नीतिवचन 9:7
जो ठट्ठा करनेवाले को सुधारता है, वह अपमानित होता है, और जो दुष्ट जन को डाँटता है वह कलंकित होता है। (केजेवी)
हर कोई सुधार और फटकार की भली सहायता के योग्य नहीं होता है। कुछ लोग इतने निंद्य और आपत्तिजनक होते हैं कि उन्हें उन के विद्रोही अक्खड़पण के नतीजे भुगतने के लिए उन के हाल पर छोड़ देना ही बेहतर है। एक बुद्धिमान मनुष्य किसी को सुधारने या फटकार लगाने से पहले सफलता और नतीजों के ख़तरे की सम्भावनाओं का मूल्यांकन करता है।
क्या आप ज़हरीले साप को उकसाते हैं? एक दुष्ट फुसकार मारकर वे बड़ी फुर्ती से डंस लेते हैं, और अपने विषैले दांतों से आप पर आक्रमण कर घायल कर देते हैं। एक तीक्ष्ण जुबान अपने घिनौने मुंह से तीर चलाती है, जबकि बुरी नज़र भावनाशुन्य नफरत से घूरती है। सांपो से बचना है। बुद्धिमान लोग उन्हें पहचान कर चिन्हित करते हैं और उन से दूर ही रहते हैं।
क्या होता है जब आप किसी ठट्ठा करनेवाले को सिखाने का या सुधारने का प्रयास करते हैं? वही होता है जिस का मैं ने अभी अभी ऊपर वर्णन किया। ये शैतानी आत्माएं ज़हरीले मुंह से आप पर प्रहार करेंगी और आप को चोट पहुंचाने का प्रयत्न करेंगी (नीति 9:8)। वे उन में निवास करनेवाले अपने पिता की आत्मा में होकर आप पर पलटवार करते हैं, अर्थात् वह प्राचीन सांप, जो शैतान है (यूहन्ना 8:44; 2 तिमु 2:26)। उन में कोई अंतरात्मा या तरस नहीं होता है, इस कारण वे आप का तिरस्कार करते हैं और आप को तथा आप के प्रयासों को ठुकराते हैं।
ठट्ठा करनेवाले सुधार या सत्य के लायक नहीं हैं (नीति 23:9; 26:4; मत्ती 7:6)। उन्होंने बुद्धिमान और उसुलोंवाले मनुष्यों से आनेवाले प्रेम और देखभाल को खो दिया है। ठट्ठा उड़ानेवालों पर समय बर्बाद करना मूर्खतापूर्ण और जोख़िम से भरा है। सत्य को तुच्छ जानने वाले ये लोग दुखों में अपना जीवन बीता सकते हैं, जिन्हें परमेश्वर उचित ही उन पर भेजेगा। बुद्धिमान मनुष्य उनके साथ बहसबाजी करने में अपनी मेहनत और प्रतिष्ठा को बर्बाद नहीं करते (नीति 22:10; 24:9; 2 तिमु 2:23)।
एक ठट्ठा करने वाला व्यक्ति क्या होता है। यही तुच्छ और नीच चरित्रवाले बुरे लोगों का नाम है। वे न केवल घमण्डी अकड़ से भरे होते हैं, बल्कि वे उस हर व्यक्ति को तुच्छ समझते हैं जो अपनी शिक्षा या फटकार के द्वारा उन की मदत करने का प्रयास करते हैं (नीति 26:12, 16)। उनकी आत्मा से उस हर व्यक्ति के लिए नफरती झाग और आक्रोश बहता है जो उन्हें ईश्वर के तुल्य नहीं समझते और जो उनकी व्यर्थ कल्पनाओं के आगे घुटने नहीं टेकते (यशा. 29:20-21)।
एक ठट्ठा करने वाला कौन होता है? वह जो धर्म के मार्ग का मज़ाक उड़ाता है, सुधार करने पर बुरा मानता है, और शिक्षकों की हंसी उड़ाता है – एक ऐसा व्यक्ति जो हर प्रकार का अधर्म करने का दृढ़ निश्चय बना चूका होता है। ये लोग न केवल पत्थर-दिल होते हैं, बल्कि वे बेहूदा प्रश्न पूछनेवाले और सुधार की बातों को अभिमानी प्रतिक्रिया देनेवाले बदतमीज और गुस्ताख़ मिज़ाज के होते हैं। वे ऐसी संतान हैं जो किसी की नहीं सुनते और अपने में ही मगरूर होते हैं जो अपने माता-पिता को तुच्छ जानकार उनका अनादर करते हैं।
