नीतिवचन 23:25

तेरे कारण तेरे माता–पिता आनन्दित, और तेरी जननी मगन हो।

माँ को मगन करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? धर्मी और बुद्धिमान बेटा और बेटी बनो। भली माँ की बड़ी इच्छा होती है और वह आशा करती है कि उसके बच्चे नीतियों पर चलनेवाले धर्मीजन होंगे।

यह वचन नीतिवचन का दूसरा भाग है। पहले भाग में इस प्रकार लिखा है: “धर्मी का पिता बहुत मगन होता है; और बुद्धिमान का जन्मानेवाला उसके कारण आनन्दित होता है” (नीतिवचन 23:24)। यह लिखने के बाद कि एक धर्मी और बुद्धिमान पुत्र के कारण उसका पिता आनन्दित होता है, सुलैमान उस आनंद और सुख का वर्णन करने लगता है जो ऐसा बेटा अपनी माँ को देता है।

भला एक स्त्री अपने गर्भ में बच्चे को क्यों धारण करती है, क्यों उसे जन्म देती है, अपना दूध पिलाती है और अथक रूप से उसका पालना करती है? इसलिए क्योंकि वह नहीं जानती थी कि उससे कैसे बचा जाए? क्योंकि बाकी सब स्त्रियाँ ऐसा करती हैं? क्योंकि वह अकेली थी? शिशु को दूध पिलाने या उसके पहले कदम उठाने की याददाश्त खतरनाक होती है। एक मूर्ख और दुष्ट बच्चा ऐसी यादों को चकनाचूर कर देगा और इन्हें दुःख, दर्द, शर्म और परेशानी में बदल देगा।

स्त्री, आपको बच्चा अपने गर्भ केवल इसलिए धारण करना है, उसे गर्भ में पलने देना है, उसे जन्म देना है, दूध पिलाना है और बड़ा करना है ताकि आप उसे परमेश्वर को प्रसन्न करने उसका भय मानना सिखाए, और दूसरों की सेवा करने और आपको सुख-शान्ति देने के लिए प्रशिक्षित करें। यदि आप ऐसा नहीं करती हैं, तो आप स्वर्ग के नीचे अपनी पवित्र बुलाहट का उल्लंघन करती हैं, एक ऐसे व्यक्ति को अस्तित्व में लाती हैं जो जीवनभर दुःख ही देगा और अनंत काल में पीड़ा भोगेगा, और इससे पहले कि आप इस दुनिया से जाए, आपके जीवन के अंतिम दिनों को दुःख में बर्बाद कर देगा।

यदि आप अपने वंश को प्रशिक्षित नहीं करती हैं, तो सुलैमान ने जो लिखा उसे पढ़े, “छड़ी और डाँट से बुद्धि प्राप्त होती है, परन्तु जो लड़का योंही छोड़ा जाता है वह अपनी माता की लज्जा का कारण होता है” (नीतिवचन 29:15)। और यह भी, ” बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख पुत्र के कारण माता उदास रहती है” (नीतिवचन 10:1)। और, ” मूर्ख पुत्र से पिता उदास होता है, और जननी को शोक होता है” (नीतिवचन 17:25)।

आपके लिए परमेश्वर की बुद्धि यह है कि जिन्हें आप अपने गर्भ धारण करती हैं, पालती हैं, जन्म देती हैं, अपना दूध पिलाती हैं और बड़ा करती हैं, अगर आप उन बच्चों को प्रशिक्षित नहीं करेंगी तो आप को अत्यधिक शर्म, मन का भारीपन और कड़वाहट का सामना करना पड़ेगा। लेकिन इसका उल्टा और भी सच है। यदि आप अपने बच्चों को यहोवा का भय मानना सिखाओगी, तो आप उनके कारण बड़े आनन्दित और मगन होओगी, जैसा हन्ना शमूएल के कारण और यूनीके और लोइस तीमुथियुस के कारण हुई थीं।

जिस पुरुष से आप विवाह करती हैं और जिससे आप बच्चों का गर्भ धारण करती हैं, अच्छा होगा कि वह एक विश्वासयोग्य और धर्मीजन हो – एक ऐसा पुरुष जो आपके बच्चों को सावधानीपूर्वक और बिना थके प्रशिक्षित करेगा। क्या आपके माता-पिता ने आपको यह सिखाया, और जब आप अपने लिए पति की तलाश कर रही थीं तो क्या आपने इस गुण की मांग कीं? क्या आप अपनी बेटियों का विवाह करने से पहले इस गुण को उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएंगी ताकि उन्हें आप सुरक्षित कर सकें?

परिवार के लिए परमेश्वर की जो योजना है उसमें पिता ही बच्चों का मुख्य शिक्षक है (उत्पत्ति 18:19; यहोशू 4:21-22; भजन 78:1-8; यश 38:19; योएल 1:1-3; इफि 6:4) )। परन्तु इसमें आपकी भी भूमिका है, जैसा कि बतशेबा की सुलैमान के जीवन में और नामा की रहूबियाम के जीवन में थी (नीतिवचन 1:8; 4:1-3; 6:20)। नीतिवचन का पूरा 31वा अध्याय राजा लमूएल को राजमाता द्वारा लिखित शिक्षा और निर्देश है (नीतिवचन 31:1-31)।

बालकों, अपनी माँ को आनंदित करने का सबसे अच्छा मार्ग क्या है? एक धर्मी और बुद्धिमान संतान बनो। एक अच्छी माँ की बड़ी इच्छा होती है और वह आशा भी करती है कि उसके बच्चे धर्मी हो। अपने धर्मपरायण जीवन के द्वारा उसका सम्मान करके, आप परमेश्वर का भी सम्मान करते हैं और उससे दुगुनी आशीष पाते हैं।

जितना आनंद आप अपने धर्मी जीवन से उसे देते हैं, उसके सामने वह सब तकलीफें जो उसने आपके लिए उठाई कुछ महसूस नहीं होंगी, या आप उसके लिए बहुत शर्मिंदगी, मन का बोझ और कड़वाहट का कारण बन सकते हैं। इस विषय पर विचार करो, क्योंकि तुम अपनी माता के साथ जैसा बर्ताव करोगे, परमेश्वर और मनुष्य तुम्हें वैसा ही प्रतिफल देंगे।

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