नीतिवचन 21:13

जो कंगाल की दोहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी।

आपकी बात भी उसी तरह सुनी जाएगी जिस तरह आप दूसरों की बात को सुनते हैं! यदि आप सहायता के लिए निर्धनों की दोहाई को उपेक्षा करते हैं, तो परमेश्वर और दूसरे लोग भी आपकी बात तब नहीं सुनेंगे जब आप उससे या उन लोगों से सहायता के लिए हताशापूर्ण होकर पुकारेंगे। निस्संदेह, यह नियम केवल वास्तविक निर्धन लोगों पर लागू होता है, जिनके जीवन में परमेश्वर कार्य करते हैं। परमेश्वर से प्राप्त हुए सत्य और ज्ञान आपको उन लोगों की सहायता करने की अनुमति नहीं देता जो आलस्य के कारण निर्धन होते हैं।

क्या आपको दूसरों के मामलों में शामिल होना पसंद नहीं है? आप मानते हैं कि दूसरे लोग उन निर्धनों की देखभाल करेंगे? आप बहुत ही व्यस्त रहते हैं? आप भविष्य के लिए धन जोड़ रहे हैं और आपके पास निर्धनों को देने के लिए पैसे नहीं हैं? आपको नहीं पता था कि उन्हें बहुत अधिक आवश्यकता है? आप अगली बार उनकी सहायता करेंगे? जब आप स्वयं सहायता के लिए पुकारेंगे, तो परमेश्वर भी आपके लिए इसी तरह के बहाने बनाएगा, क्योंकि वह आपकी घृणा, आलस्य, स्वार्थ, लोलुपता और लालच को देखता है।

जब आप किसी आवश्यकता में होंगे, जब कोई विपत्ति आपके दिल और दिमाग में डर बैठा देगी, और आप परमेश्वर की दया के लिए पुकारेंगे कि वह आपको बचाए और आपकी सहायता करे, तब वह भी आपकी प्रार्थना को नहीं सुनेगा; वह आप पर हँसेगा, और वह आपको शापित करेगा (नीतिवचन 1:26-31; 28:27)।परंतु वह हमेशा उन निर्धनों की पुकार सुनेगा जो आपके विरुद्ध इस कारण रोते हैं कि आपने उनकी सहायता नहीं की जबकि आप कर सकते थे (निर्गमन 22:21-24)।

एक यहूदी याजक और एक लेवी ने अपने ही घायल देशवासी को एक नाले में अधमरी अवस्था में पड़े हुए देखकर भी अनदेखा कर दिया (लूका 10:30-32)। वे उसमें शामिल नहीं होना चाहते थे। वे बहुत ही व्यस्त थे। उनके पास दिन भर करने के लिए बहुत कुछ था। उन्हें अपने पैसे का उपयोग कहीं और करना था।परंतु एक सामरी यात्री ने, जिसका देश सांस्कृतिक पक्षपात के कारण यहूदियों से नाराज़ था, उस घायल व्यक्ति पर दया की और उसकी देखभाल की (लूका 10:33-35; यूहन्ना 4:9)। यह व्यक्ति अपने पड़ोसी से प्रेम करता था, और वह निश्चित रूप से धन्य था। आप इस बात से निश्चिंत हो सकते हैं कि स्वर्ग के महान परमेश्वर ने अवश्य रूप से बाद में आवश्यकता पड़ने पर उस याजक और लेवी की उपेक्षा की होगी।

परमेश्वर निर्धनों की देखभाल करता है। इस बात को कभी न भूलना (व्यवस्थाविवरण 15:7-11; भजन संहिता 68:5)। जब आप उन्हें अनदेखा करते हैं तो वह देखता है; और जब आप उनकी सहायता करते हैं तो वह तब भी देखता है। वह पहले को शापित करेगा और दूसरे को आशीष देगा (नीतिवचन 11:26; 19:17; 22:9; 24:11-12; 28:27; 29:7; भजन संहिता 41:1-3)। और बाकी मनुष्य भी ऐसा ही करेंगे! वे आपकी आवश्यकता के समय में आपकी निर्दयता का बदला आपको देंगे। यह चुनाव आपका है, परंतु इसके परिणाम भयानक होंगे। जब भी आपको किसी की वैध आवश्यकता का पता चले, तो कभी भी उसकी उपेक्षा मत करना।

