नीतिवचन 21:26
कोई ऐसा है, जो दिन भर लालसा ही किया करता है, परन्तु धर्मी लगातार दान करता रहता है।
सभी मनुष्य एक जैसे नहीं हैं। मेहनती लोग आलसी लोगों से कहीं अधिक कुलीन होते हैं। लालच करने से देना कहीं अधिक बेहतर है। आलसी लोग हर समय लालसा करते हैं; मेहनती और धर्मी मनुष्य उदारतापूर्वक दान करते हैं।
धर्मी और दुष्ट के बीच का अंतर बहुत बड़ा है, और इसमें आपकी कार्य नीति और दानशीलता शामिल है। परमेश्वर जीवन के सब पहलूओं को देखता है, और धर्मी जन व्यापार और दान के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होते हैं (नीतिवचन 15:3)। पाठक, आप आलसी हैं या मेहनती?
यह नीतिवचन इसके पहले वाले नीतिवचन से जुड़ा है, “आलसी अपनी लालसा ही में मर जाता है, क्योंकि उसके हाथ काम करने से इन्कार करते हैं” (नीतिवचन 21:25)। आलसी मनुष्य, हालांकि हर समय सोते रहते हैं या खेलते रहते हैं, फिर भी उन वस्तुओं की चाह करके अपनी शांति नष्ट कर लेते हैं जो उनके पास नहीं हो सकती, क्योंकि उन्हें काम से घृणा होती है। अभिलाषाएँ दिन-रात उनका पीछा करती हैं; दूसरों से ईर्ष्या निरंतर ताप पैदा करती है; पर फिर भी वे परिश्रम नहीं करते।
आलसी मनुष्य चरित्र से भ्रष्ट और अच्छी बातों के प्रति विद्रोही होते हैं। वे आलसी और लालची होने के कारण मन के विकृत होते हैं – दो विपरीत दुर्गुण। जहाँ आलसीपण उन्हें भूखा मारता है, वहीं उनकी लालसाएँ उन्हें नष्ट कर देती हैं। वे दूसरों से दान लेकर अच्छाई की अवहेलना करते हैं और जरूरतमंदों को देने के बजाय और अधिक की चाह रखते हैं। वे दूसरों से पाना चाहते हैं, जबकि वे स्वयं की और दूसरों की मदद करने से इनकार करते हैं।
आलसी मनुष्य लालच करता है – वह वह चाहता है जो उसके पास नहीं है और जिसे पाने के लिए वह काम नहीं करेगा। वह अपनी योग्यता से कहीं अधिक की लालसा करके लालच करता है या अपनी क़ाबलियत से कही अधिक उपभोग कैसे किया जाए यह जानता है। वह यह लालसा दिन भर करता है, क्योंकि वह अन्य पुरुषों के समान किसी काम या और व्यवसाय में लाभकारी रूप से व्यस्त नहीं है। उसकी अभिलाषाएं कभी नहीं छूटतीं, क्योंकि दूसरों के फायदे और संपत्ति उसे लगातार परेशान करती रहती हैं।
धर्मी जन बहुत अलग होता है। परमेश्वर उससे प्रेम करता है, और वह परमेश्वर से प्रेम करता है, और वह अपने पड़ोसी से भी प्रेम करता है। वह अपनी सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन ईमानदारी से काम करता है और उसके पास वास्तव में जरूरतमंदों को देने के लिए पर्याप्त धन बच जाता है (लेकिन आलसियों को देने के लिए नहीं)। जब वह देता है तो उदारतापूर्वक देता है; वह दान देने से कभी घृणा नहीं करता; वह अपनी कमाई बिखेरता है (नीतिवचन 11:24-26; सभो 11:1-6)।
कड़ी मेहनत करने का एक अच्छा कारण, जैसे कि धर्मी लोग करते हैं, और वह कारण है धन दान करना। यह भक्ति है (इफि 4:28; लूका 3:11; भजन 112:9; 1 तीमु 6:17-19)। अच्छे लोग पाने की अपेक्षा देने की, दूसरों से अपनी सेवा करवाने की अपेक्षा दूसरों की सेवा करने की, प्रेम पाने की अपेक्षा प्रेम करने की अधिक परवाह करते हैं। लेने से देना धन्य है, फिर भी सात मनुष्य भी किसी आलसी को इस नियम को समझा नहीं सकते (नीतिवचन 26:16; प्रेरितों 20:35)।
प्राकृतिक और अलौकिक नियम हैं – दोनों ही आलसी के विरुद्ध काम करते हैं; दोनों मेहनती के पक्ष में काम करते हैं। पहला, प्राकृतिक: आलसीपन गरीबी और गुलामी को ले आता है; परिश्रम धन और शक्ति को ले आता है (नीतिवचन 10:4; 12:24; 13:4; 22:29)। फिर, अलौकिक: परमेश्वर आलसियों की स्वार्थी मेहनत पर पानी फेर देता है, परन्तु वह मेहनती को सफ़लता देता है (नीतिवचन 15:19; 22:5; 28:20)। इस प्रकार, मेहनती लोग आलसियों पर ज्यामितीय दृष्टि से आगे बढ़ते हैं, जैसा कि परमेश्वर ने चाहा है (लूका 19:24-27; सभोपदेशक 2:26)।
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