नीतिवचन 5:19
वह तेरे लिए प्रिय हिरनी और सुन्दर साम्भरनी के समान हो, उसके स्तन सर्वदा तुझे संतुष्ट रखे, और उसी का प्रेम नित्य तुझे मोहित करता रहे।
अपनी पत्नी से संतुष्ट रहना एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। सुलैमान ने अपने बेटे को तीन महत्वपूर्ण विकल्प चुनने की चेतावनी दी – अपनी पत्नी को प्रेम की एक नाजुक पात्र समझकर उसके साथ कोमलता से व्यवहार करना, उसके शरीर और स्त्रीत्व की सराहना करना, और अपने पति के प्रति उसके प्रेम और उसकी भक्ति से भर उठना। इस ईश्वर-प्रेरित नीतिवचन में पतियों के लिए कुछ सबसे आवश्यक वैवाहिक सलाह शामिल है। इस बुद्धि को और कुलुस्सियों 3:19 में की बुद्धि को सीखने और उसके अनुसार करने से एक व्यक्ति बहुत अधिक लाभ प्राप्त कर सकता है।
यदि कोई पुरुष अपनी कटुता के कारण अपनी पत्नी के प्रति कठोर बनता है, अन्य स्त्रियों के शरीर की लालसा रखता है, या अपनी पत्नी के उसकी प्रेमिका बनने के प्रयासों को तुच्छ जानता है, तो वह अपना विवाह, अपनी कामुकता और अपने प्राण का विनाश कर देगा। असंतोष के भयानक परिणाम होते हैं, विशेषकर विवाह में। खबरदार! धन्य परमेश्वर, जो सभी पुरुषों की तुलना में वैवाहिक प्रेम और आनंद के बारे में अधिक जानता है, उसने उन लोगों को अनमोल निर्देश दिया जो खुद को विनम्र करेंगे, इसे सुनेंगे और इसका व्यवहारिक लागुकरण करेंगे।
कटुता से भरा एक मनुष्य अत्यंत नाखुश, हमेशा निराश और यौन रूप से कमज़ोर होता है। वह अपनी पत्नी को चोट पहुँचाएगा और उसकी उपेक्षा करेगा, जब तक कि वह उससे नफरत नहीं करने लगती, और विवाह एक दिखावा न बन जाए। वह पराई स्त्रियों के लिए एक भेद्य और आसान शिकार होगा, जिनके स्तन संतुष्ट नहीं कर सकते, चाहे वे कितने भी सुंदर और सुडौल क्यों न हों, क्योंकि वे स्तन क्रूर स्त्रियों के हैं जिन्हें परमेश्वर ने दोषी ठहरा दिया हैं (नीति 5:9)। अपने पुत्र से प्रेम करनेवाले और बुद्धिमान पिता, सुलैमान ने अपने पुत्र को असंतोष के खतरों के विरुद्ध गंभीरता से चेतावनी दी।
हिरनी एक मादा हिरण है, जो आम तौर पर लाल रंग की होती है। साम्भरनी यूरोप और एशिया के हिरनों की एक छोटी प्रजाति है। ये दोनों शब्द एक छोटी, नाजुक, सुंदर और कोमल हिरनी का वर्णन करते हैं। सुलैमान के समय में इन हिरनियों को राजाओं और अन्य लोगों द्वारा पालतू जानवरों के रूप में पकड़ा जाता, पाला जाता था, और उनका आनंद लिया जाता था। उनके निर्मल, सौम्य स्वभाव पुरुषों और स्त्रियों दोनों को प्रसन्न करते थे। और बुद्धिमान मनुष्य सुलैमान अपनी पत्नी की सुंदरता का वर्णन करते समय उनका फिर से उल्लेख करता है (गीत 4:5; 7:3)।
