नीतिवचन 21:16
जो मनुष्य समझ के मार्ग से भटक जाता है सो मृतकों की मंडली में पड़ा रहेगा।
जीवित रहने का केवल एक मार्ग है। यदि आप उस मार्ग से भटक जाए, आप दुर्दशा और अशान्ति की एक जीवित मृत्यु के लिए, आनन्द और शान्ति के एक जीवन को त्याग देते हैं। आप एक से अधिक तरीके से मर सकते हैं। आप के चारों ओर के पापी, बहुतायत के जीवन के बिना, जो परमेश्वर ने ‘उस’ की सन्तानों के लिए ठहराया है, क्रियात्मक रूप से मृत हैं।
सच्चे परमेश्वर की सेवा और आराधना का केवल एक मार्ग है। यदि आप उस नियमनिष्ठ मार्ग से भटकते हैं, तो आप एक आत्मिक जीवन से भरी कलीसिया को एक ऐसी कलीसिया के लिए त्यागते हैं जो निर्जीव लाश है, भले ही उसके सदस्य लाऊड-स्पीकरों से कितना ही शोर करे और चका-चौंध बत्तियों से प्रकाश उत्पन्न करते हों। आप कुत्ते और सुअरनी के समान, मानव मत और प्रथाओं की छांट और कीचड़ की ओर लौट गये हैं (2 पतरस 2:21-22)।
जीने का एकमात्र मार्ग, सीधा और संकरा मार्ग है जो जीवन को पहुंचाता है (मत्ती 7:13-14)। यह आपकी वासनाओं के लिए उत्तेजक नहीं है। यह संसार के लिए लोकप्रिय नहीं है। परन्तु यह सही है, और यह एक उद्धार प्राप्त आत्मा की पवित्र इच्छाओं को आनन्दित करता है। ये वो मार्ग है जो धर्मशास्त्र की बुद्धि द्वारा सर्वेक्षित और परमेश्वर के कथनों की ठोस चट्टान से तैयार किया गया है। कोई भी अन्य मार्ग, नरक की ओर एक फिसलन भरी ढलान है।
यदि आप आपके जीवन का घर बाइबल की शिक्षाओं पर बांधेंगे, आप के पास एक ऐसा जीवन होगा जो उन तूफानों के मध्य सहजता से खड़ा रहता है, जो दूसरों को चकनाचूर कर देते हैं। यह समझ का मार्ग है। परन्तु यदि आप मानव मत की बालुओं पर घर बनाते हैं, तूफान आप के घर को बहा ले जाएंगे (मत्ती 7:24-27)। झूठी शिक्षाओं का झोंका प्रहार करेगा और दिखायेगा कि आप के पास कभी भी एक भक्तिमय नींव नहीं थी (1 कुरि. 11:19)। आप ‘न्याय के दिन’ में परमेश्वर के पवित्र व न्यायोचित क्रोध के तूफान के सम्मुख कभी खड़े नहीं रहने पाएंगे।
निस्संदेह, कोई भी व्यक्ति दलदल में, जिसे मृत्यु नाम दिया गया है, भटकने का चुनाव नहीं करता। वह उस दलदल के नाम को ‘उचित मार्ग’ या ‘मेरा मार्ग’ में बदल देता है। वह मान लेता है कि उसकी दिशायें बेहतर हैं। मनुष्य का प्रत्येक मार्ग उसकी अपनी दृष्टि में सही होता है (नीति. 16:2, 25; 21:2)। समझ के मार्ग में बने रहने के लिए, आप को अपने मतों / विचारों से घृणा और उनके स्थान पर परमेश्वर के उपदेशों से प्रेम करना चाहिए (भजन 119:128; 2 कुरि. 10:5)।
अब्राम अपने भतीजे लूत को मूर्तिपूजक कसदियों से कनान देश में ले गया। लूत ने अपनी आँखों से परमेश्वर और उसके चाचा के बीच अद्भुत रिश्ते को प्रत्यक्ष रूप से देखा। परन्तु वह अपने परिवार को दुष्ट सदोम की ओर ले गया, और अन्त में एक गुफा में उसकी दो बेटियों के साथ, जो उस से ही गर्भवती हुई थी, पतित अवस्था में जा पहुँचा (उत्प. 13:12-13; 19:30-38)। ये पाँच, मृतकों की मंडली थी!
