नीतिवचन 8:34
धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता है, और जो प्रतिदिन मेरे फाटकों पर दृष्टी लगाए रहता है, और मेरे द्वारों के खम्बों के पास बाट जोहता है। (केजेवी)
क्या आप बुद्धि के लिए तरसते हैं? एक सफल जीवन और परमेश्वर का अनुग्रह इसी पर निर्भर है। क्या आप बुद्धि की शिक्षा को सुनने के लिए उत्सुक हैं? क्या आप बुद्धि की खोज प्रतिदिन करते हैं? क्या आप उसे सीखने के किसी भी अवसर के लिए बड़े उत्साह से अभिलाषा करते हुए प्रतीक्षा करते हैं? उत्साही खोजकर्ताओं को परमेश्वर का अनुग्रह और धन्य जीवन की आशीष मिलती है (नीति 8:35)।
इस अध्याय के अधिकांश भाग में, और अगले अध्याय में भी बुद्धि का बड़े पैमाने पर व्यक्तित्वकरण किया गया है, जहां सुलैमान ने कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि का उपयोग किया कि ज्ञान और समझ को प्राप्त करने के लिए मनुष्यों को आग्रह कर सके। इस वचन में तीन बार बुद्धि का व्यक्तित्वकरण किया गया है – अर्थात् “मेरी,” “मेरे,” और फिर एक बार “मेरे”। जो जो मनुष्य बुद्धि को सीखना चाहता है, वह उसे बड़ी गर्मजोशी से अपने घर आमंत्रित करती है (नीति 8:1-7; 9:1-5)।
जो बुद्धि की खोज करते हैं और उसे पाते हैं, उनके लिए प्रतिफल रखे हुए हैं – जीवन की आशीष और परमेश्वर की प्रसन्नता (नीति 8:35)। “क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे,” (नीति 3:13-18)। क्या ही शानदार कथन है। बुद्धि को सुनने से आज आपको कौन-सी बात रोक रही है? क्या आप प्रतिदिन उसे देखते हैं? क्या आप उसके द्वारों के खम्बों के पास उसकी बांट जोहते हैं? जो उस से प्रेम करते हैं, वह भी उन से प्रेम करती है, और जो तड़के ही उसकी खोज करते हैं, वे उसे पाएंगे (नीति 8:17)।
अधिकतर लोग अत्यंत आलसी और हठीले होते हैं – यीशु ने उन्हें मार्ग के किनारे के श्रोता कहां (मरकुस 4:15)। वे न तो अपने मनों को तैयार करते हैं, और न ही अपने को प्रतिबद्ध करते हैं, और शैतान शीघ्र आकर उनसे बुद्धि को छीन ले जाता है। सुनकर सीखने के लिए दृढ़ तैयारी और कान लगाकर सुनना आवश्यक होता है (नीति 22:17), और प्रचार को सुनने या लिखित निर्देशों को पढ़ने के प्रति एक आलसी मनोवृत्ति कभी काम नहीं आएगी। शिक्षा का अधिकतर भाग बहरे कानों और अंधी आंखों से गुज़रता है। आज मसीही समाज के ज्यादातर लोग खरा उपदेश या खरी धर्मशिक्षा सुनना भी सहन नहीं कर सकते (2 तिमु 4:3-4)।
कुछ बहुत ही आनंद से सुनते हैं – यीशु ने उन्हें पत्थरीली भूमि कहा (मरकुस 4:16-17)। वे सत्य को सुनते समय बड़े ही उत्साही दिखाई आते हैं, परन्तु जैसे ही वे किसी विरोध का सामना करते हैं, वे शीघ्र मुरझा जाते हैं। वे सत्य और बुद्धि से अधिक मित्रता और भाईचारे की शांति को मूल्य देते हैं। इन डरपोक और समझौता करने वालों में सत्य के प्रति कोई वास्तविक समर्पण नहीं होता है, और उनके लिए शिष्यत्व की क़ीमत बहुत ज्यादा है (मत्ती 10:34-39; युहन्ना 8:31; 12:42-43; प्रेरितों 14:22; 2 तिमु 3:5, 12)।
