नीतिवचन 8:31
मैं उसकी बसाई हुई पृथ्वी से प्रसन्न थी और मेरा सुख मनुष्यों की संगति से होता था।
बुद्धि आपका ध्यान पाने के योग्य है। परमेश्वर बुद्धि का मालिक है। वह उसकी सम्पत्ति है। वह सनातन काल से ही उसके पास है। परमेश्वर कभी बुद्धि के बिना अस्तित्व में नहीं था, और न बुद्धि परमेश्वर के बिना कभी अस्तित्व में थी। उसने मनुष्य के रहने के लिए जो जगत बनाया उसे बनाने में उसने बुद्धि का उपयोग किया (नीतिवचन 8:22-31)।
स्वर्गदूतों, शैतान और मनुष्यों को बुद्धि प्राप्त करनी पड़ती है या उन्हें उसे सीखना पड़ता है, लेकिन प्रभु को न तो उसे प्राप्त करना पड़ता है और न ही उसे सीखने की ज़रूरत है। परमेश्वर की बुद्धि का सबसे बड़ा प्रगटीकरण मनुष्यों में दिखाई देता है- उनकी रचना में, उनकी सारी आवश्यकताओं को पूरा करने में, उनके समान बनने उसका देह-धारण करने में, उनमें से कुछ का अनंतकाल के लिए उद्धार करने में, और उनपर अपने वचन के द्वारा आप ही को प्रगट करने में। वह इस नीतिवचन में बुद्धि को ऊँचा उठाता है ताकि आप उसकी ओर ध्यान दें। बुद्धि आपका ध्यान पाने के योग्य है।
नीतिवचन का 8वा अध्याय बुद्धि का वर्णन एक कुलीन स्त्री के रूप में करता है। इस अध्याय के पहले पद से लेकर अंतिम पद में प्रयुक्त व्यक्तिगत सर्वनाम, जैसे “मैं”, “मेरी”, “मुझ से”, सब कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि के सन्दर्भ हैं (नीतिवचन 8:1,36)। वह अपना परिचय देती है (नीतिवचन 8:1-11), उसके अनुसार जीवन जीने के अपने लाभों का वर्णन करती है (नीतिवचन 8:12-21), वह बताती है कि परमेश्वर ने सब बातों की सृष्टि करने से पहले और जब उसने सृष्टि की उस दौरान भी वह परमेश्वर के साथ थी (नीतिवचन 8:22-31), और अंत में वह मनुष्यों को उसके महान मूल्य पर विचार करने की चुनौती देती है (नीतिवचन 8:32-36)। परमेश्वर और मनुष्यों के साथ आपका सुख और आपकी सफलता बुद्धि की प्राप्ति पर निर्भर हैं।
इस खंड में (नीतिवचन 8:22-31) कुलीन स्त्री रूपी बुद्धि वर्णन करती है कि वह सृष्टि से पहले और उसके दौरान कारीगर-सी परमेश्वर के पास थी। वह बताती है कि परमेश्वर ने उसके द्वारा पर्वत, महासागर, आकाशमण्डल, बादल और गहिरे सागर के सोते बनाए। लेकिन उसके बाद वह अपना ध्यान इन सब भौतिक चीज़ों से हटाती है, और उसकी बसाई हुई पृथ्वी और मानवजाति का वर्णन करती है। परमेश्वर की बुद्धि पर विचार करें जिसने पृथ्वी पर जीवन को इतना खुशहाल बना दिया है।
उसकी बसाई हुई पृथ्वी की ऐसी ऐसी विशेषताएं हैं जिनसे मानव-जीवन सुख और समृद्ध बन जाता है। मनुष्य सुन्दर-सुन्दर दृश्य और ठंडी-ठंडी हवाओं के लिए पहाड़ों का, सुरक्षा और हरी-भरी वनस्पतियों के लिए घाटियों का, और समुद्र तटों व जल-क्रीड़ाओं के लिए महासागरों का आनंद ले पाते हैं। वे अलग अलग चार ऋतुओं का आनंद ले पाते हैं। कुछ जलवायु अंगूर के बागानों के लिए उपयुक्त होते हैं; तो वही कुछ स्थान ऐसे हैं जहाँ ज़मीन के नीचे हीरे, बेशकीमती पत्थर, सोना और अन्य मूल्यवान धातु हैं। जानवर, फूल, पेड़, भूभाग और मौसम लगभग सब की सुविधा के लिए स्थान के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं।
