नीतिवचन 8:8
मेरे मुँह की सब बातें धर्म की होती हैं, उन में से कोई टेढ़ी या उलट फेर की बात नहीं निकलती है।
स्त्री रूपी बुद्धि कभी कुछ भी गलत, अतर्कसंगत या विरोधाभासी नहीं कहती हैं। सुलैमान ने यहाँ एक वांछनीय स्त्री के रूप में बुद्धि का अपना मानवीकरण जारी रखते हुए सिखाया कि परमेश्वर की बुद्धि कितनी परिपूर्ण और सिद्ध है (नीतिवचन 8:1-7)। उसने जिस सिद्ध बुद्धि का वर्णन किया वह केवल क्रिश्चन धर्मग्रन्थ, अर्थात् बाइबल में पाई जाती है, क्योंकि स्वाभाविक वृत्ति के मनुष्यों की बुद्धि केवल मूर्खता है, और इसी मूर्खता के कारण धर्मिजनों की बुद्धि भी कलंकित है।
बुद्धि का केवल एक ही स्रोत ऐसा है जो पूरी तरह से दोष-मुक्त है – क्रिश्चन धर्मग्रन्थ: बाइबल। यह शिक्षकों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों, पत्रकारों की सब सोच, संभाषण और कलम के विपरीत है, और अगर क्रिश्चन धर्मशास्त्रियों और चर्च के पास्टरों ने इसका उपयोग नहीं किया तो बाइबल की यह बुद्धि उनकी भी सोच, संभाषण और कलम के विपरीत है। आप बाइबल के हर शब्द को पूरे विश्वास के साथ पढ़ सकते हैं, क्योंकि हर शब्द पूरी तरह से सच्चा और बिना किसी दोष के है। बाइबल दुनिया के लिए बुद्धि और ज्ञान का भंडार है, और इसके विरोध में उठनेवाला हर विचार झूठा और गलत है।
यदि आप गलत विचारधाराओं, गलत निष्कर्षों और उनके गलत व्यावहारिक उपयोग से थक चुके हैं, तो आपको इस स्त्री रूपी बुद्धि के वचनों की सक्त आवश्यकता है। आपको बाइबल की सक्त आवश्यकता है। यदि आप ऐसे लोगों से जिनकी बातें एक दूसरे के विपरीत हैं और साथ ही अपनी ही विरोधाभासी बातों से थक चुके हैं, जिससे विश्वस्तर पर भ्रम, अज्ञानता और कलह पैदा हो रहा है, तो आपको पवित्रशास्त्र बाइबल के सिद्ध वचनों की ठोस नींव की आवश्यकता है (यशायाह 8:20)।
बाइबल के हर शब्द पर भरोसा करना और हर झूठे मार्ग से बैर रखना बुद्धिमानी है (भजन संहिता 119:128)। यह आपका कर्तव्य है कि आप परमेश्वर के वचन में खोजें, उसे पढ़ें, और उसकी बुद्धि प्राप्त करने के लिए उस पर विश्वास करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस विषय को संबोधित किया जा रहा है, पवित्रशास्त्र की सच्चाई और बुद्धि भ्रष्ट सोच से बिल्कुल अछूत हैं और अधिकार में बिल्कुल परम और अंतिम हैं। परमेश्वर सच्चा ठहरे!
चूंकि बाइबल यौन संबन्ध को विवाह के बंधन में बंधे केवल एक पुरुष और केवल एक स्त्री तक ही सीमित करती है, इसलिए अवश्य है कि आप बहुविवाह, बहुपतित्व, व्यभिचार, परस्त्रीगमन, पुरुषगामिता, पशुगमन और हर पराए यौन विकृति की भर्त्सना करें। सांस्कृतिक मानकों में वर्तमान परिवर्तन परमेश्वर की विधियों के विरुद्ध मानवजाति का विद्रोह मात्र है। और, देखो और जान लो, कि जिन जिन राष्ट्रों ने सख्ती से उसकी सीमाओं का पालन किया है, वे उन राष्ट्रों से जिन्होंने कई बातों में उसकी विधियों को नहीं माना है, बहुत आगे निकल गए हैं। परमेश्वर सच्चा ठहरे!