परमेश्वर की सेवा और आराधना करने का एकमात्र मार्ग बाइबल के द्वारा है। कौओं, कुत्तों और कीड़ों की आराधना करने में मनुष्य ने अपने बच्चों को जिन्दा जलाने से लेकर सब कुछ प्रयास किया है (2 राजा 17:17; रोमि 1:23)। ये सब कुछ घिनौना और घृणास्पद गोबर हैं, चाहे कितना ही ईमानदार अन्धा मूर्तिपूजक इसे कर रहा हो। यदि परमेश्वर की सेवा और आराधना धर्मशास्त्र के अनुसार न हो, ये किसी काम का नहीं, भले ही आराधक का चरित्र, आचार-व्यवहार या लूकप्रियता कुछ भी हो (उत्प 4:3-5; गिनती 20:7-13; 1 इति. 15:13)।
निस्संदेह, कोई भी कलीसिया एक दलदल में, जिसका नाम मृत्यु है, भटकने का चुनाव नहीं करती। वे दलदल के नाम को ‘सही मार्ग’, ‘हमारा मार्ग’, या ‘नया मार्ग’ में बदल देते हैं। वे मान लेते हैं कि चीजों को करने के पुराने तरीके की तुलना में, वे परमेश्वर को अधिक प्रसन्न करते हैं। वे इसे समकालीन और सामयिक व उत्तेजक आराधना कहते हैं। वे बाइबल में सुधार लाने और प्रभु की सहायता करना चाहते हैं। उनकी विचारधाराएं और मनसूबे बदबूदार हैं। परमेश्वर मांग करता है कि वे पुराने मार्गों को खोजें (यिर्म 6:16; यहूदा 1:3)।
कुरिन्थ की कलीसिया ने सोचा कि आत्मिक वरदान उनकी ग़लतियों पर परदा डालेंगे (1 कुरि.1:4-9)। उन्होंने आन्तरिक झगड़ों, उपदेशकों की गुटबन्दियों, आत्म-महिमामण्डन, व्यभिचार, मुकदमों, आसान तलाकों, स्वतंत्रता के दुरुपयोगों, दान-रहित जीवनों, मूर्तिपूजकों से साहचर्य, स्त्रियों के सिर पर छोटे बाल, पुरुषों के सिर पर लम्बे बाल, विवाद, प्रभुभोज की भ्रष्टता, वरदानों में घमण्ड, वास्तविक प्रेम की कमी, अन्य अन्य भाषाओं में बोलना, स्त्री उपदेशकों, पुनरुत्थान का अस्वीकरण, और कंगालों के देखभाल की उपेक्षा को अनुमति दी।
इनमें से कई आज अनेक कलीसियाओं की आम गलतियां हैं। परन्तु परमेश्वर ने इस प्रेरितिय कलीसिया को उसके सदस्यों को दुर्बल, रोगी, और मृत्यु का आघात देकर दण्ड दिया (1 कुरि 11:30)। और पौलुस ने अपनी पहली पत्री में उनका खुलकर सामना किया, जो मसीहियों ने लगभग 2000 वर्षों से पढ़ी है। यह सरलता से नया नियम में सबसे बद्तर कलीसिया थी और प्रशंसा करने के लिए कुछ भी नहीं था।
ऐसी कलीसिया कभी नहीं रही जिसने यीशु के लिए कुरिन्थ की कलीसिया से अधिक शोर किया हो। ऐसी कलीसिया कभी नहीं रही जो उस से अधिक आत्म-विश्वासी रही हो कि “पवित्र आत्मा उनके मध्य काम कर रहा था”। किसी भी कलीसिया ने उससे अधिक ऊँची आवाज़ में सुसमाचार प्रस्तुत नहीं किया। और वे सही थे। परन्तु बड़ी और घातक खतरा यह था कि उनका यीशु, आत्मा, और सुसमाचार ग़लत हो, क्योंकि उनसे याचना करनेवाले सेवक, मिथ्याभाषी झूठे शिक्षकों के समान वास्तव में शैतान के लिए कार्य कर रहे थे (2 कुरि. 11:1-4, 13-15)।
रोम की कलीसिया, जिसकी पौलुस ने उन्हें लिखी अपनी पत्री में प्रशंसा की, हर एक अशुद्ध आत्मा और अशुद्ध और घृणित पशु से भरी हुई, प्रकाशितवाक्य की ‘बड़ी वेश्या’ बन गई (रोमि. 1:8; प्रका. 17:3-6; 18:1-8)। इस ने यूहन्ना को बहुत अचम्भित किया। ये कैसे हुआ? एक प्रेरितिय कलीसिया कैसे खून की प्यासी, मसीह का विरोध करनेवाली व्यभिचारिणी कलीसिया और रोम की वेश्यालय बन सकती है?