परमेश्वर की महान बुद्धि मनुष्य के लिए उसके अन्य बहुत-से कार्यों में भी दिखाई देती है – उनकी सृष्टि, करुणामय देखभाल, उसका उनके स्वरूप में मानवरूप लेना, उद्धार और आप ही की पहचान का प्रकाशन। ये पांच काम बुद्धि को बहुत ऊंचा उठाते हैं। परमेश्वर के इन महानतम कार्यों की व्यापक समीक्षा पर विचार करें ताकि मनुष्य के पुत्रों पर अपनी दया दिखाने में परमेश्वर ने जिस बुद्धि का उपयोग किया उसके लाभ और मूल्य को आप पूरी तरह से समझ सकें। आपको बुद्धि को अवश्य ही सबसे बढ़कर महत्व देना चाहिए।
सबसे पहले, परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया। कैसे? अपनी सनातन और असीम बुद्धि से! बच्चे के नाखूनों और आँखों की पलकों को देखें। टेस्टास्टरोन एक लड़के को पुरुष में बदल देता है, और एस्ट्रोजन एक लड़की को स्त्री में बदल देता है, जबकि दोनों एक ही प्रकार का खाना खाते हैं। जब आप चलते हैं, तो आप कुछ ऐसा करते हैं जिसकी नकल कोई रोबोट नहीं कर सकता। लेकिन फिर किसी पहलवान को देखो! क्या पुरुष और महिलाएं शारीरिक समागम का आनंद लेते हैं? क्या इस शारीरिक समागम की क्रिया में उनके शरीर एक-दूसरे के लिए बिलकुल अनुकूल और सुसंगत बैठते हैं? परमेश्वर की महिमा! मनुष्य बुद्धिजीवी के रूप में पृथ्वी पर किसी अन्य भी प्राणी के मुक़ाबले चीजों का विश्लेषण कर सकता है, सोचता है, प्यार करता है और निर्णय लेता है। प्रेमियों को एक-दूसरे की अन्तरात्मा में झांकते हुए देखें। मनुष्य अद्वितीय और विशेष है। उसकी रचना में परमेश्वर ने बुद्धि का उपयोग किया।
दूसरा, परमेश्वर मनुष्य की सब ज़रूरतों का प्रयोजन करके उसकी देखभाल करता है। कैसे? अपनी सनातन और असीम बुद्धि से! वह आपकी त्वचा को चूमने के लिए धूप भेजता है और खेतों में फसल की समृद्धि के लिए बारिश भेजता है। वह खेत आपके मन की तन्दुरूस्ती के लिए रोटी, हृदय की प्रसन्नता के लिए दाखमधु, और आपके चेहरे के लिए तेल की बिजें उगा सकता है। वह इतिहास का सबसे महान शादियाँ जोड़नेवाला व्यक्ति है, जो घटनाओं को दिशा देकर आपके जीवनसाथी से आपकी मुलाकात की व्यवस्था करता है। जब आपको नौकरी की ज़रूरत थी, तो उसने आपको नौकरी दिलाने के लिए किसी उद्दोग को अस्तित्व में लाया। जब आप और आपका पड़ोसी भिन्न भिन्न जरूरतों के लिए प्रार्थना करते हैं, तो वह दोनों की प्रार्थनाओं के उचित उत्तर देता है। आपके जीवन को सुलभ बनाने के लिए उसने वैज्ञानिक आविष्कारकों की सहायता कीं और आपके जीवन को बचाने के लिए नई-नई चिकित्सा प्रक्रिया की आवश्यकता को पूरा करने कईयों को डॉक्टरी का वरदान और कौशल दिया। मनुष्य परमेश्वर की बुद्धि से सुरक्षित रखा हुआ है!
