नीतिवचन 26:22

कानाफूसी करनेवाले के वचन, स्वादिष्ट भोजन के समान भीतर उतर जाते हैं।

बीते ज़माने में माता-पिता और शिक्षक कानाफूसी करने वालों को सजा देते थे। परमेश्वर आज भी सजा देता है! कानाफूसी करना अब भूला हुआ पाप है। लेकिन परमेश्वर इस पाप को नहीं भूला है और इस पाप का दण्ड देता है! कानाफूसी किसी की चुगली करना, किसी अन्य व्यक्ति के बारे में हानिकारक या दुर्भावनापूर्ण बातें फैलाना है। वे मनुष्यों को गहरे घाव देते हैं, जो कानाफूसी करनेवालों को हत्या का दोषी ठहराता है, क्योंकि इस पाप की जड़ मन में पनपनेवाली नफ़रत है।

इस नीतिवचन की बुद्धि इतनी महत्वपूर्ण है, कि इसे फिर से दोहराया गया है (नीतिवचन 18:8)। आज दोहराव के इस नियम का पालन करना मूल्यवान होगा, क्योंकि चुगली करना, पीठ पीछे किसी की बुराई करना, बदनामी करना, कानाफूसी करना इन जैसे पापों की आज निंदा नहीं की जाती है। आज के पत्रकार कानाफूसी करने को गलत तरीके से पत्रकारिता की स्वतंत्रता, यहाँ तक कि कर्तव्य भी समझते हैं। मूर्खों की दृष्टि में यह “आपको अमुक-अमुक व्यक्ति के बारे में सच्चाई बताना है।”

परमेश्वर इस बात की परवाह नहीं करता कि आप किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में जो कहते हैं वह सच है या नहीं – दोनों ही पाप हैं। यदि आप किसी अन्य व्यक्ति के बारे में कुछ गलत कहते हैं, तो आपने उसके नाम को झूठा कलंक लगाया है। आप जो कुछ बताते हैं, वह यदि सच भी हो, तो भी आप चुगली करने वाले, कानाफूसी करने वाले और पीठ पीछे बुराई करने वाले बन जाते हैं। परमेश्वर इन तीनों पापों से घृणा करता है। कानाफूसी करना किसी अन्य व्यक्ति को बदनाम करने या उसे चोट पहुँचाने के उद्देश से गुप्त तथ्य बताना है (नीतिवचन 11:13; 20:19), तो केवल इसलिए क्योंकि आप जानते हैं कि जानकारी सत्य है, आप यह न सोचें कि आप निर्दोष हैं।

बेशक, आपने लंबे समय से कानाफूसी करने के खिलाफ कोई चेतावनी या उपदेश नहीं सुना या नहीं पढ़ा है। यह पीढ़ी इसकी आदी है, क्योंकि दुष्टता या दुष्ट मनुष्यों पर बहुत ही कम प्रतिबन्ध है। समाचार पत्र, समाचार चैनेल्स, और समाचार वेबसाइट सब के सब किसी न किसी के बारे में जो भी रहस्य खोज सकते हैं उसे खोजने और उन्हें यथासंभव फैलाने के लिए दौड़ लगाते हैं। आज की इस नफरती और दुष्ट पीढ़ी की कामुक वासनाओं की ख़बरों से पैसा कमाना भी पत्रकारिता का एक उद्देश्य है।

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की कुछ गुप्त बातें होती हैं – निजी मामले – जैसे कि पाप, गलतियाँ, असफलता, नुकसान, नौकरी से निकाला जाना, आपराधिक अतीत, दिवालियापन, उसका कम वेतन, तलाक, बीमारी, और यहां तक कि पैदाइशी निशान भी। वे उसकी गुप्त बातें हैं, और किसी और को उन्हें जानने की न तो आवश्यकता है और न ही जानना चाहिए। किसी एक व्यक्ति को भी बताना जिसे परमेश्वर द्वारा दिए गए कारणों से जानने की बिल्कुल ही आवश्यकता नहीं है, कानाफूसी करना है (नीतिवचन 11:13; 20:19)। यह ईर्ष्या, नफ़रत, द्वेष के कारण दूसरे की प्रतिष्ठा का हिंसक तरीके से बलात्कार करना या इससे भी बदतर पाप है। परमेश्वर के सामने यह आपका कर्तव्य है कि आप किसी के भी राज़ को राज़ ही रखें कि मानों वे आपके अपने हों।

