नीतिवचन 23:30

उनकी जो दाखमधु देर तक पीते हैं, और जो मसाला मिला हुआ दाखमधु ढूँढ़ने को जाते हैं।

शराब पीना, जिससे इन्सान नशे में मस्त हो जाता है, पाप है। परन्तु दाखमधु या मसाला मिला हुआ दाखमधु पीना पाप नहीं है। वास्तव में, बुद्धि रूपी स्त्री उसके पास ज्ञान सीखने वाले मेहमानों को मसाला मिला हुआ दाखमधु परोसती है (नीतिवचन 9:1-5)। इस नीतिवचन के संदर्भ में दाखमधु देर तक पीते रहना, या अत्यधिक दाखमधु पीना पाप है। सुलैमान ने अपने बेटे को नशे के खिलाफ सचेत किया (नीतिवचन 23:29-35), जिसे उसने अभी-अभी इसके कई शारीरिक लक्षणों से परिभाषित किया (नीतिवचन 23:29)। इस नीतिवचन के संदर्भ में जिन समस्याओं का वर्णन किया गया है, वे दाखमधु पीने से नहीं उभरती हैं; बल्कि दाखमधु का दुरुपयोग उन्हें पैदा करता है।

दाखमधु परमेश्वर ने बनाया, और इसलिए बनाया कि इसके सेवन से मनुष्य का मन प्रसन्न हो (भजन 104:14-15)। दाखमधु में मन को प्रसन्न करने की क्षमता है इस पर अगर आपको संदेह है, तो बाइबल पढ़ें (न्यायियों 9:13; जकर्याह 10:7; सभोपदेशक 10:19)। स्वर्ग के पवित्र परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से इसका समर्थन किया (नीतिवचन 31:6-7; व्यवस्थाविवरण 14:26; लूका 7:33-34; यूहन्ना 2:1-11)। लेकिन मनुष्य, परमेश्वर की रचना और प्रकाशन के अपने निरंतर दुरुपयोग में, आम तौर पर दो में से एक गलती करता है। वह या तो दाखमधु पीना पाप मानता है, या वह नशे में धुत होकर पीता है।

बाइबल पर विश्वास रखनेवाले ख्रिश्चन लोग सीधे मार्ग से चलते हैं। वे मार्ग की दोनों तरफ की खाइयों से बचते हैं (भजन 119:128)। परमेश्वर के नाम पर दाखमधु पीने की निंदा करना एक मूर्खतापूर्ण और विधर्मी खाई है, क्योंकि खुद परमेश्वर ने दाखमधु पीने को आशीष कहा और उसका समर्थन किया। नशे में धुत होने तक पीना या किसी और को ऐसा पाप करने देना या उसकी मदद करना एक मूर्खतापूर्ण और दुष्ट बात है।

नशे में धुत होना पाप है। दाखमधु को अत्यधिक मात्रा में पीना, जो नशे में धुत होने का एकमात्र तरीका है, पाप है (इफिसियों 5:18)। नए जन्म से पहले कुछ लोग शराबी हुआ करते थे, लेकिन विश्वास में आने के बाद अब ऐसा नहीं करते (1 पतरस 4:3-4)। पियक्कड़ मतवाले लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे (गलातियों 5:19-21; 1 कुरिन्थियों 6:10)। और जो मसीही भाई सार्वजनिक रूप से शराब पीते हैं, उन्हें बहिष्कृत किया जाना चाहिए (1 कुरिन्थियों 5:11)।

युवा पुरुष, चूँकि उनके मनों में मूर्खता की गाँठ बंधी हुई होती है, अत्यधिक दाखमधु पीने की ओर प्रवृत्त होते हैं (नीतिवचन 22:15; सभोपदेशक 11:10)। अगर आप शहर के कॉलेज या कॉलेज के हॉस्टल के आसपास नज़र डालते हुए भ्रमण करेंगे, तो आप बड़ी संख्या में युवाओं को शराब और बियर पीते हुए देख सकते हैं। युवाओं के सिर पर जीतने का भुत सवार होने के कारण और एक-दूसरे को उकसाने के कारण, वे खुद को मूर्खता और पाप में डुबो देते हैं।