सुलैमान द्वारा प्रयुक्त विशेषणों-प्रिय और सुन्दर-के युग्मों पर ध्यान देने पर हम एक प्रसन्नचित्त और कुलीन स्त्री का, जो प्रेम और देखभाल के योग्य है, एक अद्भुत शब्द-चित्र देखते हैं। कुलीन स्त्री नामक बुद्धि सब पुरुषों को आव्हान करती है कि वे अपनी-अपनी पत्नियों को इसी नज़रिए से देखें और वैसा ही आचरण रखें। एक पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी के साथ कोमल प्रेम और संयमी करुणा से व्यवहार करें, कि मानों वह एक प्रिय और सुन्दर हिरनी की देखभाल कर रहा हो। पौलुस ने नए नियम में इस नियम की पुष्टि की, जहां उसने पुरुषों को आज्ञा दी कि वे अपनी अपनी पत्नियों का पालन-पोषण करें – अर्थात्, विशेष देखभाल करें (इफि 5:28-29)।
परमेश्वर ने हव्वा के स्तनों और उसके शरीर के अन्य सभी अवयवों को बनाया जो आदम की आँखों और स्पर्श के लिए बहुत ही अद्भुत थे। आज भी कुछ नहीं बदला है – पुरुष आज भी स्त्री के शरीर को देखकर अभिभूत होते हैं। परमेश्वर ने पुरुषों को वह गुण दिया जिससे वे स्त्री के शरीर की ओर आकर्षित होते हैं, और विवाहित पुरुष इस आकर्षण के कारण बड़े प्रसन्न मन से काम से घर लौटते हैं। उसका शरीर और रतिक्रिया सुख का एक निरंतर स्रोत बना रहना चाहिए, और एक बुद्धिमान स्त्री अपने और अपने पति के सुख और आनंद के लिए इसकी जानकारी रखेगी और इसे काम में लाएगी।
पति-पत्नी के बीच यौन-सम्बन्ध कितनी बार होना चाहिए, कितना रचनात्मकता होना चाहिए, उसके मदहोशपूर्ण और विभिन्न प्रकार के आसन, ये सब सुझाव, सम्भावनाएं, या पसन्द-ना-पसन्द की बातें नहीं है, बल्कि ये आज्ञाएँ हैं (1 कुरिं 7:1-5)। इस कर्तव्यपरायण विशेषाधिकार और सम्मानजनक आनंद के किसी भी पहलू में अपने जीवनसाथी को धोखा देना, वाचा तोड़ने, कपट करने और नफरत का भयावह कृत्य है। परमेश्वर सभी स्वार्थी और टाल-मटोल करनेवाले पति-पत्नी को दण्ड देगा, क्योंकि नया नियम भी हिदायत देता है कि परमेश्वर पति और पत्नी दोनों को एक-दुसरे में संतुष्ट रहते देखना चाहता है।
हालांकि, इस नीतिवचन में स्तनों का उल्लेख नाम से किया गया है, फिर भी वे स्त्री के पूरे शरीर और यौन सुख के लिए प्रयुक्त होनेवाला एक सर्वसमावेशी शब्द है। परन्तु आकर्षण और रतिक्रिया की दृष्टी से स्तनों के स्थायी महत्व को सुलैमान की स्पष्ट भाषा के द्वारा बलपूर्वक रीति से हमारे ध्यान में लाया गया है। कुछ बदला नहीं है; स्तन अब भी एक स्त्री की सुन्दरता और आकर्षकता के लिए महत्वपूर्ण है (गीत 4:5; 7:1-10; यहेज 16:7; 23:3, 8; होशे 2:2)। सुलैमान के दिनों में स्त्रियाँ अपने स्तनों के लिए उतनी ही जागरूक रहती थीं जितनी कि आज की स्त्रियाँ हैं (गीत 1:13; 8:8-10)।
परन्तु आज के इस दुष्ट समाज की स्त्रियां अपने स्तनों को लोगों के सामने बेपरदा करने की कोशिश करती हैं, और मसीहियों को इस मानसिक विकृति के विरुद्ध अपनी पूरी शक्ति से लड़ना चाहिए। ऐसे अनैतिक परिधानों का, जो स्तनों के आकार या रूप की ओर ध्यान खींचते हैं, उन्हें बड़ा दिखाते हैं, या उन्हें खुला दिखाते हैं, विरोध किया जाना चाहिए। और पवित्रता और भक्ति का यह नियम स्त्री के शरीर के अन्य भागों पर भी लागू होना चाहिए जो पुरुषों का ध्यान खींचते हैं और उनकी वासना को भड़काते हैं। वर्तमान समय में सार्वजनिक स्थानों पर अंगप्रदर्शन के भड़कीले परिधानों के कारण पुरुष अपने महान वैवाहिक जीवन में घर पर ही अपनी पत्नी से संतुष्ट रहने में कठिनाई का सामना करते हैं। परमेश्वर स्त्रियों की निर्लज्जता से घृणा रखता है (यशा 3:16-24; 1 तीमुथियुस 2:9-10; 1 पतरस 3:3-4)।
