नीतिवचन 26:23
जलते होंठ और दुष्ट मन चांदी के मैल से ढंपे हुए ठीकर के समान है।
क्या आप इन भयानक पापों में से किसी एक या दोनों के दोषी हैं – जलते हुए होंठ जो दूसरों के बारे में बुरी बातें कहते हैं या एक दुष्ट मन जो ऐसी बातें सोचता है? यदि आप दोनों पापों के दोषी हैं, तो आप चांदी को शुद्ध करनेवाली भट्टी से निकले मैल से ढंपे हुए ठीकर के समान हैं। कितना बदसूरत और बेकार व्यक्ति! यदि आप दूसरों के बारे में अच्छी बातें नहीं कह सकते, तो अच्छा है कि आप चुप ही रहें।
यहाँ एक सरल उपमा है – शब्द “समान” को प्रयुक्त करने के द्वारा एक व्यक्ति की तुलना ठीकर से की गई है। एक ऐसा दुष्ट व्यक्ति, जिसका मन दुर्भावनापूर्ण और निष्ठुर होता है, वह मिट्टी के बर्तन के टूटे हुए ठीकर के समान होता है जो मैल से ढंपा होता है। एक अच्छा व्यक्ति, जिसका मन नेक और अनुग्रह से भरा होता है, वह मिट्टी के बर्तन के एक सुंदर ठीकरे के समान होता है जिस पर शानदार चांदी लगी होती है, एक प्रसन्नदायक और मूल्यवान वस्तु।
जलते होंठ क्या हैं? इस व्यक्ति के मुँह में आग है, और वह नियमित रूप से दूसरों को आलोचनात्मक और घृणित भाषण से जलाता है। वह ज्यादा देर तक चुप नहीं रह सकता – उसे दूसरों के बारे में कुछ न कुछ अपमानजनक कहना ही होता है। उसके होंठ नरक की आग से जलते रहते हैं (नीतिवचन 4:24; 10:18; 16:27; याकूब 3:5-9)।
दुष्ट मन क्या है? यह वाक्यांश उस व्यक्ति का वर्णन करता है जिसका मन दूसरों के प्रति अहंकार से भरी अवमानना और दुर्भावनापूर्ण नफ़रत से भरा हुआ होता है, जैसा कि संदर्भ से पता चलता है (नीतिवचन 26:18-28)। वह परमेश्वर को नहीं जानता, और दूसरों के प्रति उसके मन में कोई इज्ज़त या अपनापन नहीं है, सिवाय इसके कि वह उन्हें अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करे। वह अपने मन में हत्यारा है, भले ही उसने अभी तक ऐसा कोई अपराध प्रत्यक्ष रूप से न किया हो।
क्या आपके जलते होंठ हैं? या क्या आपका मन दुष्ट है? क्या आपके जलते होंठ और दुष्ट मन दोनों हैं? यह पता लगाना आसान है। आप कितनी आसानी से बहस करते हैं, चुगली करते हैं, चापलूसी करते हैं, झूठ बोलते हैं, निंदा करते हैं, पीठ पीछे बुराई करते हैं या कानाफूसी करते हैं? यदि आप इन सब बातों में आसानी से पाप करते हैं, तो निश्चित रूप से आपके जलते होंठ हैं। और यदि आप अपने होठों के ऐसे पापों के बाद कोई पश्चात्ताप नहीं करते हैं, तो आपका मन भी दुष्ट है। पाठक, अपने आप को जाँचें और पश्चाताप करें।
भले ही आपके होंठ और मन शारीरिक रूप से आपस में पूरी तरह से जुड़े हुए नहीं हैं, फिर भी उनमें क़रीबी रिश्ता है। कोई इन्सान कभी-कभी अपने होठों से पाप कर सकता है जबकि उसका मन शुद्ध हो, लेकिन उसे इसके लिए दुःख होगा। यदि कोई व्यक्ति अपने शब्दों से दूसरों पर आक्रमण करने का पाप हमेशा ही करता है, तो वह एक हिंसक और दुष्ट मन उजागर करता है। प्रभु यीशु ने सिखाया कि मुँह से वही निकलता है जो मन में भरा होता है (मत्ती 12:34-37)।
एक ज़माना था जब कई खूबसूरत कलाकृतियाँ और घरेलू बर्तन मिट्टी से बनाए जाते थे। बढ़िया चाँदी से ढकी एक अच्छी तरह से बनी मिट्टी की वस्तु दिखने और उपयोग में उत्तम होती थी। लेकिन एक मिट्टी का टुकड़ा मिट्टी के बर्तन का टूटा हुआ ठीकरा ही होता है, और चाँदी को शुद्ध करने के बाद निकलेवाले मैल से निकला कचरा होता है।
बुद्धिमान लोग अपने मन की जाँच करते हैं और अपने होठों की रक्षा करते हैं – वे दूसरों को नुकसान पहुँचानेवाले निन्दात्मक मन और हिंसक होठों से डरते हैं (नीतिवचन 6:12-15; 17:20)। वे इसके बजाय एक शुद्ध मन और अनुग्रहपूर्ण होठों को चुनेंगे जो एक राजा को भी अपना मित्र बना सकते हैं (नीतिवचन 22:11)। पाठक, खुद की जाँच करें!
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