नीतिवचन 8:27

जब उसने आकाश को स्थिर किया, तब मैं वहाँ थी, जब उसने गहिरे सागर के ऊपर आकाशमण्डल ठहराया,

बुद्धि कितनी महत्वपूर्ण है? जब परमेश्वर आकाश और पृथ्वी को शून्य से बनाया तब वह उसके पास थी (उत्पत्ति 1:1; इब्रानियों 11:3)। आकाश और पृथ्वी उसकी सामर्थ्य, बुद्धि और ज्ञान का वर्णन करते हैं (यिर्मयाह 10:12; 51:15)। यहां बुद्धि रूपी स्त्री आपको प्रोत्साहित कर रही है कि आप बुद्धि को अत्यधिक महत्व दें क्योंकि परमेश्वर उसे ऐसा महत्व देता है।

“कुशल रचना” (इंटेलिजेंट डिज़ाइन) की आधुनिक और कमजोर अवधारणा परमेश्वर यहोवा के साथ न्याय नहीं करती है, क्योंकि वह केवल कुशलता या बौद्धिक क्षमता से कहीं अधिक अपनी पूर्ण समझ और रचनात्मक प्रतिभा में असीम रूप से बुद्धिमान है। वह बुद्धिमान है, और वह आपको बुद्धिमान बनने के लिए कहता है।

कुशलता, या मात्र विश्लेषण और अनुप्रयोग, बुद्धिमत्ता से कम है। परमेश्वर ने विश्व के हर पहलू को उस समय क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित किया जब विश्लेषण या प्रयोग करने के लिए ऐसी कोई वस्तु पहले से अस्तित्व में थी भी नहीं। उसके पास सही परख करने की शक्ति भी है जिससे वह अन्य सभी बुद्धिजीवी प्राणियों के साथ विवेकपूर्वक और समझ के साथ वार्तालाप कर सके। उसने सुलैमान को अपने नीतिवचन लिखने के लिये प्रेरित किया ताकि उनके द्वारा वह आपको बुद्धि दे सके।

किसने सोचा था कि पृथ्वी चौकोनी और चपटी है? यहोवा परमेश्वर के बच्चे हमेशा से जानते थे कि पृथ्वी गोल है। जब धन्य और एकमात्र सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने पृथ्वी का वातावरण बनाया, और जब उसने उस वातावरण को अंतरिक्ष में लटके पानी के इस गोले के चारों ओर स्तापित किया, तब बुद्धि वहाँ उसके साथ थी। बुद्धि रूपी स्त्री आज आपको इस नीतिवचन और यहोवा के बाकी धर्मग्रंथों के द्वारा बुद्धि प्रदान करती है। क्या आप उसके इस अनुग्रह से भरे वरदान को ग्रहण करेंगे (नीतिवचन 8:1-5,32-36; 9:1-12)?

बुद्धि कितनी विशाल है? बुद्धि रूपी स्त्री के परिचय और निमंत्रण (नीतिवचन 8:1-5) के बाद, वह बुद्धि की श्रेष्ठता और सच्चाई (नीतिवचन 8:6-11), वह जिनके पास होती है उन्हें होने वाले लाभ (नीतिवचन 8:12-21), और जब परमेश्वर ने आकाशमंडल और पृथ्वी की सृष्टि कीं उस वक़्त उसका वहां होना और परमेश्वर द्वारा उसका उपयोग किया जाना (नीतिवचन 8:22-31) आदि बातों का वर्णन करती है। इसके बाद वह एक और अन्तिम बुलाहट देकर समापन करती है (नीतिवचन 8:32-36)। आप अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त करते हैं, बुद्धि उन सब में सबसे कीमती वस्तु है (नीतिवचन 3:13-20; 4:5-13; 8:10-11)।

यह नीतिवचन यह दिखाकर बुद्धि को ऊंचा उठाता है कि जब परमेश्वर ने आकाशमंडल बनाया और उसने आकाशमंडल को जल से भरी पृथ्वी के चारों ओर ठहराया तब वह वहां थी। परमेश्वर ने पहले दिन आकाश, पृथ्वी और ज्योति की सृष्टि की (उत्पत्ति 1:1-5; निर्गमन 20:11; 31:17)। उसने दूसरे दिन पृथ्वी का वायुमंडल बनाया, जो आकाशमंडल का अंतरिक्ष कहलाता है जो उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग करता है (उत्पत्ति 1:6-8)।

परमेश्वर ने विश्व की रचना की। अंतरतारकीय और अंतरग्रहीय अंतरिक्ष और गोल पृथ्वी का निर्माण सबसे पहले हुआ था (उत्पत्ति 1:1)। पृथ्वी जल से ढकी मानों एक बेडौल गेंद थी जो अंतरिक्ष के घोर अंधकार में लटकी हुई थी (उत्पत्ति 1:2)। फिर परमेश्वर ने पहले दिन को पूरा करने के लिए, तीन दिनों तक बिना किसी ज्योति के स्रोतों के, उजियाला बनाया, ध्यान रखें (उत्पत्ति 1:3-5,14-19)। एकमात्र बड़ा धमाका, यदि कोई हुआ था, तो वह तब हुआ जब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो” – तो उजियाला हो गया (उत्पत्ति 1:3)! यदि परमेश्वर ने आपको विश्वास का वरदान दिया है, तो ही आप इसे समझेंगे (इब्रानियों 11:3)।

