नीतिवचन 26:16
आलसी अपने को ठीक उत्तर देनेवाले सात मनुष्यों से भी अधिक बुद्धिमान समझता है।
आलसी लोगों के पास हमेशा कोई न कोई बहाने होते हैं। वे कभी कबूल नहीं करते कि वे आलसी हैं। उनका अहंकार इतना है कि अगर आप उन्हें सुधारने और सिखाने का प्रयास करें तो वे आपकी नहीं सुनेंगे, जो एक भयानक अभिशाप है (नीतिवचन 26:12)। वे अपनी बेरोजगारी और अपने मित्रों से पीछे रहने की वजह के लिए उटपटांग बहाने बनाते हैं जिन्हें सुनकर भी घिन आती है। अगर सात समझदार और सफल लोग उनसे कहें कि उनके पिछड़ेपन और दरिद्रता का कारण उनका आलसीपन है, तो वे नफ़रती अंदाज़ में इसे मानने से इनकार करते हैं।
आलसी व्यक्ति अपने स्वभाव और आदतन ही हर काम में धीमा और कामचोर व्यक्ति होता है। उसे मेहनत या परिश्रम करना पसंद नहीं है; उसे देर तक सोते रहना और आराम करते रहना अच्छा लगता है। वह अपने कर्तव्यों के प्रति सुस्त होता है। वह धीरे-धीरे चलता है, बात करना पसंद करता है, और अपने काम में बहुत ही धीमा होता है। उसे पसीना बहाना पसंद नहीं है; वह फटाफट काम करने से डरता है; और काम पर अपना मन केन्द्रित करना उसके लिए ऐसी चीज़ है जिसे उसने कभी आज़माया नहीं है। उसे बस बातें करना, बहाने बनाना, आवारगी करना और सोना अच्छा लगता है।
आलसी लोग इतने अहंकारी हो सकते हैं कि आपको आश्चर्य होगा। वे अपनी गलती कभी नहीं मानते। जब उनकी तुलना मेहनती और सफल लोगों से की जाती है तो वे अपने निम्न दर्जे के काम की आदतों को सही ठहराने के लिए बहाने बनाते हैं। वे तिरस्कारपूर्वक सोचते हैं कि वे इन समृद्ध व्यक्तियों से श्रेष्ठ हैं; वे बाकी सफ़ल लोगों के समान क्यों सफ़ल नहीं हुएं इसके लिए वे ताकतों को दोषी ठहराते हैं जो उनके बस में नहीं होती। वे मूर्ख हैं (नीतिवचन 12:15)।
आलसियों को आसानी से पहचाना जा सकता है। एक बच्चा भी अपनी हरकतों से पहचाना जाता है (नीतिवचन 20:11)। जो नौजवान परिश्रमी होते हैं वे आलसी बूढ़े नहीं बनते, और जो नौजवान आलसी होते हैं वे जोश से भरें मेहनती बूढ़े लोगों समान नहीं बनते। जवानी की आदतें बुढ़ापे की आदतें बन जाती हैं। आलसी का घटिया चरित्र और परवरिश उसे जीवन भर गरीबी और परेशानी में डालकर दण्ड देगा (नीतिवचन 6:6-11; 10:4; 13:4; 19:15; 20:13)। माता-पिता के लिए अवश्य है कि वे अपने बच्चों से समय रहते इस अवगुण को दूर करें और उन्हें अच्छी कार्य-नीतियाँ और आदतें सिखाएं।
निम्न स्तर की सरकारी स्कूली शिक्षा वाले आलसी लोग अपनी शिक्षा की कमी को दोषी ठहराएंगे, जबकि कई अमीर लोग कम पढ़े-लिखें होते हैं। कुछ आलसी लोग तो अपने निचली जाति का होने को दोष देंगे, जबकि उनके ही शहर में उनकी ही जाति के कई अमीर लोग हैं। गाँव के ग़रीब वर्ग के आलसी लोग उनके पालन-पोषण को दोषी ठहराएँगे, जबकि उनके ही गाँव के कई लोग कड़ी मेहनत से शहरों में बस गए हैं।
भेदभाव तो आलसियों के लिए सिर्फ़ एक बहाना है। किसी भी शैक्षिक या नस्लीय पृष्ठभूमि का, या निम्न परिवार का व्यक्ति, यदि काम में मेहनती है तो उसे सफलता मिलेगी ही। यदि कोई व्यक्ति अपने सौपें गएँ काम में समय का पाबंद, समर्पित और ऊर्जावान कर्मचारी हो, तो नियोक्ता उसकी जाति-समूहों या स्कूली शिक्षा की परवाह नहीं करते हैं। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आलसी लोग हमेशा अपनी गरीबी के लिए किसी साजिश या सामजिक भेदभाव को जिम्मेदार ठहराते हैं।
आलसी का इलाज क्या है? उसे भूखा मरने दो (नीतिवचन 20:4; 2 थिस्स 3:10)! अगर आप आलसी को खिलाते-पिलाते हैं तो उसे आलसी बने रहने में और भी बढ़ावा मिलता है। आलसी लोग दान के पात्र नहीं हैं। आज का समाज आलसी व्यक्तियों के लिए कल्याणकारी सुरक्षा योजनाओं का जाल प्रदान करके उनके आलस्य को कायम रखता है। आलसियों के लिए भूख से बेहतर कोई शिक्षक नहीं है, क्योंकि मनुष्य का पेट उसे काम पर जाने के लिए मजबूर करेगा (नीतिवचन 16:26; सभोपदेशक 6:7)।
नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।