सुलैमान के नीतिवचन: दुर्गुण

कौन से दुर्गुण आप पर राज करते और आपको बिगाड़ते हैं? दुर्गुण वह बुरी, अनैतिक या दुष्ट आदत या व्यवहार है। सुलैमान चाहता था कि उसका पुत्र और उसकी जाति बुद्धिमान हो, इसलिये उसने उन अनेक दुर्गुणों को खोलकर बताया और उनकी निन्दा की जो मनुष्यों को दास बना लेते हैं और उनका जीवन उजाड़ देते हैं। यद्यपि आज का समाज इनकी परवाह नहीं करता और अधिकांश प्रचार-मंचों पर इनकी चर्चा तक नहीं होती, फिर भी आप इन भुलाए गए और हल्के समझे गए पापों से घृणा करना सीखिए।

नीतिवचन 25:28

“जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह घेराव करके तोड़ दी गई हो।”

दुर्गुण उन्हीं को पकड़ते हैं जो अपनी आत्मा को वश में नहीं रखते, क्योंकि आपकी आत्मा आपके कामों पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि आप अपनी अभिलाषाओं पर शासन नहीं करते, तो आप निर्बल हैं और मूर्खता तथा पाप के सामने खुले पड़े हैं। किसी भी समय आप पर कब्ज़ा हो सकता है और आप विनाश की ओर बहकाए जा सकते हैं।


नीतिवचन 16:18

“विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमण्ड आता है।”

घमण्ड आपका नाश कर देगा। परमेश्वर ने इसकी प्रतिज्ञा की है। यह शैतान का पाप है, और इस बात का पक्का चिह्न है कि मनुष्य गिरनेवाला है — चाहे वह कितना ही सामर्थी या सफल क्यों न दिखाई देता हो। दीनता को चुनिए, और वह आपको प्रतिष्ठा दिलाएगी। आपको चेतावनी दे दी गई है।


नीतिवचन 11:13

“जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है।”

क्या आप कभी किसी की निंदा नहीं करते, किसी की प्रतिष्ठा बिगाड़ने के लिए झूठ नहीं बोलते? बहुत अच्छा। परन्तु चुगली — यानी किसी के विषय में ऐसा सच बता देना जिसे बताने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी — उतनी ही हानिकारक और पापमय है। परमेश्वर इस दुष्ट अपराध से घृणा करता है। क्या आप भी करते हैं?


नीतिवचन 14:6

“निंदक बुद्धि की खोज करता है किन्तु नहीं पाता : परन्तु ज्ञान समझदार के लिए सहज है।”

निंदक होना आपको मूर्ख से भी बुरा ठहराता है! मूर्ख तो अधिकतर बुद्धिहीन ही होता है, परन्तु निंदक दुष्टता से भरा घमण्डी होता है। जो मनुष्य यह मान बैठता है कि वह सदा सही है, वह उससे भी बुरा है जो कभी-कभार ही सही होता है। क्या आप सुधार से और सुधार करनेवालों से प्रेम रखते हैं? यदि नहीं, तो आप निंदक हैं।


नीतिवचन 29:1

“दपटा हुआ मनुष्य जो अपनी गर्दन को स्तंभित रखता है, सो आकस्मात मारा जाएगा, और वह भी बिना किसी उपाय के।”

हठ करना बलवा के पाप का ही एक भाग है। मनुष्यों के अधिकार के विरुद्ध हठ करना भी बुरा है; परन्तु परमेश्वर की शिक्षा और उसकी चेतावनियों के विरुद्ध हठ करना प्राणघातक है। यह ऐसा घोर अपराध है जिसका दण्ड परमेश्वर बिना चेतावनी दिए देगा, और फिर सम्भलने का कोई उपाय नहीं बचेगा।


नीतिवचन 5:19

“वह तेरे लिए प्रिय हिरनी और सुन्दर साम्भरनी के समान हो, उसके स्तन सर्वदा तुझे संतुष्ट रखे, और उसी का प्रेम नित्य तुझे मोहित करता रहे।”

