नीतिवचन 8:9

समझवाले के लिये वे सब सहज, इस कारण ज्ञान प्राप्त करनेवालों के लिये अति सीधी हैं।

कुछ लोग कहते हैं, “बुद्धि को समझना अति कठिन है,” या, “इसका मुझे कोई लाभ नहीं होगा,” या, “यह मेरी समझ से बाहर है।” दूसरे कहते हैं, “बाइबल समझने में बहुत कठिन है!” या, “बाइबल में विरोधाभास हैं!” कई लोग यह निष्कर्ष निकालते हैं, “बाइबल से कुछ भी सिखाया जा सकता है। परम सत्य को निश्चित रूप से जानना असंभव है।”

शैतान ऐसी बेतुकी टिप्पणियों पर अपनी बुरी संतुष्टि से हँसता है। लेकिन बुद्धि रूपी स्त्री सिखाती है कि बुद्धि की बातें साफ़-साफ़ समझनेयोग्य और सही हैं – अर्थात् समझ और ज्ञान वाले लोगों के लिए। यदि आपको बाइबल समझने में कठिन लगती है, तो समस्या आप में है, बाइबल में नहीं।

सुलैमान ने नीतिवचन के आठवें अध्याय में मानव-अभिव्यक्ति का उपयोग किया। स्त्रीलिंग सर्वनाम बुद्धि रूपी स्त्री को संदर्भित करते हैं, एक ऐसी स्त्री जो सुलैमान के उस अनुरोध में जिसमें वह लोगों से आव्हान कर रहा है कि वे अज्ञानता और मूर्खता को त्याग दें, और समझ और ज्ञान को अपनाएं, बुद्धि का प्रतिनिधित्व करती है। इस नीतिवचन में उस स्त्री का परिचय है, क्योंकि वह उत्कृष्ट और सही बातें (नीतिवचन 8:6), सत्य (नीतिवचन 8:7), और धर्म के वचन बोलने का दावा करती है जिन में कोई टेढ़ी या उलट फेर की बात नहीं है (नीतिवचन 8:8)।

थोड़ी सी समझ और ज्ञान, जो यहोवा का भय मानने और उसके वचन के सामने थरथराने से प्राप्त होते हैं, बाइबल को आपके सामने खोल देगा (नीतिवचन 1:7; 9:10; भजन 25:14; यशायाह 66:2; लूका 8:18)। जब आप नम्र होकर बाइबल का अध्ययन उसी के व्याख्या के नियमों का पालन करके करते हैं, तो उसके शब्द समझने में सहज और अति सीधे बन जाते हैं। यदि आप बाइबल को अपने अहंकार में और या आलोचना करने के इरादे से पढ़ते हैं, तो फिर आपके मामले में बाइबल की रचना आपको भ्रम में डालने के लिए की गई है, ताकि आप झूठ पर विश्वास करने नाश पाएं (यहेज़केल 14:1-11; 1 कुरिन्थ 1:19-20; 2:13-15; 2 थिस्स 2:9-12; 2 तीमु 2: 15; 2 पतरस 3:16)।

बाइबल अपनी अभिव्यक्ति में सहज और अति सीधी है, बशर्ते आपका नया जन्म हुआ हो (यूहन्ना 3:3; रोमियों 3:11), पवित्र आत्मा द्वारा आपको समझ प्राप्त हुई हो (इफि 1:17-18), परमेश्वर का भय मानते हो (नीतिवचन 15:33), परमेश्वर में आनन्द पाते हो (नेह 8:6-8; भजन 37:4), जो आप सीखते हैं उसका पालन करते हो (यूहन्ना 7:17), बुद्धि के लिए प्रार्थना करते हो (भजन 119:18; याकूब 1:5), उसे पाने के लिए मेहनत करते हो (2:1- 9; 18:1; 1 तीमु 4:13-15), सुधार करते हो (नीतिवचन 26:12; 1 कुरिन्थ 3:18-19), पवित्र उद्देश्य से पढ़ते हो (भजन 119:11; लूका 10:38-42) , और परमेश्वर द्वारा नियुक्त शिक्षकों की सुनते हो (मलाकी 2:7; प्रेरितों 8:30-31)।

