नीतिवचन 26:17

जो मार्ग पर चलते हुए पराये झगड़े में विघ्न डालता है, वह उसके समान है, जो कुत्ते को कानों से पकड़ता है।

एक मित्रवत कुत्ता भी आपको काटेगा, अगर आप उसके कान पकड़कर खींचेंगे। और यहाँ दूसरों के झगड़े में पड़नेवाला एक डेढ़ शाना है, जो रास्ते पर चलते चलते दूसरों के झगड़े में पड़ने के लिए रुकता है, जिसे झगड़ा करनेवाले दोनों ही पक्ष पिट देंगे। उपदेशक सुलैमान ने हमें दूसरों के झगड़ों में पड़ने से बचने की बुद्धि सिखाई।

दो पक्षों में मेल-मिलाप करानेवाले धन्य कहलाए जाते हैं (मत्ती 5:9)। परन्तु मेल-मिलाप कराने का यह सबसे बड़ा काम आपके अपने झगड़े के विषय में है, न कि दूसरों के झगड़े में पड़ने के विषय में। यदि आप ने किसी को ठेस पहुंचाई है, तो उसके साथ मेल मिलाप करो (मत्ती 5:23-26)। यदि किसी और ने आपका अपमान किया है, तो आपको उसके साथ मेल मिलाप करना है (मत्ती 18:15-22)।

आपको दूसरों के झगड़ों में बहुत सावधानी से, और बुद्धिमानी से विचार करने के बाद ही, शामिल होना चाहिए और उनके मध्य मेल-मिलाप कराने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि आपका अपना झगड़ा भी जिससे आप भली भांति वाकिब हैं, सावधानी से सुलझाया जाना आवश्यक होता है, तो फिर जिन्हें आप जानते भी नहीं हैं, उनके बीच पड़ने की तो बात ही छोड़ दो (नीतिवचन 25:8)। बुद्धिमानी से विचार करने के बाद ही, सुनिश्चित करें कि आपके शब्द लाभदायक हैं और उचित समय पर बोले जा रहे हैं (नीतिवचन 15:23; 16:20)।

आत्मिक और बुद्धिमान मनुष्यों को चाहिए कि वे दूसरों के वादविवादों और समस्याओं में उनकी सहायता करने का प्रयास करें (रोमियों 15:1-3; गला 6:1-3), जिसमें लड़ाई और झगड़े शामिल हैं। ऐसी बातों में आप अपने भाइयों के रखवाले हैं (लैव 19:17; 1 थिस्स 5:14)। और जो अधिकार के पद पर हैं, जैसे माता-पिता और पास्टर के रूप में, तो समस्याओं की जड़ तक जाना और मेल-मिलाप स्थापित करना उनका सम्मानजनक अधिकार और दायित्व है (नीतिवचन 25:2)।

लेकिन कुछ लोग दूसरों के झगड़े में पड़नेवाले डेढ़ शाने होते हैं। उन्हें अन्य लोगों के मामलों में बीच में पड़ना बड़ा अच्छा लगता है (1 पतरस 4:15; 1 तिमु 5:13)। यह एक पाप है, और बुद्धिमान पुरुषों को इससे बचना चाहिए। पतरस की कड़ी चेतावनी इस पाप को हत्या, चोरी और बुरे कामों से जोड़ती है। आप अपने काम पर ध्यान दो। यदि आप अपने कर्तव्यों को ठीक वैसे ही पूरा कर रहे हैं जैसे कि आपको करना चाहिए, तो आपके पास दूसरों की बातों में अपनी नाक घुसाड़ने के लिए समय नहीं होगा।

