नीतिवचन 26:20
जैसे लकड़ी न होने से आग बुझती है, उसी प्रकार जहाँ कानाफूसी करनेवाला नहीं, वहाँ झगड़ा मिट जाता है।
अगर दुष्ट लोग किसी के बारे में झूठी बातें, अफवाहें और नकारात्मक जानकारी इधर-उधर फैलाना बंद कर दें, तो विवाद, झगड़े और आपसी मनमुटाव तुरंत ख़त्म हो सकते हैं। जैसे आग को फैलाने के लिए आगे कोई और चीज न हो, तो आग तुरन्त बुझ जाती है, ठीक वैसे ही जब कोई भड़काऊ बातें बोलनेवाला न हो, तो आपसी झगड़े ख़त्म हो जाते हैं। अच्छे लोगों के दो महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं – दूसरों के बारे में कभी की भड़काऊ बातें या बयान न सुनना, और जो ऐसी भड़काऊ बातें या बयान देते हैं उनका सख्ती से विरोध करना और उन्हें आगे से ऐसा न करने से रोकना।
झूठ और भड़काऊ बातें बोलना एक ऐसा पाप है जिसे हमारे देश के लोग भूल गएँ हैं। आज इस अधर्म को न तो समझा जा रहा है और न ही इसकी भर्त्सना या निंदा की जा रही है। किसी व्यक्ति विशेष, या धर्म-विशेष, या किसी जाति-विशेष के बारें में झूठ और भड़काऊ बातें बोलना किसी भी देश या समाज के लिए घातक है। भड़काऊ बातें बोलनेवाला वह होता है जो लोगों की स्वाभाविक नफ़रती और दुर्भावनापूर्ण प्रवृत्ति को उकसाने के लिए किसी व्यक्ति-विशेष या धर्म-विशेष के लोगो के विषय में आधिकारिक तौर पर झूठी बातें फैलाता है (नीतिवचन 20:19)। इसे आम तौर पर कानाफूसी कहा जाता है। बाइबल के पर्यायवाची शब्द चुगली करना और बुराई करना है, और ये ऐसी हरकतें हैं जिनकी बाइबल में बार बार भर्त्सना की गई है (नीतिवचन 16:28; 25:23; रोमियों 1:29-30; 2 कुरिन्थ 12:20; 1 तीमु 5:13)।
भड़काऊ बातें किसी को चोट पहुँचाने या उन बातों को सुनने वाले को भड़काने के लिए किसी के बारे में नकारात्मक जानकारी बताना है। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि जानकारी सत्य है, या असत्य। बदनामी करने का अर्थ है किसी अन्य व्यक्ति के बारे में गलत जानकारी फैलाना। चुगली करना, गाली-गलौज करना और कानाफूसी करना किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में वह जानकारी फैलाना है जिससे उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।
भड़काऊ बातें बोलनेवाला व्यक्ति, जो अपने दुश्मनों की निज़ी बातों को ज़िन्दा रखता है और उनके बारे में खबरें फैलाता रहता है, उस सामजिक संघर्ष को जीवित रखता है, जो अन्यथा ख़त्म हो जाता। इन दुष्ट व्यक्तियों को शांति से कोई प्रेम नहीं है; उन्हें अपने अधर्मी राजनितिक उद्देश्यों को हासिल करने केवल सामजिक उथल-पुथल और अशान्ति खड़ी करना अच्छा लगता है (नीतिवचन 15:18; 16:27-28; 26:21; 29:22)। अच्छे लोग दूसरों के पापों को ढँक देते हैं और उन्हें दफना देते हैं (नीतिवचन 10:12; 17:9; 1 पतरस 4:8)। वे हर समय शांति स्थापित करना चाहते हैं (याकूब 3:17-18)।
परमेश्वर झूठ बोलनेवालों से घृणा करता है (नीतिवचन 6:12-19; भजन 15:3), जो मौखिक रूप से दूसरे के चरित्र और प्रतिष्ठा का बलात्कार करना है। बिना किसी कारण के अपने भाई पर क्रोधित होने से अगर तुलना की जाए, तो झूठ बोलना या भड़काऊ बातें बोलना छठी आज्ञा का उल्लंघन है, जो कहती “तू हत्या न करना (मत्ती 5:21-26)। भड़काऊ बातों से मनुष्य की आत्मा और रिश्तों में गहरी खाई उत्पन्न होती है (नीतिवचन 16:28; 17:9; 18:8; 26:22)।
जब आप दूसरों के बारे में बातें कहते हैं तो आपका लक्ष्य श्रोताओं के बीच उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा करना और उनकी अच्छाई का गुणगान होना चाहिए, न कि उनकी कमज़ोरियों का, जो कि आप में भी हैं। इस बात पर विचार करें कि जब आप अनुपस्थित हों तो आप चाहते हैं कि दूसरे आपके बारे में कैसी बातें करें। प्रेम अपराधों को ढांक देता है (नीतिवचन 10:12)। क्या होगा अगर हर कोई एक-दूसरे की पीठ पीछे उनकी सिर्फ़ तारीफ करे? यह दुनिया क्या ही सुहावनी बन जाएगी! आज ही इसकी शुरुआत आप ही से क्यों न करें?
क्या आपको इस पाप से घृणा है? क्या आप अपने होठों पर पहरा रखते हैं कि जोश में आकर या हल्की-फुल्की बातचीत के दौरान किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में कोई भड़काऊ बात बाहर न निकल जाए? क्या आप दूसरों से इतना प्यार करते हैं कि उनके बारे में कुछ भी ऐसा कहने से बचते हैं जो अपमानजनक या हानिकारक हो? यदि आप बहुत ज्यादा बातें करनेवालें इन्सान हैं, तो संभवतः आप अक्सर यह पाप करते हैं। अपने शब्द आधे कर दें। केवल अच्छी बातें ही कहने का गंभीर फैसला लें, ऐसी बातें जो दूसरों के बारे में दया से भरी हो और जो सुननेवाले की उन्नति करें, और जिससे सामाजिक एकता की अखंडता स्थापित हो (कुलुस्सियों 4:6; इफिस्सियों 4:29)।
क्या आप उन लोगों से घृणा करते हैं जो भड़काऊ बातें बोलने का पाप करते हैं? जब ऐसे लोग आपकी उपस्थिति में भड़काऊ बातें फैलाना शुरू करें तो आप उन्हें अपने सच्चे क्रोध को देखने और महसूस करने दें (नीतिवचन 25:23)। यदि आपके पास उन पर क़ानूनी कार्यवाही करने का अधिकार है, तो ऐसे विवादास्पद और नफरती लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दें (नीतिवचन 22:10)। उन्हें समाज से बाहर कर देने से लोगों में आपसी कलह, संघर्ष और पनपती नफ़रत ख़त्म हो जाएगी। ऐसा करना किसी भी परिवार, समाज और देश के किए क्या ही धन्य बात है! बाइबल में वर्णित दाऊद नाम का मनुष्य ऐसे लोगों को अपने आस-पास भी भटकने नहीं देता था (भजन 101:4-5)। आपकी समस्त वाणी में मधुरता हो (कुलुस्सियों 4:6)।
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