नीतिवचन 23:18
क्योंकि अन्त में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी।
यहां पापियों से ईर्ष्या करने के खिलाफ उपाय है, और यहां परमेश्वर से डरने का प्रतिफल है (नीतिवचन 23:17)। पापियों की समृद्धि का निश्चित ही अंत होगा, क्योंकि महान और भयानक परमेश्वर अभी और न्याय के दिन उनका न्याय करेगा। विश्वासियों की आशा भी निश्चित है, क्योंकि धन्य परमेश्वर उन्हें इस जीवन में और न्याय के दिन पुरस्कृत करेगा (भजन 37:28-38)।
स्वर्ग के विरुद्ध विद्रोह और पाप करने के बावजूद दुष्टों को फलते-फूलते देखकर धर्मी से धर्मी लोग भी हतोत्साहित हो सकते हैं। दाऊद के भजनों का प्रसिद्ध आराधना का अगुवा और संचालक, आसाप, यहोवा के धर्म को छोड़ने के लिए तैयार था, जब उसने दुष्टों के सुख और समृद्धि पर विचार किया, जो कि उसकी अपनी धार्मिकता की ज़िन्दगी से ठीक विपरीत था (भजन 73:1-15)।
परन्तु जब वह परमेश्वर के भवन में दण्डवत् करने गया, तो उसे वहां स्मरण दिलाया गया कि यहोवा शीघ्र ही दुष्टों का भयानक न्याय करेगा (भजन 73:16-20)। परमेश्वर निश्चित ही उन्हें उजाड़ देगा और विनाश की ओर धकेल देगा, और वह उन्हें अपने आतंक से पूरी तरह भस्म कर देगा। फिर आसाप ने अपनी मूर्खतापूर्ण सोच पर पश्चाताप किया, क्योंकि वह जान गया था कि उसे अनन्त महिमा मिलेगी (भजन 73:21-24)।
निश्चय ही अंत है। दुष्ट परमेश्वर के न्याय से बच नहीं पाएंगे। वह उनके सभी पापों को देखता है, और वह उन्हें कड़ी सजा देगा। दुष्ट के लिए एकमात्र अच्छा स्वाद इस जीवन में उसकी समृद्धि और सफलता का भ्रम है (भजन 17:14; 49:6-20)। धर्मी जन सर्वदा शोक या दुःख नहीं भोगेगा; उनके कष्टों का अंत हो जाएगा, जो उस महिमा की तुलना में कुछ भी नहीं है जो उन्हें स्वर्ग में दी जाएगी (रोमियों 8:17-25; 2 कुरिन्थ 4:16-18)।
आपकी आशा न टूटेगी। धर्मी लोग इस अनन्त महिमा के लिए पहले से ही ठहराएं गए हैं, और वे अपने चुन लिए जाने को कभी नहीं खोएंगे। कोई भी वस्तु उन्हें उनके स्वर्गीय पिता के इस गौरवशाली आशीष और फल से अलग नहीं कर सकती (रोमियों 8:29-39; 1 पतरस 1:3-5)। इसलिए, धर्मी लोग जानते हैं कि प्रभु में उनके परिश्रम व्यर्थ नहीं हैं; वे जानते हैं कि उन्हें अनन्त जीवन का फल मिलेगा और वे अपने प्रभु और उद्धारकर्ता से प्रशंसा का पुरस्कृत पाएंगे (मत्ती 25:23; 1 कुरिन्थ 15:58)।
मृत्यु से पहले धनवान मनुष्य और लाजर के बीच एक बड़ा अंतर था, लेकिन मृत्यु के बाद और भी अधिक अंतर उत्पन्न हुआ! धनवान मनुष्य जब जीवित था, तब वह हर दिन शानदार भोजन करता था, लेकिन गरीब भिखारी को केवल उसे चाटनेवाले कुत्तों का साथ मिलता था, जबकि वह खाने के लिए एक एक टुकड़े को तरसता था। लेकिन तभी नियति में नाटकीय उलटफेर हुआ।
धनवान मनुष्य जब मरा तो उसने खुद को नरक में यातना सहते हुए पाया और आतंक से जल उठा। उसने परमेश्वर और लाजर से दया की भीख मांगी, लेकिन अब्राहम ने उसे समझाया कि दोनों की नियति में जो परिवर्तन हुआ था वह अब बदलनेवाला नहीं था। उसने कहा, “हे पुत्र, स्मरण कर कि तू अपने जीवन में अच्छी वस्तुएँ ले चुका है, और वैसे ही लाजर बुरी वस्तुएँ : परन्तु अब वह यहाँ शान्ति पा रहा है, और तू तड़प रहा है” (लूका 16:25)।
ख्रिश्चन पाठक, आपके लिए स्वर्ग में एक विरासत रखी हुई है, और यह उस हर चीज़ से जिसे आप इस दुनिया में देखते हों, बहुत अलग है – वह अविनाशी, निर्मल है, और वह कभी मिटने की नहीं (1 पतरस 1:4)। आज अगर कोई आपसे एक लाख रुपये देने का एक वादा करे तो आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी, लेकिन परमेश्वर के वादे को जानकार आपको क्या करना चाहिए? परमेश्वर के मुफ़्त में मिले अनुग्रह से प्राप्त अनन्त जीवन के कारण, आपको अवर्णनीय और महिमा से भरपूर आनंद मनाना चाहिए, चाहे आपकी आर्थिक परिस्थितियाँ कुछ भी हों (1 पतरस 1:6-9)।
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