उन्होंने तथाकथित कलीसिया के पितामहों के विचारों के लिए धर्मशास्त्र के उपदेशों को छोड़ दिया। उसने दलदल की ओर एक पथ पर चलना आरम्भ कर दिया, जिस में अब मनुष्य को ज्ञात प्रत्येक घृणित वस्तु है। परमेश्वर उस में या उसकी पुत्री कलीसियाओं में शेष किसी सन्त को क्या कहता है? “हे मेरे लोगों उस में से निकल आओ” (प्रका 18:4)। उन्हें यीशु मसीह की एक स्थानीय कलीसिया में धार्मिकता और सत्य के बहुतायत के आत्मिक जीवन को ढूंढने के लिए मृतकों की मंडली को छोड़ना चाहिए।
क्या हुआ? इसका आरम्भ कैसे हुआ? क्या पास्टर ने प्रतिष्ठा की खोज की क्योंकि उसका चर्च स्रामाज्य के राजधानी शहर में था? क्या अपने आप को पास्टर की बजाय पुरोहित कहने से मूर्तिपूजकों का ध्रुविकरण किया गया? क्या इस पदवी ‘पोन्टिफैक्स मैक्सिमस’ [सर्वोच्च धर्मसंघी अधिकारी] ने कैसर की आराधना करनेवाले रोम को खुश किया? क्या शिशु बपतिस्मा की आज़माइश ने कुछ माताओं को सुख दिया? क्या इस मान्यता ने कि रोटी मसीह की वास्तविक देह और दाखमधु उसका वास्तविक लोहू था, प्रभु भोज के समय लोगों की उपस्थिति को बढ़ाया? क्या एक रविवार की सुबह ‘मरियम’ से प्रार्थना करने के प्रयोंग से कुछ माताओं की आँखों में आँसू आ गए? क्या एक सुन्दर मूर्ति की शिल्पकारिता ने शिल्पकारों को सदस्य बनाने प्रेरित किया? क्या स्त्रियों से उनके पुरोहितों के समक्ष पाप का अंगीकार करने के लिए कहने से, दृष्यरतिक सुख का आरंभ हुआ? क्या रोम के मूर्तिपूजकों के त्योहारों को मसीही नाम देने से और भी अधिक मूर्तिपूजक कलीसियाओं में जुड़ गए? क्या छिड़काव के बपतिस्मा के कारण वह व्यक्ति कुछ घबराहट से बच गया जब वह बपतिस्मा की हौदी को भरना भूल गया? क्या एक वाद्य से लोगों में संगीत के प्रति रुचि निर्माण हुई। क्या हुआ? उन्होंने अपने-आप का मृत्यु के साथ समझौता किया।
भटकनेवाला मनुष्य केवल एक, ग़लत, और पहला कदम उठाकर मृत्यु की दलदल में चला जाता है। हर पाप मात्र एक ग़लत विचार के साथ आरम्भ होता है। सब झूठे धर्म बढ़ते हुए समझौतों के कारण हैं। सभी भ्रष्ट उपासना पद्धति एक झूठ से आरम्भ होती हैं। सभी ग़लत तर्क-वितर्क एक झूठे आधार-वाक्य से आरम्भ होते हैं। प्रिय पाठक, आप ने सही मार्ग से, कहाँ से एक या अधिक कदम लिये हैं? पश्चात्ताप कीजिए! आप के चर्च ने धर्मशास्त्र के एक उपदेश से कहाँ समझौता किया है? मन फिराइये! क्योंकि सही मार्ग पर वापस आने का यही एकमात्र तरीका है। यदि आप इसे नहीं सुधारते हैं, आप खो चुके हैं। आरम्भ में कोण के एक अंश से हटना, केवल कुछ इंचों की ग़लती लग सकती है, किन्तु जितना आगे आप उस झूठी लकीर पर बढ़ते हैं, यह मीलों की ग़लती बन जाती है!
केवल धर्मशास्त्र परमेश्वर के एक जन को एक पास्टर बना सकता है, जो हर भले काम में सिद्ध हो (2 तिमु 3:16-17)। आज के सभी आविष्कार सत्य से रहित हैं (2 तीमु. 3:7), क्योंकि लोगों ने कथा-कहानियों के लिए खरे उपदेश को त्याग दिया है (2 तीमु. 4:3-4)। उन्होंने प्रेमी परमेश्वर को जीवन के सुख विलासों से प्रेम करने के लिए छोड़ दिया है (2 तीमु. 3:4)। रविवारों को इकट्ठा होने के द्वारा उनके पास भक्ति का एक रूप तो है, किन्तु उनके पास उस की जलन भरे अधिकार (2 तीमु. 3:5) और मांग की गई श्रद्धा (इब्रा. 12:28-29) का कोई सुराग नहीं है। ये कोलाहलपूर्ण, आपत्तिजनक, अहंकारी तथा-कथित मसीहीगण पौलुस की उन कठिन समयों की चेतावनी को परिपूर्ण करते हैं!
