नीतिवचन 9:12
यदि तू बुद्धिमान हो, तो बुद्धि का फल तू ही भोगेगा, और यदि तू ठट्ठा करे, तो दण्ड केवल तू ही भोगेगा।
आपका भविष्य आपके हाथों में है – आपके दिल और दिमाग में – या तो उन्नति के लिए या फिर दुर्गति के लिए। आप बुद्धि को जो भी प्रतिक्रिया देते हो, वह किसी न किसी तरह से आपके जीवन को काफी हद तक प्रभावित करेगी। बड़े विशेषाधिकारों के साथ बड़ी जिम्मेदारियाँ भी आती हैं। प्रत्येक व्यक्ति के स्वतंत्र निर्णय के अपने नतीजें होते हैं। आपके साथ क्या होगा?
जीवन का सबसे बड़ा चुनाव, जिसे सुलैमान ने बार-बार दोहराया, बुद्धि का चुनाव है। यदि आप उसे चुनोगे, तो आप आशीषित हो जाओगे; यदि आप उसे अस्वीकार करोगे तो दण्ड भी आप ही को भुगतना होगा। आप परिणामों से बचकर कहीं नहीं भाग सकते; आप जो भी चुनते हैं, उसके नतीजें होंगे। आपको परिणाम भुगतना पड़ेगा। आपकी बुद्धि परमेश्वर को लाभ नहीं पहुँचा सकती, न ही आपकी मूर्खता उसे हानि पहुँचा सकती है (अय्यूब 35:5-8)। परिणाम आप ही भुगतोगे।
नए नियम के उपदेशक, पौलुस ने चेतावनी दी, “क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा ” (गला 6:5)। “धोखा न खाओ; परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा। 8क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा” (गला 6:7-8)। इसलिए प्रिय पाठक, आपको अपना काम आप ही को साबित करना होगा, और फिर आपका बिना किसी और से न्याय हुए, अपने आप में आनन्द मना सकते हैं (गला 6:4)।
बुद्धि का एक कुलीन स्त्री के रूप में व्यक्तिवकरण पिछले अध्याय से लेकर इस सारगर्भित वचन तक जारी है। बुद्धिरूपी स्त्री आपको अपने घर आने और एक अद्भुत दावत का आनन्द लेने का निमंत्रण देती प्रदान है (नीतिवचन 9:1-5)। आप उसके निमंत्रण का प्रत्युत्तर कैसे देंगे? यह मौका जीवन भर के लिए है। उसके निमंत्रण की आशीषें वर्णन से परे हैं (नीतिवचन 8:11)। या क्या आप उसकी उपेक्षा करेंगे और अपने लिए एक ऐसे मृत्यु चुनेंगे जो अटल और निश्चित है (नीतिवचन 8:36)?
इस नाटकीय समापन के बाद, सुलैमान हमें फिर एक बार उस मूर्खतारूपी और व्यभिचारी स्त्री का स्मरण दिलाता है, जिसके इस दुनिया में कई शिकार हुए हैं (नीतिवचन 9:13-18)। यह स्त्री नौजवानों का विनाश करने का इरादा रखती है। उसका भी एक घर है, जिसे वह सुगंधित बिस्तर से सजाती है, लेकिन वह अपने मूर्ख और अविश्वासी मेहमानों को अपने साथ नरक में ले जाती है (नीतिवचन 5:3-13; 6:23-35; 7:6-23; 9:18)।
आज, प्रिय पाठक, आपको चुनाव करना पड़ता है। और कल भी आप चुनाव करेंगे। क्या आप परमेश्वर के बुद्धि के सिद्ध वचनों के सामने स्वयं को विनम्र करेंगे? या क्या आप अपने मूर्ख मन के घमण्ड, हठ, और विद्रोह के कारण उन्हें मानने से इनकार करेंगे? आप चुनाव और उसके नतीजें से बच नहीं सकते। यह क्या होगा? अगर आप इस प्रकट बुद्धि अपनाते हैं, तो आप उसके उपयोग से अपने विचारों, शब्दों और कार्यों को निर्धारित कर सकते हैं, और अगर आप उसे अपनाने से इनकार करते हैं, तो आपका जीवन आपकी आदतों, वासनाओं, दुनिया की विचारधाराओं और दूसरों के चाल-चलन के मार्गदर्शन में चलेगा।