इस नीतिवचन का संदर्भ स्पष्ट रूप से पियक्कड़पण को लेकर है (नीतिवचन 23:29,33-35), जो दाखमधु लंबे समय तक पीते रहने, या बहुत अधिक पीने का नतीजा होता है (यशायाह 5:11)। दूसरे खंड को पहले खंड के प्रकाश में समझा जाना चाहिए, क्योंकि दूसरे खण्ड में व्यक्ति बुद्धिसंगत समझ के बिना मसाला मिला हुआ दाखमधु ढूँढ़ने जा रहा है (नीतिवचन 9:2)। अय्यूब 31:1 देखें, जहाँ किसी स्त्री के बारे में सोचना पाप के एक विशिष्ट संदर्भ में समझा जाना चाहिए (जैसे कि इस सन्दर्भ में वासनापूर्ण इच्छा से देखना), और मत्ती 6:34, जहाँ कल के बारे में न सोचना भी पाप के रूप में समझा जाना चाहिए।

दाखमधु मजाक उड़ानेवाली चीज है, क्योंकि नशे में धुत्त व्यक्ति मूर्खतापूर्ण और शर्मनाक काम कर सकता है (नीतिवचन 20:1)। नूह और लूत को याद करें (उत्पत्ति 9:18-27; 19:30-38)। केवल मूर्ख ही दाखमधु और अत्यधिक दाखमधु पीने को लेकर दी गई चेतावनियों को अनदेखा करते हैं; बुद्धिमान लोग जानते हैं कि यह खतरनाक है और इसे सख्ती से नियंत्रित किया जाना चाहिए। आपको शुरू करने से पहले पता होना चाहिए कि आप कितना पीएँगे, कहीं ऐसा न हो कि आप बहुत देर तक पीते रहें और नशे में धुत हो जाएँ। बुद्धिमान लोग शराबियों के साथ संगति भी नहीं करते (नीतिवचन 23:20; 28:7)।

लेकिन दाखमधु ब्रेड, पिज्जा और अन्य प्रसंस्कृत कार्बोहाइड्रेट से बने खाद्यपदार्थो से ज़्यादा खतरनाक नहीं है, क्योंकि वे लोलुपता की ओर ले जाते हैं, जो नशे का जुड़वा भाई है (नीतिवचन 23:21; व्यवस्थाविवरण 21:20; लूका 21:34)। यह शर्म की बात है जब 150 किलो वज़न वाली महिला अपने केक के तीसरे टुकड़े को खाते हुए एक पुरुष को देखकर जो भोजन के साथ एक गिलास दाखमधु पी रहा है उसे पियक्कड़ कहकर उसका मज़ाक उड़ाती है। ऐसी स्त्री खुद को धर्मी समझनेवाली फरीसी है जो बाइबल की बातों से अनजान है। परमेश्वर दोनों पापों में कोई नैतिक अंतर नहीं देखता है – उसे पियक्कड़ और पेटूपन, दोनों ही से बैर है।

सुलैमान सफलता के बारे में जितना आप सोच सकते हैं उससे कहीं ज़्यादा जानता था – परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में सफलता। वह जानता था कि दाखमधु अगर मामूली मात्रा में पिया जाए तो उसमें उपयुक्त गुण मौजूद होते हैं, लेकिन अगर उसका सेवन सीमाओं में रहकर न किया जाए, तो यह एक आदमी को मूर्ख और बेवकूफ बना सकता है (नीतिवचन 31:6-7,4-5; 23:29-35)। वह जानता था कि नशा और लोलुपता इन्सान की क़ाबलियत को बर्बाद कर देते हैं (नीतिवचन 23:20-21)।

यीशु अक्सर दाखमधु पीते थे, जबकि बपतिस्मा करनेवाला यूहन्ना नहीं पीता था (लूका 7:33-34)। हालाँकि उनके शत्रुओं ने उन्हें शराबी और पेटू कहा, लेकिन उन्होंने कभी भी ज़्यादा दाखमधु नहीं पी और न ही ज़्यादा खाया और उन्हें स्वर्ग के सिंहासन पर महिमान्वित किया गया। खानेपीने के विषय में उनके संयम और धीरज को अपने जीवन का आदर्श बनाएँ।

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