नीतिवचन 26:1

जैसा धूपकाल में हिम का, और कटनी के समय जल का पड़ना, वैसा ही मूर्ख की महिमा भी ठीक नहीं होती।

मूर्खों को तुच्छ समझा जाना चाहिए। वे कोई सम्मान या आदर पाने के लायक नहीं होते हैं। यदि मूर्खों को अनदेखा किया जाए और उनसे वैसा ही व्यवहार किया जाए जैसा कि उनके साथ किया जाना चाहिए, तो वे अपनी मूर्खता और हठधर्मिता से बाहर निकलने के लिए बुद्धि रूपी स्त्री की कृपापूर्ण आव्हानात्मक वरदान पर शायद कुछ विचार करें (नीतिवचन 1:22; 8:5; 9:4-5)। क्या आप मूर्ख हैं, जो बिलकुल भी किसी इज्ज़त के लायक नहीं है? या क्या आप मूर्खों की महिमा करने के लिए ललचाते हैं, जिन्हें असल में शर्मिंदा किएँ जाने की ज़रूरत है?

यहाँ एक उपमा दी गई है जो मूर्खों की महिमा करने की तुलना अप्राकृतिक मौसम और खेती की आपदा से करती है। गर्मियों में बर्फ़बारी का होना उचित नहीं होता है; यह प्रकृति के ख़िलाफ़ है। गलत समय पर बारिश अच्छी फसल को बर्बाद कर सकती है, क्योंकि किसान पकी हुई फ़सल को कोठरियों में रखने में लग जाते हैं। ऐसे में बर्फ़ का गिरना या बारिश का होना कोई अच्छी, उपयुक्त या वांछनीय घटना नहीं है; ऐसी बेमौसम घटनाएँ किसानों के लिए परेशानी, उथल-पुथल और नुकसान का कारण बनती हैं।

जिस प्रकार ऐसी बेमौसम घटनाएँ ठीक नहीं, ठीक वैसे ही मूर्ख की महिमा करना ठीक नहीं है। “ठीक नहीं” का क्या अर्थ है? बाइबल में “अनुरूप”, “उचित” और “ठीक” जैसे शब्द समानार्थक शब्दों के रूप में प्रयुक्त किएँ गएँ हैं, और ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी कहती है: “ठीक। व्यक्ति या अवसर के लिए उचित; अनुरूप।” इस प्रकार आप आसानी से समझ सकते हैं कि मूर्ख को सम्मानित करना अनुरूप, उचित, या ठीक नहीं है।

अगर आप बुद्धि से प्रेम रखते है, और आप देख पाते हैं कि बुद्धि इस दुनिया को बेहतर जगह बना सकती है, तो आपको समझना चाहिए कि किसी भी मूर्ख को सम्मानित करना कितना गलत है। इस नीतिवचन में मूर्ख को सम्मानित करने का मज़ाक उड़ाया गया है, जो गर्मियों में बर्फ़ या फ़सल की कटनी के मौसम में बारिश की तरह पागलपन है। लेकिन सुलैमान ने इसकी तुलना पत्थरों के ढेर में मणियों की थैली से भी की है, जो बहुत ही प्रतिकूल है (नीतिवचन 26:8)। इस पर विचार करें।

लोग कई कारणों से मूर्खों की महिमा करते हैं। वे मूर्ख से होनेवाले खतरे को नहीं समझते; वे मूर्ख को पहचानते नहीं हैं; वे देखते हैं कि समाज मूर्खों को स्वीकार करता है और उनकी महिमा करता है; मूर्ख उनका मित्र है; मूर्ख उनके परिवार का सदस्य भी है; वे मानते हैं कि तरस हमेशा सही होता है, मूर्खों के लिए भी; वे सोचते हैं कि वे दया और सम्मान से मूर्ख की मदद कर सकते हैं; और इस प्रकार वे खुद मूर्ख हैं।

मूर्ख क्या है? मूर्ख अपने मुँह के वचन या कर्म से परमेश्वर के अस्तित्व को नकारता है (भजन 14:1); मूर्ख शिक्षा को तुच्छ जानता है (नीतिवचन 23:9), सोचता है कि दुष्टता खेल है (नीतिवचन 10:23), मानता है कि उसकी चाल सही है (नीतिवचन 12:15), अपने क्रोध पर काबू नहीं रख सकता (नीतिवचन 12:16), डांट से घृणा करता है (नीतिवचन 15:10), झगड़ा करना पसंद करता है (नीतिवचन 19:13), बहुत अधिक बोलता है (नीतिवचन 15:2), हमेशा असंतुष्ट रहता है (नीतिवचन 17:24), लोगों की निंदा करता है (नीतिवचन 10:18), दुर्भावना रखता है (नीतिवचन 17:12), जिद्दी होता है (नीतिवचन 17:10), सफल नहीं होता (सभोपदेशक 10:15), दुष्टतापूर्ण शरारत का आनंद लेता है (नीतिवचन 10:23), उसे हस्तक्षेप करना अच्छा लगता है (नीतिवचन 20:3), मूर्खता की ओर वापस लौट जाता है (नीतिवचन 26:11), अपने मन पर भरोसा करता है (नीतिवचन 28:26), या आसानी से धोखा खा जाता है (नीतिवचन 14:15)। मूर्ख की यही परिभाषा है।

क्या आप किसी मूर्ख को जानते हैं? बेशक, आप जानते हैं। आपके परिवार में, आपके दोस्तों के बीच, आपके ऑफिस में, साथी छात्रों के बीच, आपकी पलटन में, या आपके चर्च में कुछ लोग हो सकते हैं। ज़रूरी है कि सुलैमान ने आपके सामने जो सबक रखा है आप उसपर अमल करें। आप मूर्खों से कैसे निपटेंगे? उन्हें सम्मान देकर और उनपर तरस खाकर? या फटकार और दंड के साथ? वास्तव में आप परमेश्वर की बुद्धि पर कितना भरोसा करते हैं?

