नीतिवचन 14:15
भोला तो हर एक बात को सच मानता है, परन्तु चतुर मनुष्य समझ बूझकर चलता है।
इस दुनिया की हर बात पर संदेह करना एक सद्गुण है। सावधानी और सतर्कता कुलीनता का लक्षण है। सबूत मांगना चतुराई है। केवल मूर्ख और भोले लोग ही सुनी या पढ़ी हुई सब बातों पर विश्वास करते हैं। चतुर और सफल व्यक्ति निर्णय लेने से पहले चीजों की सावधानीपूर्वक जांच-पड़ताल करता है। वह कोई भी कदम उठाने से पहले जोखिमों और प्रतिफलों को समझता है। वह इत्तफ़ाक़न और संयोगवश या मात्र आशा से कुछ नहीं करता।
यह नीतिवचन आपकी सुरक्षा और सफलता के लिए है। यह सर्वश्रेष्ठ नीतिवचनों में से एक है। इसे कंठस्थ करें। इस नीतिवचन की सिख आपको हमेशा बचाएगी (नीतिवचन 22:3)। हम बुरे समय में हैं। आज लोग ठोस तर्क के बजाय विज्ञापनों पर भरोसा करते हैं। सूचना क्रान्ति का विस्फोट आप पर हर दिन नई नई जानकारी की बमबारी करता है। टेलीमार्केटर्स, मेल ऑर्डर कैटलॉग, विज्ञापन, इन्फॉमर्शियल, पॉप-अप विज्ञापन और इंटरनेट आप पर इस नए प्रचलन की राय, सुझाव और उत्पाद फेंकते हैं। आपको बचाने के लिये परमेश्वर ने सुलैमान को अपनी प्रेरणा देकर इस सारगर्भित कथन को लिखवाया।
जो सीधे-सादे और भोले-भाले होते हैं वे आसानी से उल्लू बनते हैं। वे चालाक नहीं होते। उनमें किसी नई जानकारी पर सवाल उठाने और उसकी समीक्षा करने का दृढ़ विश्वास या क़ाबलियत नहीं होती है। यदि उन्हें कुछ अच्छा लगता है, और वे कुछ इमानदार होना चाहते हैं, तो वे उस पर विश्वास कर लेते हैं। यदि दूसरे लोग उस बात पर उत्साहित हो जाएँ, तो वे भी उत्साहित हो जाते हैं। यदि वह किसी अख़बार या पत्रिका में छपा हुआ हो, तो वे उसे सच मान लेते हैं। यदि कोई कथित अधिकारी उस वास्तु की तारीफ़ करे, तो वे उस पर पूरा भरोसा कर लेते हैं, बिना किसी सबूत के ही। यदि कोई अजनबी कहे कि उसे उस चीज का बहुत फ़ायदा हुआ, तो यह बात उस चीज को खरीदने के लिए पर्याप्त सबूत है।
बुद्धिमान लोग चतुर होते हैं। उनके पास विवेक होता है। वे भोले-भाले नहीं हैं। अगर वे किसी ऐसी चीज को देख लें जो कुछ ज्यादा ही अच्छी, खरीदने में कुछ ज्यादा ही सस्ती और सुलभ, और कुछ ज्यादा ही साफ-सुथरी है तो वे उस पर संदेह करते हैं। ‘इतना अच्छा कि यकीन करना मुश्किल है’ यह उनका आदर्श वाक्य है। वे छपी हुई चीज़ों, कथित अधिकारीयों के शब्दों, या अजनबियों के प्रशंसापत्रों से प्रभावित नहीं होते। वे सबूत चाहते हैं, और उसमें कोई दम होना चाहिए। अगर भोले लोग उस चीज से उत्साहित हो जाते हैं, तो वे तुरन्त समझ जाते हैं कि “कुछ तो गड़बड़ है दया।” इस अज्ञानी और विकृत समाज में वे भीड़ की राय से दूर ही रहते हैं।
ऐसी किसी भी चीज़ को जिसकी सच्चाई का कोई प्रमाण नहीं है, अस्वीकार करना सीखें, और किसी भी बात के प्रमाणीकरण का मूल्यांकन कैसे किया जाता है, उसके मूल सिद्धांतों को सीखें। प्रशंसापत्र किसी भी बात के सच होने का प्रमाण नहीं है; बन्दर के उद्विकास का चित्रण कपोल कल्पना है। वर्तमान शिक्षा प्रणालियाँ तर्क और रूपक भाषा की उपेक्षा करती हैं। ये प्रणालियाँ चाहती हैं कि आप उनके अधिकारियों, जो कि शिक्षक, मीडिया और मनोरंजनकर्ता हैं, पर भरोसा करें। ऐसे विपत्काल के दिनों में जब बाइबल को अस्वीकार किया जाता है, इनमें से किसी को भी सत्य और असत्य के बीच का फ़र्क समझ में आता है और न उन्हें कोई जानकारी है। नीतिवचन 13:16 पर हमारी शिक्षा को पढ़ें।
