नीतिवचन की व्याख्या

1. जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।

2. जैसे गौरैया घूमते–घूमते और सूपाबेनी उड़ते–उड़ते नहीं बैठती, वैसे ही व्यर्थ शाप नहीं पड़ता।

3. घोड़े के लिए कोड़ा, गदहे के लिए लगाम, और मूर्खों की पीठ के लिए छड़ी है।

4. मूर्ख की मूर्खता भरी बातों का उत्तर मत देना; अन्यथा तू भी उसी के समान मूर्ख बन जाएगा।

5. मूर्ख को उसकी मूढ़ता के अनुसार उत्तर देना, ऐसा न हो कि वह अपने लेखे में बुद्धिमान ठहरे।

6. जो मूर्ख के हाथ से संदेश भेजता है, वह मानो अपने पाँव पर कुल्हाड़ा मारता और विष पीता है।

7. लंगड़े की टांगे एक सी नहीं होती है : सो मूर्खों के मुंह में दृष्टान्त ऐसा ही है।

8. जैसे पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली, वैसे ही मूर्ख को महिमा देना होता है।

9. जैसे मतवाले के हाथ में काँटा गड़ता है, वैसे ही मूर्खों का कहा हुआ नीतिवचन भी दु:खदाई होता है।

11. जैसा कुत्ता अपने छांट को फिर जाता, वैसा मूर्ख अपनी मूर्खता की ओर फिर जाता है।

12. यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उससे अधिक आशा मूर्ख ही से है।

13. आलसी कहता है, “मार्ग में सिंह है, चौक में सिंह है!”

14. जैसे किवाड़ अपनी चूल पर घूमता है, वैसे ही आलसी अपनी खाट पर करवटें लेता है।

15. आलसी अपना हाथ थाली में तो डालता है, परन्तु आलस्य के कारण कौर मुँह तक नहीं उठाता।

16. आलसी अपने को ठीक उत्तर देनेवाले सात मनुष्यों से भी अधिक बुद्धिमान समझता है।

17. जो मार्ग पर चलते हुए पराये झगड़े में विघ्न डालता है, वह उसके समान है, जो कुत्ते को कानों से पकड़ता है।

18. जैसा एक पागल जो जलती लकड़ियाँ और मृत्यु के तीर फेंकता है,

19. वैसा ही वह भी होता है जो अपने पड़ोसी को धोखा देकर कहता है, “मैं तो मज़ाक कर रहा था।”

20. जैसे लकड़ी न होने से आग बुझती है, उसी प्रकार जहाँ कानाफूसी करनेवाला नहीं, वहाँ झगड़ा मिट जाता है।

22. कानाफूसी करनेवाले के वचन, स्वादिष्ट भोजन के समान भीतर उतर जाते हैं।

23. जलते होंठ और दुष्ट मन चांदी के मैल से ढंपे हुए ठीकर के समान है।

24. जो बैरी बात से तो अपने को भोला बनाता है, परन्तु अपने भीतर छल रखता है;

25. उसकी मीठी–मीठी बात की प्रतीति न करना, क्योंकि उसके मन में सात घिनौनी वस्तुएँ रहती हैं;

27. जो गड़हा खोदे, वही उसी में गिरेगा, और जो पत्थर लुढ़काए, वह उलटकर उसी पर लुढ़क आएगा।

28. जिसने किसी को झूठी बातों से घायल किया हो वह उससे बैर रखता है, और चिकनी चुपड़ी बात बोलनेवाला विनाश का कारण होता है।

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