नीतिवचन 23:12
अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाना।
अपना मन शिक्षा की ओर लगाओं! यह कोई ऐसा-वैसा नीतिवचन नहीं है जो आपको उबाऊ लगे। अपना हृदय और अपने कान इस की बातों की ओर लगाओ। मन में शिक्षा पाने की अभिलाषा और सुधार की बातों को सुनने के लिए मन की तैयारी महानता और सद्गुण के लक्षण हैं (नीतिवचन 12:1; 13:18; प्रेरितों 17:11)। बहुत कम लोग ज्ञान और बुद्धि सीखने के लिए समर्पित होते हैं। अगर आप गौर करें, तो ज्यादातर लोग मनोरंजन और विलासिता में ज्यादा रुचि लेते हैं। शिक्षा की ओर मन लगाना बहुत ही कठोर परिश्रम जैसा लगता है।
व्यक्ति व्यक्ति में बहुत फ़र्क होता हैं। कुछ जीत जाते हैं, तो वही कुछ हार जाते हैं। कुछ बुद्धिमान होते हैं; कुछ मूर्ख होते हैं। लोग जिन्दगी के हर मोड़ पर कुछ ऐसे फैसलें लेते हैं जो या तो मूर्खता साबित होते हैं या फिर उन्हें बुद्धि प्राप्त होती है। कुलीन और सद्गुणी व्यक्ति बुद्धि और ज्ञान प्राप्त करने के लिए जीवन की बहुत-सी चीजों को कुर्बान कर देता है, लेकिन एक मूर्ख खुद को एक अच्छा वक्ता समझकर लोगों को अपनी बकवास के श्रेता बना देता है (नीतिवचन 18:1-2; 15:14; 17:24; सभो 10:12-15)।
जो मनुष्य बुद्धि की खीज करता है उसका जीवन सुखी और सफल होगा, क्योंकि वह दुनिया को सही ढंग से समझता है, लाभदायक निर्णय लेता है और तकलीफ़ों और संकटों से बचता है। लेकिन जो मनुष्य मूर्ख होता है और बुद्धि का उपहास करता है, वह अपनी अज्ञानता में अहंकारी होता है, मूर्खतापूर्ण फैसलें लेता है और अपनी भ्रमित सोच और उन भयानक फैसलों के कारण दण्ड पाता है (नीतिवचन 17:16; 11:29; 13:15; 14:16; 15:10; 22: 3,5)।
दिन में कूल1,440 मिनट होते हैं। इनमें से कितने मिनट आप बुद्धि की खोज करने में बिताते हैं? कितने मिनट आप शिक्षा और निर्देश की खोज करने में बिताते हैं? औसत भारतीय व्यक्ति हर दिन 3-4 घंटे या लगभग 210 मिनट टेलीविजन देखता है, और घन्टों सोशल मीडिया पर बर्बाद करता है – और इसमें से एक भी माध्यम एक मिनट के लिए भी उसे न तो बुद्धि सिखाता है और न ज्ञान। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आज हमारा देश नैतिक रूप से दिवालिया हो गया है और कर्ज़ के बोझ तले दबा है। टेलीविजन का प्रत्येक मिनट आपसे आपका बुद्धिमान बनने का अवसर निगल जाता है। हॉलीवुड, बॉलीवुड के दर्शक और खेल या फेसबुक में समय बर्बाद करनेवाले लोग मूर्खता की निश्चित कटनी करेंगे।
लेकिन वासना में पागल इस पीढ़ी को बिगाड़ने में अकेले टेलीविजन का ही दोष नहीं है (2 तीमु 3:1-4)। सोशल मीडिया (फेसबुक व्हाट्सएप्), टेक्स्टिंग, ट्वीटर, फिल्में, पत्रिकाएं, संगीत, खेल, शौक, मुज़िकल नाइट्स, वीडियो गेम और इंटरनेट सर्फिंग और कई अन्य चीजों पर बेकार में समय बिताने के बारे में क्या? जब कोई व्यक्ति इन गतिविधियों को अपनी लत बना चूका है, तो वह इस नीतिवचन में सुलैमान द्वारा दी गई सलाह को खो देता है, क्योंकि दिन भर के 1,440 मिनट तेजी से बर्बाद हो जाते हैं और खो जाते हैं।
केवल कुछ कुलीन पुरुष और महिलाएं ही बुद्धि और ज्ञान की खोज करने में खुद को समर्पित करेंगे और अद्भुत नतीजों की कटनी करेंगे (मत्ती 7:13-14)। क्या आप अपना ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित कर पाते हैं और क्या आप हर दिन सच्ची बुद्धि और सच्चा ज्ञान सीखने पर अपना मन लगाते हैं? क्या आप प्रतिदिन अपनी बाइबल पढ़ते हैं? क्या आप जितनी बार संभव हो बाइबल-प्रचार करने वाले चर्च में जाते हैं? क्या आप बड़े निर्णय लेने से पहले बुद्धिमान और गंभीर सलाहकारों से सलाह लेते हैं (नीतिवचन 11:14)? इस नीतिवचन की शिक्षा पर ध्यान दीजिये!
सुलैमान एक ऐसे मनुष्य का वर्णन करता है जिसने अपने आप को बुद्धि सिखने के लिए समर्पित किया। वह अपना लक्ष्य पाने के लिए विभिन्न तरीकें अपनाना है, और लक्ष्य को प्राप्त करता है (नीतिवचन 2:1-9; 18:1)। परन्तु मूर्ख का मन सदैव अपनी कोरी कल्पनाओं में इधर-उधर भटकता रहता है, भले ही बुद्धि बिलकुल उसके सामने खड़ी हो ((नीतिवचन 17:24; 9:1-6; 14:6; 18:2)। इसलिए सुलैमान ने बुद्धि प्राप्त करने के लिए समर्पित होने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया (नीतिवचन 5:1-2; 7:1-4; 8:32-36; 15:31-32; 22:17-21; 23:19,23; भजन 90:12)।
इस नीतिवचन का उपदेश और ज्ञान सुनने के बाद आपका हृदय और कान कितने चौकस हैं? आज आप क्या बदलाव करेंगे? क्या आपने परमेश्वर का वचन पढ़ा है ताकि वह आपको शिक्षा दे सके और आपका ज्ञान बढ़ा सके? क्या आपने किसी दुविधा में डालने वाले मामले में अपने माता-पिता से सलाह मांगी है? क्या आपको याद है कि पिछले रविवार को क्या उपदेश दिया गया था? शिक्षा और ज्ञान अनमोल उपहार हैं; इनका सदुपयोग करो, क्योंकि इनके बिना जीवन कष्टमय है।
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