नीतिवचन 21:6

जो धन झूठ के द्वारा प्राप्त हो, वह वायु से उड़ जाने वाला कुहरा है, उसके ढूँढ़नेवाले मृत्यु ही को ढूँढ़ते हैं।

क्या आप मृतु की कतार में खड़े हैं, और आपको पता ही नहीं? यदि आप पैसे कमाने के लिए झूठ बोलते हैं या चालबाज़ी करते हैं, तो यकीन मानें आप मरना चाहते। आप जो घोटाले करते हैं लोग उनसे भले ही अनजान हो या पर्वा ही न करें, परमेश्वर उन्हें जानता हैं, और वह उनकी अनदेखी नहीं करेगा। आपको लगता है कि आपके पास खज़ाना है, लेकिन यह आपका केवल भ्रम है, मानों ऐसे सोचना कि तेज़ बवंडर में से एक पत्ता आपकी जेब में आ पड़ेगा।

व्यवसाय और आर्थिक मामलों में ईमानदार होना बुद्धि का एक पहलू है। तरक्की करने के लिए झूठ बोलना व्यर्थ है – यह काम नहीं करेगा – यह मूर्खता और बेकार है। झूठ से कमाया हर लाभ या अर्जित धन नष्ट हो जाएगा, और परमेश्वर चोर का न्याय करेगा। इस मार्ग पर चलना अपने लिए मृत्यु और विनाश की अभिलाषा करना है (नीतिवचन 8:36)।

यह नीतिवचन दो अन्य नीतिवचनों के बीचो-बीच है, और वे भी आर्थिक क़ामयाबी की शिक्षा देते हैं। परिश्रम की प्राप्ति का परमेश्वर द्वारा नियुक्त माध्यम है; उतावली करना पाप और दरिद्रता की ओर ले जाएगा (नीतिवचन 21:5)। परमेश्वर उन दुष्टों का नाश कर देगा जो धन के लिए चोरी करते हैं, क्योंकि वे ईमानदारी से रूपया कमाने की नीति को ठुकरा देते हैं (नीतिवचन 21:7)। उन अनेकों नीतिवचनों पर भी गोर करें जो सच्चे तराजू और पलड़ों की माँग करते हैं (नीतिवचन 11:1; 16:11; 20:10,23)।

जैसा कि सुलैमान ने यहां अपने बेटे को व्यवसायिक नैतिकता की शिक्षा दी, उसी रीति से हर युवा को अपने आर्थिक व्यवहारों में बेदाग रहने की शिक्षा देनी चाहिए। आर्थिक विनिमय के किसी भी पहलू में हेराफेरी की कोई गुंजाइश नहीं है। परमेश्वर यहोवा उसकी व्यवस्था के हर एक उल्लंघन को देखता है, और वह हर एक का न्याय करेगा। वह हर ग्राहक के हितों की रक्षा करता है और पृथ्वी पर होनेवाले प्रत्येक सौदे का स्वर्ग से निरिक्षण करता है। आपका पाप आपको ज़रूर ढूंढ निकालेगा!

सुनों, परमेश्वर बेईमान मनुष्यों को यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा क्या चेतावनी देता है: “जो अन्याय से धन बटोरता है वह उस तीतर के समान होता है जो दूसरी चिड़िया के दिए हुए अण्डों को सेती है, उसकी आधी आयु में ही वह उस धन को छोड़ जाता है, और अन्त में वह मूढ़ ही ठहरता है” (यिर्मयाह 17:11)। और यह भी, “उस पर हाय जो अपने घर को अधर्म से और अपनी उपरौठी कोठरियों को अन्याय से बनवाता है; जो अपने पड़ोसी से बेगारी में काम कराता है और उसकी मज़दूरी नहीं देता” (यिर्मयाह 22:13)।

बाइबल अपनी जेब भरने के लिए किसी भी प्रकार के छल या धोखाधड़ी के खिलाफ गंभीर चेतावनियों से भरी हुई है। वे कितनी हैं उनकी संख्या पर ध्यान दो और अपने सभी व्यापारिक लेन-देन में पूरी तरह ईमानदार रहो (नीतिवचन 10:2; 11:26; 13:11; 20:14,21; 28:8; लैव्य 19:13,35-36; व्यवस्था 24:14) -15; 25:13-16; अय्यूब 24:10-11; यहेज 45:10-12; होशे 12:7; आमोस 8:4-6; मीका 6:10-11; मलाकी 3:5; याकूब 5: 1-7)।

अहाब और ईज़ेबेल ने नाबोत की दाख की बारी पाने के लिए झूठ बोला, और अहाब ने अपने धन का आनंद लेने की कोशिश की, लेकिन एलिय्याह ने बताया कि वह और ईज़ेबेल कैसे मरेंगे (1 राजा 21: 1-24)। क्या आकान अपने धन का आनंद ले सका, जब पत्थरों ने उसके शरीर को चूर-चूर कर दिया और आग ने उसकी हड्डियों को जला दिया (यहोशू 7:20-26)? क्या गेहजी अपने धन का आनंद ले सका, जब वह लाइलाज कोढ़ से सड़ रहा था (2 राजा 5:20-27)? यहूदा इस्करियोती का क्या हुआ (मत्ती 27:3-10)? हनन्याह और सफीरा का क्या हश्र हुआ (प्रेरितों के काम 5:1-11)?