परमेश्वर मूर्खों की निंदा करता है (भजन 5:5), और आपको भी उनकी निंदा ही करनी चाहिए। मूर्खों से उचित व्यवहार उनसे दूर रहकर (नीतिवचन 9:6; 13:20; 14:7), उनसे बात न करके (नीतिवचन 23:9; 26:4), उन्हें डांटकर (नीतिवचन 26:5), और उन्हें पीटकर (नीतिवचन 26:3) किया जा सकता है। अनुशासन की छड़ी के द्वारा ही उनका भला हो सकता है (नीतिवचन 10:13; 17:10; 18:6; 19:29; 20:30)। शारीरिक दंड शायद पुरानी प्रथा हो, लेकिन यह समझदारीपूर्ण प्रथा है। यह शर्म की बात है कि आज शिक्षकों, नियोक्ताओं, सेना के अधिकारीयों और समाज के ज़िम्मेदार लोगों ने अनुशासन की छड़ी का उपयोग करना छोड़ दिया है।

आपके नाम से जाने जानेवाले मूर्खों के बारे में क्या? अगर आपके बच्चे हैं, तो आप देखेंगे कि उनमें मूर्खता की प्रवृत्ति कम उम्र में ही दिखाई देगी। लड़के के मन में मूढ़ता की गाँठ बन्धी रहती है, परन्तु अनुशासन की छड़ी के द्वारा वह खोलकर उस से दूर की जाती है (नीतिवचन 22:15)। मूर्ख लड़के की महिमा करने के बजाय, उसे डांट और छड़ी से ज्ञान सिखाओ (नीतिवचन 29:15)। यह स्वर्ग से उतर आया ईश्वर-प्रेरित ज्ञान है जिसकी पुष्टि राजा सुलैमान ने की है।

अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका बच्चा मूर्खता के परिणामों के कारण कम उम्र में ही मर सकता है (नीतिवचन 23:13-14)। और अगर ज़िन्दा रहता भी है, तो आप और आपकी पत्नी उसके सार्वजनिक आचरण से शर्मिंदा होंगे (नीतिवचन 29:15,17), और आप दोनों को अपने मन में एक मूर्ख बच्चे का निरंतर दर्द लेकर जीना होगा (नीतिवचन 17:21,25; 10:1; 15:20; 19:13)। आपके परिवार का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने घर के मूर्खों से कैसे निपटते हैं।

मूर्खों की महिमा करने से उनकी मूर्खता बढ़ती जाती है (नीतिवचन 30:22), और यह दूसरों को मूर्ख बने रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा (नीतिवचन 19:25)। मूर्ख अपनी मूर्खता से घृणा कर सकते हैं, यदि हर कोई उन्हें अस्वीकार करे और डांटे। सबक सरल है, और यदि हर कोई अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करें, तो मूर्खों की संख्या कम हो जाएगी और मूर्खता भी कम हो जाएगी।

सरकारें मूर्खों की महिमा करके इस नीतिवचन का उल्लंघन करती हैं, और ऐसा देश खतरे में होता है (सभोपदेशक 10:5-7)। देश की बागडौर सम्भालनेवाले ज़िम्मेदार पदों के लिए अज्ञानी और अशिक्षित गोबरखाऊ उम्मीदवार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में मूर्खों या मूर्खता की महिमा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आचरण-नियम या कानून इसके उदाहरण हैं।

यीशु ने कभी मूर्खों की महिमा नहीं कीं, और उन्होंने इसके लिए अपनी जान दे दी, क्योंकि फरीसी और अन्य धार्मिक मूर्ख उनके जीवन, उत्तरों और निंदा को बर्दाश्त नहीं कर पाएँ (मरकुस 3:1-6; मत्ती 23:1-39)। आम लोगों ने शास्त्रियों के मूर्खतापूर्ण उपदेशों पर उनकी श्रेष्ठता को आसानी से देखा (मत्ती 7:28-29)।

वे मूर्ख धार्मिक अगुओं को कितना सम्मान देते, भले ही उनके अपने प्रेरितों ने भी कुछ सम्मान की मांग की हो? उन्होंने कहा, “हर पौधा जो मेरे स्वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। उन को जाने दो; वे अंधे मार्गदर्शक हैं और अंधा यदि अंधे को मार्ग दिखाए, तो दोनों ही गड़हे में गिर पड़ेंगे” (मत्ती 15:13-14)। दाऊद का यह सर्वश्रेष्ठ पुत्र बड़ा बुद्धिमान था!

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