दुसरे व्यक्ति के बारे में राज़ फैलाने की घिनौनी और धूर्त इच्छा कहाँ से जन्म लेती है? यह घमंड से जन्म लेती है, जो शैतान का पाप है, दूसरे की कीमत पर खुद को बड़ा करना। यदि आप दुसरे व्यक्ति को बहुत बुरा दिखाना चाहते हैं, तो आप अपने जैसे मूर्खों या कानाफूसी करनेवालों को बड़े सद्गुणी दिखाई दे सकते हैं। यह इच्छा नफरत से भी जन्म लेती है, जो कि धरती पर सबसे प्रथम परिवार में शैतान का किया काम है, जब उसने कैन को अपने भाई हाबिल को मारने के लिए प्रेरित किया, सिर्फ इसलिए कि हाबिल एक धर्मी इंसान था।

किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में राज़ बताना उसके मन और आत्मा को गहरा घाव देता है, जिसके लिए इस नीतिवचन में शब्द ‘भीतर’ प्रयुक्त हुआ है (नीतिवचन 20:27)। वास्तव में दो व्यक्ति घायल होते हैं – एक वह जिसके विषय में कानाफूसी करके उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, और दूसरा वह जो कानाफूसी सुनने के बाद जिसकी बुराई कीं गई है उसके विषय में अपनी राय को पापपूर्ण रूप से बदल देता है (नीतिवचन 16:28; 26:20)। परमेश्वर इन मौखिक हत्यारों को कड़ी सजा देगा (नीतिवचन 26:20-26; भजन 55:21-23)। चूँकि ऐसे मनुष्यों में मसीहियों को नहीं गिना जाना चाहिए (भजन 15:3), फिर भी यह स्पष्ट है कि कानाफूसी करनेवाले सीधे नरक में जा रहे हैं (प्रकाशितवाक्य 21:8,27)।

कानाफूसी करनेवाले का घाव ठीक होना मुश्किल होता है, इसलिए यह दूसरे तरीके से हत्या करने जैसा ही है। एक बार जब आप दूसरों के विषय में गुप्त बातें फैलाते हैं, तो जिस व्यक्ति को आपने चोट पहुंचाई है, आपके माफी मांग लेने से आपके शब्दों को वापस नहीं लिया जा सकता, या जो क्षति उसे हुई है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। यदि आप उस व्यक्ति से माफी मांगते हैं जिसके सामने आपने कानाफूसी कीं थी, और वह आपको माफ कर भी देता है, तब भी उनके दिमाग में ऐसी जानकारी अब भी होती है जो नहीं होनी चाहिए थीं। आपने एक प्रतिष्ठा की हत्या कर दी है।

पाठक, आपके दो कर्तव्य हैं। सबसे पहला, आपको कानाफूसी करने से खुद ही बचना होगा और ऐसी आदत को ठुकराना होगा। कैसे? मसीही प्रेम और भलाई के द्वारा दूसरों की प्रतिष्ठा का सम्मान करें और पवित्र उत्साह के साथ उनकी रक्षा करें। ध्यान से दूसरों के बारे में केवल अच्छी बातें ही कहें, खासकर जब वे मौजूद न हों। परमेश्वर दूसरों की रक्षा करने और उनकी उन्नति करने के आपके प्रयासों को देखेगा, और वह आपको आशीष देगा।

दूसरा, यदि आपके कोई मित्र या आपकी कलीसिया के कोई सदस्य कानाफूसी करते हैं, तो उनके साथ कोई मेलजोल न रखें, क्योंकि वे मनुष्यों की आत्माओं के लिए ज़हर हैं और कलीसिया की एकता के लिए विनाशकारी हैं (नीतिवचन 25:23; भजन 101: 4-5)। परमेश्वर इन दुष्ट आत्माओं से घृणा करता है जो एकता के बजाए कलह बोते हैं, और आपको भी उनसे घृणा करनी चाहिए (नीतिवचन 6:16-19; भजन 139:21-22)। उनके पाप पर अपना क्रोध जताए और उन्हें दूर भगा दे।

कानाफूसी करनेवाला बनने के बजाय प्रशंसा करनेवाला बनें! किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के लिए बुरी बातें फैलाने के बजाय, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए प्रशंसा फैलाएँ। पीठ पीछे बुराई करनेवाला बनने के बजाय, पीठ पीछे प्रशंसा करनेवाला बने! जब दूसरे आसपास न हों, तो उस व्यक्ति के बारे में ढेर सारी अच्छी बातें बताएं। यदि वे जो आपको जानते हैं आपकी अनुपस्थिति में आपके बारे में केवल अच्छी बातें कहते हैं, तो कल्पना करें कि इसके कितने अच्छे नतीजें होंगे। आप इस आशीष को पाने की शुरुआत कैसे कर सकते हैं? आज किसी को किसी के बारे में कुछ अच्छा बताएं।

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