यह नीतिवचन प्रत्येक पुरुष को बाध्य करता है कि वह अपनी पत्नी के स्तनों, उसका शरीर और उसके साथ रतिक्रिया से तृप्त और संतुष्ट रहे। यह चुनाव है। प्रत्येक पति को चाहिए कि जो कुछ उसके पास है उसमें आनंदित रहे, बजाय इसके कि जो नहीं है उसके लिए तड़पकर विलाप करें। यह तो आज्ञा है। यह नीतिवचन एक सुझाव नहीं है, और प्रत्येक पुरुष इसका पालन कर सकता है यदि वह प्रभु की आज्ञा माने। निस्सन्देह, यदि उसकी पत्नी उसे यौन सुख से वंचित रखती है या वह अपनी खूबसूरती को बिगड़ती है, तो यह पति का कर्तव्य बनता है कि वह बुद्धिमानी तथा संयम से अपने वैवाहिक जीवन को सूझबूझ के साथ सम्भालते हुए इस परिस्थिति को सुधारें (उत्पत्ति 3:16; 1 कुरिं 7:3-5; 11:9; 14:34-35; इफि 5:22-24; तीतुस 2:4-5)।
एकमात्र असीम सृष्टिकर्ता, जिस ने प्रेम, यौन-इच्छा और शरीर का हर अंग बनाया, उसने मनुष्य को केवल एक ही स्त्री तक और स्त्री को एक ही पुरुष तक विवाह में सीमित कर दिया। एक-पत्नीक सम्बंध को उबाउपन से बचाने के लिए उसने पुरुषों के लिए वैवाहिक सम्मति के ये नियम दिए। यदि पुरुष इन नियमों का पालन करें तो वह उस महिमामय आनंद और तृप्ति को पा लेगा जिसे यहोवा परमेश्वर ने आदम के लिए हव्वा को बनाने में नियत किया था (उत्पत्ति 2:18; 1 कुरिन्थियों 11:9)। वह बड़े उत्साह से भरकर अपने सृष्टिकर्ता के साथ कहेगा “यह बहुत अच्छा है!” जब एक पुरुष और स्त्री के बीच यौन सम्बंध का विषय आता है तब बॉलीवुड, हॉलीवुड और प्लेबॉय जैसी पत्रिकाएं आपको पराजित कर देगी, जैसा कि उनके जीवनों, तलाकों, दुष्क्रियाओं और एक-दूसरे के प्रति नाखुशी से प्रमाणित होता है। परमानंद से भरा प्रेम केवल आज्ञाकारी मसीहियों के लिए है।
किसी बात से मोहित होने का अर्थ है उसे अपने कब्जे में लेकर आक्रामक बल के द्वारा अपने साथ ले जाना, जैसे किसी शत्रु से लूट का सामान ले जाया जाता है। उसी प्रकार किसी व्यक्ति को मोहित करने का अर्थ है उस पर हावी हो जाना और अपने साथ बलपूर्वक ले जाना, जैसे उन्हें वश में करके ले जाया जाता है। बुद्धिमान पुरुष अपनी पत्नी के प्रेम, भक्ति और प्रणयक्रिया के द्वारा वश में रहने का चुनाव करते हैं। यहां का नियम अपनी पत्नी को मोहित करना नहीं है, बल्कि अपनी पत्नी के द्वारा मोहित हो जाना है। परंतु क्योंकि वह प्रत्युत्तरकर्ता है, अतः इसमें उसके प्रति आपका प्रेम भी शामिल है। यह उसके प्रेम के द्वारा लूट लिए जाने का चुनाव करना है, ताकि पराई स्त्री के पास आप तक कोई पहुंच या फुसलानेवाली तरकीब न हो।
