नीतिवचन 21:4
ऊँची दृष्टि और अभिमानी मन, और दुष्टों का जोतना पाप है।
दुष्ट मनुष्य जो कुछ करता है वह सब पाप है। परमेश्वर उसके रूप, हृदय, और कर्मों को ठुकराता है। वह प्रतिदिन और भी अधिक विपत्ति में पड़ता जाता है (रोमियों 2:5)। उसका हल जोतने जैसा मासूमियत से किया गया काम भी पाप है (तीतुस 1:15-16)। परमेश्वर ने एक बार संसार को डुबा दिया जब उसने देखा कि मनुष्य का प्रत्येक विचार केवल बुरा ही था (उत्पत्ति 6:5)।
धार्मिकता का आरम्भ एक पुनर्जीवित हृदय में होता है जिसके विचार और उद्देश्य दीनतापूर्ण होते हैं (नीतिवचन 4:23; 14:14; 22:11)। ऐसी धार्मिकता चेहरे पर चमकती है (नीतिवचन 30:13; 2:11), जो उन कार्यों की ओर ले जाती है जिनसे पवित्र परमेश्वर का सम्मान होता है और जो उसे प्रसन्न करते हैं (नीतिवचन 11:20; 21:27; भजन 11:7)।
यदि आपका मन परमेश्वर के साथ सही नहीं है, पूरी तरह से उसके प्रति आज्ञाकारी नहीं है, तो आपके सभी कार्य पापपूर्ण हैं। पाप कितनी भयानक और विनाशकारी बात है! सबसे निर्दोष, महान या धार्मिक कार्य भी यदि शुद्ध हृदय से न किए जाए तो वे और अधिक दण्डनीय हो जाते हैं। भविष्यद्वक्ता ने इस्राएल को उनके आत्मिक आलस्य के लिए किस प्रकार डांटा इसके विषय में पढ़ें, जिससे उनके सब काम भ्रष्ट हो गए थें (हाग्गै 2:10-14)।
सुलैमान ने सबसे पहले एक ऊँची दृष्टि की निंदा की। परमेश्वर अभिमान से घृणा करता है, इसलिए वह अक्सर उसकी निन्दा करता है। अभिमान या घमण्ड अपने आप में भरोसा और महिमा करता है, और परमेश्वर उन से घृणा करता है जो उसकी महिमा और प्रशंसा अपने लिए पाने के उद्देश से उसके साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, विशेष रूप से आप से। वह जानता है कि आप कुछ भी नहीं हो, और आपको भी यह पता होना चाहिए (भजन 39:5; 62:9)।
परमेश्वर स्पष्ट रूप से अभिमानी दृष्टि से घृणा करता है (नीतिवचन 6:16-17)। ऊँची दृष्टि तब होती है जब आपके मन से गर्व के विचार निकलते हैं जिनका असर परमेश्वर और दूसरों की दृष्टी में आपके चेहरे, बातों और आचरण पर पड़ता हैं। यह तब सबसे अधिक घृणित बन जाता है जब यह किसी स्त्री के चेहरे पर या आंखों में दिखाई देता है, क्योंकि ऐसी स्त्री को परमेश्वर उसके नियत पद से हटा देता है (यशा 3:16-17; 1 कुरिन्थ 11:3; 1 तीमुथियुस 2:9)। इसलिए प्रत्येक स्त्री अपनी दृष्टि निचे रखे।
उसके बाद सुलैमान ने अभिमानी मन की निंदा की। आपका पहला कर्तव्य है कि आप अपने मन को परमेश्वर और दूसरों के सामने विनम्र रखें। आपको अपना सिर झुकाना चाहिए और कबूल करना चाहिए कि यदि आप पर कृपादृष्टि न की जाए तो आप खोए हुए हैं (लूका 18:13)। आपको अपने स्वयं के मिथ्याभिमान को ठुकराकर विनम्रतापूर्वक दूसरों के सामने दीन होना चाहिए (रोमियों 12:16)। आपको दीन मन से दूसरों को अपने से बेहतर समझना चाहिए (फिलिप्पियों 2:3-5)। यदि आप परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे अपने आप को दीन करेंगे, तो वह आपको ऊंचा करेगा (1 पतरस 5:6)।