तीसरा, परमेश्वर मानव-शरीर और प्रकृति में अवतरित हुआ। कैसे? अपनी सनातन और असीम बुद्धि से! नासरत का यीशु चमत्कारिक तरीके से एक कुंवारी से जन्म लेकर परमेश्वर का पुत्र बना। वह परमेश्वर और मनुष्य दोनों का देहधारी रूप है। बुद्धि और ज्ञान के सारे भंडार उसी में हैं। वह परमेश्वर और मनुष्यों की दृष्टि में परिपूर्ण है। वह जीवन का देहरूप है। वह सत्य का देहरूप है। इतिहास में कभी किसी भी मनुष्य ने उसके समान बातें नहीं कीं; इतिहास में उसके समान कोई मनुष्य नहीं हुआ। जब इस महिमामय मनुष्य की मृत्यु हुई, तो सूर्य अन्धियारा हो गया, और भूकम्प से पृथ्वी हिल गई। वह महिमा की सामर्थ्य से मृतकों में से जी उठा, और अब वह स्वर्ग में राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु बनकर समस्त विश्व पर राज्य करता है। परमेश्वर और असीम बुद्धि दोनों यीशु मसीह में मानव शरीर में प्रकट हुए थे।
चौथा, परमेश्वर मनुष्यों को पाप से बचाता है। कैसे? अपनी सनातन और असीम बुद्धि से! न्यायी और पवित्र परमेश्वर, जिसे प्रत्येक पाप और पापी को दंड देना चाहिए, उसने एक मार्ग तैयार किया जिससे कि वह आप ही धर्मी ठहरे, और पापियों को भी धर्मी ठहरानेवाला हो सके। उसने कुंवारी से जन्म के द्वारा एक मानव शरीर तैयार किया, जिसमें वह आप निवास कर सका कि मृत्युदंड के योग्य अपने चुने हुओं के बदले शरीर में पाप को दण्ड दे सके। परमेश्वर ने कुंवारी से जन्मे और निष्पाप अपने पुत्र को क्रूस पर बलिदान किया, ताकि वह अपने दुष्ट शत्रुओं को पुत्र और पुत्रियों के रूप में अपना सके। उसने अपने बेटे को मृतकों में से जीवित कर दिया, ताकि उसका पुत्र, यीशु और उसके लेपालक पुत्र-पुत्रियाँ अनंत काल के लिए एक साथ आनंद मना सकें। वह उनकी पाप में मरी हुई आत्माओं को पुनर्जीवित करता है और अन्त में उनके शरीरों को महिमामंडित करेगा ताकि उन्हें स्वर्ग के लिए पूरी तरह उपयुक्त बना सके। इस कार्य में जिस बुद्धि और सामर्थ की आवश्यकता थी उसका प्रचार सुसमाचार के माध्यम से किया जाता है। हम परमेश्वर की बुद्धि से बचायें गएँ हैं!
पाँचवाँ, परमेश्वर आप ही मनुष्यों पर प्रकट हुआ। कैसे? अपनी सनातन और असीम बुद्धि से! उसने विभिन्न समयों में चालीस चुने हुए लोगों को पृथ्वी के सच्चे इतिहास, मनुष्य के पतन और उद्धार की सख्त ज़रूरत, परमेश्वर की अनंत महिमा और उसके गुणों, और सुखी और सफल जीवन जीने के लिए पूर्ण बुद्धि की आवश्यकता के विषय में लिखने के लिए प्रेरित करके बाइबल – बुद्धि और ज्ञान की परम अधिकार की पुस्तक – लिखी। मनुष्य को प्रेम, विवाह, यौन संतुष्टि, पालकों द्वारा बच्चों का प्रशिक्षण, काम का कर्तव्य, वित्तीय प्रबंधन, पारिवारिक संबंध, राजनीति-विज्ञान, चर्च की सेवकाई, सामाजिक कल्याण, परमेश्वर से संबंधित बातों को करने, किस अवस्था में मरना है, आदि बातों के लिए सही सलाह और समाधान कहीं और नहीं मिल सकते। बाइबल परमेश्वर की प्रकट बुद्धि है!
प्रिय पाठक, परमेश्वर ने आपकी रचना करने में, आपको संभालकर रखने में, यीशु मसीह के देहधारण में, पहले से ठहराए गए अपने पुत्रों के उद्धार में, और बाइबल में सत्य व ज्ञान को प्रगट करने में बुद्धि का उपयोग किया, और बुद्धि का प्रदर्शन किया। क्या बुद्धि आपके ध्यान दिए जाने के योग्य है? वास्तव में! आप परमेश्वर की बुद्धि को पाने के लिए क्या कर रहे हैं? यह बाइबल में लिखे वचनों में पाई जाती है, और परमेश्वर के चुने हुए लोग इसे अपनी मण्डलियों (चर्च) में सिखाते हैं। महान आशिषें उन लोगों की प्रतीक्षा कर रही हैं जो उसे खोजते हैं, और भयानक न्याय उन लोगों की प्रतीक्षा कर रहा है जो उसे अनदेखा करते हैं या उसे अपनाने से इनकार करते हैं (नीतिवचन 8:32-36)।
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