नीतिवचन 21:27

दुष्टों का बलिदान घृणित लगता है; तब कितना अधिक जब वह महापाप के निमित्त चढ़ाता है।

धार्मिक कर्मकाण्ड स्वर्ग के परमेश्वर को प्रभावित नहीं करता। क्या आप इस नीतिवचन के शब्दों को सुन रहें हैं? क्या आप इसके सबक और चेतावनी को समझ पा रहें हैं? आप धार्मिक कर्मकाण्डों से अपने मूर्ख अंतर्मन को भले ही तसल्ली दे सकते हैं, लेकिन पाखंड परमेश्वर को क्रोध दिलाता है। यदि आपके जीवन में कोई पाप है, तो चर्च में आपकी उपस्थिति, आपका दान, आपके वचन और सेवा उसे घृणित लगते हैं (नीतिवचन 15:8; 28:9)। वह आपके इन सब धार्मिक कामों से घृणा रखता है! इन से उसे बू आती है! वह उन्हें बर्दाश्त नहीं कर सकता! और यदि आपकी धार्मिक सेवा में आपके इरादे बुरे हैं, तो वह इससे और भी अधिक नफरत करता है।

लोगों को धार्मिक कर्मकाण्ड करना अच्छा लगता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से वे परमेश्वर का सम्मान कर रहें हैं, और उन कर्मकान्डों से स्वयं को उसके सामने धर्मी ठहराना चाहते हैं, उन्हें देखनेवाले बाकी लोगों को खुश करना चाहते हैं और अपने मन को तसल्ली देना चाहते हैं। लोगों को धर्म बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि कर्मकाण्ड करना आसान है। चर्च जाना, बाइबल साथ में रखना, बाकी विश्वासियों से बातें करना, दानपत्र में पैसे डालना और भले काम करना आसान है। वे परमेश्वर से प्रेम करने का भी दावा कर सकते हैं। परन्तु अपने हृदय और जीवन का परिक्षण करना और उन प्रिय बातों को जड़ से उखाड़ कर फेंक देना जो बाइबल की शिक्षाओं के विपरीत हैं, बहुत कठिन है। आज कलीसियाओं में लोगों की एक बड़ी भीड़ धार्मिकता का चोला ओढ़े बनी हुई है। लेकिन परमेश्वर को पाखंड से घृणा है!

कुछ लोगों को धार्मिक कर्मकाण्ड इसलिए भी अच्छे लगते हैं क्योंकि इनसे उन्हें कुछ न कुछ फ़ायदा होता है। वे अपनी महिमा कराने, व्यावसायिक लाभ पाने या लड़कियों और औरतों को अपना शिकार बनाने के लिए चर्च में जाते हैं (1 शमूएल 2:12-17,22; मत्ती 6:1-6; 23:14)। वे स्वेच्छा से चर्च के कुछ कामों की ज़िम्मेदारियाँ ले सकते हैं। हर शहर में ख्रिश्चन समाज के कुछ चर्च होते हैं जहाँ लोग एक-दूसरे को खुश करते हैं। ये लोग प्रायः संदेहवादी, उदारमतवादी या नास्तिक होते हैं; उन्हें परमेश्वर से कोई लगाव नहीं है। वे अपनी स्वार्थी महत्वाकांक्षाओं की प्राप्ति के लिए धर्म का उपयोग करते हैं। और परमेश्वर उन से कपटियों से भी अधिक बैर रखता है!

कुछ लोगों को धर्म और धर्म की बातें सिर्फ़ इसलिए अच्छी लगती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इनसे उनके पाप करने के बुरे इरादे छिप जाते हैं। बिलाम का धार्मिक दिखावा (गिनती 23:1-3), अबशालोम का धर्म की आड़ लेकर विश्वासघात करना (2 शमूएल 15:7-13), इज़ेबेल का नाबोत की हत्या के लिए उपवास रखना (1 राजा 21:9-13), व्यभिचारिणी का अपने शिकार को अपनी धर्मपरायणता दिखाकर फँसाना (नीतिवचन 7:13-14), और अपना पेट भरनेवाले चर्चों में के झूठे शिक्षक (2 पतरस 2:12-19), जैसे लोगों पर विचार करें। ये सभी पाप के प्रति अपने प्रेम को छुपाने के लिए धर्म का उपयोग करते हैं, परन्तु परमेश्वर उनसे पाखंडियों से भी अधिक नफरत करता है!

सब लोग अपने आप से झूठ बोलते हैं (यिर्मयाह 17:9)। अदन की वाटिका की घटना के बाद से, लोगों ने सत्य और धार्मिकता के स्थान पर छलावा और झूठ को ही चुना है। वे कल्पना करते हैं कि परमेश्वर उनकी धार्मिक कर्मकाण्ड के कारण उनके कुछ या यूँ कहों कि सब पापों को नज़रअंदाज़ कर देता है। लेकिन वे सरासर गलत हैं। परमेश्वर पाखंड से घृणा करता है, और वह उनकी सारी आराधना से घृणा करता है। वह ऐसी आराधना को पाप मानता है (यशायाह 1:13)! वह इससे नफरत करता है (यशायाह 1:14)! और वह ऐसे लोगों की प्रार्थनाओं को न सुनने की कसम खाता है (यशायाह 1:15)!

