नीतिवचन 23:14

तू उसको छड़ी से मारकर उसका प्राण अधोलोक से बचाएगा।

परमेश्वर और राजा सुलैमान दोनों अपने वचन के द्वारा आपके बच्चों को बचाने में आपकी मदद करना चाहते हैं। सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने बच्चों के प्रशिक्षण के लिए अपनी व्यवस्था में नियम दिएँ, और उन नियमों में उसने बच्चों को विपत्ति और अकाल मृत्यु से बचाने के लिए शारीरिक दंड ठहराया। मामूली शारीरिक दर्द देने वाली छड़ी के उपयोग से आपका बच्चा एक बेकार और विनाशकारी जीवन से बच जाएगा और अन्त में परमेश्वर के कठोर दण्ड के से भी बच निकलेगा।

आप चाहे तो मनोविज्ञान या बाल प्रशिक्षण के सब पाठ्यपुस्तकें पढ़ सकते हैं – आप उनमें से अधिकांश पुस्तकों में कोई समझ या ज्ञान नहीं पाएंगे (यशायाह 8:20)। जब परमेश्वर बोलता है, तो मामला सुलझ जाता है (भजन 119:128)। आप अपने बच्चों के लिए क्या करेंगे? दुनिया के असफल तरीकों को चुनेंगे, या फिर उन प्राचीन मार्ग को चुनेंगे जिन्हें परमेश्वर ने अपने वचन में अपनी प्रेरणा से लिखवाया और जिनपर आपके दादा-दादी चलते थें और एक सफ़ल जीवन जी चुकें हैं?

इस स्त्रैण, आज़ादी देनेवाले और बिगड़े हुए समाज का मंत्र है: “तुम बच्चों को पिट नहीं सकते।” उन्होंने इस हास्यास्पद टनटनाहट का अविष्कार कैसे किया? दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने की अपनी मतिभ्रम कपोल कल्पना के कारण! सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने इस विषय पर अंतिम और आधिकारिक उत्तर दिया है, और 6,000 वर्षों के विश्व-इतिहास ने इसकी पुष्टि की है। सबसे सुव्यवस्थित घर और समाज वे होते हैं जिनमें सिर्फ़ अनुशासन का सिक्का चलता है, और जो अनुशासित लोग हैं वे अपने घर और समाज को इस मुक़ाम पर पहुँचाने के लिए शारीरिक दंड का अभ्यास करते हैं।

प्रत्येक माता-पिता को चुनना होगा। क्या आप अंतिम अधिकार के रूप में परमेश्वर के वचन के प्रति समर्पण करेंगे, या आप आधुनिक शिक्षा और मनोविज्ञान की वेदी पर अपने बच्चों की बलि चढ़ाएंगे? परमेश्वर और उसके वचन में विश्वास के बिना, सिर्फ़ एक तर्कहीन पशु बनकर रह जाता है जिसमें कोई बुद्धि नहीं होती, वह क्या सही है और क्या ग़लत है इस भेद को समझ नहीं सकता, और बेंजामिन स्पॉक की बेबी एंड चाइल्ड केयर या ए. एस. नील्स द्वारा लिखित ‘समरहिल: बच्चों के पालन-पोषण के लिए एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण’ जैसी हास्यास्पद बकवास की धारा में बह जाता है। ये दोनों ही किताबें अपनी विषयवस्तु में बेतुकी और परिणामों में निष्फल हैं। क्या आधुनिक मनुष्य का ऐसा मूल्यांकन करना बहुत कठोर लगता है? बिलकुल नहीं ( पढ़ें, रोमियों 1:21-32; 1 तीमु 6:3-5,20-21)!

