नीतिवचन 8:33

उपदेश सुनो, और बुद्धिमान बनो, और उसे मत नकारों। (केजेवी)

यहां आज तक की सबसे बेहतरीन सलाह दी गई है जो आपने न कभी सुनी होगी और न कभी पढ़ी होगी! ये नौ शब्द गहन बुद्धि सिखाते हैं। आपका चरित्र, आपकी प्रतिष्ठा, जीवन में आपकी वर्तमान स्थिति और आपकी भविष्य की आशाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि आपने इस सरल नीतिवचन का कितनी अच्छी तरह से पालन किया या करेंगे। एक बुद्धिमान व्यक्ति की गुण-विशेषता इस बात से परिभाषित होती है कि वह इस बुनियादी तीन-भागों में दिए गए नियम का पालन करने में कितना सक्षम है।

सुलैमान ने इस बिंदु पर आकर नीतिवचन में बुद्धि के एक विस्तारित व्यक्तित्वकरण का उपयोग किया (नीति 8:1-9:12)। कुलीन महिला-बुद्धि ने बालकों को अपने अनुग्रह से अनुरोध किया कि वे बुद्धिमान बनें और उससे महान आशीषें प्राप्त करें (नीति 8:32)। यह सलाह इतनी संक्षिप्त, इतनी सरल और इतनी बुनियादी है कि अधिकांश लोग इसे अनदेखा कर देंगे। उन्हें लगता है कि बुद्धि इतने कम शब्दों में नहीं हो सकती। वे ग़लत हैं!

कुलीन महिला-बुद्धि ने सबसे पहले यह कहा, “उपदेश सुनो”। सबसे पहले, समस्त शिक्षा को पाने के लिए दूसरे व्यक्ति को सुनना एक क़ाबलियत और चुनाव है। क्योंकि आप ने इस दुनिया में पूरी तरह से एक अज्ञानी के रूप में जन्म लिया, इस कारण आप जो भी ज्ञान प्राप्त करेंगे, वह अवश्य है कि केवल दूसरों से आये। बहुत-से लोगों को यह सुनना अच्छा नहीं लगता कि वे कुछ भी नहीं जानते, और उन्हें कैसे सोचना है और कैसे कार्य करना है यह सीखना होगा। परन्तु बुद्धिमान लोग इस प्रक्रिया के लिए तरसते हैं (नीति 1:5; 9:9; 12:1)।

जो बच्चें बुद्धिमान होते हैं वे अपने माता-पिता की सुनने का मूल्य जानते हैं और सुनने में आनंद लेते हैं, क्योंकि वे समझते हैं और स्मरण रखते हैं कि उनके माता-पिता उनसे कहीं अधिक जानते हैं (अय्यूब 32:6-7)। बुद्धिमान माता-पिता अपने माता-पिता की सुनते हैं, क्योंकि वे और भी अधिक जानते हैं! और बुद्धिमान पवित्र जन परमेश्वर के भवन में जाने के लिए तरसेंगे, जहां वे परमेश्वर के वचन को अपनी आत्मा के लाभ के लिए खोलकर और समझाते हुए सुन सकते हैं।

पौलुस ने बिरीया के यहूदियों की उनकी कुलीनता के लिए प्रशंसा कीं क्योंकि वे बड़े तत्पर मन से उसके उपदेश को सुन रहे थे (प्रेरितों के काम 17:11)। फिर भी बाइबल सुनने के विभिन्न स्तरों का स्पष्ट रूप से वर्णन करती है। हेरोदेस अन्तिपा ने यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले को ख़ुशी-ख़ुशी से सुना, परन्तु उसने उसका शिरच्छेद भी कर दिया (मरकुस 6:16-28)। यीशु ने अपने श्रोताओं से कहा कि यदि वे फल लाना चाहते हैं तो ध्यान दें कि उन्होंने कैसे सुना (लूका 8:18)।

फिर कुलीन महिला-बुद्धि ने आगे कहा, “और बुद्धिमान बनो।” आप माता-पिता, पास्टरों और शिक्षकों से जो सुनते हैं, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है? क्या आप जो सुनते हैं उसे स्वीकार करने और अपने जीवन में उसे लागू करने के लिए अपने स्वयं के विचारों को त्याग देते हैं? उसने सच्ची बुद्धि की मांग कीं, जो दूसरों से सीखती है (नीति 6:6; 19:20; भजन 2:10; 94:8)। अभिमानी बुद्धि जो शिक्षा को ग्रहण नहीं करती, वह मूर्खतापूर्ण और खतरनाक है (नीति 3:7; 26:5,12)।

फिर उसने कहा, “और उसे मत नकारों।” सुधार, निर्देश, या चेतावनी को करारा जवाब देना एक मूर्ख हृदय को प्रमाणित करता है। ऐसी प्रतिक्रियाओं से घृणा रखे और एक समर्पित मन से सुनें। एक शिक्षक से मुंह न मोड़ें, भले ही वह ऐसी बातें कहे जो आपको नापसंद हों। पौलुस ने सिखाया, “नबूवत को तुच्छ न जानो,” जिसका अर्थ है कि उसके सुनने वालों को उपदेश से प्रेम करना था, उसकी खोज करनी थी और उसे ग्रहण करना था (1 थिस्स 5:20)।

क्या आप शिक्षकों से प्रेम करते हैं, अपने विचारों को त्याग देतें हैं, और निर्देश स्वीकार करते हैं? इसी से आपकी बुद्धि का मूल्यांकन होता है; यह आपके भविष्य की शांति और समृद्धि को निर्धारित करता है (नीति 1:20-33; 8:34-36; 10:17; 29:1)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।