बाइबल मांस खाने को प्रोत्साहित करती है, इसलिए बुद्धिमान व्यक्ति शाकाहारी नहीं होते। बाइबल पुरुषों को आदेश देती है कि वे अपने देश की रक्षा करें, इसलिए आप युद्धविरोधी नहीं हैं। बाइबल दफनाने के संस्कार देती है, इसलिए क्रिश्चन धर्मीय अपने मृतकों का दाह संस्कार नहीं करते। बाइबल अविश्वासी मूर्तिपूजकों की धार्मिक प्रथाओं की भर्त्सना करती है, इसलिए हम हैलोवीन, क्रिसमस और ईस्टर को नहीं मनाते। जब एक विश्वासी बपतिस्मा लेता है तब उसमें विवेकपूर्ण समझ होनी आवश्यक होती है, ताकि वह मसीह के साथ गाड़े जाने और जिलाए जाने को समझ सके, इसलिए हम शिशुओं का छिड़काव से बपतिस्मे की विधि को अस्वीकार करते हैं। बाइबल ब्रह्मचर्य को शैतान का सिद्धांत घोषित करता है, इसलिए हम रोमन कैथोलिक के फादरों और ननों के अस्तित्व से इनकार करते हैं।
यदि बाल-प्रशिक्षण का बाइबल का तरीका आधुनिक बाल-मनोवैज्ञानिकों के तौर-तरीकों के विपरीत हैं, तो हम बाल-मनोवैज्ञानिकों के तौर-तरीकों को ठोकर मारते हैं और पूरी तरह से उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर जिसने बच्चों को बनाया और बाइबल को अपनी श्वास से लिखवाया, भरोसा करते हैं। यदि पत्नियों के लिए अपने पतियों का अनुसरण करना और उनका सम्मान करना चलन में नहीं रह गया है, तो बुद्धिमान पुरुष आसानी से पहचान लेते हैं कि आज के इस चलन को परमेश्वर-विरोधी आधुनिक लोगों द्वारा बढ़ावा दिया जाता है ताकि परमेश्वर के मानकों को उलट दे।
इस जगत के लिए यह ज़रूरी है कि वह शैतान के बहकावे में आकर बाइबल में दोष निकाले। परन्तु अगर बाइबल सर्वथा और परम सत्य है तो जगत के लोगों की सोच और जीने की योजनाएं झूठी हैं। उदाहरण के लिए, उनकी शिक्षा-प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी, क्योंकि शिक्षकों और दार्शनिकों की सभी राय व्यर्थ ठहरेंगी। यह घातक परिणाम सरकारों, धर्मों, सामाजिक कार्यक्रमों आदि को उखाड़ फेंकेगा। इसलिए वे पवित्रशास्त्र, अर्थात् बाइबल की आलोचना और उपहास करने के लिए हर समय प्रतिबद्ध हैं। इसमें आपको कोई आश्चर्य करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
सृष्टिकर्ता परमेश्वर और उसके द्वारा निर्धारित सत्य और बुद्धि के एक परम और अंतिम मानक के प्रति उनकी विक्षिप्तमति, कट्टर, उन्मत्त और मतान्ध नफ़रत के कारण उनके लिए बाइबल की शुद्धता, अखंडता और अंदरूनी सुसंगतता को कमज़ोर करने और उसे पढ़ने और उस पर विश्वास करनेवाले किसी भी व्यक्ति का उपहास करना आवश्यक बन जाता है। अपनी सोच को बाइबल से भी ऊंचा उठाने के लिए उसमें ऐसी बातें ढूंढ़ निकलना और प्रकाशित करना जिन्हें वे विसंगतियां, बेतुकापन और विरोधाभास समझतें हैं, उनके लिए आवश्यक बन जाता है।
बाइबल पर संशय करनेवाला एक मतिभ्रष्ट मनुष्य कुछ इस प्रकार अपना विरोध दर्शाता है! अहज्याह एक ही घटना के वर्णन में 22 वर्ष का और 42 वर्ष का कैसे हो सकता है (2 राजा 8:26; 2 इतिहास 22:2)? ऐसे में आप क्या कहेंगे? बस मुस्कुराएं! यदि ये ईश्वर-द्वेषी पूरी बाइबल को पढ़ते, तो उन्हें पता चलता कि अहज्याह 22 वर्ष की उम्र में राजा बन गया था, जो कि ओम्री से लेकर 42 वर्ष का समय होता है, और जो दिखाता है कि क्यों परमेश्वर ने यीशु मसीह की वंशावली से उसके, उसके बेटे के और उसके पोते के नामों को हटाया (मत्ती 1: 8)। जब हम परमेश्वर द्वारा दिए अन्य प्रकाशन को समझते हैं, तब इन दोनों तथाकथित विरोधाभासों को एक बार में ही हल किया जा सकता है!
