नीतिवचन की व्याख्या

2. मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में तो ठीक होता है, परन्तु यहोवा मन को जाँचता है।

3. धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है।

4. ऊँची दृष्टि और अभिमानी मन, और दुष्टों का जोतना पाप है।

6. जो धन झूठ के द्वारा प्राप्त हो, वह वायु से उड़ जाने वाला कुहरा है, उसके ढूँढ़नेवाले मृत्यु ही को ढूँढ़ते हैं।

7. जो उपद्रव दुष्ट लोग करते हैं, उससे उन्हीं का नाश होता है, क्योंकि वे न्याय का काम करने से इन्कार करते हैं।

8. पाप से लदे हुए मनुष्य का मार्ग बहुत ही टेढ़ा होता है, परन्तु जो पवित्र है, उसका कर्म सीधा होता है।

9. लम्बे–चौड़े घर में झगड़ालू पत्नी के संग रहने से छत के कोने पर रहना उत्तम है।

11. जब ठट्ठा करनेवाले को दण्ड दिया जाता है, तब भोला बुद्धिमान हो जाता है; और जब बुद्धिमान को उपदेश दिया जाता है, तब वह ज्ञान प्राप्त करता है।

12. धर्मी जन दुष्टों के घराने पर बुद्धिमानी से विचार करता है;

13. जो कंगाल की दोहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी।

14. गुप्त में दी हुई भेंट से क्रोध ठण्डा होता है, और चुपके से दी हुई घूस से बड़ी जलजलाहट भी थमती है।

15. धर्मी के लिए न्याय करना आनंद की बात है, परन्तु कुकर्मियों का विनाश होगा। (केजेवी)

16. जो मनुष्य समझ के मार्ग से भटक जाता है सो मृतकों की मंडली में पड़ा रहेगा।

17. जो विलासिता से प्रीती रखता है, वह कंगाल; जो दाखमधु और चिकनाई से मन लगाता है सो धनी न होगा।

18. दुष्ट जन धर्मी की छुड़ौती ठहरता है, और विश्वासघाती सीधे लोगों के बदले दण्ड भोगते हैं।

19. झगड़ालू और चिढ़नेवाली पत्नी के संग रहने से जंगल में रहना उत्तम है।

20. बुद्धिमान के घर में उत्तम धन और तेल पाए जाते हैं, परन्तु मूर्ख उनको उड़ा डालता है।

21. जो धर्म और कृपा का पीछा करता है, वह जीवन, धर्म और महिमा भी पाता है।

22. बुद्धिमान मनुष्य सामर्थी के नगर पर चढ़ जाता है, और उस पर उसके आत्मविश्वास के बल को ढ़ा देता है। (केजेवी)

23. जो मनुष्य अपने मुह में लगाम देता है, और जीभ को वश में रखता है, वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।

24. जो अभिमान से रोष में आकर काम करता है, उसका नाम अभिमानी, और अहंकारी ठट्ठा करनेवाला पड़ता है।

25. आलसी अपनी लालसा ही में मर जाता है, क्योंकि उसके हाथ काम करने से इन्कार करते हैं।

26. कोई ऐसा है, जो दिन भर लालसा ही किया करता है, परन्तु धर्मी लगातार दान करता रहता है।

27. दुष्टों का बलिदान घृणित लगता है; तब कितना अधिक जब वह महापाप के निमित्त चढ़ाता है।

28. झूठा साक्षी नाश होता है, परन्तु जिसने जो सुना है वही कहता हुआ स्थिर रहेगा।

29. दुष्ट मनुष्य कठोर मुख का होता है, और जो सीधा है वह अपनी चाल सीधी करता है।

30. यहोवा के विरुद्ध न कोई बुद्धि, न कोई समझ, और न कोई युक्ति चलती है।

31. युद्ध के दिन के लिये घोड़ा तैयार तो होता है, परन्तु जय यहोवा ही से मिलती है।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।

↑