मामूली ज्ञान और अनुभव के साथ किसी भी स्त्री में यौन सुख के लिए पुरुष से अधिक काबिलियत और क्षमता होती है, जिसका अर्थ है आपकी पत्नी आप से अधिक सामर्थी है; यदि आप उससे उचित रीति से प्रेम करें। सच्चा परमेश्वर सब बातों को बड़े कौशल से करता है, जिनमें पुरुष और स्त्री के विषय में यह तथ्य भी शामिल है। यद्यपि उसे पुरुष के लिए बनाया गया था (उत्पत्ति 2:18; 1 कुरिं 11:9), तौभी उसका अपना बड़ा यौन सुख उसके यौन सुख पर बल देने से आता है (गीत 2:6-7; 8:3-4)। सर्वश्रेष्ठ बनने में अपनी पत्नी की सहायता करें, पराई स्त्री के विषय में ज़रा भी परवाह न करते हुए उसी के प्रेम में आनंदविभोर हो जाएँ।
यह बात भी स्पष्ट समझ ले कि यह नीतिवचन अश्लील साहित्य की भी पूरी-पूरी निंदा करता है। सदैव अपनी पत्नी के स्तनों और शरीर से तृप्त रहने का तात्पर्य है, अन्य किसी भी स्त्री के स्तनों या शरीर पर ज़रा भी नज़र नहीं डालना। यदि कोई पुरुष इस नीतिवचन का व्यवहारिक उपयोग करना चाहता है, तो अवश्य है कि वह टेलीविजन, OTT, वेब सीरीज़, वयस्कों की अश्लील पत्रिकाओं से अत्यंत सावधान रहे, और अश्लील स्त्रियों से बचने सार्वजनिक जगहों, जैसे समंदर-किनारे, शॉपिंग मॉल्स, पुरुष-स्त्री के साझा जिमखाने ,और कार्यालयों में, जहाँ व्यभिचारी स्त्रियाँ मंडराती हैं, जाना टाले। यदि ऐसे नियम आपको अति कठोर और पत्थर-दिल लगते हैं तो अपने नाखुश वैवाहिक जीवन के विषय में शिकायत न करें।
स्त्रियां भी अपने वैवाहिक जीवनों, यौन इच्छाओं और अपने प्राणों का विनाश कर बैठ सकती हैं, यदि वे सोचने लगे कि काश उनका पति अलग व्यक्तिमत्व वाला होता। किसी स्त्री को ऐसे वार्तालाप-कौशल, भावनाएं, बुद्धिमत्ता, अगुवाई, व्यक्तित्व, आत्मिकता, सफलता, या अन्य किसी लक्षण की अपने पति में चाहत नहीं रखनी चाहिए जिसे वह अन्य पुरुषों में देखती है। उसे ऐसी बातों के विषय में सोचने से बचना चाहिए। ऐसे विचार वैसे ही हैं मानो उसका पति किसी पराई स्त्री के चेहरे, स्तनों, कमर, या पैरों की लालसा कर रहा हो। उसे अवश्य है कि वह उस पुरुष के साथ संतुष्ट रहने का फैसला करें जिस से उसने विवाह किया है, जैसा कि वह भी चाहती है कि उसका पति उसके साथ संतुष्ट रहे।
प्रेम क्रीडा की कहानियों के उपन्यास पढ़ना, जिनमें काल्पनिक पुरुषों, आवेशी प्रलोभनों और अवास्तविक भावनाओं का वर्णन किया होता है, स्त्रियों के लिए अश्लील साहित्य है। ऐसी तृष्णायुक्त काल्पनिक कहानियां पढ़ना एक स्त्री को अपने पति से नाखुशी की अवस्था में ले जा सकता है, क्योंकि कोई भी पुरुष ऐसे घिनौने विचारों की बराबरी नहीं कर पाएगा। ऐसे काल्पनिक पुरुषों के विषय में पढ़ना आत्मविनाशी और मानसिक विक्षिप्तता है। यह वैसा ही पाप है जब पुरुष अश्लील साहित्य देखकर अपनी पत्नियों को शारीरिक रूप से विद्रूप समझने लगते हैं।
वैवाहिक जीवन में संतुष्टि एक चुनाव है और फैसला है, जैसा कि बाकी सब बातों में होता है (फिली 4:11)। यह एक मनोवृत्ति है, न कि बेहतर परिस्थितियां (फिली 4:12)। कोई जीवनसाथी परिपूर्ण या सिद्ध नहीं होता है, और न ही कभी होगा। न ही कोई परिपूर्ण नौकरी, उद्योग, घर, कार, या छुट्टियां होती हैं। इसलिए एक सफल विवाह की कुंजी है उस व्यक्ति के साथ संतुष्ट, पूरी तरह से संतुष्ट रहना और उसी से मोहित होना जिससे आपका विवाह हुआ है। किसी ऐसे दूसरे व्यक्ति की प्रतिक्षा न करें जिस से आप अपने जीवनसाथी को बदलना चाहते हैं, और न ही कामना करें कि काश आप किसी अन्य व्यक्ति के साथ होते। संतोषसहित भक्ति बड़ा लाभ है (1 तिमु. 6:6), और यह नियम निश्चित ही विवाह पर भी लागू होता है।
