नीतिवचन 26:3

घोड़े के लिए कोड़ा, गदहे के लिए लगाम, और मूर्खों की पीठ के लिए छड़ी है।

कुछ लोग बातों से नहीं समझते । इसके बजाय वह ठोकर खाकर ही समझते हैं । वे मूर्ख हैं, और ऐसे लोगों से निपटना सीखना बुद्धि का ही एक तत्व है । जैसे कुछ पशुओं को नियंत्रित करने या निर्देशित करने के लिए लगाम और कोड़े की आवश्यकता होती है, वैसे ही कुछ लोगों को केवल बातों से अधिक कठोर तरीकों से समझाने की आवश्यकता होती है।

आप अपने जीवन में मूर्खों से मिलेंगे , इसलिए आपको उनकी पाशविक मानसिकता के अनुकूल होना सीखना चाहिए। वे केवल बलप्रयोग या दर्द देने पर ही प्रतिक्रिया करते हैं। चाहे आप नम्रता और शांति से प्रेम करते हों, तौभी आपको अपनी रक्षा के लिए या उन्हें कुछ भी लाभकर करने पर मजबूर करने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।

क्या आपको लगता है कि आप मूर्ख से बुद्धि की बातें कर सकते हैं? यह आप कैसे करेंगे? मूर्ख बातों से नहीं सीखते; वे कभी नहीं सीखेंगे। इसी कारण वह मूर्ख हैं । बातों से सीखने के लिए बुद्धि और दीनता की आवश्यकता होती है। मूर्खों के पास बुद्धि बहुत कम और दीनता तो बिल्कुल नहीं होती है। उन्हें क्रूर पशुओं की तरह शारीरिक कष्टों और दंड द्वारा नियंत्रित किया जाना ज़रूरी है। (नीतिवचन 10:13; 19:29)।

मूर्ख पर बातों का कोई असर नहीं होता (नीतिवचन 26:4; 23:19)। इसलिए केवल उसकी अज्ञानता को फटकारने के लिए जितना ज़रूरी है उतना प्रत्युत्तर अवश्य दें, ऐसा न हो कि वह अपने आप को लाजवाब समझे (नीतिवचन 26:5)। एक घुड़की, “बुद्धिमान के लिए शब्द” बुद्धिमान पर प्रभावकारक होगी, जितनी कि मूर्ख की पीठ पर सौ कोड़े पड़ने पर भी नहीं होगा (नीतिवचन 17:10; 1:5)। समझदार बनो; अपनी संगति के लिए केवल बुद्धिमान व्यक्ति का चुनाव करो (नीतिवचन 9:6 ; 13:20 ; 14:7)।

यह दुखद बात है कि हमारे शहरी समाजों में अब घोड़े और गधे जैसे पशुओं से कार्य नहीं कराया जाता, क्योंकि इस नीतिवचन को थोड़ी स्पष्टीकरण की आवश्यकता होगी। वे लोग जो खेतों में इन पशुओं के साथ पले बड़े हुए, उन्होने शारीरिक कष्टों और दंड के द्वारा इन्हें नियंत्रित और निर्देशित करना सीखा। लेकिन कथित पशु-रक्षकों ने आज के “सभ्य” राष्ट्रों से इस तरह के ज्ञान को लगभग चुरा लिया है।

हाथ में कोड़ा, या घुड़सवारी का चाबुक पकड़े रहना एक घोड़े को प्रशिक्षण याद रखने में मदद करते हैं। एक घोड़ा अपने घुड़सवार को चाबुक या कोड़े के साथ सवारी न करने की तुलना में, चाबुक या कोड़े के साथ सवारी करते देख बेहतर व्यवहार करता है, भले ही इसका प्रयोग न किया जाए। घोड़े ने उस चुभने वाले कोड़े को पहले महसूस कर रखा है, इसलिए वह निर्देशों का पालन करता है, हालांकि उसे कोई समझ नहीं होती है। यहां तक कि अच्छी नस्ल के और प्रशिक्षित किए गए अच्छे घोड़ों को भी दौड़ में सर्वश्रेष्ठ जीत हासिल करने के लिए कोड़े खाना आवश्यक होता है।

एक लगाम एक गधे ,खच्चर या घोड़े को निर्देशित करने के लिए एकदम उपयुक्त होती है (भजन संहिता 32:9; याकूब 3:3)। उसके मुंह के विपरीत दिशा में लगाया गया धातु का एक टुकड़ा, उसे मालिक द्वारा चुनी गई दिशा में आगे बढ़ना याद दिलाता है, विशेष रुप से चार फीट के उत्तोलन जिसमें दोनों तरफ लगाम होती है। क्या कमाल का उपकरण है! जानवरों के लिए इस प्रकार के उपकरण बनाने के लिए मनुष्य प्रवीण रहे हैं, और आपको मूर्खो के साथ भी ऐसा ही करने की आवश्यकता होगी ।

