नीतिवचन 8:36

परन्तु जो मेरे विरुद्ध अपराध करता है, वह अपने ही पर उपद्रव करता है; जितने मुझ से बैर रखते वे मृत्यु से प्रीति रखते हैं।

जैसा मैं कहती हूँ, वैसा ही करो, या मर जाओ! यह बुद्धि रूपी स्त्री की आखरी चेतावनी (अल्टीमेटम) है! वह आपको मुफ़्त में बुद्धि देना चाहती है, जो पृथ्वी पर किसी भी चीज़ से अधिक कीमती है (नीतिवचन 8:1-11)। और फिर वह उन शानदार आशीर्वादों को सूचीबद्ध करती है जो बुद्धि के कारण प्राप्त होते हैं (नीतिवचन 8:12-21), और फिर वह वर्णन करती है कि वह सनातनकाल से परमेश्वर के साथ रही है और सृष्टि की उत्पत्ति में अपनी भूमिका का वर्णन करती है (नीतिवचन 8:22-31)। यदि आप उसे अपनाने से इनकार करते हैं, तो आप अपने लिए एक ऐसी मृत्यु का चुनाव करते हैं जो धीमी तो है ही, पर दर्दनाक भी है (नीतिवचन 1:24-33)। जो भी उसे अपनाने से इनकार करते हैं, उन पर कोई रहम नहीं किया जाएगा (नीतिवचन 8:33; 9:12; 29:1)।

नीतिवचन का आठवां अध्याय एक स्त्री के रूप में बुद्धि का एक लंबा चित्रण है। यह भाषण का एक सुंदर और शक्तिशाली अलंकार है, लेकिन यह सुन्दर भाषालंकार इस स्त्री के एक निर्दयी गंभीर स्वरुप को छुपाता है, और वह यह, कि अगर आप उसे अपनाने से इनकार करते हैं तो क्या होगा। यदि आप बुद्धि को अपनाने से इनकार करते हैं, तो आपके जीवन में विपत्तियाँ निश्चित आएंगी, और जब आप बुद्धि की खोज करेंगे तो वह आपके दर्द और विपत्ति पर हँसेगी और आपका मजाक उडाएगी (नीतिवचन 1:26-27)। जब आप पीड़ा, संकट और भय में डूब रहे होंगे, जबकि आपकी आत्मा और जीवन नष्ट हो जाएंगे, तो वह आपकी चीखों से अपने कान फेर लेगी।

वह अपनी इस निर्दयता में अन्यायी नहीं है; मूर्ख व्यक्ति दुष्ट और घिनौना होता है! जब बुद्धि को अपनाने से इनकार कर दिया जाता है, तो वह क्रूर मूर्ख पशु जिसने उसे अपनाने से इनकार कर दिया, वह कष्ट भोगने के ही लायक होता है। यहां कुछ भी अन्यायपूर्ण नहीं है। क्योंकि बुद्धि जीवन और अनंतकाल की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है, अत: उसे अस्वीकार करना घमण्ड से भरी आत्महत्या है। जो लोग अपने स्वयं के विचारों को चुनकर बुद्धि के विरुद्ध अपराध करते हैं, वे अपने ही पर उपद्रव कर रहे हैं। जो लोग बुद्धि से नफ़रत करते हैं और उसके सुधार और शिक्षा का तिरस्कार करते हैं, वे दर्दनाक मृत्यु से प्रीति रखते हैं।

बुद्धि ही सुखी, समृद्ध, सुरक्षित और सफल जीवन जीने का एकमात्र मार्ग है। यदि आप इसके खिलाफ विद्रोह करते हैं, तो आपको उस बेकार जीवन से प्रीति रखते हैं जिससे आज अधिकतर लोग पीड़ित हैं। दुष्क्रिय जीवन एक महामारी है; तलाक, नशा, कर्ज़ का बोझ, अवज्ञाकारी और विद्रोही बच्चे, बीमारी, अवसाद और नशे की लत आज सब ओर व्यापक है। बुद्धि रूपी स्त्री ही इसका समाधान और इलाज करती है। यदि आप उसे अस्वीकार करते हैं, तो आप अपने ही पर उपद्रव करते हैं। यदि आप उसका तिरस्कार करते हैं, तो आप मृत्यु से प्रीति रखते हैं, क्योंकि आप उसी की ओर बढ़ रहे हैं।

न तो परमेश्वर, न बुद्धि, और न ही बाइबल ऐसे मामलें हैं जिन्हें आप अपनी मन मर्ज़ी से अपना सकते हैं या ठुकरा सकते हैं। स्वर्ग के परमेश्वर के मामले में “चलो, हम अपनी इस असहमती पर सहमत हो जाएं” जैसा कोई विकल्प नहीं है (सभो 12:13-14; यूहन्ना 4:24)। बाइबल की कुछ बातों को स्वीकार करने और कुछ को अस्वीकार करने का अपनी मनमर्ज़ी वाला कोई विकल्प नहीं है (भजन 119:128; 1 तीमु 6:3-5)। मानव जाति केवल दो हिस्सों में बंटी हुई हैं – एक अल्पसंख्यक हिस्सा जो जीवन के सीधे और संकीर्ण मार्ग पर चलता है, और एक बड़ा समुदाय जो विनाश के व्यापक और चौड़े मार्ग पर चलता है (मत्ती 7:13-14)।

