नीतिवचन 9:8

ठट्ठा करनेवाले को न डाँट, ऐसा न हो कि वह तुझ से बैर रखे, बुद्धिमान को डाँट, वह तो तुझ से प्रेम रखेगा।

परख करना सीखें। क्या आप एक ठट्ठा करने वाले और एक बुद्धिमान की पहचान कर सकते हैं? क्या आप जानते हैं कि उनमें से हर एक के साथ कैसे व्यवहार करना है? परमेश्वर चाहता है कि आप लोगों के साथ व्यवहार करने में चतुर और सफल हों। ठट्ठा करने वालों से बचे, क्योंकि वे सत्य जानने के योग्य नहीं हैं और वे आप से बैर रखेंगे; बुद्धिमान को सुधारे, और वे आपसे प्रेम रखेंगे।

अपने चरित्र का परीक्षण करें। क्या आप एक ठट्ठा करने वाले मनुष्य हैं या बुद्धिमान? दोनों में विशाल अंतर है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप सुधार को किस रूप में लेते हैं? आप या तो नीतिवचन के अनुसार सबसे बुरे, या सबसे उत्तम, या दोनों के बीच के झूलने वाले व्यक्ति हैं। परमेश्वर और भले मनुष्य या तो आप पर और अधिक सत्य प्रकट करेंगे अथवा आपको अपनी ग़लत विचारधारा और जीवनशैली में रहने देंगे।

अपना भविष्य देखे। अगर आप एक ठट्ठा करने वाले हैं – माता-पिता और पास्टर्स का मखौल उड़ा रहे हैं, जिन्हें परमेश्वर ने आपको चेतावनी देने के लिए भेजा है – तो परमेश्वर ने आपको पहले से ही सत्य जानने से वंचित कर दिया है। इस संभावना से आपको भयभीत होना चाहिए। यदि आप उसकी चेतावनियों और संदेशवाहकों से प्रेम करते हैं, तो वह आप पर और अधिक सत्य प्रगट करेगा।

मनुष्य दो प्रकार से फटकार अथवा डांट के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं; यह अंतर उनके चरित्र और हृदय को दर्शाता है। कुछ सुधार का मूल्य समझते हैं, इससे सीखते हैं, और संदेशवाहक से प्रेम रखते हैं। अन्य लोग इससे बुरा मानते हैं और इसे अस्वीकार करते हैं और संदेशवाहक से बैर रखते हैं। पहले अपना चरित्र निर्धारित करें, और तब बुद्धिमानी के साथ दूसरों की पहचान करें।

यहां कौन-कौन से सबक हैं? पहला, और कुछ कम महत्वपूर्ण, आपको सुधार के लिए एक बुद्धिमान व्यक्ति की तरह प्रतिक्रिया देना सीखना होगा। दूसरा, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है, आपको दूसरों के चरित्र को पहचानना सीखना होगा और जैसा नीतिवचन बताता है उनके साथ वैसा व्यवहार करना होगा। कुछ लोग फटकार और परमेश्वर के सत्य के योग्य नहीं होते हैं। तीसरा और अंतिम, अगर परमेश्वर आपको ठट्ठा करने वाले को ठुकराने के लिए कहता है, तो अनुमान लगाए कि उसने पहले से ही उनके साथ क्या किया होगा।

बुद्धिमान मनुष्य सुधार किए जाने से प्रीति रखते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि बुद्धिमान होने का यही एकमात्र तरीका है (नीति 9:9)। यह सच है, भले ही सुधार से दुख पहुंचता हो (भजन 141:5)। वे जानते हैं कि सच्चा प्रेम उनको फटकारेगा और घायल करेगा, और वे इसे शत्रुओं के चुंबन और छल-कपट वाले प्रेम के ऊपर स्थान देते हैं (नीति 27:5-6)। जब आप ऐसे व्यक्ति को फटकारेंगे, तो वह इसे सराहेगा और इसके लिए आपसे प्रेम करेगा, अत: फटकार लगाए (नीति 25:12)।

किंतु मूर्ख सुधार किए जाने से बैर रखते हैं, क्योंकि उनके अज्ञानी हृदय ये मान लेते हैं कि वे सही हैं (नीति 12:15; 23:9)। ठट्ठा करने वाले मनुष्य मूर्खों से भी बढ़कर बुरे हैं, क्योंकि उनका प्रबल घमंड डांट ग्रहण नहीं करेगा; वे संदेश और संदेशदूत से घृणा करेंगे (नीति 9:7)। उनका धृष्ट अहंकार उन्हें निर्देश, सुधार, या चेतावनी को तुच्छ जानने का कारण बनता है (नीति 26:12)। उनसे सावधान रहें, प्रिय मसीही।

एक धृष्ट और आत्म-धर्मी व्यक्ति अच्छे तर्क करने वाले सात मनुष्यों को त्याग देगा (नीति 26:16)। ठट्ठा करने वाले उस सलाह को ठुकरा देते हैं जो उन्हें बचा सकती थी, क्योंकि वे अभिमान के कारण सुधारे जाने से घृणा करते हैं। वे इतने दिनों से घमंड की रोटी खाते आए हैं, कि वे अब आशा से परे हैं (नीति 21:24)। वे मनुष्यों के लिए घृणित हैं (नीति 24:9); यदि आप बुद्धिमान हैं, तो आप उनको निकाल देंगे (नीति 22:10)।