परमेश्वर ने पृथ्वी का वातावरण बनाया। उसने एक अन्तर बनाकर उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया, जिसे हम वायुमंडल कहते हैं, जिसमें पक्षी और हवाईजहाज उड़ते हैं (उत्पत्ति 1:6-8,20)। उसने तीसरे दिन पृथ्वी पर और इस वातावरण के नीचे के जल को समुद्र में इकट्ठा किया (उत्पत्ति 1:9)। वायुमंडल के ऊपर का जल बारिश से पहले 1,656 वर्षों तक वहीं बना रहा (उत्पत्ति 2:5-6; 7:4; इब्रानियों 11:7)। बाढ़ आने तक बारिश नहीं हुई थी; जलप्रलय के बाद तक धनुष दिखाई नहीं देता था (उत्पत्ति 7:11-12; 9:12-15)।

दूसरे दिन परमेश्वर ने अपने रचनात्मक कार्य को आगे बढ़ाते हुए उसने पृथ्वी के चारो और इस वायुमंडलीय आकाश की सृष्टि की। सृष्टि के इन पहले दो दिनों में पृथ्वी के चारों ओर पानी और वातावरण को बनाए रखने के लिए गुरुत्वाकर्षण का समन्वय शामिल था। हालाँकि पृथ्वी 1000 मील प्रति घंटे की गति से घूमती है, पृथ्वी की दिशा में घूमने वाला वातावरण पृथ्वी के साथ-साथ चलता है, इसलिए आप उड़ नहीं जाते! हम अंतरिक्ष यान के सुविधाजनक बिंदु से, आकाश के अन्तरिक्ष में एक्वा ब्लू बॉल देख सकते हैं। परमेश्वर की महिमा का गुणगान करें!

इस नीतिवचन में प्रयुक्त शब्द “आकाशमण्डल” वायुमंडलीय आकाशीय वृत्त, परिधि, वक्र, चाप, वलय या गोल आकार का वर्णन करता है जिसे परमेश्वर ने उस गेंद के चारों ओर लपेटा है जिसे हम पृथ्वी कहते हैं। उसने भूमि के अस्तित्व में आने से पहले जलीय पृथ्वी पर एक आकाशमण्डल, या एक घेरा स्थापित किया (नीतिवचन 8:29; उत्पत्ति 1:3-5)। हालाँकि सुलैमान ने ये वचन ईसापूर्व 1000 साल पहले लिखे थे, लेकिन परमेश्वर के प्रेरित प्रकाशन से उसे पता चला कि पृथ्वी गोल है। यशायाह ने भी ईसापूर्व लगभग 700 वर्ष पहले ईश्वर-प्रेरणा से लिखते हुए पृथ्वी के वृत्ताकार या गोल होने का उल्लेख किया है (यशायाह 40:22)।

एक यूनानी गणितज्ञ एराटोस्थनीज़ (276-195 ईसा पूर्व), जो जानते थे कि पृथ्वी गोल है, उन्होंने इसकी सही परिधि और इसकी धुरी के झुकाव की गणना की। निकोलस कोपरनिकस (1473-1543), जो जानते थे कि पृथ्वी गोल है, उन्होंने हेलियोसेंट्रिकिज़्म के लिए प्रमाण विकसित और प्रचारित किए – अर्थात् यह कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। पोप अर्बन VIII ने ऐसी बेतुकी बातों का समर्थन करने के लिए गैलीलियो (1564-1642) को फटकार लगाई। लेकिन न्यूटन (1643-1727) ने पुष्टि की कि कैसे एक गेंद आपको गुरुत्वाकर्षण के साथ सीधा महसूस करा सकती है। लेकिन वे तो बस पुरानी ख़बरों को नए सिरे से प्रस्तुत कर रहे थे!

इस नीतिवचन से हमें क्या शिक्षा मिलती है? जब परमेश्वर आकाश और पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडलीय पर्दा बनाया तब यदि बुद्धि वहां उसके साथ थी, तो वह आपके लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है! यदि परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को बनाने के लिए बुद्धि का उपयोग किया, तो यह आपके निर्णय लेने की शक्ति के लिए एक विशाल वस्तु होगी! क्या आप बुद्धि की खोज के लिए प्रतिबद्ध हैं? क्या वह आपके लिए किसी भी अन्य चीज़ से अधिक महत्वपूर्ण है? आखिरी बार आपने बाइबल कब पढ़ी थी? आखिरी बार आपने कब सच्चा उपदेश सुना?

बुद्धि और ज्ञान के सब भण्डार प्रभु यीशु मसीह में हैं, क्योंकि वह देह में प्रकट यहोवा परमेश्वर हैं – मानव शरीर में परमेश्वरत्व की पूर्णता (कुलु 2:3,9)। उसी ने सब वस्तुओं की सृष्टि की, और जो कुछ उत्पन्न हुआ वह उसके बिना उत्पन्न न हुआ (यूहन्ना 1:3; इफि 3:9; इब्रानियों 1:2)। उसके पास एक आदर्श राजा, महायाजक, उद्धारकर्ता और आने वाले न्यायाधीश के रूप में समस्त बुद्धि और ज्ञान है। आज ही उसके सामने स्वयं को नम्र करें। उससे अनुग्रह और बुद्धि के लिए प्रार्थना करें।

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