नीतिवचन 16:18
विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमण्ड आता है।
अगर गुरुत्वाकर्षण से भी अधिक शक्तिशाली कोई शक्ति है जो मनुष्य को नीचे गिरा देती है, वह है गर्व या घमण्ड! सुलैमान ने यहां एक सिद्धांत दिया जिसे सभी मनुष्यों को हर दिन याद रखना चाहिए और उस पर विचार करना चाहिए। किसी भी बात पर अहंकार करना या घमण्ड से फूल जाना ऐसा मार्ग है जो आपको निश्चित रूप से विनाश की ओर ले जाएगा। जिस प्रकार से पके फल पेड़ से गिर जाते हैं, उसी प्रकार घमंडी या अहंकारी मनुष्य नीचे गिरते जाते हैं। पाठको, आज ही अपने आप को दीन बनाओ, और अपने अहंकार का तिरस्कार करो, उसे अपना शत्रु मानो।
यहाँ एक सबसे बुद्धिमान और राजाओं में सबसे सफल राजा की ओर से सर्वश्रेष्ठ बुद्धि है। उसका इस विषय पर ज्ञान कि जीवन में समृद्धि और सफलता के लिए कौन-सी बात सबसे कारगर सिद्ध होती है, किसी भी सलाहकार या दार्शनिक से बढ़कर था। उसने इसके महत्व को दिखाने के लिए इस चेतावनी को बार-बार दोहराया, लेकिन आपको बिजनेस स्कूल या इस विषय पर शिक्षा देनेवाले अन्य में किसी भी संस्थान में यह नियम नहीं सिखाया जाएगा। सांसारिक स्वभाव वाले मनुष्य को गर्व और घमण्ड प्रिय होता है, विशेषकर खुद पर गर्व करना!
घमण्ड आपके मन, आत्मा और दिमाग के लिए जहर है। यह दूसरों से प्रेम करने और दूसरों के अपराधों को माफ करने के प्रति इंसान के दिल को कठोर बना देता है, और परिणामस्वरूप रिश्तों में कड़वाहट पैदा करके उन्हें मिटा देता है। यह मन को सुधार और चेतावनियों को स्वीकार करने के प्रति सख्त कर देता है, इस कारण यह भयानक पतन की ओर ले जाता है। यह इन्सान के दिमाग को खतरों और जोखिमों के प्रति अंधा कर देता है, इस कारण वह बिना किसी भी सावधानी के मूर्खतापूर्ण फैसले लेता है और अपने विनाश की ओर तेज़ी से भागता है।
यह घमण्ड और गर्व ही था जिसने शैतान को स्वर्ग में से उसके गौरवशाली पद से गिरा दिया (1 तीमु 3:6), और सुलैमान ने भी देखा कि किस प्रकार गर्व ने कई कलंदरों को नीचे गिरा दिया। वह घमण्ड के विरुद्ध बार बार चेतावनी देता है (नीतिवचन 11:2; 17:19; 18:12; 29:23)। परन्तु उसका अपना पुत्र रहूबियाम इस सबक से चूक गया। उसने अहंकार में आ कर इस्राएल को उकसाया और अपने राज्याभिषेक के समय इस्राएल के बारह गोत्रों में से दस को खो दिया (2 इतिहास 10:1-19)। उसके अति आत्मविश्वास की कीमत पूरे देश को चुकानी पड़ी। आज हमारे देश की स्थिति भी लगभग ऐसी ही हो गई है : गर्व और अहंकार की मस्ती में डूबा शासक! पतन करीब और अटल है।