वैवाहिक जीवन में गहरा शारीरिक सुख सुन्दर देह या नई-नई रीतियों से उतना नहीं आता, जितना आपके अपने चुनाव से आता है। यदि आप चाहें, तो आप सन्तुष्ट भी रह सकते हैं और मोहित भी। जो बातें आप शुरू के दिनों में किया करते थे, उन्हें फिर से करने से वही पहला उल्लास आपको दोबारा मिल सकता है।

नीतिवचन 16:32

“क्रोध में धीमा सामर्थी से भला है; और जो अपने मन को वश में रखता है, नगर को जीतने वाले से उत्तम है।”

क्रोध आपको बरबाद कर देगा, या फिर अपने क्रोध पर शासन करके आप पृथ्वी पर महान बन सकते हैं! चुनाव आपका है। आपके सद्गुण और आपकी महिमा का एक बड़ा माप यही है कि आप क्रोध को टाल सकें और अपनी आत्मा को वश में रख सकें। क्या आपको इस बात पर क्रोध आता है कि आपको क्रोध आ जाता है?


नीतिवचन 27:4

“क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है।”

डाह से बुरी बात शायद ही कोई हो। आप उसे अपने मन में छिपा रखते हैं, परन्तु वह दिन-रात आपको ही खाती रहती है, और जिस व्यक्ति से आप बैर रखते हैं उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ती! वह आपकी हड्डियों की सड़न है और आपकी आत्मा तथा आपकी देह दोनों को गला देगी। दूसरों को मिलनेवाली भलाइयों पर आनन्दित होइए।


नीतिवचन 14:14

“जिसका मन ईश्वर की ओर से हट जाता है, वह अपनी चालचलन का फल भोगता है, परन्तु भला मनुष्य आप ही आप सन्तुष्ट होता है।”

परमेश्वर की ओर से मन का हट जाना आपको महँगा पड़ेगा, क्योंकि परमेश्वर इसे यों ही जाने नहीं देगा। बुद्धि का एक भाग यह भी है कि आप बड़ी सावधानी से अपने मन की रक्षा करें, क्योंकि जीवन के स्रोत उसी में से निकलते हैं। यदि आपने अपने मन को इतना फिसलने दिया कि वह किसी पाप पर गम्भीरता से विचार करने लगे, तो समझ लीजिए दण्ड निकट है।


नीतिवचन 19:24

“आलसी अपने हाथ गोद में छिपाता है, परन्तु अपने मुंह तक कौर नहीं उठाता।”

आलस्य उस सुस्त जानवर के समान है जो दिन भर धीरे-धीरे रेंगता और आराम करता रहता है! आलस का पाप मनुष्य को निकम्मा बना देता है। परिश्रमी धनी होंगे और प्रभुता करेंगे, परन्तु आलसी कंगाल रहेंगे और दूसरों के अधीन बेगार करेंगे। आलसी मनुष्य तो खाना पाने के भी योग्य नहीं है।


नीतिवचन 14:15

“भोला तो हर एक बात को सच मानता है, परन्तु चतुर मनुष्य समझ बूझकर चलता है।”

बर्नी मैडॉफ दूसरों के 50 अरब डॉलर लेकर चंपत हो गया। अगला बर्नी आपको ही ठग सकता है, जब तक कि आप परख कर सोचना न सीखें। धोखाधड़ी और छल-कपट के विषय में सुलैमान किसी भी मनुष्य से अधिक जानता था, और उसने आपकी रक्षा के लिए एक सरल नियम दिया।


नीतिवचन 15:15

“दुखियारे के सब दिन दु:ख भरे रहते हैं, परन्तु जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है।”

उदासी प्रायः एक चुनाव ही होती है — हर बात को दोष ढूँढ़ती हुई और नकारात्मक दृष्टि से देखने का चुनाव। ऐसा स्वभाव मनुष्य के पूरे जीवन पर ऐसा रंग चढ़ा देता है कि वह दुःख से भरी गड़बड़ बनकर रह जाता है। दूसरे लोग आनन्दित रहने का चुनाव करते हैं, और उनके लिये तो मानो नित्य भोज चलता रहता है! इसे पढ़िए। इस पर विश्वास कीजिए!