पतियों, तुमने अभी-अभी सबसे बड़े बुद्धिमान मनुष्य से वैवाहिक सलाह को पढ़ा है जो आपके भविष्य को उज्वल बना सकती है (1 राजा 11:3)। वैवाहिक आनंद, संतोषप्रद प्रेम, और संतोषजनक यौन-सम्बंध आप पर निर्भर है। यह सलाह एकदम स्पष्ट और सरल है : उसके साथ संवेदनशील अपनेपनसहित कोमलता का आचरण रखे; हमेशा उसी के शरीर और प्रेम-प्रणय में संतुष्ट रहने का चुनाव करें, और आपके प्रति उसकी जो श्रद्धा, प्रेम और वफादारी है उस पर अपना मन लगाए। आप आनंद से ओतप्रोत हो सकते हैं!
किसी भी पराई स्त्री को जीवन के इन क्षेत्रों के करीब भी न आने दे। एक महान वैवाहिक जीवन को उन्नत करने के लिए सुलैमान के वचन अत्यंत मूल्यवान हैं, परंतु वे इसलिए दिए गए थे कि पराई स्त्री के प्रलोभनों को नाकाम किया जा सके। अपनी पत्नी को उसका अधिकारयुक्त स्थान देकर आप अन्य स्त्रियों के कचोटनेवाले आकर्षणों से सुरक्षित रहेंगे जो आपकी वासना को भड़काने का प्रयास करके आप को पराजित और बर्बाद करना चाहती है। व्यभिचारियों के लिए कोई सच्ची शांति, सुख या समृद्धि नहीं है। इसलिए परमेश्वर का वचन स्पष्ट और सरल है – अन्य किसी भी पराई स्त्री की ओर न तो देखें और न ही उसके विषय में सोचे (नीति 6:25; अय्युब 31:1; मत्ती 5:28)।
पत्नियों यदि आप चाहती है कि आपका पति महान वैवाहिक जीवन के लिए वर्णित इन तीनों मार्गों के अनुसार आपके साथ संतुष्ट रहे, यहां तक कि आप पर मोहित और अभिभूत हो जाए, तो फिर आप इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उसकी सहायता करने क्या कर रही हैं? क्या आप प्रेम और अपनेपन के योग्य एक सौम्य तथा अनुग्रहकारी व्यक्ति हैं, जैसे एक प्रिय हिरनी या सुंदर साम्भरनी होती हैं? क्या आप अपने शरीर को सुडौल बनाए रखने के लिए नियमित रूप से कसरत और खान-पान पर विशेष ध्यान देती हैं? क्या आप अपने शरीर को नियमित रूप से उसके यौन सुख के लिए काम में लाती हैं? क्या आप अपने पति पर अपना प्रेम, भक्ति, प्रेम-प्रणय और प्रशंसा लुटाती हैं? क्या आप यह एक कामुक मदहोशी के साथ पूरी सरगर्मी से करती हैं? क्या आप प्रणय के लिए उसे मोहित करने में सफल होती हैं, या असफल?
प्रभु यीशु के शीघ्र आगमन के पश्चात एक ऐसा विवाहोत्सव होगा जब दूल्हा और दुल्हन दोनों सिद्ध और परिपूर्ण हैं। पराई स्त्री या पराए पुरुष के लिए कोई लालसा नहीं होगी, क्योंकि वह आपकी कल्पनाओं और विचारों से परे असीम रूप से महाप्रतापी और देदीप्यमान होगा, और उसने आपको अपने लिए पूरी तरह से प्रिय और सुंदर बना दिया होगा (भजन 45:10-15; इफि 5:25-27; प्रका 19:7-8)। प्रभु यीशु, शीघ्र आ! आमीन।
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