नीतिवचन 8:28
जब उसने आकाशमण्डल को ऊपर से स्थिर किया, और गहिरे सागर के सोते फूटने लगे,
बुद्धि कितनी प्राचीन है? परमेश्वर के लिए बुद्धि कितनी महत्वपूर्ण है? वह आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण होनी चाहिए? इस नीतिवचन में इन सवालों के जवाब दिए गए हैं। आकाश और पृथ्वी के सृष्टिकर्ता परमेश्वर के पास बुद्धि आदि में ही थी, इससे पहले कि उसने आकाश में बादलों और समुद्रों में सोते बनाए। उसने इन चीज़ों को बनाने के लिए बुद्धि का उपयोग किया (नीतिवचन 3:19-20)। आपको बुद्धि से प्रेम करना चाहिए।
नीतिवचन 8 बुद्धि का एक लंबा मानवीकरण (व्यक्तित्वकरण) है। राजा सुलैमान ने महिला-बुद्धि का परिचय दिया और मनुष्यों के सामने उसके प्रस्ताव को रखा (नीतिवचन 8:1-11); उसने उसके कई लाभों को सूचीबद्ध किया (नीतिवचन 8:12-21); उसने कहा कि संसार की रचना करने से पहले परमेश्वर के पास बुद्धि थी (नीतिवचन 8:22-31); और उसने बुद्धि के प्रस्ताव को दोहराया और जो उसे अपनाने से इनकार करते हैं उन पर कठोर दंड की चेतावनी दी (नीतिवचन 8:32-36)।
यदि यहोवा परमेश्वर के पास आदि में बुद्धि थी और उसने संसार की रचना करने के लिए उसका उपयोग किया, तो निश्चय ही वह तुम्हारा ध्यान पाने के योग्य है। आप ने अन्य चीजों का पीछा करने के लिए कई घंटे खर्च किए, कठोर परिश्रम किया, और बहुत सारा रूपया खर्च किया, ये सब बुद्धि पाने के लिए क्यों नहीं? आपने बुद्धि को प्राप्त करने के लिए हाल ही में कितने मिनट और कितने प्रयास किए हैं? समय आ गया है कि आप अपने जीवन के प्रति गंभीर बने।
परमेश्वर ने ऊपर आकाशमंडल को स्थिर किया, और उस समय बुद्धि उसके साथ थी। क्या आप बादलों में के जल-चक्र और उनमें से बरसनेवाले कई टन पानी के कार्य में लगनेवाली बुद्धि को समझते हैं? “वह जल को अपनी काली घटाओं में बाँध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता” (अय्यूब 26:8)। “आकाश की ओर दृष्टि करके देख; और आकाशमण्डल को ताक, जो तुझ से ऊँचा है” (अय्यूब 35:5)।
“देख, परमेश्वर महान् और हमारे ज्ञान से कहीं परे है, और उसके वर्ष की गिनती अनन्त है। क्योंकि वह तो जल की बूंदें ऊपर को खींच लेता है वे कुहरे से मेंह होकर टपकती हैं, वे ऊँचे ऊँचे बादल उँडेलते हैं, और मनुष्यों के ऊपर बहुतायत से बरसाते हैं। फिर क्या कोई बादलों का फैलना और उसके मण्डल में का गरजना समझ सकता है?” (अय्यूब 36:26-29)।
” क्या तू घटाओं का तौलना, या सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है?” (अय्यूब 37:16)। “सब नदियाँ समुद्र में जा मिलती हैं, तौभी समुद्र भर नहीं जाता; जिस स्थान से नदियाँ निकलती हैं, उधर ही को वे फिर जाती हैं” (सभोपदेशक 1:7)।
क्या तू बादलों तक अपनी वाणी पहुँचा सकता है, ताकि बहुत जल बरस कर तुझे छिपा ले? क्या तू बिजली को आज्ञा दे सकता है कि वह जाए, और तुझ से कहे, ‘मैं उपस्थित हूँ’? किसने अन्त:करण में बुद्धि उपजाई, और मन में समझने की शक्ति किसने दी है? कौन बुद्धि से बादलों को गिन सकता है? और कौन आकाश के कुप्पों को उण्डेल सकता है, जब धूलि जम जाती है, और ढेले एक दूसरे से सट जाते हैं? (अय्यूब 38:34-38)।
क्या आपने कभी 4 इंच की वर्षा पर विचार किया है? यह 2.5 गैलन प्रति वर्ग फुट की होती है, जो वजन में 10 लीटर के करीब है। केवल एक एकड़ ज़मीन के लिए लगभग 452 टन पानी की आवश्यकता होती है। अय्यूब ने कहा, “वह जल को अपनी काली घटाओं में बाँध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता” तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं (अय्यूब 26:8)। परमेश्वर ने बादलों को ऊपर स्थापित किया। उसकी महिमा करों!