बाइबल पर विश्वास रखनेवालों को यह समझने में कोई दुविधा नहीं होती है कि 1960 के दशक में हिप्पियों और विद्रोही पीढ़ी की उत्पत्ति कैसे हुई और इसके परिणामस्वरूप क्यों अपराध में विस्फोट, नए नए नशीलें पदार्थो का अविष्कार, बिना शादी के बच्चें पैदा होना और नैतिकता में भरी गिरावट आई। यह स्पॉक की परमेश्वर-विरोधी कपोल कल्पना पर खड़ी होनेवाली पहली पीढ़ी थी, जो पहली बार 1946 में प्रकाशित हुई और उस समय की देश की बेस्टसेलर पुस्तक बन गई थी। उसकी शिक्षा के परिणामों को देखने और अपने पोते को आत्महत्या करते देखने के बाद मिस्टर स्पॉक ने बाद में क्या सोचा? इस विद्वान् ने कबूल किया कि उसकी किताब, फ्रायड के मतिभ्रम और डार्विन की घिनौनी मानव-सिद्धांत की थेओरी की पैदाइश थी, और उन अप्रमाणित सिद्धांतों पर आधारित थी जो विफल हो गए थे।

क्या अनुशासन का दर्द सही रास्ते पर लाता है? जब आपने पिछली बार ट्रैफ़िक रूल का उल्लंघन किया और जिसके चलते आपको दण्ड भरना पड़ा तो क्या उसके बाद आपने अपनी ड्राइविंग गति की गति में सुधार किया? सोचिए, अगर आपको हर उल्लंघन के लिए चालान भरना पड़े तो आप कितनी सावधानी से गाड़ी चलाएंगे! यदि आयकर विभाग आपको ऑडिट के बारे में सूचित करता है, तो आप अपने वहिखाते को कितनी सटीकता से रखेंगे? दर्द सुधारता है! दर्द का विचार ही अपने आप में भी रचनात्मक है! यह मुद्दा इतना सरल है कि इस पर किसी बहसबाज़ी की भी कोई गुंजाईश नहीं है। लेकिन दुनिया शारीरिक दंड के विरोध में शोर करती है और कोई परवाह नहीं करती, जबकि अजन्मे बच्चों की हत्या की पैरवी करती है। उदारमतवादी शिक्षा-प्रणाली आपको यही पहुँचाएगी (1 कुरिन्थ 1:19-20; 3:19-20)!

यह सोचना कि आप परमेश्वर और 6,000 वर्षों के विश्व-इतिहास से भी अधिक बुद्धिमान हैं और अपने बच्चों के प्रशिक्षण के लिए आधुनिक मिथ्या विचारधारा को अपनाना बहुत बड़ी बेवकूफी है। परमेश्वर ने साफ़ साफ़ कहा है। आप नीतिवचन के इस सरल ज्ञान में सुधार नहीं कर सकते, चाहे आप अपने अहंकार में आकर कोई भी तरीका अपनाएँ। न तो हद से ज्यादा कठोरता और न ही हद से ज्यादा आज़ादी काम आएगी। बच्चे जन्म से ही मूर्ख होते हैं; छड़ी की मार ही उसे उन में से निकाल देगी; उन्हें आत्म-विनाश से बचाया जा सकता है। अगर छड़ी के अनुशासन को समय रहते और खुलकर और लगातार अमल में लाया जाए वे बड़े होकर सफ़ल नागरिक बन सकते हैं और माता-पिता को अति प्रसन्न और उनका नाम रोशन कर सकते हैं (नीतिवचन 3:11-12; 13:24; 19:18; 22:6,15; 23:13-14; 29:15,17)।

