नीतिवचन 26:8
जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देना होता है।
मूर्ख गौरव या सम्मान दिए जाने के योग्य नहीं हैं, बल्कि उन्हें तिरस्कृत और अस्वीकृत किया जाना चाहिए। चूंकि बुद्धि श्रेष्ठ और पवित्र है, बुद्धिमान व्यक्तियों को सम्मानित किया जाना चाहिए; चूंकि मूर्खता बुरी और भ्रष्ट है, मूर्ख का सम्मान करना समस्त पवित्र संवेदनाओं के विपरीत है। यह इतना ही गलत और भ्रमित करने वाला है जैसे पत्थर को गोफन में बांधा जाए, ताकि जब इसे फेंकने का प्रयास किया जाता है तो यह बाहर ही नहीं आ सके।
एक गोफन चमड़े के एक छोटे से टुकड़े से बनी होती थी, जिसके दोनों किनारों पर एक पट्टी लगी होती थी। चमड़े पर पत्थर को रखकर एक दो बार घुमाया जाता और एक पट्टी छूटती, जिससे बड़ी ताकत से पत्थर फेंका जाता। दाऊद ने गोलियत को गोफन से मार डाला, और बिन्यामिन के पास 700 बाएं हाथ से गोफन चलाने वाले व्यक्ति थे, जो अविश्वसनीय रूप से सटीक निशानेबाज थे (न्यायियों 20:16)। गोलाकार पत्थर गोल्फ बॉल से लेकर टेनिस बॉल के आकार तक के होते थे और 400 मीटर से अधिक दूरी तक फेंके जा सकते थे, और इस ऐतिहासिक साक्ष्य के साथ कि निशानेबाज मारने के लिए शत्रु के चेहरे पर निशाना भी निर्धारित कर लेते थे।
यदि एक पत्थर गोफन में बंधा होता था, तो जब पट्टी को छोड़ा जाता, तो पत्थर गोफन को नहीं छोड़ पाता था। यद्यपि, रूके अपकेंद्रिय बल के कारण थैली समेत पत्थर आपके चेहरे पर आकर लग सकता था! कम से कम पत्थर को गोफन में बांधना पूर्णतया अनुत्पादक और बेकार सिद्द होता था; सबसे खराब स्थिति में, यह फेंकने वाले के लिए जानलेवा होकर खतरनाक हुआ करता था।
पत्थर को गोफन में बांधने की उपमा का क्या अर्थ है? कम से कम यह कि एक मूर्ख का सम्मान करना अनुत्पादक और बेकार है; सबसे खराब स्थिति में यह बहुत खतरनाक है, क्योंकि अयोग्य को दिया गया सम्मान आपको गंभीर चोट पहुंचाने आप ही पर वार कर सकता है। अगर आप एक मूर्ख का सम्मान करते हैं, तो इसके लिए आपको कष्ट भुगतना पड़ेगा, क्योंकि सम्मानित मूर्ख एक असहनीय बात है (नीति 23:9; 26:4-5; 29:9; 30:21-23; मत्ती 7:6)।
सुलेमान के नीतिवचन एक बुद्धिमान जीवन के लिए दिए गए नियम हैं (नीति 1:1-6), और यहां मूर्खों के विषय में बारह नियम दिए हुए हैं (नीति 26:1-12), ताकि आपको बुद्धिमत्तापूर्ण चलने में सहायता की जा सकें (कुलु 4:5)। स्वाभाविक मनुष्य मूर्ख होते हैं; परमेश्वर चाहता है कि आप बुद्धिमान बनें। इसलिए, आप सुलेमान के नीतिवचन में निरंतर बुद्धि और मूर्खता, बुद्धिमान मनुष्य और मूर्खों के बीच संघर्ष के विषय में पढ़ सकते हैं। बुद्धि का एक सरल नियम यह है कि बुद्धिमान मनुष्यों का सम्मान करना और उन्हें अपने मित्रों के रूप में चुनना। विपरीत नियम मूर्खों का तिरस्कार करना और उन्हें अस्वीकार करना है।
भेद करना अच्छा और पवित्र है। बुद्धिमान मनुष्य अच्छे और बुरे के बीच, बुद्धि और मूर्खता के बीच, और बुद्धिमान मनुष्यों और मूर्खों के बीच भेद करते हैं। परमेश्वर मनुष्यों के चरित्र और आचरण के अनुसार कर्इ वरदानों और शापों के वितरण में भेद करता है। जबकि वह अच्छे और बुरे दोनों पर धूप और वर्षा भेजता है, वह मनुष्यों को पुरस्कार और दंड भी देता है (भजन 58:11)।
चरित्र और आचरण का विचार किए बिना, सभी मनुष्यों के साथ एक सा व्यवहार करना मूर्खों को उनकी मूर्खता में बढ़ावा देना है, और बुद्धिमानों को उनकी बुद्धि के लिए हतोत्साहित करना है, जो वास्तव में सम्मान के योग्य हैं। मात्र अस्तित्व में होने या स्वाभाविक संबंध होने से सम्मान के पात्र नहीं हो जाते हैं, जब तक कि व्यक्ति परमेश्वर के द्धारा ठहराए गए सम्मानीय कार्य में लीन न हो। शर्तरहित सम्मान देना अज्ञानतावश खतरनाक है। मूर्खों से प्रसन्न होने के लिए कोर्इ स्थान अथवा कारण नहीं है (नीति 19:10)। सारा सम्मान केवल बुद्धि को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए।