परमेश्वर की नज़र में केवल़ वास्तविक रूप से निर्धन लोग ही मायने रखते हैं। मूर्ख या आलसी लोगों को भूखा ही रहना चाहिए; वे किसी चीज़ के लायक नहीं होते (नीतिवचन 20:4; 2 थिस्सलुनीकियों 3:10)। सबसे पहले आप अपने परिवार की देखभाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं (1तीमुथियुस 5:8), फिर अपनी कलीसिया के निर्धनों की देखभाल के लिए (प्रेरितों के काम 2:44-45), फिर अन्य सच्चे कलीसियाओं के निर्धन लोगों की देखभाल के लिए (प्रेरितों के काम 11:27-30), और फिर उन अपरिचितों की देखभाल के लिए प्रतिबद्ध हैं, (लूका 10:25-37; अय्यूब 31:16-22)। बाइबल आपको संसार के सभी निर्धन लोगों के बोझ से दबने के लिए नहीं कहती, क्योंकि ये चार ज़िम्मेदारियाँ ही आपके लिए पर्याप्त होंगी।

जब आप रात्रिभोज की योजना बनाते हैं और विचार करते हैं कि किसे आमंत्रित किया जाए, तो आपको उन लोगों को आमंत्रित करना चाहिए जो ज़रूरतमंद हैं और जो आपको बदले में कुछ नहीं दे सकते। क्योंकि उनका भाग परमेश्वर चुकाएगा। यही यीशु मसीह की व्यवस्था है (लूका 14:12-14)। केवल अपने मित्रों के बारे में न सोचें, क्योंकि स्वर्ग का महान परमेश्वर आपके इस स्वार्थ पर नज़र रखेगा और आपकी विपत्ति के दिन आपकी उपेक्षा करेगा। यही कारण है कि कुछ लोग धन्य होते हैं और अन्य लोग शापित। निर्धन लोगों के प्रति आपका मन कितना सचेत और करुणामय है?

अनंत जीवन प्राप्त करने का एक बहुत महान प्रमाण यह होता है कि क्या वह व्यक्ति यीशु मसीह के नाम से निर्धन लोगों की धन द्वारा सहायता करने के लिए इच्छुक है या नहीं। इसे प्रेम का श्रम कहा जाता है, और यह परमेश्वर के चुनाव को प्रमाणित करता है (2 थिस्सलुनीकियों 1:2-4; गलातियों 5:6)। परमेश्वर अपने संतानों के प्रति दान के कार्यों को कभी नहीं भूलेगा (इब्रानियों 6:10; मत्ती 25:31-46)। इस प्रकार एक उदार व्यक्ति आने वाले समय, अर्थात न्याय के दिन के लिए एक अच्छी नींव रख सकता है और इस तरह आनंदित होकर दान करने के द्वारा वह अनंत जीवन के वारिस बन सकते हैं( 1 तीमुथियुस 6:17-19)।

क्या आप एक उदार व्यक्ति हैं? या नाबाल की तरह मूढ़ हैं? परमेश्वर पहले से प्रेम करता है और उसे आशीष देता है, परंतु दूसरे से घृणा करता है और शापित करता है (यशायाह 32:5-8; 1 शमूएल 25:2-3)। आप इन दोनों मे से कौन हैं? उदार लोग ज़रूरतमंदों की सहायता करने में रचनात्मक और उदार होते हैं, और परमेश्वर उन्हें अपनाता है और आशीषित करता है, अभी और न्याय के दिन, दोनों समय ( (यशायाह 32:8; नीतिवचन 22:9)। मूढ़ लोग स्वार्थी और दुष्ट होते हैं, और वे दूसरों की सहायता करने से कतराते हैं क्योंकि वे भ्रष्ट होते हैं, भले ही उनकी कुछ भी आवश्यकता हो।

यह एक स्वर्गीय रहस्य है कि आर्थिक रूप से ऊपर उठने का सबसे अच्छा तरीका दूसरों की धन से सहायता करना है (नीतिवचन 19:17, नीतिवचन 28:27)। “ऐसे हैं, जो छितरा देते हैं, तौभी उनकी बढ़ती ही होती है; और ऐसे भी हैं जो यथार्थ से कम देते हैं, और इस से उनकी घटती ही होती है।उदार प्राणी हृष्ट-पुष्ट हो जाता है, और जो दूसरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी” (नीतिवचन 11:24-25)।

एक धनी व्यक्ति जो इस जीवन में किसी भिखारी को खाने का टुकड़ा देने से मना करे, उसे अनंत काल के अधोलोक की आग में पानी की एक बूंद भी नहीं दी गई जाएगी (लूका 16:19-26)। यीशु मसीह आपको धनवान बनाने के लिए स्वयं निर्धन बन गया, और आपको भी अपने भाइयों के लिए भी ऐसा करने में सबसे आगे रहना चाहिए (2 कुरिन्थियों 8:9; 1 यूहन्ना 3:16-19)। परमेश्वर की संतानों की देखभाल करना इस बात का सर्वोच्च प्रमाण है कि आप भी परमेश्वर की संतान हैं।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।