नीतिवचन 21:14
गुप्त में दी हुई भेंट से क्रोध ठण्डा होता है, और चुपके से दी हुई घूस से बड़ी जलजलाहट भी थमती है।
अगर किसी की उपद्रवी भावनाओं को शांत करना हो तो भेंट एक ताकतवर हथियार है। क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है (नीतिवचन 27:4), परन्तु भेंट उन दोनों को पराजित कर सकती है। इस नीतिवचन का सबक एक-दूसरे को उपहारों का आदान-प्रदान करना नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को दी जानेवाली गुप्त भेंट इस नीतिवचन का सबक है। बुद्धिमान मनुष्य अपनी आत्म-रक्षा में या बिखरें और खतरे में पड़े रिश्तों को फिर से स्थापित करने के लिए उपहारों का उपयोग करता है। दुष्ट मनुष्य न्यायाधीश या किसी क्रोधित अफ़सर को रिश्वत देकर न्याय और निर्णय को उखाड़ फेंकने के लिए भेंट का उपयोग करता है।
यहाँ बुद्धि और ज्ञान है! यहां दाऊद के समान अपने दोस्तों और दुश्मनों दोनों के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करने की समझ है (1 शमू 18:5,14,30)। क्या आपका कोई दुश्मन है? क्या कोई दोस्त आपसे नाराज़ है? आप भेंट देकर उसका क्रोध ठण्डा कर सकते हैं और उसके साथ मेलमिलाप कर सकते हैं। लेकिन इसे निजी तौर पर, गुप्त रीति से दें, ताकि आप भेंट को सबकी नज़रों में देकर खुद को महान न दिखा सकें। यदि आपका दोस्त जो आपसे ख़फा है, सोचता है कि आपने भेंट सिर्फ़ दिखावा करने के लिए दी है, तो आप मामले को सुधारने के बजाय बड़ी आसानी से और भी बदतर बना देंगे।
अपने बचाव के लिए लड़ना आमतौर पर बेवकूफी है। नरमी से दिया गया और व्यवहार क्रोध को ठण्डा करता है, लेकिन बहस आग में घी डालने का काम करती है (नीतिवचन 15:1,18; 17:14; 26:21; 30:33)। यदि आप बुद्धिमान बनना चाहते हैं तो शान्ति से बात करें और नाराज व्यक्ति को कोई भेंट दें। भेंट के कारण याकूब को एसाव के क्रोध को ठण्डा करने में मदद मिली थी (उत्पत्ति 32:3 – 33:9)। भेंट के कारण अबीगैल को दाऊद के क्रोध को ठण्डा करने में मदद मिली थी (1 शमू 25:2-35)। और दाऊद ने पलिश्तियों के विरुद्ध युद्ध में हार जाने के कारण यहूदा को प्रसन्न करने के लिए उपहारों का प्रयोग किया (1 शमू 29:1-11; 30:26-31)।
परमेश्वर प्रतिदिन अपने शत्रुओं को खुलेआम और गुप्त दोनों तरीकों भेंट देता है (मत्ती 5:43-48; प्रेरितों के काम 14:17)। ख्रिश्चानों को परमेश्वर की आज्ञा है कि उन्हें अपने दुश्मनों के साथ भलाई के कामों द्वारा सिद्ध बनना है, क्योंकि यह भलाई के काम ही हैं जो बुराई पर जय प्राप्त करते हैं – आपका भेंट देना आपके बदला लेने के विचारों पर विजय प्राप्त करता है (रोमियों 12:17-21)। किसी व्यक्ति के गुस्से या क्रोध के कारण अपने अंदर द्वेष या बदला लेने की भावना को जन्म देने के बजाय, उनकी बुराई और अपनी खुद की बुराई दोनों ही पर विजय पाने के लिए उन पर दया करने का महा मार्ग अपनाएं। सदियों से ख्रिश्चन लोग यही करते आ रहें हैं, और दुनियाभर में ऐसी ही करुणा के लिए जाने जाते हैं।
भेंट गुप्त रूप से दी जानी चाहिए, ऐसा न हो कि व्यर्थ दिखावे के कारण आप अपने अच्छे इरादों को भी कलंकित कर दें। “चुपके से दी हुई घूस” एक ऐसी भेंट है जो किसी व्यक्ति को दूसरों की नज़रों से बचाकर दी जाती है। इसे गुप्त रूप से देकर, आप शेख़ी बघारने से बचते हैं, और इससे भेंट पानेवाले को लालच का अहसास नहीं होता। किसी की सबके सामने चाटुकारिता करना इस नीतिवचन के पाठ के बिल्कुल विपरीत है।
यहाँ एक चेतावनी है! यद्यपि गुप्त या चुप के से घूस स्वीकार की जा सकती है और इससे आप सजा से बच सकते हैं या सज़ा या सज़ा को कम करवा सकते हैं, फिर भी यह केवल एक दुष्ट व्यक्ति है जो न्याय को बिगाड़ने के इरादे भेंट देता है, और परमेश्वर न्याय करेगा (17:23; निर्गमन 23:8; व्यवस्थाविवरण 16:19; 1 शमू 8:3; मीका 7:3)।
इस नीतिवचन का सबक हमारे प्रभु पर भी लागू होता है। यदि आपने स्वर्ग के अपने पिता को क्रोधित किया है, तो वह चाहता है कि आप उसे गुप्त भेंट दें और गुप्त में प्रार्थनाएँ करें, न कि दूसरों को दिखाने के लिए सार्वजनिक रूप से (मत्ती 6:1-6,16-18)। यदि तुम गुप्त में दोगे, तो वह तुम्हें खुलेआम सबके सामने आशीष देगा। कितना वैभवी ज्ञान!
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