लेकिन क्या होगा अगर वही बारिश पुरे भारत देश पर गिरती है, जो 3,287,263 वर्ग किलोमीटर या 81 करोड़ एकड़ से अधिक है? तब तो यह वर्षा अरबों लीटर में हो जाती है! और उस पानी का वजन 463 बिलियन पाउंड या 232 मिलियन टन है! यदि आपके सिर पर मंडराने वाले बादल ही इस प्रकार का भार लेकर चल सकते हैं, तो फिर अवश्य ही आपको उस बुद्धि की आवश्यकता है जिसका उपयोग परमेश्वर ने उन्हें बनाने में किया था।
परमेश्वर ने गहिरे सागर के सोतों को, जो समुद्र के सोते हैं, दृढ़ किया। यदि आप नहीं जानते थे कि समुद्र में सोते और जल के धबधबे हैं, तो बाइबल यह 3500 वर्षों से बताती आ रही है (नीतिवचन 8:28; अय्यूब 38:16; उत्पत्ति 8:2)। यह केवल 1977 में था जब गहरे समुद्र के भूवैज्ञानिकों ने सतह के नीचे पृथ्वी की पपड़ी में हाइड्रोथर्मल वेंट, अर्थात् जलतापीय छिद्र पाएं जिनमें से गर्म खनिज पानी के सोते फूट पड़ते हैं।
परमेश्वर के पास आरम्भ से ही बुद्धि थी। उसके पास बुद्धि हमेशा से ही थी। उसने आकाश और पृथ्वी को बनाने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग किया। आप अपना शेष जीवन कैसे जिएंगे? अपने माता-पिता की परंपराओं पर चलकर? अपने बचपन की आदतों पर चलकर? वैज्ञानिक परीक्षणों और उनकी गलतियों पर चलकर? आपके साथियों के साथ चलकर? उन विद्वान विशेषज्ञों की विचारधाराओं पर चलकर जो एक पीढ़ी को हिम युग और उसकी अगली पीढ़ी को ग्लोबल वार्मिंग के बारे में चेतावनी देते हैं?
पाठक, बुद्धि आपके सामने वरदान के रूप में रखी जा रही है। परमेश्वर के प्रारंभिक ज्ञान को उसकी सृष्टि को देखने और उस पर विचार करने से सीखा जा सकता है (भजन 19:1-7; रोमियों 1:19-21)। लेकिन परमेश्वर अपने प्रेरित-शास्त्रों, अर्थात् बाइबल में ऐसी बुद्धि और समझ प्रदान करता है जो उससे भी बढ़कर विशाल और महान हैं (भजन 19:7-11; 2 तीमुथियुस 3:16-17)। आपने बाइबल को आखिरी बार कब पढ़ा था? आपने पिछली बार बाइबल का उपदेश कब सुना था? यदि आप आज बाइबल या उसके उपदेश की खोज नहीं कर रहे हैं, तो आप जीवन की सबसे बड़ी आशीष खो रहे हैं।
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