इन प्रश्नों पर मंथन करें। जिन्हें आपको रुपये देने हैं क्या आप पूरा भुगतान करते हैं? समय पर करते हैं? या आप अपने लिए अनुग्रह अवधि का उपयोग करते हैं?जब आप अपनी पुरानी कार या कोई भी अन्य गाडी बेचते हैं तो क्या आप उस वाहन में मौजूद सभी खराबियों का खुलासा करते हैं? जो उत्पाद आप बेचते हैं क्या वह परमेश्वर की दृष्टि में वैध है? क्या आप लाभ पाने के लिए वस्तुओं की कीमत बढ़ाचढ़ाकर बताते हैं? जो संपत्ति आपने किराये पर ली है क्या आप उसकी देखभाल अपनी संपत्ति से बढ़कर करते हैं? क्या आप उन लोगों को उदारतापूर्वक बख्शीश देते हैं जो छोटे-छोटे कामों के द्वारा आपकी सेवा करते हैं? क्या आप ऑफिस या फैक्ट्री में काम के समय हमेशा मेहनती होते हैं?

आओ, कुछ और प्रश्नों पर मंथन करें। क्या आप अपने किसी कारोबार के विषय में बढ़ाचढ़ाकर बताते हैं या उत्पाद की गुणवत्ता को उसकी असली गुणवत्ता से बढ़ाचढ़ा कर बताते हैं? अगर आप कोई बड़े कारोबारी हैं तो क्या आप अपने सब कर्मचारियों को उनकी तनख्वाह हर बार समय पर देते हैं? जो घर आप बेच रहे हैं क्या आप उस घर की सभी खामियों का खुलासा करते हैं? क्या आप अपने सब बिल अदा करते हैं? और समय पर करते हैं? जिस किसी ने आपकी सेवा की है क्या आपने उसे ठीक से भुगतान किया है? क्या आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न के प्रति ईमानदार हैं? क्या आप अपनी आय का पहला भाग प्रभु को देते हैं? या क्या आप यह कहकर झूठ बोलते हैं कि आप उससे प्रेम करते हैं लेकिन उसका हिस्सा अपने लिए रखते हैं?

कुछ और प्रश्नों पर मंथन करें। क्या आप बीमार न होने पर भी बीमार होने का दिखावा करते हैं, ताकि सुविधाओं का लाभ उठाकर पैसे वसूल करे? क्या आपने अपने मालिक से छोटी-छोटी चीज़ें ली हैं जो लूटपाट या चोरी कहलाएगी? क्या आप कोई वस्तु खरीदने के बाद पसंद न आनेपर धन-वापसी (रिफंड) पाने की कोशिश करते हैं? क्या आपने किसी व्यापारी या सेवादार से किसी ऐसे काम करवाने को कोशिश की है जो असंभव हो, और फिर भुगतान नहीं किया इसलिए क्योंकि वे मानव थे? क्या आप जो चीजें खरीद रहे हैं उनके दाम पूछकर मोल-भाव करते हैं? जब आपको कोई वस्तु सस्ते में मिलती है तब क्या आप दूसरों के सामने आनन्दित होकर अपने शातिर दिमाग पर शेखी बघारते हैं (नीतिवचन 20:14)?

हम कुछ और प्रश्नों पर मंथन करें। क्या आपका बायोडाटा पूरी तरह से सच है? क्या आप साक्षात्कार के सवालों का पूरी तरह और सटीक उत्तर देते हैं? साथी कर्मचारियों के आचरण के बारे में पूछे जाने पर क्या आप पूरी सच्चाई बताते हैं? क्या आप किसी भी सरकारी सहायता जिसके लिए आपने अनुरोध किया है या ले चुके हैं, उसके लिए पूरी तरह से पात्र हैं? परमेश्वर की दृष्टि में यह सब कैसा है जिसके मापदंड उसने बाइबल में दिएँ हैं? क्या आप बीमा आवेदनों में मांगी गई सभी जानकारियों के प्रति पूरी तरह से ईमानदार हैं? क्या आप उन लोगों को उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं जिन्हें इसकी आवश्यकता है, भले ही उन्होंने आपसे इसके बारे में न पूछा हो और भले ही उन्हें बताना आपको महंगा पड़े?

इस नीतिवचन की शिक्षा से आप अपने प्रत्येक आर्थिक लेन-देन, रोज़गार के आवेदन और व्यापारिक सौदे का बारीकी से निरिक्षण करें, कही ऐसा न हो कि आप व्यर्थ में ही इधर-उधर उछलते पाएं जाएँ और अपने ऊपर परमेश्वर का दण्ड ले आयें। जो कुछ भी आप करते हैं वह सबकुछ परमेश्वर देखता और सुनता है, और वह केवल पूर्ण निष्पक्षता, धार्मिकता और उदारता को ग्रहण करता है। धोखेबाज़ और कंजूस न तो समृद्ध होंगे और न ही जीवित रहेंगे। यदि आप हमेशा अपने बिलों का भुगतान करते हैं और उदारता से देते हैं, तो आप आशीषों को पाएँगे (नीतिवचन 11:18,24-26; 19:17; 28:8,27; व्यवस्था 15:10; लूका 6:38; सभोपदेशक 11:1-6; भजन 112:1-10; यशायाह 32:8; 2 कुरिन्थियों 9:6-11)।

यदि आप सचमुच खज़ाना पाना चाहते हैं, जो वास्तविक खज़ाना है, तो पहले परमेश्वर के राज्य की खोज करें (मत्ती 6:33)। क्योंकि यह उस “खेत में छिपे हुए धन के समान है, जिसे किसी मनुष्य ने पाया और छिपा दिया, और मारे आनन्द के जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उस खेत को मोल ले लिया” (मत्ती 13:44)। पृथ्वी पर का सब प्रकार का धन व्यर्थ है, प्राण को दुखी करता है, और मृत्यु के दिन किसी काम का नहीं। परन्तु सन्तोष सहित भक्ति अब और अनंतकाल के लिए लाभदायक है (1 तीमु 4:8; 6:6)।

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