नीतिवचन 8:23

मैं सदा से वरन् आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही से ठहराई गई हूँ।

बुद्धि बदलती नहीं। बुद्धि का अंश अंश कर के विकास नहीं हुआ है। बुद्धि खोज या प्रयोग का परिणाम नहीं है। विश्व में बुद्धि की मात्रा बढ़ती नहीं जा रही है। मानवजाति अपनी शिक्षा या समय के साथ बुद्धि में सुधार नहीं कर रही है। विश्वविद्यालयों के विचार-मंचों पर बुद्धि का विकास नहीं किया जाता। बुद्धि पुस्तकालयों में जमा नहीं कीं जाती। विश्व में बुद्धि की एक निश्चित मात्रा है, और मानवजाति इसके साथ अपना संपर्क खो रही है। आपकी इस मानवजाति का भविष्य दांव पर है।

बुद्धि किसी स्थिति का ठीक-ठीक आंकलन करने और सही क्रिया का चुनाव करने की शक्ति है। यहोवा परमेश्वर के पास असीम बुद्धि है – अर्थात् सभी बातों की ठीक ठीक समझ (नीतिवचन 8:22-31)। उसके पास आदि में बुद्धि थी – वही सनातन आरम्भ जब उसने उन सब चीजों की, जो आपको ज्ञात है, सृष्टि कीं (उत्प. 1:1)। मनुष्यों के पास जो भी बुद्धि है वह केवल उस प्रकटीकरण द्वारा है जो उसी से आया; उसकी ख़ोज मानव-प्रयासों से नहीं कीं गई। उसका आरम्भ परमेश्वर का भय मानने से होता है (नीतिवचन 1:7; 9:10)।

इस नीतिवचन में बुद्धि प्रथम व्यक्तिवाचक के रूप में बातें कर रही है, क्योंकि सुलैमान एक वांछनीय स्त्री के रूप में बुद्धि का लम्बा वर्णन कर रहा है (नीतिवचन 8:1 – 9:12)। एक शक्तिशाली रूपक में, यह कुलीन महिला-बुद्धि मनुष्यों से आग्रह कर रही है कि वे पराई स्त्री के मूर्खतापूर्ण और जानलेवा आकर्षण के ऊपर उसके श्रेष्ठ वरदानों और खूबियों को चुने (नीतिवचन 9:13-18)। प्रत्येक मनुष्य एक चुनाव करता है – वह या तो परमेश्वर से शाश्वत बुद्धि के वरदान को ग्रहण करने का चुनाव करता है, या इसके बजाय भ्रष्ट मूर्खता को चुनता है ।

हम आज एक ऐसे युग में हैं जब सूचना-प्रणाली विस्फोटक रूप ले रही है। इंटरनेट, और जानकारी का पहाड़ यह सब माउस के केवल एक क्लिक की दूरी पर है। शिक्षा पर अधिक पैसा खर्च किया जा रहा है, और बच्चों को पहले से कहीं अधिक ज्यादा वर्षों के लिए उच्च शिक्षा के संस्थानों में भेजा जाता है। निजी और सार्वजनिक अनुसंधानों में भी, जो सबसे विचित्र और अस्पष्ट विषयों की शिक्षा देते हैं, लगातार वृद्धि होती जा रही है। आप जिस किसी भी विषय का अध्ययन करना चाहते हैं, आज उसके लिए अविश्वसनीय मात्रा में जानकारी उपलब्ध है।

लेकिन पौलुस ने ऐसे ज्ञान और शिक्षा के विषय में क्या कहा? उसने तीमुथियुस को चेतावनी दी कि उपदेश के द्वारा जिस बुद्धि की धरोहर उसे दी गई है उसकी रखवाली करें और अशुद्ध बकवाद और विरोध की बातों से परे रहे, जो मनुष्य को सत्य के ज्ञान से भटका देता है (1 तीमुथियुस 6:20-21)। क्या ही उचित चेतावनी है! और साथ ही उसने उसे यह भी चेतावनी दी कि एक ऐसी पीढ़ी पर जो हमेशा सीखती तो रहेगी परन्तु कभी सत्य के ज्ञान को नहीं पाएगी, गंभीर खतरा आ रहा है (2 तीमुथियुस 3:1-7)।

मानवजाति “होशियार पर होशियार” नहीं होती जा रही है। ऑटोमोबाइल और अन्य उन्नतियों का आविष्कार केवल धोखा है, क्योंकि ठीक उसी समय मानव जाति नैतिक रूप से गिरती जा रही है। पढ़े-लिखे पुरुष तो स्त्री के यौन सुख से ही वंचित रह जाते हैं। परमेश्वर ने प्रभावी रूप से मनुष्य को एक मस्तिष्कखंडछेदन दिया है और उसे एक ऐसा मोड़ दिया है कि वह मानसिक विक्षिप्तता में आकर सब प्रकार के लज्जाजनक काम करे (रोमियों 1:18-32)।