दाऊद, जो परमेश्वर के मन के अनुसार मनुष्य था, उसने एक महान आदर्श रखा। उसने प्रार्थना की कि वह इन दोनों ही पापों- ऊँची दृष्टि और अभिमानी मन- से निर्दोष रहेगा (भजन 131:1)। तब उसने निश्चय किया कि वह अपने घर से ऐसे किसी भी व्यक्ति को निकाल डालेगा जिसमें इनमें से कोई भी पापपूर्ण दोष हो (भजन 101:5)। केवल अपने चारों ओर देखें तो आप समझ जाएंगे कि दाऊद के समान प्रभु परमेश्वर के लिए उत्साह रखने वाले बहुत कम हैं। अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को अपनी मुरते बना लेते हैं और दाऊद के समान पवित्र संकल्प लेने की न तो कल्पना कर सकते हैं और न ही इच्छा।
सुलैमान ने दुष्टों के जोतने की भी निंदा की। दुष्टों के जोतने के प्रकाश में आप पाप के बारे में क्या सीख सकते हैं? दुष्ट मन वाले मनुष्य द्वारा किए जाने पर प्राकृतिक और निष्कपट रूप से किये गए काम भी, जो परमेश्वर और प्रकृति के ठहराए हुए कर्तव्य हैं, पाप बन जाते हैं। जोतना, जो कि मनुष्य का स्वयं के लिए प्रयोजन करने का कर्तव्य है, पाप है जब इसे दुष्ट व्यक्ति द्वारा किया जाता है।
अवश्य है कि मनुष्य का हर एक काम परमेश्वर की महिमा के लिये किया जाए, जिस पर दुष्ट कभी विचार नहीं करते (1 कुरिन्थियों 10:31; भजन 10:4)। अवश्य है कि प्रत्येक कार्य विश्वास से किया जाए, जो दुष्टों के पास नहीं है (रोमियों 14:23; 2 थिस्स 3:2)। अवश्य है कि प्रत्येक काम में धन्यवाद देना शामिल हो, जिस पर वे कभी विचार नहीं करते (रोमियों 1:21; 2 तीमुथियुस 3:2)। इस कारण उनका तो श्वास लेना भी अभिशाप बन जाता है।
दुष्ट व्यक्ति की धार्मिक कामों में भागदौड़ तो इससे भी बदतर होती हैं। उसकी प्रार्थनाएँ भी घृणित ठहरती है (नीतिवचन 28:9)। उसके बलिदान घृणित ठहरते हैं (नीत 15:8)। जब वह बलि चढ़ाते समय पाप के बारे में सोचता है, जो सामान्य है, तो यह और भी बुरा है (नीतिवचन 21:27)। कितना भयानक जीवन है, यह न्याय के दिन के लिए पापों का संचय करना है, तब भी जब वह चर्च में है और भेंट में पैसे डालता है।
यह क्यों सच है? क्योंकि दुष्ट मनुष्य अपने आप पर भरोसा रखते हैं, धन्यवादी नहीं होते हैं, और अपने सृजनहार की महिमा करने के बजाए अपने ही लालच और घमण्ड के पीछे भागते हैं। परमेश्वर उनके किसी भी विचारों में नहीं है (भजन 10:4)। वे उसकी सृष्टि का उपयोग अपने स्वार्थी उद्देश्यों के लिए करते हैं। उन्हें उसके या उसके उपदेशों की कोई परवाह नहीं है। वे लगातार उसकी उपेक्षा करते हैं और जब उनका सामना किया जाता है, तब वे उसे अस्वीकार कर देते हैं।
धर्मीजन अपने खेत में हल चलाने से पहले, अपने और अपने बैल के स्वास्थ्य, धूप, पिछली रात की बारिश, अपनी ज़मीन, काम करने का अवसर, पापियों के लिए परमेश्वर की दया, और अनन्त जीवन की आशा के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देता है। हल जोतते समय, वह बैल की ताकत, मिट्टी की गंध, पौधों का चमत्कारिक रीति से बढ़ना, और परमेश्वर की भलाई पर चिंतन करता है, तथा अधिक बारिश और अधिक कृपा के लिए परमेश्वर से दया की याचना करता है। वह पसीने को पोंछता है और शरीर की शीतलन प्रणाली के लिए स्वर्ग की ओर धन्यवाद देता है। दिन के अंत में, वह अपने पड़ोसी को बीज देता है, उपदेशक के पास मुर्गी ले जाता है, धन्य दिन के लिए प्रभु का धन्यवाद करता है, अपनी बाइबल पढ़ता है, अपने पापों को स्वीकार करता है, और अपनी पत्नी से प्रेम करता है।