आज के तथाकथित प्रबुद्ध समाज, जो छिदी हुई जीभ वाले रॉकर्स को मोश पिट में एक दूसरे से भिड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, सोचते हैं कि मूर्खजन लाड़ -प्यार और एक नए वातावरण से बुद्धिमान हो जायेंगे। लेकिन हर किसान, विशेषकर वह जिसमें उच्च शिक्षा का अभाव होता है, उनसे बेहतर जानता है। वह जानता है कि आप जिद्दी, क्रूर जानवरों को सिर पर चढ़ाकर और लाड़- प्यार से आज्ञाकारी नहीं बना सकते।

शिक्षाविशरद कहते हैं कि कोमल शब्द मूर्ख को बुद्धिमान बना देंगे, लेकिन परमेश्वर का ज्ञान कहता है कि वे व्यर्थ शब्द होते हैं और वे मूर्ख को और अधिक मूढ़ता की ओर ले जाएंगे। क्योंकि तब वह स्वयं को चर्चा के योग्य समझेगा, जो वह नहीं है (नीतिवचन 26:5 ; 2 तीमुथियुस 2:16, 23 ; तीतुस 3:9)। मूर्ख तेरी बुद्धि के वचनों को तुच्छ जानेगा और उनका प्रयोग तेरे विरोध में करेगा ( नीतिवचन 23:9; मत्ती 7:6)।

वे कहते हैं कि एक नया वातावरण मूर्ख को बुद्धिमान बना देगा, लेकिन परमेश्वर का ज्ञान इसे भी रद्द करता है (यशायाह 26:10)। जैसे कुत्ता अपनी छाँट को चाटता है, वैसे ही मूर्ख अपनी मूर्खता को दोहराता है। कुत्ता अपनी छाँट की ओर और नहलाई हुई सूअरनी कीचड़ मे लोटने के लिए फिर चली जाती है। परमेश्वर ने मूर्ख के चरित्र पर ठीक बैठते इन शब्दों को चुना (नीतिवचन 26:11; 2 पतरस 2:22)।

शिक्षाविद कहते हैं कि बेहतर शिक्षा मूर्खों को बुद्धिमान बना देगी, लेकिन वह उच्च शिक्षा के संस्थान ही थे जिन्होंने 1970 के हिप्पी अराजकतावादी मूर्खों, और आज के पेड़ों को गले लगानेवालों, परिवार तोड़ने वाले, शिशु-गर्भपात करने वाले अराजकतावादी मूर्खों को जन्म दिया। आज के स्कूलों का चापलूसी और लाड़-प्यार करने वाला शैक्षिक-शिष्टाचार वास्तव में मूर्खों को उत्पन्न कर उन्हें द्विगुणित करता है।

समाजवादी लोग सुझाव देते हैं कि बेहतर नौकरियों और अधिक पैसे से बदलाव आएगा। लेकिन आज की अभिनेत्रियों और खिलाड़ियों के बीच मूर्खों को देखकर आप समझ नहीं पाएंगे। लड़कों के खेल खेलने पर करोड़ों की तनख्वाह ने भी उन्हें बुद्धिमानी नहीं सिखाई है। कुछ तो, अत्यधिक आय और भव्य जीवन शैली के बावजूद भी इस नीतिवचन में उल्लेखित पशुओं जितने ही मूर्ख हैं।

मूर्ख के लिए प्यार और स्नेह सही नहीं है, क्योंकि वह उसके अहंकार को भटकाएंगे और उसकी विकृत जीवन-शैली को सही ठहराएंगे। मूर्खों को सम्मान या महिमा नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह दो कारण इसे गलत बनाते हैं (नीतिवचन 26 :1, 8; 19:10; 30:21-23, सभोपदेशक 10:5 -7)। मूर्ख को आदर और सम्मान देना इस तरह के निरादर का अवलोकन करने वाले बुद्धिमानों के दिलों को हतोत्साहित करने का एक निश्चित तरीका भी है ।

यह शर्म की बात है जब कई तथा-कथित मसीही लेखक “डेअर टू डिसिप्लिन” जैसी किताबें लिखते हैं। कुछ लोगों द्वारा बाल-अनुशासन के लिए एक मजबूत तर्क माने जाने वाली इस पुस्तक ने मसीहत की आड़ में, बच्चों के लाड़-प्यार और आत्मसम्मान को बढ़ावा दिया है। मानवतावादी मनोविज्ञान छड़ी के उपयोग को खारिज करता है, और दंड के अधिक कोमल रूपों की माँग करता है। स्पष्ट है, लेखकों ने कभी भी क्रूर जानवरों के साथ काम नहीं किया, और उनके तरीके बेकार साबित हुए हैं ।