राजा उज्जिय्याह ने याजक के समान धूप चढ़ाने धूप की वेदी पर धूप जलाने को यहोवा के मन्दिर में घुसने का दुस्साहस किया, लेकिन उसके माथे पर कोढ़ प्रगट हुआ जिसके चलते उसके राज का अंत हो गया। हामान ने घमण्ड में फूल कर यहूदियों को नष्ट करना चाहा, जिससे चलते उसी की नामधराई हुई और उसे ही फाँसी के फंदे पर लटका दिया गया। पतरस ने बड़े आत्म-विश्वास से ऐलान कि वह कभी भी प्रभु का इन्कार नहीं करेगा, और जैसा कि प्रभु ने कहा था, जैसे ही मुर्गे ने कुछ घंटों बाद बाँग न दी, उसका यह घमण्ड चूर-चूर हो गया। हेरोदेस ने घमण्ड में फूल कर चापलूस लोगों की अपने लिए प्रशंसा का आनंद लिया, और कीड़ों ने उसे मारने से पहले घंटों तक उसे बड़े दर्दनाक तरीके से नोंच-नोंचकर खाया।
घमंड और गर्व से फूले व्यक्ति को पहचानना आसान है। उसे बातें करना अच्छा लगता है, ख़ासकर अपने बारे में या अपनी विचारधारा के बारे में। वह स्वेच्छा से दूसरों की सेवा नहीं करता है, क्योंकि यह उसकी दृष्टि में बहुत छोटा काम है, और वह अपनी ही चीजों में बहुत व्यस्त रहता है। वह ऊँचे लोगों के बीच उठता-बैठता है, और अपनी वास्तविक औकात से ऊपर रहता है। वह दूसरों की सलाह या चेतावनियों को तुच्छ समझता है। वह आसानी से क्रोधित हो जाता है, दूसरों की आलोचना करता है, और अगर कोई उसके कुछ ख़िलाफ बोले या उसके साथ कोई कुछ ग़लत कर दे तो वह उसके लिए अपने मन में कड़वाहट को पालता है।
घमंडी व्यक्ति खुद को सब लोगों पर ज़बरदस्ती थोप देता है, और उनसे अपने लिए सम्मान की मांग करता है, अधिकार का अनादर करता है, और कानूनों का उल्लंघन करता है। उसके पास हमेशा अपने बुरे कार्यों के लिए विनम्र अफ़सोस या माफ़ी के बजाय एक बहाना होता है। वह ऐसे ऐसे वादे करता है जिन्हें वह पूरा नहीं कर सकता, या निभा नहीं पाएगा। वह चुटकियाँ बजाते हुए फटा-फट निर्देश देता है। उसके जीवन की समस्याएँ हमेशा किसी और की गलती के कारण होती हैं। वह कभी किसी से मदद नहीं मांगेगा, वह स्वयंभू है। वह मुख्यतः हुकुमशाह के समान अत्याचार से शासन करता है।
घमंड का इलाज क्या है? अपने सब पापों को परमेश्वर के सामने मान लो, और उन्हें त्याग दो। आपने जो भी गलत किया है उसके लिए माफी मांगें और उसकी पूरी पूरी भरपाई भी करें। अपने मन को दीन करों और जो बुद्धिमान सलाह आपको दी जा रही है उसका अपने जीवन में व्यवहारिक उपयोग करो। जो दरिद्र और कंगाल है उसकी सेवा करो। कम बोलो। अपने दिल और दिमाग को केवल दूसरों के बारे में अच्छे विचार सोचने के लिए प्रशिक्षित करें। सब प्रकार की प्रतिशोध की भावना से घृणा रखो और उसे त्याग दो।
मन की दीनता का अर्थ यह सोचना या यह कहना नहीं है कि आप मन के दीन हैं। मन की दीनता का अर्थ है परमेश्वर की आज्ञा मानना और दूसरों की सेवा करना। मन की दीनता का अर्थ यह नहीं है कि आप कैसे दिखते हैं या कैसे चलते हैं; यह स्वयं के बजाय परमेश्वर और दूसरों को ऊँचा उठाना है। आपका घमण्ड परमेश्वर के क्रोध और दण्ड को भड़काता है; परन्तु मन की दीनता से उसका अनुग्रह होता है और आशीष का कारण बनती है. “इसलिये परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए” (1 पतरस 5:6)।
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