वास्तव में, शारीरिक शिक्षा पर प्रतिबन्ध लगाना बाल-शोषण है, उनका बैरी होना है और उनसे नफ़रत करना है (नीतिवचन 13:24)। छड़ी को रोको और देखो आपके बच्चें कैसे बिगड़ जाते हैं। बेहतर होगा कि आप उन्हें क़ाबू में रखें। बच्चों के लिए ज़रूरी है कि वे अपनी बाल-अवस्था के वर्षों में ही माता-पिता के प्रेमपूर्ण अधिकार के प्रति समर्पित होना सीख लें , अन्यथा वे बड़े होकर सिर्फ़ विद्रोही, घमंडी और स्वार्थी होंगे। उन्हें जीवन के अन्य आधिकारिक रिश्तों के प्रति समर्पण करने में कठिनाई होगी। जवान होने के बाद सफलता के लिए जिस आत्म-अनुशासन की आवश्यकता होती है वह माता-पिता के उस अनुशासन पर निर्भर करता है जो वे उन्हें उनकी बाल-अवस्था में ही देते हैं। अनुशासन के कारण बच्चों को जो थोड़ा दर्द होता है और माता-पिता का जो थोडा बहुत दिल दुखता है उससे अभी बचना असल में क्रूरता है जो निश्चित रूप से भविष्य में दोनों के लिए और भी ज्यादा दर्द का कारण बनेगी।

इस नीतिवचन में छड़ी क्या है? यह एक पतली छोटी डंडी या लकड़ी होती जिस पर फूल-पत्तियाँ लगी होती हैं। यह बिल्कुल वही है जो हर माता-पिता और शिक्षक कुछ पीढ़ियों पहले उपयोग करते थें (नीतिवचन 10:13)। उन दिनों में छड़ी उतनी ही आवश्यक होती थीं जितना कि घोड़े के लिये कोड़ा और गदहे के लिये लगाम होती थी (नीतिवचन 26:3)। यह लाठी नहीं होती है, क्योंकि इसका उद्देश्य हानि नहीं, बल्कि प्रेमपूर्ण सुधार है। इसके उपयोग से पीठ पर लाल रंग की पतली धारियां ज़रूर पड़ती हैं, जो बच्चे के लिए मानो ट्रैफिक के चालन या माता-पिता के लिए ऑडिट के समान प्रभाकारक होती हैं (नीतिवचन 17:10; 19:29; 20:30)।

इस नीतिवचन में अधोलोक से बचाना क्या है? इसका शाब्दिक अर्थ आग की झील नहीं हो सकता, अन्यथा अनन्तकाल का जीवन, जो केवल प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास के द्वारा मिलता है, वह बच्चों के अनुशासन पर निर्भर होगा, न कि परमेश्वर के अनुग्रह पर। लेकिन ‘अधोलोक’ शब्द का उपयोग इस दुनिया की विपत्ति, विनाश और मृत्यु के लिए रूपक के रूप में भी किया जाता है (भजन 16:10; 18:5; 86:13; 116:3; 5:14; 28:15; योना 2:2)। यह बिगड़ा हुआ अस्तव्यस्त, और मुसिबतों से भरा जीवन है जो दुर्घटना, अपराध, प्रतिशोध या मृत्युदंड के कारण अकाल मृत्यु की ओर ले जाता है। इस अर्थ से यह सच में एक प्रकार का उद्धार ही है!

आपके परिवार, आपके चर्च और आपके देश का भविष्य परमेश्वर के प्रेरित और अचूक वचन के बुद्धिमानीपूर्ण व्यावहारिक उपयोग पर निर्भर करता है। जो लोग वचन पर आनन्दित होंगे और इसका पालन करेंगे वे धन्य होंगे। जो लोग इसकी अवहेलना करते हैं और इसे मानने से इनकार करते हैं उन्हें परिणाम भुगतने होंगे, जैसा कि कोई भी ईमानदार व्यक्ति पहले से ही देख सकता है। परमेश्वर के वचन के विरुद्ध विद्रोह करने और बिगड़ैल बच्चों को दुनिया में भेजने के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। आज ही अपने बच्चों को बचाएं! स्वर्ग और पृथ्वी के परमेश्वर, बच्चों के उचित प्रशिक्षण के लिए तेरे प्रेरित और अचूक निर्देश के लिए धन्यवाद।

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