दखलंदाजी करने वालों को दूसरों के बीच चल रहे विवाद या संघर्ष में पड़ना अच्छा लगता है। वे दूसरों के निजी विवादों की अंदरूनी जानकारी के लिए तरसते हैं। इससे उनमें अपने लिए मूल्य की विकृत भावना महसूस होती है। इससे उन्हें दूसरों की समस्याओं में शामिल होने के लिए अपना व्यक्तित्व महत्वपूर्ण महसूस होता है, हालाँकि वे आमतौर पर अपनी समस्याओं को हल करने में भयानक रीति से विफल होते हैं। हर इंसान की अपनी पर्याप्त समस्याएं होती हैं।

थिस्सलुनीके के कुछ लोग इस पाप के इतने आदी थे कि उन्होंने तो काम करना भी बंद कर दिया। पौलुस ने लिखा, “हम सुनते हैं कि कुछ लोग तुम्हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं, और कुछ काम नहीं करते पर दूसरों के काम में हाथ डाला करते हैं। ऐसों को हम प्रभु यीशु मसीह में आज्ञा देते और समझाते हैं कि चुपचाप काम करके अपनी ही रोटी खाया करें” (2 थिस्स 3:11-12)। उसने पहली पत्री में लिखा था, “और जैसी हम ने तुम्हें आज्ञा दी है, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना–अपना काम–काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो” (1 थिस्स 4:11)।

महिलाएं अक्सर उन झगड़ों में दखलंदाजी देने, या बीच में पड़ने की परीक्षा में पड़ती है, जिनका उनसे कोई लेनादेना नहीं होता है। इसलिए पौलुस ने जवान विधवाओं को विवाह करने और बच्चों को जन्म देने की सलाह दी, ताकि उन्हें बेकारीपन और ऐसी मूर्खता के प्रलोभन से बचाया जा सके (1 तीमु 5:12-15)। एक व्यस्त महिला जो अपने कर्तव्यों को पूरा करने के विषय में सचेत है, उसके पास ऐसी खतरनाक चीजों के लिए अपना समय बर्बाद करने में कोई दिलचस्पी नहीं होगी। बेकारापन किसी भी व्यक्ति के लिए एक अभिशाप है, जैसा कि प्राचीन समय के सदोम में था (यहेजकेल 16:49)। एक सच्ची कहावत है कि “खाली दिमाग शैतान का घर होता है।” व्यस्त रहें, और किसी के बीच में न पड़ें।

यीशु ने सिखाया कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी चिंता है जो प्रत्येक दिन उसके अपने जीवन के लिए खतरा है ताकि उसे पूरी तरह से व्यस्त रख सके (मत्ती 6:34)। किसी दूसरे व्यक्ति की आँख में धूल के तिनके के बारे में चिंता करना और उसे दोष लगाना, जबकि आपको अपनी आँख से लट्ठा निकालने में पूरी तरह से व्यस्त होना चाहिए ऐसी मानसिकता को उसने पाखण्ड कहा (मत्ती 7:3-5)। सुलैमान और वह जो सुलैमान से कहीं बड़ा है, अर्थात् यीशु, दोनों ने ही तुम्हें चेतावनी दी है। दूसरों के झगड़ों से दूर रहें। किसी भी कुत्ते के कानों को मत पकड़ो!

प्रभु यीशु मसीह ने भी इस मामले में एक उत्तम आदर्श हमारे सामने रखा। “फिर भीड़ में से एक ने उससे कहा, “हे गुरु, मेरे भाई से कह कि पिता की सम्पत्ति मेरे साथ बाँट ले।” उसने उससे कहा, “हे मनुष्य, किसने मुझे तुम्हारा न्यायी या बाँटनेवाला नियुक्त किया है?” (लूका 12:13-14)? प्रिय पाठक, आज ही से आप यीशु के इस पवित्र आदर्श का अनुसरण कर सकते हैं। दूसरों के झगड़े में पड़नेवाले एक डेढ़ शाना व्यक्ति के रूप में कष्ट उठाने और एक मसीही के रूप में कष्ट उठाने के बीच मौजूद अंतर बहुत बड़ा है (1 पतरस 4:14-16)।

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