स्वर्ग का महान और भयानक संप्रभु परमेश्वर आपके जीवन पर पूरी पूरी प्रभुत्व रखता है। आप कुछ भी नहीं। वह कुम्हार है; आप मिट्टी हैं (यशायाह 45:9-10; रोमियों 9:20-21)। वह स्वर्ग में और पृय्वी के निवासियोंके बीच अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है; कोई भी उसका विरोध नहीं कर सकता या उस पर सवाल नहीं उठा सकता (दानिय्येल 4:35)। उसने सब कुछ अपने लिये बनाया है (नीतिवचन 16:4; प्रकाशितवाक्य 4:11)। उसने आपको बनाया और आप में अनंतकाल जीवित रहनेवाली आत्मा डाली जिसे आप अपनी मर्ज़ी से नहीं चला सकते – और यह उसने आपसे पूछे बिना किया। आपके जीवन में होनेवाली किसी भी घटना के लिए उसने आप से आपकी पसंद-नापसंद नहीं पूछी। उसके सामने अपने आप को नम्र करो!

उसने खुद को इस सृष्टि में प्रकट किया, ताकि किसी भी मनुष्य के पास उसकी आराधना न करने और उसे धन्यवाद न देने का कोई बहाना न हो (भजन 19:1-6; प्रेरितों के काम 14:17; रोमियों 1:18-20)। क्योंकि मनुष्य अपने आप को बुद्धिमान समझता है, इसलिए वह उनके मनों को ही कठोर कर देता है और उनकी बुद्धि को अंधा कर देता है ताकि वे स्वयं को अप्राकृतिक यौनाचार और अन्य घृणित और आपत्तिजनक पापों से अशुद्ध करें (रोमियों 1:21-32)। क्या आप बाइबल के परमेश्वर को जानते हैं (45:5-7; प्रेरितों के काम 17:23)? वह कभी बदलता नहीं, और न वह कभी बदलेगा (इब्रानियों 12:28-29; 13:8)।

आज विश्व अपने अस्तित्व के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। अंतिम दिनों के इस विनाशकारी समय में ख्रिश्चन धर्म के एक स्त्रैण और समझौतावादी स्वरूप का उदय हुआ है (2 तीमु 3:1-7)। ये सांसारिक और वासनाओं से भरें पाखंडी और नकली ख्रिश्चन लोग बाइबल के उपदेशों से घृणा करते हैं – वे दंतकथाओं और मनोरंजन को अधिक पसंद करते हैं, खासकर अगर उन्हें अंग-प्रदर्शनवाले वस्त्र पहने की आज़ादी मिले और चर्च में बड़ी स्क्रीन पर गाने और 10-15 अलग-अलग बाइबल संस्करणों को दिखाने की सुविधा हो और जहाँ वे उपासना के दौरान रम केक के साथ स्टारबक्स कॉफी का मज़ा लें सकें (2 तीमु 4:3-4) )।

ये आधुनिक धोखेबाज पाखंडी मसीही लोग जीवित परमेश्वर के वचनों का तिरस्कार करते हैं। वे चिकनी-चुपड़ी बातें सुनना चाहते हैं, ठीक उन लोगों के समान जो उनसे पहले सत्य को अस्वीकार कर चुकें हैं (यशायाह 30:8-11)। वे खरे उपदेश और सच्चे धर्म-सिद्धांत के बजाय जीसस रैप, क्रिश्चियन रॉक और अलग अलग रंगों का धुआं चाहते हैं। वे “यहोवा यों कहता है” के स्थान पर उद्देश्य-चालित जीवन और अपने अहं की संतुष्टि को ढूंढते हैं। बुद्धि रूपी स्त्री कहती है, “परन्तु जो मेरे विरुद्ध अपराध करता है, वह अपने ही पर उपद्रव करता है; जितने मुझ से बैर रखते वे मृत्यु से प्रीति रखते हैं।”

प्रभु यीशु मसीह ने उन्हीं भावनाओं को उन यहूदियों के खिलाफ कैसे व्यक्त किया जिन्होंने उसे मार डाला था, “क्योंकि वे दिन तुझ पर आएँगे कि तेरे बैरी मोर्चा बाँधकर तुझे घेर लेंगे, और चारों ओर से तुझे दबाएँगे; 44और तुझे और तेरे बालकों को जो तुझ में हैं, मिट्टी में मिलाएँगे, और तुझ में पत्थर पर पत्थर भी न छोड़ेंगे; क्योंकि तूने उस अवसर को जब तुझ पर कृपा दृष्टि की गई न पहिचाना” (लूका 19:43-44)। और उसने अपने इस वादे को पूरा किया – अक्षरशः – 70AD में यरूशलेम पर टाइटस के अधीन रोम की सेनाओं को भेजकर।

पाठक, आप क्या करेंगे? स्वर्ग के परमेश्वर ने सृष्टि की रचना में स्वयं को आपके सामने प्रकट किया है। बुद्धि रूपी स्त्री ने नीतिवचन की पुस्तक से आपसे बातें की है। बाइबल दुनिया में धार्मिकता, सत्य और बुद्धि का एकमात्र स्रोत है, और इसका प्राथमिक संदेश परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह का सर्वोच्च अधिकार और उसका सुसमाचार है। उन लोगों के लिए उसका संदेश क्या है जो उस पर विश्वास नहीं करते हैं? यदि कोई प्रभु यीशु मसीह से प्रेम नहीं रखता, तो वह शापित हो जाए। यीशु मसीह के आगमन पर उसे अनंतकाल के लिए नरक की आग में डाला जाएगा (1 कुरिन्थ 16:22)। आज ही उसपर विश्वास रखें।

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