लोग आज किसी भी क्षेत्र में काम कर रहें हो, वे बड़ी आसानी से धोखाधड़ी के शिकार बन जाते हैं। बूढ़े लोग अपने बुढ़ापे और बीमारी का इलाज चाहते हैं, इसलिए वे स्वास्थ्य संबंधी अटकलों, धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों और चमत्कारों के प्रशंसापत्रों से भरी पत्रिकाएँ खरीदते हैं। युवा पुरुष सलमान खान या विन डिजेल जैसी बॉडी बनाकर उनके जैसा दिखना चाहते हैं, इसलिए वे बाज़ारों से भारी मात्रा में मसल और वज़न बढ़ानेवाले नए नए पाउडर ख़रीदकर खाते हैं, जिनका विज्ञापन यही लोग करते हैं। और इसमें कोई शक नहीं कि बीस वर्षों के बाद वे उसी वज़न को घटाने के लिए एक नया पाउडर आज़माएँगे, और तरह तरह के शाकाहारी खान-पान और भूखें रहने के टोटके अपनाएंगे।
कुछ लोग आर्थिक चार-सौ बीसी के धोखाधड़ी में फंस जाते हैं, क्योंकि वे आसानी से लाखों रुपये कमाना चाहते हैं। तो वही कुछ लोग साजिशों के शिकार हो जाते हैं और वे किराने की दुकान पर इलेक्ट्रॉनिक कैशियर से बचते हैं, इस डर से कि कही उनपर प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में वर्णित उस पशु की छाप न लगाई जाए, क्योंकि वे प्रकाशित 13:15-18 को शाब्दिक अर्थ से लेते हैं और उसकी ग़लत व्याख्या के शिकार हो जाते हैं। लोग जो अपनी सुरक्षा के प्रति कुछ ज्यादा ही जागरूक होते हैं, हवाई ज़हाज से सफ़र करना बंद कर देते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा यह डर सता रहा होता है कि कही उनके साथ यात्रा कर रहें यात्रियों में से किसी एक यात्री के जूते में बम न हो।
कई लोग उद्विकासवाद को विज्ञान मानते हैं, जबकि यही सिद्धान्त वैज्ञानिक पद्धति के प्रमुख भागों का उल्लंघन करता है। कई लोग यह सोचकर लॉटरी टिकट खरीदते हैं कि उनके पास एक मौका है क्योंकि उन्होंने टेलीविजन पर एक विजेता को देखा है। कई लोग जोएल ओस्टीन की पाखण्डी शिक्षा “मेरा सर्वश्रेष्ठ जीवन आज और अभी” के बहकावे में आकर, उसके जैसे मुस्कुराते हुए करोड़पति बनने के सपने देखते हैं। आज कई ख्रिश्चन लोग मृत रिश्तेदारों का दाह संस्कार करते हैं क्योंकि उन्हें बताया जाता है कि यह दफनाने से बेहतर है। बहुत से लोग शाकाहारी हैं क्योंकि किसी अंधश्रद्धा के पाखण्डी योग-गुरु ने उनसे कहा कि शाकाहार उन्हें ईश्वर से मिलाता है।
1637 में हॉलैंड का ट्यूलिप उन्माद का जन्म कैसे हुआ? या 1997-2000 का dot.com बुलबुले का आविष्कार कैसे हुआ? समलैंगिकता कट्टर विरोधी रहे अमेरिका ने मात्र एक ही पीढ़ी के अन्तराल में अपनी राय कैसे पलट दी? “दी चोज़न” जैसी पाखण्डी वेब सीरीज़ भला कैसे कोई क्यों देख सकता और दूसरों को भी उसकी अनुशंसा कर सकता है? और “हेवेन इज़ फ़ॉर रियल” फ़िल्म का टिकट कोई कैसे खरीद सकता है? नेटवर्क मार्केटिंग अब भी कैसे अस्तित्व में रह सकती है जब 98% लोग 2 रुपये बचाने के लिए बड़े बड़े मॉल में जाकर अधिक कीमत वाली चीजें खरीदने में पैसा खो देते हैं?
