नीतिवचन 14:6
निंदक बुद्धि की खोज करता है किन्तु नहीं पाता : परन्तु ज्ञान समझदार के लिए सहज है।
एक निंदक सुधार और शिक्षा से क्रोधित होता है, और जो उसे सुधारते और निर्देश देते हैं, वह उन्हें तुच्छ जानता है। वह एक विकृत मानसिकता वाला विद्रोही है, और वह बुद्धि में नहीं बढ़ेगा। परन्तु समझदार मनुष्य, जो सुधार और शिक्षा से प्रीति रखता है, बुद्धि में आसानी से बढ़ता जाता है। मनुष्यों-मनुष्यों में क्या ही फ़र्क है! मसीही, बुद्धिमान व्यक्ति बनना आपका कर्तव्य और सौभाग्य है।
निंदक धन्य परमेश्वर के किसी काम के नहीं हैं। वह उन से घृणा रखता है, और वह जीवन भर उनका शत्रु बना रहता है। वे अपनी अज्ञानता के चलते जीवनभर अहंकार और आत्म-धार्मिकता में भटकते रहते हैं, जबकि वह स्वर्गदूतों और मनुष्यों के सामने उनका मज़ाक उड़ाता है। यहोवा नम्र लोगों से प्रेम करता है, जो तत्परता से उसके वचन को ग्रहण करते हैं और उसके लिए आभारी हैं। वे उसके प्रचारकों और शिक्षकों से प्रेम रखते हैं, चाहे माता-पिता हों या पास्टर।
मनुष्य जन्म से ही असहाय और अज्ञानी होते हैं। उन्हें लड़खड़ाकर चलना सीखने में एक वर्ष लगता है, कुछ बुनियादी शब्द सीखने में एक और वर्ष लग जाता है, एक और वर्ष तिपहिया साइकिल चलाने में लगता है, और फिर बारह से पंद्रह वर्ष खतरनाक तरीके से कार चलाना सीखने में लग जाते हैं। समझदार मनुष्य जानते हैं कि वे अज्ञानी हैं, और छुटकारा देनेवाले ज्ञान के लिए परमेश्वर के प्रकाशन तथा शिक्षकों पर निर्भर हैं। वे माता-पिता, पास्टरों, और किसी भी अन्य प्रशिक्षक से, जो उन्हें ज्ञान सिखाएगा, प्रेम करते हैं। वे समझ लेते हैं कि परमेश्वर ने उन्हें सच्चे ज्ञान की ओर ले जाने के लिए दूसरों को चुना है।
परन्तु निंदक अपने ही विचारों से प्रेम करते हैं, और जब उन्हें बताया जाता है कि वे गलत हैं, वे नाराज हो जाते हैं। उनके अपने विचारों पर उनका अहंकार उन्हें मूर्ख से भी बदतर बना देता है (नीति 26:12)। वे शिक्षा पाने के लिए ज्ञानियों के पास नहीं जाएंगे, क्योंकि वे मानते हैं कि वे यह सब पहले से ही जानते हैं (नीति 15:12)। और क्योंकि वे निंदक हैं, अत: बुद्धिमान लोग उन से दूर रहते हैं, और उनकी किसी भी संगति से इन्कार करते हैं (नीति 9:7-8)। वे खोए हुए हैं!
मूर्ख और विनम्र बनना बुद्धि की प्राप्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम है (1 कुरिं 3:18)। परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करता है और उनसे सत्य छिपाकर रखता है (मत्ती 11:25-27; याकूब 4:6)। सुलैमान ने कहा कि वह तो एक छोटा बालक ही है; यहोशापात ने कहा कि वह नहीं जानता कि क्या करना है: इन दोनों मनुष्यों को बहुतायत से आशीष दी गई। सच्ची नम्रता में आप जितना नीचे जाएंगे, परमेश्वर आपको उतना ही ऊँचा उठायेगा।
अपने आप को नम्र करते हुए, आपको परमेश्वर का भय मानना, और सब बातों में उसके वचन पर भरोसा करना आवश्यक है (नीति 1:7; 3:5-6; 9:10; भजन 119:128)। फिर आप उन इकट्ठे हुए यहूदियों और बिरियावासियों के समान कुलीन और ग्रहणशील आत्मा वाले बनकर उसके प्रचारकों की खोज करो (नहे 8:1-12; प्रेरितों 17:11)। यह मिश्रण शक्तिशाली है! परमेश्वर बुद्धि और ज्ञान के सभी विषयों में स्पष्ट रूप से आपका मार्गदर्शन करेगा।
यह एक निंदक पीढ़ी है, इसलिए इस पीढ़ी के लोग बेहद अज्ञानी हैं। आज की मसीही स्त्रियाँ जो बाइबल की शिक्षक बन बैठी हैं, मूर्ख स्त्रियों की सेवा करती हैं, जो पत्नी की अपने पति के प्रति अधीनता और पवित्र मातृत्व का अपना परमेश्वर-प्रदत्य कर्तव्य निभाने के बजाय बाइबल पढ़ाने को प्राथमिकता देती हैं (2 तीमु 3:1-7; 1 कुरिन्थ 14:34-35)। आज अधिकतर तथाकथित नकली मसीहियों ने मनोरंजन और दंतकथाओं को सुनने के लिए खरा उपदेश त्याग दिया है (2 तीमु: 4:3-4)। वे खोए हुए हैं। वे कभी कुछ नहीं सीखने पाएँगे। परन्तु जो नम्र हृदय से परमेश्वर के नियमों का पालन करते हैं, वे सहज ज्ञान प्राप्त करेंगे।
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