ये चर्च या कलीसियाएँ, मृतकों की मंडलियां हैं, भले ही कितने अपने सभा भवनों को मसीही रैप संगीत के साथ उनकी लज्जा का झाग उछालने के लिए भरते हैं। इफिसुस की कलीसिया के पास इसकी प्रशंसा करने के लिए बहुत सी चीजें थीं, किन्तु उन्होंने अपना पहला-सा प्रेम खो दिया था और ‘आत्मा’ खो देने पर थे, जो उन्हें एक मृत लोथ के रूप में छोड़ता (प्रका. 2:1-5; 3:1; याकूब 2:26)। इन आधुनिक विशाल – कलीसियाओं ने कभी वे भले काम नहीं किये जो इफिसुस ने किये, इस कारण वे अधिक मृत हैं और रहेंगे!
नया मार्ग जो उन्होंने ढूंढा है, मृत धर्म की ओर मार्ग है, भले ही ये कितना ही जीवन्त क्यों न दिखाई दे। जो ऊँचाई वे अपने कान-फोडू रॉक-एन-रोल संगीत, कूदा-कादी और शोर-शराब से भरी सभाओं से प्राप्त करते हैं, वह अधिक देर टिकती नहीं। वे आनन्दरहित शंख हैं जो शारीरिक भोग-विलास का पीछा कर रहे हैं; वे बाइबल के परमेश्वर को जानते तक नहीं। परमेश्वर धर्मसिद्धान्त, प्रथा, और शुद्धता के द्वारा मापता है; वे ध्वनि-तीव्रता, लोकप्रियता और विलास के द्वारा मापते हैं। वे प्रेरितिय मसीहियत से बाहर चले गये, क्योंकि वे कभी इसका सचमुच हिस्सा नहीं थे (1 यूहन्ना 2:19), और आत्मा में मरे हुए उनके ख़ाली स्थानों को भरते हैं।
यदि एक व्यक्ति मसीह के आरोग्यजनक शिक्षाओं को पूरी तरह छोड़ देता है, वह नहीं जानता कि वह किस विषय में बातें कर रहा है। वह कुछ भी नहीं जानता (1 तीमु. 6:3-5; यशा 8:20)। बुद्धिमान व्यक्तियों को या तो एक भटकते हुए व्यक्ति या एक भटकते हुए चर्च के साथ क्या करना है? उस मनुष्य से या उस कलीसिया से दूर हो जायें! “ऐसों से परे रहना” शब्दों के लिए 2 तीमु. 3:5 पढ़िये। “ऐसों से अपने को दूर कर” शब्दों के लिए 1 तीमु.6:5 पढ़िये। वे कब्रों के मध्य रह रहे हैं। उन से दूर हो जाए।
उनके पास भोले लोगों को धोखा देने के लिए अच्छे शब्द और सुन्दर वक्तव्य हैं, परन्तु वे मात्र पेट के पुजारी हैं (रोमि.16:18)। आप इसे कैसे जान सकते हैं? तब जब वे ‘नया नियम’ की शिक्षा के विपरीत कुछ करते हैं (रोमि.16:17)। उनके विषय में आप को क्या करना चाहिए? चिन्हित कीजिये और उन से दूर रहो (रोमि.16:17)। परमेश्वर के थोड़े से बचे सच्चे सन्तों को अवश्य स्थिर खड़े रहना और प्रेरितों द्वारा सिखायी गई प्रथाओं को थामे रहना चाहिए (2 थिस्स.2:15; यहूदा 1:3)। ये समझ का मार्ग है।
हाय, विश्वासयोग्य मसीही, क्या आप को आडम्बरपूर्ण रूप से घूरना चाहिए कि आप के पास सत्य है और आप समझ के मार्ग में सुरक्षित हैं? कदापि नहीं। आपका भाई पौलुस आप को बतायेगा कि अभिमानी न हों, इसके बजाए भय माने (रोमि 11:20)। वह आप को कहेगा कि भय माने, ऐसा न हो कि आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं से भी रहित हो जाए (इब्रा.4:1)। वह आप को बतायेगा कि अपने-आप में बहुत अधिक आत्म-विश्वास, आप पर ही असफलता और पतन ले आयेगा (1 कुरि.10:12)। अपने-आप को परमेश्वर के सम्मुख नम्र करें।