कुछ इस संसार से प्रेम करते हैं – यीशु ने उन्हें कटीली भूमि कहा (मरकुस 4:18-19)। वे सत्य सुनने को मूल्यवान समझते हैं, परन्तु वे धन और विलासिता में अधिक रुचि रखते हैं। वे अपनी नौकरी, शौक, या मनोरंजन में तल्लीन रहते हैं; बुद्धि का सरगर्मी से पीछा करने के लिए उनके पास समय नहीं होता, और न ही वे प्रयास करते हैं। धन और विलासिता का प्रेम उन्हें बर्बाद कर देता है (1 तीमु 4:7-8; 6:6-10; 2 तीमु 3:4; 4:10; याकूब 4:4; 1 यूहन्ना 2:15-17)। लूत की पत्नी और देमास को स्मरण करों।
ये तीनों प्रकार के श्रोता – जिन में मसीहियों का एक बड़ा हिस्सा है – प्रभु की आशीषों को कभी नहीं पाते। वे उस जीवन से वंचित रह जाते हैं जिसे वह उनके सामने रखता है; वे उसकी ईश्वरीय कृपा से वंचित रह जाते हैं; वे बुद्धि में नहीं बढ़ते। वास्तव में, परमेश्वर उनसे वह ज्ञान और बुद्धि भी ले लेता है जो वे सोचते हैं कि उनके पास है (लूका 8:18)। परमेश्वर की अर्थव्यवस्था में, धनवान और धनवान बनता है, और निर्धन और भी निर्धन हो जाता है (मत्ती 25:28)। वह आलसी सुननेवालों को कंगाली की अवस्था में छोड़ देता है, कि वे मरे हुओं की मण्डली में रहे (नीति 21:16)।
परन्तु कुछ ऐसे हैं जो अच्छी भूमि हैं! वे बुद्धि को आनन्द से सुनते हैं, और फल लाते हैं, और परमेश्वर का अनुग्रह प्राप्त करते हैं। जैसा कि यह नीतिवचन बताता है, वे प्रतिबद्ध और मेहनती होते हैं। उन्हें बिरिया में कुलीन मनुष्य कहा जाता था (प्रेरितों 17:11), और सुलैमान ने उन्हें एकचित्तवाले मनुष्यों के रूप में वर्णित किया (नीति 18:1)। वे वचन सुनने के लिए इतनी तत्परता और गर्मजोशी की चित्तवृत्ति रखते हैं मानो किसी ख़जाने की खोज कर रहे हो (नीति 2:1-5)। ऐसे मनुष्य बहुत ही कम हैं (मत्ती 7:14), परन्तु वे यहोवा के रत्न हैं (मला 3:16-18)।
इस नीतिवचन का सबक क्या है? यीशु ने कहा, “इसलिये चौकस रहो कि तुम किस रीति से सुनते हो” (लूका 8:18)। आप जैसा सुनते हैं नतीजे भी वैसे ही होते हैं! यदि आप मार्ग के किनारे के, पत्थरीली भूमि, या कंटीली भूमि हैं, तो वह आपके पास से उस ज्ञान और आशीष को भी ले लेगा जो आपको लगता है कि आपके पास हैं। यदि आप एक अच्छी भूमि हैं, तो वह आपको अधिक ज्ञान और आशीष देगा। “इसलिये चौकस रहो कि तुम किस रीति से सुनते हो।” बुद्धि की लालसा करों; उसे प्रतिदिन ढूंढ़ो; अपने आप को इसकी खोज में लगा दों; हर अवसर का बेसब्री से इंतजार करों।
दाऊद ने बुद्धि की लालसा की। ” वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकनेवाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।” (भजन 19:10-11)। उसने फिर कहा, “मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं।” (भजन 119:111)। और फिर, ” जैसे कोई बड़ी लूट पाकर हर्षित होता है, वैसे ही मैं तेरे वचन के कारण हर्षित हूँ।” (भज 119:162)।