इस्राएल जानता था कि पृथ्वी के सभी राष्ट्रों में केवल उन्हें ही सच्चे परमेश्वर की सच्ची आराधना करने का दायित्व और सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उनके पास यहोवा का मंदिर था, वेदी थी, याजकत्व भी उन्हें ही मिला था, भविष्यवक्ता भी उन्हीं में से थें और व्यवस्था भी उन्हें ही सौंपी गई थी। लेकिन उन्होंने धर्म के इन बाहरी रूपों में अपने आप को ज्यादा तसल्ली दीं, इसलिए परमेश्वर ने उनकी पवित्र जीवन से रहित यरूशलेम के मंदिर में जाकर आराधना पर भरोसा करने की मानसिकता का मज़ाक उड़ाया (यिर्म 7:1-15)। फिर उसने सुलैमान के मंदिर का विनाश करने के लिए कसदियों को भेजा और बाद में जरुब्बाबेल के मंदिर को नष्ट करने के लिए रोमियों को भेजा। सावधान!

धार्मिक पाखंड के लिए परमेश्वर ने अक्सर इस्राएल को दोषी ठहराया (भजन 50:7-23; यशायाह 1:10-20; 58:1-7; 66:1-4; यिर्म 6:20; 7:1-15; होशे 8:11- 14; आमोस 5:21-24; मिका 6:6-8; मलाकी 2:1-9)। उसने उनके बैलों के बलिदान को मनुष्य की हत्या के समान, मेमने के बलिदान को कुत्ते की गर्दन के समान और उपहार को सूअर के खून के समान माना और उनका मूल्य भी वैसे ही समझा (यशायाह 66:3)। नये नियम में यह अलग नहीं है। यीशु मसीह ने लौदीकिया के लोगों से कहा कि वह उन्हें उनके गुनगुने धर्म कारण अपने मुंह से बाहर फेंक देगा (प्रकाशितवाक्य 3:14-19)।

आपको क्या लगता है कि आप पाखंड से कब तक और किस हद तक बच सकते हैं? थोड़ा? आप गलत माप रहें हैं! जिस परमेश्वर का अन्त में तुम्हें सामना करना है उसकी आँखों के सामने सब वस्तुएँ खुली और प्रगट हैं (इब्रानियों 4:12-14)। उसकी आँखें हर जगह टिकी रहती हैं, और जो कुछ तुम करते हो, चाहे बुरा या भला, दोनों पर वह अपनी दृष्टि रखता है (नीति 15:3)। वह हम से हमारा संपूर्ण मन और पवित्र जीवन की मांग करता है (मत्ती 6:24; 22:27)। इससे कम कुछ भी आध्यात्मिक व्यभिचार के रूप में गिना जाता है और इसके लिए वह गंभीर रूप से न्याय करेगा (याकूब 4:1-10; प्रकाशितवाक्य 2:1-5)।

यीशु मसीह का धर्म ऐसा है जिसमें शुद्ध हृदय और पवित्र जीवन आवश्यक है (यूहन्ना 4:24; रोमियों 12:1-2; याकूब 1:27)। यीशु ने आंतरिक पवित्रता के बिना बाहरी धर्म-काण्ड की भर्त्सना की (मत्ती 5:17-20; 6:1-6; 23:23-28)। उसने चेतावनी दी कि बलिदान चढ़ाने से पहले दूसरों के साथ मेल-मिलाप करा लें (मत्ती 5:21-26)। अवज्ञा धार्मिक आराधना को मूर्तिपूजा और जादू-टोने में बदल देती है (1 शमूएल 15:22-23)। यह अंतिम दिनों का विपत्तिकारक समय है जब लोग भक्ति का सिर्फ़ दिखावा करेंगे (2 तीमु 3:1-5)।

अब से आगे कोई भी धर्माचरण करने से पहले आपको कौन से पाप स्वीकार करने चाहिए? आपको हर उस पाप को स्वीकार करना चाहिए जो आपको याद आता है, और जो पाप आप नहीं देख पा रहें हैं उन्हें दिखाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें (भजन 139:23-24; 19:14)। इस नीतिवचन को दोबारा पढ़ें। आपके जीवन में पाप की आदत रहते हुए आप अपने मुँह से बाइबल के पवित्र परमेश्वर का नाम लेकर उसके साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहेंगे (भजन 50:16-23; यहेज़केल 20:39)। अब उसके पास जाओ, क्योंकि जो कोई सच में अपना मन फिराता है उसे वह क्षमा कर देगा।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।