यदि आप किसी ठट्ठा करने वाले या दुष्ट जन की मदद करोगे, तो आप ही शर्मिंदा और कलंकित हो जाएंगे। वह आप के विवेकपूर्ण शब्दों को तुच्छ जानकार उनका उपहास करेगा; उन शब्दों को कहने के कारण वह आप को चोट पहुंचाएगा; आप की इज्ज़त और प्रतिष्ठा को बर्बाद करने वह हर सम्भव प्रयास करेगा; ऐसे मनुष्य पर अपना समय बर्बाद करने के कारण आप को एक मूर्ख व्यक्ति समझा जाएगा। किसी ठट्ठा करनेवाले की सहायता करने का कोई कारण नहीं है, किन्तु उसको सहायता न करने के कई कारण हैं। अगर किसी मूर्ख का आदर-सम्मान करना व्यर्थ है, तो एक ठट्ठा करनेवाले का आदर करना उससे भी अधिक बद्तर है (नीति 26:1, 8)।
जो भोले-भाले और निर्बुद्धि हैं, उन्हें बुद्धि को सुनने का आव्हान किया गया है (नीति 9:4-5)। परन्तु ठट्ठा करनेवाला मुर्खता के एक अलग ही प्रकार में आता है। फरीसी ठट्ठा करनेवालों में से थे, और उन्होंने यीशु मसीह पर झूठा लांचन लगाया और फिर क्रूस पर चढ़ा दिया। यीशु और उसके प्रेरित उन पर अपना समय बर्बाद नहीं करते थे (मत्ती 7:6; 15:10-14; 21:23-27)। उसने उनके प्रश्नों के उत्तर इसलिए नहीं दिए क्योंकि वह समझने में उनकी मदद करना चाहता था, बल्कि इसलिए ताकि उन्हें उलझन में डालकर ग़लत साबित करें और उन्हें लज्जित करें (मत्ती 22:15-46)। वह जानता था कि उनके मन में सत्य के लिए कोई वास्तविक अभिलाषा नहीं थी।
बुद्धिमान लोग ठट्ठा करनेवालों से दूर रहते हैं, जब वे किसी सुधर पर नाराज़गी या आक्रोश को देखते हैं, या सुधार करनेवालों का अपमान होते हुए देखते हैं (नीति 9:8; 13:1; 15:12; 19:28; 21:24)। ऐसे लोगों के सामने बुद्धि रखकर वे सत्य को निचा नहीं दिखाएंगे। उन में सुधार करने के लिए वे अपनी ही प्रतिष्ठा दाव पर नहीं लगाएंगे। ठट्ठा करनेवालों का बहिष्कार कर देने से आप के जीवन में शान्ति आएगी, क्योंकि लड़ने-झगड़ने की उनकी चाहत मन की शांति और एकता को भंग कर देती है (नीति 22:10)।
बुद्धिमान मनुष्य अपने स्वयं के भी ठट्ठापूर्ण लक्षणों को पहचानते हैं और उनका त्याग करते हैं। वे सुधार और फटकार को सौम्यता से ग्रहण करना सिखाते हैं। वे अपने अधिकारियों या शिक्षकों के सामने हमेशा प्रश्न उपस्थित नहीं करते और न ही “किन्तु-परन्तु” की मुंहजोरी करते हैं। वे नम्र होते हैं और सुधार तथा फटकार को सुनकर ग्रहण करते हैं, और वे अपने सिखाने और चेतावनी देनेवालों की भलाई की सराहना करते हैं (नीति 27:6; भजन 141:5)।
प्रभु यीशु ठट्ठा करनेवाले मनुष्य से बिलकुल अलग था, क्योंकि उसने अपने जीवन के लिए अपने पिता की इच्छा को बड़े आनंद से और तत्परता से सिखा और उसने वैसा ही किया। पापियों के उद्धारकर्ता के रूप में, उसने तरसुस के शाऊल, और क्रूस पर के चोर जैसे ठट्ठा करनेवालों को क्षमा भी किया। मसीही, यदि आप अपने माता-पिता या शिक्षकों के लिए एक अड़ियल या जिद्दी विषय रहे हैं, तो आज ही प्रभु के सामने अपनी मुर्खता को मान ले। नम्रता और अधीनता के उसके सिद्ध उदाहरण से सीखे, और अपने शिक्षकों की सराहना करते हुए उनकी प्रशंसा करें।
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