मूर्खों के लिए शारीरिक दंड उतना ही अच्छा है, जितना क्रूर जानवरों के लिए कोड़े और लगाम आवश्यक और उपयोगी है। अनुशासन से घृणा और विद्रोह से लाड़-प्यार करने वाले समाजों में इसे जिस हद तक खारिज किया गया है, उन राष्ट्रों का पतन हो जाएगा। एक छड़ी से सिखाया गया आत्म-अनुशासन अच्छे चरित्र-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह नीतिवचन अकेले ही बाइबल को सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों की सूची में सबसे शीर्ष पर रहने योग्य बनाता है।

बेंत मारना किसी समय पर पारिवारिक, घरेलू ,सैन्य और शैक्षणिक अनुशासन को बनाए रखने का सार्वभौमिक तरीका हुआ करता था। हिकरी छड़ी का उपयोग करना पढ़ने, लिखने और अंक गणित सिखाने का एक शानदार तरीका हुआ करता था । अब आप इसे सभी प्रकार के मूर्खों के लिए व्यय के रूप से इस्तेमाल की जाने वाली इस सार्वजनिक सजा को शायद ही कभी किसी सटीक विश्वकोश प्रविष्टि भी पा सकते हैं। ऐसा संशोधनवाद एक शैतानी झूठ है ।

वे कहते हैं कि शारीरिक दंड कोई निवारक नहीं है, लेकिन ऐसी विशिप्त धारणा शिक्षाविदों की उपज है, जिन्होंने कभी खेत पर काम नहीं किया और जो वास्तविकता से परे मतिभ्रम हैं। हर कोई जानता है कि दर्द एक निवारक होता है। बच्चे आग और गर्मी, पेड़ों की नरम शाखाओं और सीढ़ियों का अनुभव करके उन्हें जान पाते हैं। न कि मौखिक निर्देश के माध्यम से उनके बारे में जानने से ।

कोड़ा घोड़े को चतुर नहीं बनाता, न लगाम गदहे कि सहायता करती है; न ही छड़ी मूर्ख को बुद्धिमान बनाती है (नीतिवचन 17:10 ;27:22 )। छड़ी चाबुक और लगाम की तरह ही, मूर्खों को नियंत्रित करने, प्रेरित करने और दंडित करने के लिए केवल परमेश्वर के साधन हैं। उन्हें अक्सर मार की आवश्यकता होगी, क्योंकि वे आमतौर से बुद्धि नहीं सीखेंगे, क्योंकि उनके पास उसके लिए दिल या समझ नहीं होती (नीतिवचन 17:16)।

इस नीतिवचन के अर्थ में, बच्चे सच में मूर्ख नहीं होते, परंतु वे अपने हृदय में मूर्खता लिए जन्म लेते हैं (नीतिवचन 22:15)। उन्हें कम उम्र से ही घुड़कियों और छड़ी के उपयोग से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। (नीतिवचन 13: 24; 19:18; 23:13 -14; 29:15, 17) । जहां वास्तविक मूर्ख ज्ञान नहीं सीखते, वहीं आप छड़ी द्वारा अपने बच्चों में उत्कृष्ट चरित्र को प्रशिक्षित कर सकते हैं।

आज राष्ट्रों ने बाइबल और छड़ी के अपने पारंपरिक उपयोग को नकार दिया है, इसलिए आपके पास उन मूर्खों को मारने का विकल्प नहीं है जिन्हें आपको प्रबंधित करना होगा। हर स्थिति की सीमा के भीतर, आपको अपने निस्तारण में सबसे मज़बूत, सबसे प्रत्यक्ष ,सबसे दर्दनाक उपायों का उपयोग करने के लिए रचनात्मक होना होगा। इस नीतिवचन की बुद्धि ने सिखाया है कि सिर्फ शब्द पर्याप्त नहीं होंगे।

प्रभु यीशु मसीह मौखिक निर्देश द्वारा अपने माता-पिता के आज्ञाकारी पुत्र और परमेश्वर के दास थे (लूका 2:51; यशायाह 50:4-6)। उनके प्रशिक्षण में छड़ी की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वह मनुष्यों में सबसे बुद्धिमान थे। फिर भी, अपने पिता के प्रार्थना घर से मूर्खों को बाहर निकालते समय, वह कोड़ा बनाना और उसका उपयोग करना जानते थे (यूहन्ना 2:12-18) वह क्या ही महिमावान मनुष्य और अगुवे थे!

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