सिय्योन के नागरिक, जो परमेश्वर की सच्ची संतान हैं, उनके चरित्र की एक विशेषता है: मूर्खों की निंदा और तिरस्कार करना और बुद्धिमानों का सम्मान करना और उन्हें बढ़ावा देना। जब दाऊद ने परमेश्वर की संतान के चिंन्हों को सूचीबद्ध किया, तो उसने इसे भी सम्मिलित किया, ‘‘जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है; और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है’’ (भजन 15:4) और उसने अपने स्वयं के घर में इसपर अमल किया (भजन 101:3-8)।
एलीशा ने, परमेश्वर के भविष्यवक्ता के रूप में, जब राजा यहोराम (अहाब और यिजबेल का पुत्र) और राजा यहोशापात से भेंट करने गया, यह कहा, ‘‘सेनाओं का यहोवा जिसके सम्मुख मैं खड़ा रहता हूं, उसके जीवन की शपथ, यदि मैं यहूदा के राजा यहोशापात का आदर मान न करता, तो मैं न तो तेरी ओर मुंह करता और न तुझ पर दृष्टि करता’’ (2 राजा 3:14)। वह अहाब के मूर्ख पुत्र का सम्मान नहीं करेगा।
पालक, क्या आप बुद्धिमान और मूर्ख संतान, और उनके बुद्धिमानीपूर्ण और मूर्खतापूर्ण कार्यों के बीच भेद करते हैं? बुद्धिमानी का र्इनाम और मूर्खता की सजा के लिए आप जो भेद करते हैं वह एक समान और स्पष्ट होना चाहिए। यह परमेश्वर की पद्वति से एक श्रेष्ठ परिवार का निर्माण करेगा। क्या आज आप एक मूर्ख बच्चे की उपेक्षा करने के लिए बुद्धिमान बच्चे के सम्मान करने का कोर्इ कारण खोज सकते हैं? इसे करें!
पास्टर, क्या आप बुद्धिमान और मूर्ख सदस्य, और उनके बुद्धिमानीपूर्ण और मूर्खतापूर्ण कार्यों के बीच भेद करते हैं? बुद्धिमानी का र्इनाम और मूर्खता की सजा के लिए, आप जो भेद करते हैं वह एक समान और स्पष्ट होना चाहिए। यह परमेश्वर की पद्धति से एक श्रेष्ठ कलीसिया का निर्माण करेगा। क्या आज आप मूर्ख सदस्यों की उपेक्षा करने के लिए बुद्धिमान सदस्यों के सम्मान करने का कोर्इ कारण खोज सकते हैं? इसे खोजे!
सुलेमान को हताश करने वाली बुरार्इ के लिए न तो माता-पिता और न ही पास्टर को दोषी होना चाहिए। उसने लिखा, ‘‘एक बुरार्इ है जो मैंने सूर्य के नीचे देखी, वह हाकिम की भूल से होती है: अर्थात मूर्ख बड़ी प्रतिष्ठा के स्थानों में ठहराए जाते हैं, और धनवान लोग नीचे बैठते हैं। मैं ने दासों को घोड़े पर चढ़े, और रर्इसों को दासों की नार्इं भूमि पर चलते हुए देखा है” (सभो 10:5-7)। बुद्धिमान व्यक्ति को सम्मान देने और मूर्ख की अवहेलना करने के द्वारा, मूर्खता को दूर कीजिए, और बुद्धि को बड़ी प्रतिष्ठा के लिए स्थापित कीजिए।
मूर्खों से दूर रहने से, उनकी उपेक्षा और निंदा करने और उन्हें अस्वीकार करने से धर्मी पृथ्वी पर नमक बन सकते हैं ताकि बुद्धिमानों को सुरक्षित रखें और मूर्खों का क्षय हो (मत्ती 5:13; कुलु 4:6)। ऐसा ही व्यवहार करने से, वे मूर्खों को उजागर करने और उन्हें डांटने के कारण ज्योति की संतान होंगे (इफि 5:8-13)। मूर्खों के इलाज के लिए ऐसे और इसी के समान नियमों का पालन करना संतों का सौभाग्य है।
धन्य प्रभु इस नीतिवचन को व्यवहार में प्रकट करने का सिद्ध उदाहरण थे। जहां कहीं उन्होंने मूर्खता पार्इ, यहां तक कि अपने शिष्यों के बीच भी, तो उसकी निंदा की और डांटा (मत्ती 22:34-46; 23:17-19; लूका 24:25-26)। किंतु वह बुद्धि को जितना ऊंचा उठा सकते थे, उसे उठाया, यहां तक कि अपने आज्ञाकारी अनुयायियों को अपनी माता, भार्इ, और बहन भी कहा (मत्ती 12:46-50; लूका 11:27-28)।
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