ऐसे मिथ्या विरोधाभास अपर्याप्त अध्ययन के नतीजें हैं। आलसी पाठक या परमेश्वर से घृणा करनेवाले पहले से ही यह मानकर चलते हैं कि बाइबल में दोष हैं, और वे किसी समाधान की खोज नहीं करते। यह विश्वास का मामला है। बाइबल पर विश्वास करनेवाला मनुष्य परमेश्वर और उसके वचन पर भरोसा करता है। वह जानता है कि मिथ्या विरोधाभास का सटीक उत्तर है। संशयवादी मानता है कि परमेश्वर वचन को प्रेरित करने में या उसकी रक्षा करने में विफल रहा है। बाइबल के प्रति इन विभिन्न दृष्टिकोणों के बहुत बड़े परिणाम होते हैं। संशयवादी अंधा हो जाएगा; विश्वासी धन्य और सौभाग्यशाली कहलाएगा (भजन 119:18; यहेज 14:7-9)।
यदि आपको अपनी आँख निकालकर फ़ेंक देने की आज्ञा पर विश्वास करने में कठिनाई होती है, तो फिर भी यह समझने के लिए उसका अध्ययन करें कि जब यीशु ने यह कहाँ तब उसके कहने का आशय यौनाचार के पाप से इनकार करना था (मत्ती 5:28-30)। जब बाइबल कहती है कि बच्चों को छड़ी लगाने जैसे शारीरिक दंड की उपेक्षा करना असल में बच्चे से प्रेम नहीं अपितु उससे घृणा करने जैसा है, तो उसके इस शासन के सामने घुटने टेकें और अपने विचारों को माता-पिता का प्रेम क्या होता है इस विषय में परमेश्वर की परिभाषा के अनुरूप बनाएं (नीतिवचन 3:11-12; 13:24)। यदि अविवाहित रहना और विवाह करना दोनों अच्छा है, तो आप सरल समाधान खोजने के लिए पवित्रशास्त्र के वचन का ठीक ठीक विभाजित करते हैं (उत्पत्ति 2:18; 1 कुरिन्थियों 7:8; 2 तीमुथियुस 2:15)।
सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि बाइबल पर संदेह करनेवाले कई लोग ख्रिश्चन होने का दावा करते हैं। उनमें से कई तो बाइबल के टीकाकार, आलोचक, बाइबल कॉलेज के प्राध्यापक और पास्टर हैं। अपनी नौकरियों को बचाने, और अपने दानदाताओं की सूचि सँभालने के लिए, उन्हें बाइबल में दोष निकालना ज़रूरी होता है, ताकि नासमझ निम्न स्तर के लोगों को उनके पास यह जानने के लिए आना पड़े कि बाइबल के अमुक-अमुक वचन का क्या अर्थ होना चाहिए। वे बाइबल में सुधार करने, बाइबल में बदलाव करने और नए शब्दों और वाक्यों को जोड़कर बाइबल को नएं सिरे से प्रकाशित करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं।
बाइबल को NASV और NIV, या ESV के रूप में संशोधित करने के उनके सर्वोत्तम प्रयासों पर विचार करें। इन संस्करणों में 2 शमूएल 21:19 में लिखा गया है कि गोलियत को दाऊद ने नहीं, बल्कि एल्हनान ने मारा। BSI के हिन्दी बाइबल में भी यही लिखा है। ये संस्करण मरकुस 1:2 में एक उद्धरण को यशायाह से बताते हैं जबकि वह मलाकी से आता है। NASV का पुराना संस्करण यूहन्ना 1:18 में यीशु को जन्मा हुआ ईश्वर कहता है। उनके द्वारा निर्मित सबसे छलपूर्ण नकली संस्करण – NKJV पर विचार करें। इसमें अब्राहम से की गई प्रतिज्ञा में एकवचनी “वंश” को बहुवचन “वंशों” में बदल दिया गया, जिससे वे अपने ही पुराने नियम को नकारते हैं (गला 3:16, तुलना करें उत्पत्ति 13:15-16; 22:15-18)। मनुष्यों के हाथों से बनी हुई ये पुस्तकें परमेश्वर के शुद्ध वचन का भ्रष्टिकरण हैं।
बुद्धि के वचनों के रूप में केवल किंग जेम्स बाइबल पर भरोसा किया जा सकता है, क्योंकि केवल यही संस्करण इन आंतरिक त्रुटियों और विरोधाभासी बयानों से मुक्त है। यीशु ने कहा, “पवित्रशास्त्र को तोड़ा नहीं जा सकता” (यूहन्ना 10:35), परन्तु सभी आधुनिक संस्करणों को आसानी से तोड़ा जा सकता है। यह आपका कर्तव्य है कि आप पवित्रशास्त्र को स्वर्ग से परमेश्वर की वाणी से भी अधिक निश्चित समझकर उसमे खोज करें (2 पतरस 1:16-21)। यह आपका कर्तव्य है कि आप उन शास्त्रलेखों को खोजें, उनपर विश्वास करें और उनका पालन करें जिनमें कुछ भी दोष या विकृती नहीं है।
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