जबकि आप उन्हें कुछेक बार उनका मुंह बंद करने के लिए डांट सकते हैं (नीति 26:5), फिर भी आपको बुद्धिमान कारणों से जल्द ही उनसे बहस करना रोकना होगा (नीति 26:4; 23:9)। ऐसे व्यक्तियों के प्रश्नों पर तकरार करना, बहस करना या उन्हें पनपने देना मूर्खता और ग़लत है (2 तीमु 2:16, 23; 1 तीमु 6:3-5; तीतुस 3:9)। इस सलाह की मूल्यवान बुद्धि आपको स्वतंत्र करने पाए और आपको शांति प्रदान करे।

प्रभु यीशु ने इस नीतिवचन को मत्ती 7:6 में सिखाया, जहां उसने आज्ञा दी कि अपने मोतियों को सुअरों के आगे मत डालो और न पवित्र वस्तु कुत्तों को दो। मोती और पवित्र वस्तुएं परमेश्वर की बुद्धि और सत्य अनमोल रत्न हैं। उसने दो बुद्धिमान कारण दिए। ये अहंकारी, क्रूर पशु पहले तो आपकी बातों को ठट्ठों में उड़ाएंगे, और फिर उनको आपके विरूद्ध उलटकर प्रयोग करेंगे।

इन दुष्ट लोगों से बचे। आप उनसे वाद विवाद करने के लिए बाध्य नहीं हैं। लड़ार्इ जारी रखकर अपने गौरव को उनका सम्मान न करने दें। आपको उन्हें अकेला छोड़ देने की नसीहत दी गयी है। अगर आप ठट्ठा करने वालों से दूर हो जाते हैं, तो आप शांति और चैन से रह सकते हैं। इसके साथ ही, अपने जीवन या परिवार के सदस्यों में उनके जैसा बनने की कोर्इ भी प्रवृत्ति हो, उसको सुधारें। ऐसे लोग बुद्धि और सत्य सिखाने के योग्य नहीं हैं।

डांट से प्रीति रखना सीखें, क्योंकि इसी से बुद्धिमान बनते हैं (नीति 9:9; 19:20)। सुलैमान ने सुधार को ग्रहण करने की योग्यता को बुद्धि पाने के सर्वोतम उपायों में से एक के रूप में पहचाना (नीति 15:5, 31)। अपने मित्रों को बुद्धिमान मनुष्यों तक सीमित रखें, तो आप और भी अधिक बुद्धिमान हो जाएंगे (नीति 13:20)। ऐसे बुद्धिमान मनुष्य कहां मिलेंगे? वे यीशु मसीह की उस कलीसिया में मिलेंगे जो परमेश्वर के वचन पर आधारित प्राचीन काल के धर्म का अनुसरण करती हो!

यीशु जिन ठट्ठा करने वालों से मिला, उसने तब तब इस नीतिवचन का पालन किया। उन्हें डांटने और लज्जित करने के उपरांत वह निकल जाता था (लूका 13:17)। उसने उनके विषय में कहा, ‘‘हर पौधा जो मेरे स्वर्गीय पिता ने नहीं लगाया, उखाड़ा जाएगा। उन को जाने दो; वे अन्धों के अन्धे अगुवे हैं : और अन्धा यदि अन्धे को मार्ग दिखाए, तो दोनों गड़हे में गिर पड़ेंगे’’ (मत्ती 15:12-14)।

जब सत्य और बुद्धि की बात आती है, तो धनी और धनी होते जाते हैं, और गरीब अधिक गरीब होते जाते हैं। जब यीशु ने बीज बोने वाले के दुष्टान्त को बताया और समझाया कि सच्चे सुसमाचार के प्रति एक व्यक्ति की चार प्रकार की प्रतिक्रियाएं हो सकती है, तब यीशु ने अपने प्रेरितों को चेतावनी दी कि जो अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं उनको वह अधिक सत्य सौंपेगा, और दूसरों से सत्य का विचार तक वापस ले लेगा (लूका 8:18)।

जिस हद तक आप ठट्ठा करने वाले होते हैं, परमेश्वर ने आपको पहले ही आपकी अहंकारी अज्ञानता में छोड़ छोड़ दिया है, परंतु आप इतने मूर्ख हैं कि आपको यह बात पता ही नहीं है (यशा 44:19-20)। जिस स्तर तक आप बुद्धिमान मनुष्य हैं और सुधार किए जाने से प्रेम रखते हैं, परमेश्वर आपको और सत्य दिखाएगा (नीति 4:18)। मनुष्यों के संग परमेश्वर के व्यवहार का यह सरल और अति गम्भीर नियम है। सुलैमान के समान अपने को नम्र करें, और बुद्धिमान बने (1 राजा 3:7-9)।

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