कॉलेजों की कक्षाएं ऐसे युवाओं से भरी पड़ी है जो जीभ और कानों में बालियाँ पहने हुए हैं, बाल रंगे हुए हैं, कपड़ों पर चीर-फाड़ किये हुएं हैं, और गांजा पीते हैं। उनकी विकसित प्रजातियों का एक पुराना संस्करण उनके सपनों और कल्पनाओं के साझाकरण पर नज़र रखता है। वे माता-पिता का उपहास करते हैं, पास्टरों का मज़ाक उड़ाते हैं, सरकार के विरुद्ध विद्रोह करते हैं, और चीजों को एक नए नज़रिए से देखने का आह्वान करते हैं। और वे इसे शिक्षा कहते हैं! वे इसे विद्या कहते हैं!

यहोवा परमेश्वर ने मानव जाति को जो बुद्धि दी है, वह मुख्य रूप से पवित्र बाइबल में पाई जाती है। लेकिन बेशक, इंटरनेट अनुसंधान और विश्वविद्यालय की उनकी सब प्रकार की उन्मत्तत्ता के चलते, वे इस एकमात्र बुद्धि को तुच्छ समझते हैं। वास्तव में, यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके मतिभ्रम पर सवाल न उठाया जाए और न उनका खंडन किया, वे क्रिश्चन स्कूलों में बाइबल के उपयोग को गैरकानूनी मानते हैं। कितने बुद्धिमान!

पाठक, यदि आप बुद्धि की सही परिभाषा और उसके स्रोत का मूल्य समझते हैं, तो बाइबल से अय्यूब 28:12-28 को ध्यान से पढ़ें। वहां उस सच्चे बुद्धिमान मनुष्य से शिक्षा पाए। एक बार आप उससे बुद्धि की सही शिक्षा पाने के बाद, बुद्धि में बढ़ने का भ्रष्ट और घिनौना दावा करनेवाली इस कुटिल पीढ़ी को आपका केवल एक ही जवाब होगा, “लेकिन बादशाह तो नंगा है!” परमेश्वर सच्चा, और हर एक मनुष्य झूठा ठहरे।

धन्य प्रभु यीशु मसीह के पास परमेश्वर की सारी अनन्त बुद्धि है (कुलस्सियों 2:3)। उसके पास सब बुद्धि हमेशा से रही है। वह कभी नहीं बदलता – वह बुद्धि में बढ़ नहीं रहा है (इब्रा 13:8), वह आप ही बुद्धि है। वह इस संसार को अपना असली रंग दिखाने दे रहा है – परमेश्वर के विरुद्ध भ्रष्ट विद्रोह और बुद्धि के लिए नफ़रत – इससे पहले कि वह इसे भस्म करने आए (2 थिस्स 1:7-10; 1 तीमुथियुस 6:13-16)।

बहुत से लोग ओरिजन नामक व्यक्ति द्वारा इजात की गई “यीशु की अनन्त पीढ़ी” की झूठी शिक्षा का समर्थन करने के लिए इस नीतिवचन को भ्रष्ट करते हैं। वे बार-बार नायसेन विश्वासंगिकार का जाप करते हैं जो कहता है “और एक प्रभु यीशु मसीह में, परमेश्वर का एकमात्र पुत्र, सभी युगों से पहले पिता से एकलौता पुत्र, परमेश्वर से परमेश्वर,” आदि। वे मूर्खतापूर्वक यूहन्ना 1:18 में न्यू वर्ल्ड ट्रांसलेशन और न्यू अमेरिकन स्टैंडर्ड वर्शन पर विश्वास करते हैं, जहाँ दोनों दावा करते हैं कि यीशु एक उत्पन्न परमेश्वर है। कितनी पाखंडपूर्ण शिक्षा! सिद्धांत और भाषा के प्रति उनके भ्रम के कारण वे सुलैमान द्वारा बुद्धि के एक सरल मानवीकरण को समझने से चुक जाते हैं।

आप परमेश्वर के 66 पुस्तकों के दिव्य ग्रंथालय को कब पढ़ेंगे और बुद्धि सीखेंगे? आप इस कमेन्ट्री को यहां तक पढ़कर शुरुआत कर चुकें हैं। आपके पास प्रत्येक सप्ताह में 168 घंटे हैं। सोचिए कि अगर आप बेकार की परीक्षाओं और परीक्षणों के लिए जितनी मेहनत करते हैं उसका 1/10 भी सिख लें तो आप कितना कुछ सीख सकते हैं। बुद्धि शाश्वत है, लेकिन आज आप इसके विषय में क्या निर्णय लेंगे?

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