नीतिवचन 8:2

वह तो ऊँचे स्थानों पर मार्ग की एक ओर और तिर्मुहानियों में खड़ी होती है;

बुद्धि छिपी हुई या धुंधली नहीं है। यह दोपहर की धुप के समान साफ़ साफ़ दिखाई देती है। बुद्धि अंधेरे, गुप्त स्थानों में फुसफुसाती नहीं है। वह ऐसे स्थानों में पुकारती है इन्सानों का आवागमन होता है और जहाँ वे उसकी पुकार को साफ़ साफ़ सुन सकते हैं। उसे पाना कठिन नहीं है। वह हर व्यक्ति जिसके दिल में उसके लिए तड़प है उसे आसानी से पा सकता है। यह कुछ ख़ास अभिजात वर्ग तक ही सीमित ऐसा विशेषाधिकार नहीं है। वह सब मनुष्यों को मुफ़्त और व्यापक रूप से दी जाती है (नीतिवचन 8:4)।

यह नीतिवचन उस परिचय का हिस्सा है जहाँ सुलैमान बुद्धि को एक स्त्री के रूप में प्रस्तुत कर रहा है (नीतिवचन 8:1-3)। दुनिया के सबसे सुंदर साहित्य में से एक में, बुद्धिरूपी स्त्री को उसके चरित्र और पुरुषों के लिए उसके लाभों का वर्णन करने वाले प्रथम व्यक्ति के रूप में पेश किया गया है (नीतिवचन 8:4-36)। वह अगले अध्याय (नीतिवचन 9:1-12) में भी बुद्धि के अपने व्यक्तित्वकरण को जारी रखता है।

इसके पहले के तीन अध्यायों में पराई स्त्री और उसके यौन प्रलोभन के तरीकों और खतरों का विवरण देने के बाद (नीतिवचन 5-7), सुलैमान ने एक और स्त्री, अर्थात बुद्धिरूपी स्त्री को प्रस्तुत किया। जबकि व्यभिचारी औरतें अपने पापों को छिपाने के लिए अंधकार से प्रेम रखती हैं और कोनों में घात लगाए रहती हैं (नीतिवचन 7:8-12), बुद्धिरूपी स्त्री चरवाहे में खड़ी रहती है, जहाँ से मानव भीड़ आना-जाना करती है। जबकि व्यभिचारी औरतों के निमंत्रण से दूर भागना ज़रूरी होता है (नीतिवचन 9:13-18), बुद्धिरूपी स्त्री के प्रस्ताव को अपनाना अवश्य है (नीतिवचन 9:1-5)।

परमेश्वर पृथ्वी पर रहनेवाले सभी मनुष्यों को बुद्धि देना चाहता है। यहोवा का भय मानना और पवित्र परमेश्वर को जानना इसका आरम्भ है (नीतिवचन 1:7; 9:10)। “आकाश परमेश्वर की महिमा का वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहाँ उनका शब्द सुनाई नहीं देता है” (भजन 19:1-3)।

“इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उनके मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उसकी सनातन सामर्थ्य और परमेश्वरत्व, जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं, यहाँ तक कि वे निरुत्तर हैं” (रोमियों 1:19-20)। फिर भी लोग परमेश्वर का भय नहीं मानते!

परमेश्वर-प्रेरित साहित्य का एक और शानदार अंश जिसका वास्तविक महत्व है, वह है अय्यूब 28। उस अध्याय में, अय्यूब ने एक दृष्टांत का उपयोग करके पृथ्वी से कीमती धातुओं को निकालने के लिए लोगों द्वारा किए गए अविश्वसनीय प्रयासों का वर्णन किया है। सोने, चांदी और हीरे के लिए गहरी, भूमिगत खदानें एक विशाल उद्यम हैं, लेकिन वहां बुद्धि नहीं है, और उन खदानों और रिफाइनरियों के लिए जितनी आवश्यक पूंजी लगती है जो कि व्यय है उतनी पूंजी बुद्धि के लिए नहीं लगती। बुद्धि परमेश्वर का भय मानने से आती है।

सृष्टि की सर्वव्यापी भाषा सभी मनुष्यों से पश्चाताप करने और अपने सृष्टिकर्ता के सामने खुद को विनम्र करने के लिए पुकारती है, जो बुद्धि का आरम्भ है (भजन 19:1-6)। लेकिन यही एकमात्र माध्यम नहीं है जिसके द्वारा बुद्धि बुलाती है। परमेश्वर का लिखित वचन भी भोले लोगों को बुद्धि प्रदान करता है, जो इसे सोने से भी अधिक कीमती और मधु से भी अधिक मीठा बनाता है (भजन 19:7-11)।

पाठक, क्या आपने माता-पिता और अपने चर्च के पास्टर को भी आपको बुद्धि पाने के लिए बुलाते हुए नहीं सुना है? वह किसी ऐसे स्थानों में नहीं है जो बहुत दूर है। वह अंधेरे में नहीं फुसफुसाती। वह खुले स्थानों में है और आपको ऊँची आवाज़ से बुला रही है। आपको क्या रोक रहा है? उसे अभी अपनाएं। उसका निमंत्रण ग्रहण करें। उसकी दोस्ती को आगे बढ़ाएँ। मूर्खता को त्यागें। जो चीजें आपके जीवन को भटकाती हैं उनसे खुद को अलग करें (नीतिवचन 18:1)। यदि यह करने में आप विलम्ब करते हैं, तो आपकी विपत्ति के दिन वह आपका उपहास उड़ाएगी (नीतिवचन 1:20-33)। या कही आप मृत्यु से प्रेम तो नहीं रखते (नीतिवचन 8:36)?

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