कई ख्रिश्चन लोग अपने बच्चों का बपतिस्मा करते हैं, हालाँकि बाइबल में इसका संकेत भी नहीं दिया गया है। आज कई करिश्माई और पेंटीकोस्टल लोग प्रेरित होने का दावा करते हैं, जबकि पौलुस अन्तिम प्रेरित था। सेवेंथ-डे एडवेंटिस्टों की प्रसिद्धि का दावा 1844 में प्रभु के आगमन की उनकी झूठी भविष्यवाणी है, फिर भी उनके लाखों अनुयायी हैं। कैथोलिक लोग प्रभु-भोज में वेफर खाते हैं और दावा करते हैं कि यह यीशु मसीह का शरीर, रक्त, आत्मा और ईश्वरत्व है, बिना किसी बाइबल या वैज्ञानिक प्रमाण के।
पालकों, अपने बच्चों को इन दुनिया की बातों पर संदेह करना सिखाओं। यह सुखद हो सकता है। उन्हें दिखाओं कि निःशुल्क पारिवारिक छुट्टियों के विज्ञापन कितने झूठे हैं। उन्हें दिखाएं कि इस्राएल की पावन-भूमि के दर्शन के नाम से चलने वाली टूरिज़्म कम्पनियाँ लोगों की धार्मिक आस्था का फ़ायदा उठाकर कितना रुपया कमाती हैं। उन्हें देखना सिखाएं कि ख्रिश्चन संस्थाएं कैसे बाइबल के नए नए संस्करण बनाकर दुनियाभर के ख्रिश्चन लोगों को लूटती हैं और कैसे आज की पैरा-चर्च प्राइवेट सेवकाइयों के बाइबल-भाषांतर के बाज़ार फल फूल रहें हैं, और उन्हें सावधान करों (फिलिप्पियों 3:19)।
अपने बच्चों को जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखाएं – हर चीज की क़ीमत होती है, चाहे दिखाई दे या नहीं। उन्हें एक और सबक सिखाएं – अजनबियों पर आसानी से विश्वास न करों। सेल्समैन और कम्पनी-प्रतिनिधि का एक ही लक्ष्य होता है, उनकी जेब से अपने लिए पैसा निकालना। उन्हें सिखाएं कि बाइबल ही एकमात्र ऐसी किताब है जिस पर वे पूरी तरह विश्वास कर सकते हैं। उन्हें सिखाएं कि परमेश्वर ही एकमात्र है जिस पर वे पूरी तरह भरोसा कर सकते हैं। उन्हें याद दिलाएं कि केवल परमेश्वर और पवित्र लोग ही वास्तव में उनकी और उनकी भविष्य की सफलता की खोज कर रहे हैं।
शाम के समय साथ में बैठकर टीवी पर ख़बरें देखें और उन्हें गोदी मीडिया से अवगत कराएं, चाहे वह कोई भी हो, और इमानदार पत्रकारों से परिचित कराएं। उन्हें झूठे शिक्षक बेनी हिन के कार्यक्रम दिखाएं। उन्हें बताएं कि उसने कभी किसी को चंगा नहीं किया है, बस बेवकूफ़ बनाया है, और लोगों को मंच के नज़दीक आने देने से पहले वह सीढियों पर खड़े प्रत्येक चमचे की कई बार जांच करता है। उन्हें The Emperor’s New Clothes (सम्राट का नया कपड़ा) नाम की पुस्तक पढ़ने को दें, और समझाएं कि साथियों के दबाव वाली विकृति की इस विकृत दुनिया में उन्हें कितनी बार यह कहना होगा, “लेकिन सम्राट तो नग्न है!” (आप फिलहाल इस मज़ेदार किस्से को यूट्यूब पर देख सकते हैं : The Emperor’s New Clothes | Tales in Hindi | बच्चों की नयी हिंदी कहानियाँ I सम्राट का नया कपड़ा – YouTube)