बुद्धि और सत्य – अर्थात् यीशु मसीह के राज्य का सुसमाचार – मूल्यवान बाते हैं। बहुत से भविष्यद्वक्ताओं और धर्मीजनों ने सुसमाचार को देखना और सुनना चाहा, परन्तु उन्हें यह अवसर नहीं मिला (मत्ती 13:16-17)। कुलीन मनुष्य इसे खरीदने के लिए अपना सब कुछ बेच देंगे (नीति 23:23; मत्ती 13:44-46)। कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि आप के सामने बुद्धि को बिना दाम के रख रही है, परन्तु बेहतर होगा कि आप उसके इस निमंत्रण को पलटा न दे, क्योंकि जब विपत्तियाँ न्यायोचित प्रतिशोध लेने आप पर टूट पड़ेगी, वह आपको असहाय और निराशाजनक हालत में अकेला छोड़ देगी (नीति 1:20-33)।
आप इस बुद्धि से कहाँ मिलते हैं? वह किंग जेम्स बाइबल और किंग जेम्स बाइबल से अनुवादित विभिन्न भाषाओं के बाइबलों में है। आप कर्तव्यपरायणता या उत्सुकता से पवित्रशास्त्र को कैसे पढ़ते हैं? आप उसे ऐसी कलीसियाओं में सुन सकते हैं, जहाँ विश्वासयोग्य पास्टर और शिक्षक अपने मंचों से उसका प्रचार करते हैं। आप कठोर सहनशक्ति और जोशपूर्ण प्रशंसासहित कैसे सुनते हैं? बुद्धि इस नीतिवचन पर दी गई हमारी शिक्षाओं में हैं। क्या आप हमारी शिक्षाओं को जल्दबाज़ी में पढ़कर छोड़ देते हैं, या उन पर मन लगाकर चिंतन भी करते हैं? “इसलिये चौकस रहो कि तुम किस रीति से सुनते हो।”
“धन्य है वह मनुष्य जो मेरी सुनता है”। जब बुद्धि का प्रचार किया जाता है, तो क्या आप एक तैयार और तत्पर श्रोता हैं, जैसे की कुलीन बिरिया के यहूदी थे (प्रेरितों 17:11)? धन्य है वह मनुष्य जो “मेरे फाटकों पर प्रतिदिन दृष्टी लगाए रहता” है। क्या आप ज्ञान की खोज केवल रविवार को करते हैं, या प्रतिदिन (भजन 1:2)? क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो “मेरे द्वारों के खम्भों के पास” बाट जोहता है। जब कुलीन स्त्री नाम की बुद्धि अधिक समझ देने के लिए प्रकट होती है तब क्या आप ऐसे प्रत्येक अवसर का बेसब्री से इंतजार करते हैं (प्रेरितों 10:33)?
महान परमेश्वर उस हर एक मनुष्य से पाया जाता है, जो उसे अपने पूरे मन से खोजता है (यिर्म 29:13)। क्या आप उसे अपने पूरे मन से खोजते हैं? यह वही मनुष्य है जो परमेश्वर में प्रसन्न होता है, जिसे अपने मन की अभिलाषायें प्राप्त होती है (भजन 37:4)। क्या आप सरगर्मी से उस में आनंदित होते हैं? और उसकी बुद्धि के विषय में क्या? क्या आप बुद्धि के लिए तरसते हैं? इस नीतिवचन को बिना चिंतन किये छोड़ने से पहले, इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार करें। क्या आप बुद्धि के लिए तरसते हैं? आपकी भविष्य की आशीषे इसी पर निर्भर है।
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