‘अदन की वाटिका’ के समय से ही सारा संसार समझ के मार्ग से भटक गया है, और लोग एक अनंतकाल की मृत्यु के लिए नरक में झुण्डों के साथ एकत्र होंगे। जबकि परमेश्वर ने मनुष्य को खरा और अच्छा बनाया, उसने अनेक अविष्कार खोज निकाले हैं कि परमेश्वर के मार्गों को भ्रष्ट करे (सभो. 7:29)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने उन सभी को नूह के समय में एक जलप्रलय के द्वारा नाश कर दिया, और अगली बार यह न-बुझनेवाली आग और उत्तप्त गर्मी के द्वारा किया जाएगा (2 पतरस 3:1-14; 2 थिस्स 1:7-9)।
आज मसीही कहलानेवाले देश भक्ति, धार्मिकता, और न्याय के मार्ग से भटक कर गर्भपात, बाल-विद्रोह, किसी भी कारण से तलाक, सुखमृत्यु, विकासवाद, मजदूर संघों, प्रार्थना का निषेध, ‘दस आज्ञाओं का निषेध, समलिंगी सम्भोग, भ्रष्ट मनोरंजन, और जादू-टोना के घातक दलदल में धंस गए हैं। मृत्यु का घण्टानाद बज रहा है, जब तक कि देश-देश पश्चात्ताप नहीं करते, और जब तक कि परमेश्वर इन मसीही राष्ट्रों को उनके अनेकों जघन्य पापों के लिए क्षमा करने का अनुग्रह नहीं करता।
अनेक तथा-कथित मसीही उनके विस्फोटक महा-चर्चों में सुख और जीवन की निश्चयता ढूंढ रहे हैं, जहाँ प्रकाश प्रदर्शनों, तीव्र संगीत, जनसमूह हथ-कंडा, बड़ी संख्या, सामाजिक गतिविधियाँ, सामुदायिक परियोजना, स्वैच्छिक सेवकाईयाँ, और रॉक स्टार पादरीगण उन्हें बताते हैं कि सब ठीक है। उनके पास उनके आत्म विश्वास के लिए यहूदा इस्करियोति से अधिक आधार नहीं है। ये जो समझ के मार्ग से भटक गये हैं, उनकी सभी धार्मिक गतिविधियों व संख्याओं की ओर इशारा करेंगे, परन्तु प्रभु यीशु मसीह खुलकर कहेगा कि ‘उस’ ने उन्हें कभी नहीं जाना (मत्ती.7:21-23)।
प्रभु यीशु मसीह, जो मार्ग, सत्य और जीवन है, पिता के पास लौटने का एकमात्र मार्ग है। अपने आप को ‘उस’ की दया पर सौंप दो ! स्वर्ग में एक अन्य भक्त मण्डली है। यह जीवतों की मण्डली है। इसकी इतनी सदस्यता है कि कोई मनुष्य गिन नहीं सकता। इस की सेवा करने अनगिनत स्वर्गदूत हैं। यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की महा-कलीसिया है ! यह यीशु मसीह की दुल्हिन और राज्य है। सभी सन्तगण वहाँ पर हैं। क्या आप ‘उस’ के सीधे और सकरे मार्ग का अनुसरण करने के लिए, नम्र आज्ञाकारिता में, प्रभु यीशु मसीह के सम्मुख गिरकर उन में जुड़ जाएगे?
आपको यीशु मसीह की एक ऐसी स्थानीय कलीसिया को ढूंढने की ज़रूरत है जो नया नियम’ के धर्मसिद्धान्त, रीतियों, आराधना और व्यक्तिगत जीवन- शैली के लिए, बिना समझौते या किसी प्रकार के अविष्कार के बाइबल के नियमों का पालन करती है। ऐसी कलीसियाएँ बहुत थोड़ी हैं, और शारीरिक मसीहियत की सांसारिक अतिविरूपताओं की तुलना में, जो इस समय धार्मिक जगत को बहा ले जा रही है, सदस्यता में कम होंगे। परन्तु आप उन शहीदों और अन्य लोगों के निकट संगति में होंगे जिन्होंने परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन किया और समझ के मार्ग में बने रहे (प्रका.12:17; 14:12)।
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