आप अंतिम दिनों के विनाशकारी समय में हैं जहाँ स्वार्थी, लोभी, डींगमार, और अभिमानी लोग फल-फूल रहें हैं (2 तीमु 3:1)। सूचना क्रान्ति का हाहाकार मचा है। स्कूल और डिग्रियां, किताबें और अन्य मीडिया हास्यास्पद तरीके से बढ़ रहे हैं। लोग सूचनाओं पर अड़े रहते हैं, लेकिन उनमें कोई सच्चाई नहीं है! पौलुस ने हमें सतर्क करने के लिए उनके विषय में लिखा कि वे “सदा सीखती तो रहती हैं पर सत्य की पहिचान तक कभी नहीं पहुँचतीं” (2 तीमु 3:7)। और ये हालात कभी सुधरेंगे नहीं, क्योंकि आगे उसने लिखा, “दुष्ट और बहकानेवाले धोखा देते हुए और धोखा खाते हुए, बिगड़ते चले जाएँगे” (2 तीमु 3:13)।
पतियों, अपनी अपनी पत्नी को सम्भालो। अदन की बाग़ में शैतान ने चंद पलों में हव्वा को अपनी ओर आकर्षित कर लिया था, इसलिए पौलुस ने आगाह किया कि भक्ति का भेष धरनेवाले ये धार्मिक ढोंगी मूर्ख स्त्रियों – कमज़ोर और असुरक्षित – को अपने वश में करने की कोशिश करेंगे (2 तीमु 3:6)। अपने इस कमज़ोर साथी की रक्षा करें (1 कुरिन्थ 14:34-35; 1 पतरस 3:7)। इसका हल क्या है? बाइबल में विश्वास और उसका ज्ञान और एक ऐसा पास्टर जो मुख्य रूप से आपको उपदेश देगा और आपको इस विषय पर प्रोत्साहन और सिद्धांत सिखाएगा कि अपने कुटुम्ब की अगुवाई कैसे करनी है (भजन 119:128; 2 तीमु 3:14 – 4:4)!
यहाँ बहुमूल्य बुद्धि और ज्ञान हैं। आप अपने जीवन में सत्य और झूठ दोनों का सामना करते हैं। परन्तु जो मनुष्य चतुर है वह सब बातों को परखेगा, सच या झूठ को साबित करेगा, वह झूठ को ठुकरा देगा और सत्य को दृढ़ता से पकड़े रहेगा। पौलुस ने यह नियम सिखाया जब उसने लिखा, “सब बातों को परखो; जो अच्छी है उसे पकड़े रहो” (1 थिस्स 5:21)। बिरीया के कुलीन यहूदी पौलुस की सिखाई बातों को भी प्रमाणित करने के लिए पवित्र शास्त्र की खोज किया करते थें (प्रेरितों 17:11)। वे भोले नहीं थे। वे आवेग में आकर किसी भी ऐरी-गैरी बात पर विश्वास नहीं करते थे; उन्होंने उसके उपदेश की जांच-पड़ताल की। प्रत्येक आत्मा पर विश्वास मत करो (1 यूहन्ना 4:1-6)।
परमेश्वर ही परम और मुक़म्मल सत्य है, और उसका वचन परम और मुक़म्मल सत्य है (व्यवस्थाविवरण 32:4; यूहन्ना 17:17)। शैतान झूठा और झूठ का पिता है; उसमें कोई सत्य नहीं है (यूहन्ना 8:44)। और सब मनुष्य किसी न किसी का अनुसरण करते हैं। कोई तटस्थ भूमिका नहीं है (गलातियों 1:8-9; इफि 2:1-3; 1 तीमु 6:3-5)। जन्म से ही आप झूठ से प्रेम करते हैं (यूहन्ना 8:45)। लेकिन जब आपका नया जन्म होता है, तब परमेश्वर की संतान के रूप में, आप केवल सत्य के पीछे चलते हैं, यदि आप इसे परखते हैं और इसका अनुसरण करते हैं (यूहन्ना 8:47; 1 कुरिन्थ 2:15; यहूदा 1:3)। परमेश्वर सच्चा ठहरे (रोमियों 3:4)!
यीशु मसीह ही मार्ग, सत्य और जीवन है (यूहन्ना 14:6)। वह विश्वासयोग्य और सच्चा है (प्रकाशितवाक्य 19:11)। वह जगत की ज्योति है, और जो उसके पीछे हो लेंगे वे अन्धकार में नहीं चलेंगे (यूहन्ना 8:12)। आप वर्तमान में भरपूर जीवन पाने और बाद में अनंत काल का जीवन पाने के लिए उस पर पूरा भरोसा रख सकते हैं।
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