बाइबल, परमेश्वर की बुद्धि और ज्ञान की पुस्तक, विश्व के उन सब रहस्यों को उजागर करती है जो मानव अस्तित्व को अत्यन्त प्रभावित कर देते हैं, लेकिन अधिकांश मनुष्यों के लिए इसका कोई उपयोग नहीं है। बाइबल उनके लिए बंद है (1 कुरिन्थ 2:6-15; 2 कुरिन्थ 4:3-4)। परमेश्वर इन बातों को केवल अपने बच्चों पर प्रकट करता है (मत्ती 11:25-27)। वे मानव-बुद्धि, मानव-शिक्षा, या किसी भी व्यक्तियों की राय की कोई परवाह नहीं करते। वे परमेश्वर के प्रत्येक शब्द को पूर्ण सत्य मानते हैं, और वे किसी भी अन्य विचार से घृणा रखते हैं (भजन 119:128)।

एक उदाहरण पर विचार करें। सुलैमान ने लिखा कि शारीरिक दंड (छड़ी का उपयोग) बच्चों को शिक्षा देने का सही मार्ग है (नीतिवचन 13:24; 19:18; 20:30; 22:6,15; 23:13-14; 26:3; 29:15)। लेकिन जानवरों के हक़ के लिए लड़नेवाली माताएं, डॉक्टर स्पॉक, सीस और डॉब्सन की बाइबल विरोधी शिक्षा के नशे में चूर हैं, जिन्होंने उस बाइबल को नकारा जो उन राक्षसों के लिए एक एक प्रारंभिक शिक्षा की मार्गदर्शिका है जो बच्चों से प्यार करने के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे। वे कहते हैं कि बाइबल को समझा नहीं जा सकता है, यह बच्चों के लिए अनैतिक रूप से क्रूर है, और आज के समाज के लिए इसे और अधिक सौम्य तरीके से लागू करने की आवश्यकता है, लेकिन परमेश्वर के बच्चों के लिए शारीरिक दंड सहज शिक्षा और सीधा मार्ग है।

एक और उदाहरण पर विचार करें। मूसा और सुलैमान ने लिखा कि हत्यारों से निपटने के लिए मृत्युदंड ही एकमात्र तरीका है (नीतिवचन 28:17; उत्पत्ति 9:6; निर्गमन 21:12-14; लैव्य 24:17)। लेकिन मदर टेरेसा, एसीएलयू और विवेकरहित और नासमझ अन्य कई लोगों को वास्तव में पीड़ितों की तुलना में हत्यारों पर अधिक दया आती है। विश्वास नहीं होता? ये सच है। वे बाइबल को ऐसे पुराने कानून के रूप में देखते हैं जो आज के हिंसक समाज के लिए कोई मायने नहीं रखता, लेकिन परमेश्वर के बच्चे जानते हैं कि इसमें आम नाकरिक के लिए दिव्य ज्ञान है। उनके लिए मृत्युदंड उतना ही सहज है जितना किसी पागल कुत्ते द्वारा किसी शिशु को खा लेने पर उसे मार डाला जाता है।

एक और उदाहरण पर विचार करें। मूसा ने यह लिखते हुए पृथ्वी की उत्पत्ति का मूल बताया, “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की” (उत्पत्ति 1:1)। लेकिन चार्ल्स डार्विन और अन्य मतिभ्रम शिक्षकों ने दुनिया को एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर और जीवन के लिए उसके नियमों से छुटकारा दिलाने की एक घिनौनी साजिश रचते हुए एक असंभव सपना रचा कि किसी अराजक तत्व विस्फोट से विश्व का निर्माण हुआ, कोई आदिकालीन चिपचिपा पदार्थ प्रजनन करने वाला जीव बन गया, और उसने बंदर बनना चुना, जिनमें से एक चार्ल्स डार्विन की माँ थी। विश्वासी और उनके बच्चे इस झूठे विज्ञान पर हंसते हैं, जिसे किसी भी मनुष्य ने न तो कभी देखा, न परिभाषित किया, न उसकी नकल नहीं कर सकता हैं, न कभी कर पाएगा (1 तीमु 6:20-21)।