आपके लिए बाइबल का क्या अर्थ है? इसे सीखना और इसका पालन करना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण है? बाइबल के इतिहास के महान लोगों ने इसकी लालसा की और लगन से इसका पालन किया। क्या आप उस प्रचारक के उपदेश को जिसे यीशु मसीह ने आपका शिक्षक होने के लिए चुना और नियुक्त किया और जो केवल बाइबल से पढ़ाता है, और जो बिल्कुल भी मनोरंजन नहीं करता है बल्कि बिना किसी अफ़सोस या समझौता किए परमेश्वर की समस्त मंशा की घोषणा करता है, ईमानदारी से सुनते हैं,? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? यदि नहीं, तो आप अवश्य ही एक ठट्ठा करनेवाले एक धर्म-निन्दक हैं। नीतिवचन की इस चेतावनी को याद रखें, “दण्ड केवल तू ही भोगेगा।”
यहेज़केल ने लिखा, “जो प्राणी पाप करे वही मरेगा” (यहेजकेल 18:20)। सुलैमान ने चेतावनी दी, “जिसका मन ईश्वर की ओर से हट जाता है, वह अपनी चालचलन का फल भोगता है, परन्तु भला मनुष्य आप ही आप सन्तुष्ट होता है” (नीतिवचन 14:14)। यदि आप बुद्धि को अपनाने से पीछे हटते हैं, तो प्रभु आपके जीवन को दर्दनाक परिणामों से भर देगा। परन्तु जो मनुष्य मूर्खता को ठुकरा देता है वह आप आशीषों से संतुष्ट रहेगा।
मूसा ने चेतावनी दी, “जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा” (गिनती 32:23)। ये आठ शब्द गुरुत्वाकर्षण और मृत्यु के समान अटल हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पाप के बारे में क्या सोचते हैं, उसके परिणाम सामने आएंगे ही। चाहे आप कहीं भी पाप करें, परमेश्वर सब देखता और जानता है (नीतिवचन 15:3; यिर्मयाह 23:23-24)। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपनी सुरक्षा के लिए कितनी सावधानियां बरतते हैं, उनका कोई फ़ायदा नहीं होगा (नीतिवचन 11:21; 16:5)।
यदि तुम पाप से खेलोगे, तो तुम्हें उसका फल भुगतना पड़ेगा; यदि तुम भक्ति को चुनते हो, तो तुम आशीष पाओगे। अपराधियों का मार्ग कठिन है (नीतिवचन 13:15), और जब आपको पता चलेगा कि कितना कठिन है तब तक बहुत देर हो चुकी होगी (नीतिवचन 1:20-32; भजन 36:1-3)। जब परमेश्वर क्रोध में शपथ खाता है, तो कौन बचा सकता है? चाहे आप कितना ही पश्चाताप करने की कोशिश करें (नीतिवचन 29:1; गिनती 14:39-45; भजन 95:7-11; इब्रानियों 4:1; 10:26-31; 12: 16-17)।
लूत ने बुद्धि की ठट्ठा कीं और इस नीतिवचन का उल्लंघन किया। उसने महान संभावित आशीर्वाद और धन खो दिया। अंत में वह बर्बाद होकर गुफ़ा में रहने लगा, उसकी दोनो बेटियाँ उसकी मूर्खता के कारण गर्भवती हुईं। परन्तु अब्राहम ने बुद्धि को चुना। परमेश्वर ने उसे अपना मित्र कहा, उसे बताया कि वह धर्मी था, और उसे दीर्घायु देकर उसके जीवन को कई आशीषों से ओतप्रोत कर दिया। स्वर्ग को अब्राहम की गोद कहा जाता है, और उसका वंश परमेश्वर के दाहिने ओर विराजमान है जिसकी अनुग्रह से जन्मी लाखों संताने हैं।
अंत में, यीशु मसीह के कहे इस सकारात्मक और नकारात्मक बात पर विचार करें: “जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है” (यूहन्ना 3:36)। और एक और, “जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा” (मरकुस 16:16)। क्या आपने बुद्धि के नियम के अनुसार विश्वास किया है और बपतिस्मा लिया है? परमेश्वर और उसके इस अति महत्वपूर्ण सिद्धांत की ठट्ठा मत करो!
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