परन्तु दुष्ट व्यक्ति खेत में हल चलाने से पहले शिकायत करता है कि उसके पास केवल एक बैल है, पिछले महीने धूप की कमी, पिछली रात की बारिश के कारण उत्पन्न हुआ कीचड़, बगल के खेत जो वह चाहता है कि वह उसका मालिक हो, पिछली सर्दियों में उसके पिता की मृत्यु, आयकर का बोझ, और जीवन कितना कठिन है, जैसी बातों पर कुढ़ कुढ़ता है। हल जोतते समय, वह अपने भाई से अधिक पैसा कमाने का सपना देखता है, किसी स्थानीय राजनेता के लिए अपने पड़ोसी को पीटता है, और ताकतवर तथा और सफल होने की कल्पना करता है। दिन की गर्मी के लिए वह दो बार सूरज को कोसता है। दिन के अंत में, वह उधार लेने आए अपने पड़ोसी को खाली हाथ भेज देता है, खुद को पेट भरने के लिए दो मुर्गियों को मारता है, शिकायत करता है कि उसने कितनी मेहनत की, टीवी देखता है, और अपने पड़ोसी की पत्नी के बारे में सोचते हुए सो जाता है।
आपको दुष्टों की जुताई के बारे में और कोई प्रश्न नहीं होने चाहिए। लेकिन आप हर दिन की ओर तथा जो कर्तव्य आपको दिनभर निभाने हैं उनकी ओर कैसे देखते हैं? क्या आप दिन का उपयोग धर्मीजन के समान करते हैं, या दुष्ट मनुष्य के समान? क्या आपका हृदय परमेश्वर के साथ सही है, जो आपको उन सब बातों की ओर जो आप करते हैं, एक विनम्र नज़रिया और एक भक्तिपूर्ण दृष्टिकोण और उद्देश्य दिलाता है? जो कुछ भी इसके विपरीत है वह आपके जीवन को पाप बनाता है।
पाठक, यह आपका गंभीर कर्तव्य है कि आप अपने हृदय को पाप से शुद्ध रखें। बिना किसी विचलन के परमेश्वर के साथ चलने के लिए अपनी आत्मा की जांच करें। यदि आप समझौते को जैस का तैस रहने देते हैं, तो आपके परिश्रम और प्रार्थना पाप बन जाते हैं। और उसकी कड़ी ताड़ना आप अपने ऊपर ले आएँगे। इसलिए हृदय से, अपनी दृष्टि में, और अपने कार्यों से, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिए किया जाए।
मसीही, यहां आपके लिए कोई डर नहीं है। यदि आप यीशु मसीह में विश्वास करते हैं और अपने पापों का अंगीकार करते हैं, तो परमेश्वर आपको क्षमा करेगा और आपको सभी पापों से शुद्ध करेगा (1 यूहन्ना 1:7-9)। परमेश्वर के पुत्र में विश्वास द्वारा शुद्ध किए गए तुम्हारे हृदय और मन में उत्साह हो तो उपेक्षित बातें भी उसके साथ आपके रिश्ते को नष्ट नहीं करेंगी (1 राजा 15:14)। धर्मी की वैध स्वतंत्रता एक महान महिमा है (तीतुस 1:15; रोमियों 14:22)। उसने आपको जो जीवन दिया है, उसका भरपूर आनंद लें, हर सुख के लिए उसका धन्यवाद करें। कड़ी मेहनत करो, अपनी पत्नी से प्यार करो, और खाओ और पियो जैसा कि वह तुम्हें निर्देश देता है (सभो 9: 7-10)।
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