एक और उदाहरण 1 कुरिन्थियों 11:24 के शब्दों “यह मेरी देह है” पर विचार करें। कैथोलिकों ने माना कि यीशु ने नरभक्षण सिखाया था और इन शब्दों का अर्थ शाब्दिक था, इसलिए उन्होंने ‘प्रभु-भोज परिवर्तन’ का आविष्कार किया – की रोटी का टुकड़ा उसके शरीर, लहू, आत्मा और दिव्यता में बदल जाता है – जबकि बह रोटी अब भी मानव इंद्रियों और किसी भी प्रकार के विश्लेषण के लिहाज से शाब्दिक रोटी ही बनी रहती है। उनका गैर-बाइबलीय धर्म प्रभु भोज के इस ईश-निंदनीय मज़ाक को आदर्श मानता है, और भूल जाता है कि यीशु ने कई अन्य रूपकों के बीच यह भी कहा था, “मैं द्वार हूँ,” और, “मैं दाखलता हूँ”।

लूथरन, जो अच्छी तरह से जानते थे कि रोटी अब भी रोटी ही बनी रहती है (क्योंकि वे अब भी इसे छू सकते हैं, इसका स्वाद ले सकते हैं, इसे सूंघ सकते हैं और इसे देख सकते हैं), उन्होंने पुष्टिकरण का आविष्कार किया – कि उनकी प्रभुभोज की विधि में यीशु का शरीर, लहू, आत्मा और दिव्यता रोटी में मौजूद रहती हैं। प्रेस्बिटेरियन, जो रोम से आने वाले अंधविश्वासी संस्कारवादी भी थे, उन्होंने इस धारणा का आविष्कार किया कि यीशु वास्तव में, सच में और आध्यात्मिक रूप से रोटी में मौजूद होता हैं, हालांकि शरीर, रक्त, आत्मा या दिव्यता के रूप में नहीं।

परमेश्वर के बच्चे, थोड़ी सी समझ और ज्ञान पाकर ही, जान जाते हैं कि यीशु आलंकारिक भाषा में बातें कर रहा था, जैसे आप अपनी माँ की तस्वीर पकड़कर कहते हैं, “यह मेरी माँ है।” उस वक़्त आपका मतलब केवल यह है कि कागज का टुकड़ा आपकी माँ का प्रतिनिधित्व करता है। यीशु ने अपने सच्चे अनुयायियों को एक सरल भोज दिया जिसे उन्हें उसकी याद में करना है। किसी भी प्रकार, आकार या स्वरूप में दोबारा कोई बलिदान नहीं दिया जाता है। प्रभुभोज का उद्देश्य केवल रोटी और दाखमधु का उपयोग करके उसके तोड़े गए शरीर और बहाए गए लहू को दर्शाने के लिए उसे याद करना है। यह कोई संस्कार नहीं है, और इसमें किसी भी तरह से, किसी भी पदार्थ में बिलकुल भी कोई बदलाव नहीं होता है।

ख्रिश्चन पाठक, बाइबल पृथ्वी पर एकमात्र सच्ची पुस्तक है। केवल इसी में स्वर्ग से उतर आनेवाली बुद्धि और ज्ञान के वचन हैं, जिसके बारे में सुलैमान ने इस नीतिवचन में बुद्धि रूपी स्त्री के माध्यम से आपको बताना चाहा है। यदि आप उसे गले लगाओगे, तो वह आपको आशीष देगी; यदि आप उसे अस्वीकार करते हो, तो आप अवश्य ही मृत्यु से प्रेम रखते हैं (नीतिवचन 8:35-36)। लेकिन यह अद्भुत पुस्तक आपका कोई भला नहीं कर सकती, जब तक कि आप वह समझ और ज्ञान हासिल नहीं कर लेते जो इसके खजाने को खोल देता है। महान परमेश्वर के सामने स्वयं को विनम्र करें, अपने अभिमान और पापों से पश्चाताप करें और उससे ज्ञान और बुद्धि के लिए प्रार्थना करें। वह आपको सहज और अति सीधी बातें समझाएगा।

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