नीतिवचन 8:13

बुराई से घिन करना परमेश्वर का भय है, और मैं अहंकारी और अभिमानी और कुमार्ग और हठीले मुंह से बैर रखती हूँ। (केजेवी)

इस वचन में वर्णित भय, घिन, और बैर अच्छे हैं! ये परमेश्वर और मनुष्यों के साथ सफल होने के लिए मौलिक हैं। परमेश्वर का भय मानने में पाप से घिन करना शामिल है। यहोवा का भय मानना, उसे प्रसन्न करने की एक आदरयुक्त इच्छा, उन बातों के प्रति आपकी घृणा से जाना जाता है जिन से वह घृणा करता है। यदि आप सचमुच परमेश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं, और बुद्धिमान बनना चाहते हैं, तो यहां उन चार पापों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनसे आपको घृणा करनी है। कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि भी कहती है कि वह इन चारों पापों से घृणा रखती है।

यहोवा का भय मानना जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य और लक्ष्य है। सुलैमान ने व्यापक प्रयोगों द्वारा जीवन के लिए हर सम्भव कारण का परीक्षण करने के बाद यह परमेश्वर-प्रेरित निष्कर्ष निकाला (सभोपदेशक 5:7; 8:12; 12:13)। भक्तिमान मनुष्यों का यही सबसे पहला और महान लक्ष्य है। जब तक आप परमेश्वर का भय नहीं मानते, तब तक आप उससे उचित रीति से प्रेम नहीं कर सकते, क्योंकि उससे प्रेम करना एक कर्तव्य है जिसकी उसने आज्ञा दी है (व्यवस्थाविवरण 6:1-5; 10:12)।

कोई भी मनुष्य स्वभाव से परमेश्वर का भय नहीं मानता (भजन 36:1; रोम 3:18)। यह एक पुनर्जीवित हृदय देने के द्वारा पापियों के लिए परमेश्वर का वरदान है, लेकिन यह आपका कर्तव्य है कि आप इस वरदान को उत्तेजित करें और इसे व्यवहार में लाएं। यह बुद्धि, समझ, और ज्ञान की प्राप्ति के लिए सबसे बड़ी शर्त है (नीति 1:7; 9:10; भजन 111:10), और यह परमेश्वर की ओर से बड़ी बड़ी आशीषों को ले आता है (भजन 112:1; 115:13; 128:1; 145:19; 147:11; लूका 1:50)।

आज की कायर और विकृत पीढ़ी परमेश्वर का भय मानने और पाप से घिन रखने की निंदा करती है। तौभी वे बाइबल के खरे उपदेश और सच्चाई से डरते हैं, क्योंकि इससे उनका दोष प्रमाणित होता है; और वे उन से बैर रखते हैं जो उसका प्रचार करते और उसके अनुसार जीते हैं, क्योंकि प्रचार करने वाले लोग उनकी दुष्टता पर प्रतिरोध लगाते हैं। लेकिन एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर की बुद्धि और उसके प्रेरित शास्त्रों की तुलना में उनकी राय कोई मायने नहीं रखती। भय, घिन और बैर बहुत अच्छी बातें हैं।

यहोवा का भय मानना परमेश्वर यहोवा, अर्थात् बाइबल के सृष्टिकर्ता परमेश्वर को प्रसन्न करने की एक आदरयुक्त इच्छा है, जिसमें उन चीजों से घृणा करना शामिल है जिन से वह घृणा करता है। बाइबल का जीवित और सच्चा परमेश्वर पाप से घृणा करता है (नीति 6:16-19; यिर्म 44:4; जकर्याह 8:17), और उसके अनुयायियों को भी पाप से घृणा करनी चाहिए। भय और घिन अच्छे हैं। इसलिए परमेश्वर के साथ मिलकर बुराई से घृणा करो (भजन 97:10; आमोस 5:15; रोम 12:9)!

कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि अहंकार से बैर रखती है, जो अपने विषय में ऊंची सोच रखना है, जिससे अपने लिए उच्चता की मानसिकता और दूसरों को नीच समझने की भावना पैदा हो जाती है। यह अपने ही लिए असाधारण आत्म-सम्मान की भावना है जिसे वर्त्तमान पीढ़ी पागलपन तक चाहती है। सोशल मीडिया आत्मकामी और स्वार्थी व्यक्तियों के लिए दूसरों को अपने विषय में बताने का एक खिलौना है। परमेश्वर ने शैतान को घमण्ड के कारण ही स्वर्ग से निकाल दिया था (1 तीमुथियुस 3:6), और वह घमण्डी मानसिकता के किसी भी मनुष्य को कुचल डालेगा, क्योंकि उसके सामने और उसके बिना तुम कुछ भी नहीं हो (भजन 39:5; 62:9)।

कुलीन स्त्री रुपी बुद्धि अभिमान से बैर रखती है, जो दूसरों के साथ व्यवहार करने में आक्रामक घमण्ड है। अभिमान अपने और दूसरों के विषय में आपका रवैया है; अभिमान दूसरों के साथ उद्धट, नीचा दिखानेवाला, घमण्डी और अक्खड़ व्यवहार करना है। यह पौलुस की प्रेम की परिभाषा के अनुसार घमण्ड से फुल जाने और अपने आप पर डींग मारने के बीच का अंतर है (1 कुरिं 13:5; रोम 12:16)। यह अपने तथा-कथित अधिकारों को दूसरों पर थोपना है, जबकि आपको अपना ध्यान अपनी ज़िम्मेदारियों पर केन्द्रित करना चाहिए।

कुलीन स्त्री नामक बुद्धि कुमार्ग की जीवन शैली से बैर रखती है, जो दुष्ट आदतों से भरा पाप का जीवन है। आपको अधर्मी लोगों और उनके कामों से बचना है (भजन 1:1; 5:4-5; 101:3-8; 1 यूहन्ना 2:16)। परमेश्वर इस दुष्ट संसार के साथ मित्रता को अपने विरुद्ध आत्मिक व्यभिचार मानता है (याकूब 4:4)। आपको अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के लिए परमेश्वर के निर्देशों से प्रेम करना है और अन्य सब विचारों से घृणा करनी है (भजन 119:128; यिर्म 6:16)। धन्य राजा यीशु को कुमार्ग से बैर रखने के कारण बहुत सम्मानित किया गया था (भजन 45:7; इब्रा 1:9)।

कुलीन स्त्री नामक बुद्धि हठीले मुंह से बैर रखती है, जो विकृत, आपत्तिजनक या दुष्ट भाषण है। आपके वचनों से दूसरों का पालन-पोषण और मदद होनी चाहिए (नीति 10:21; 15:4; 16:24)। क्या आपका मुंह तलवार है जो दूसरों को लहूलुहान करती है या उनके लिए चंगाई का स्रोत है (नीति 12:18)? परमेश्वर हठीली और झूठ बोलने वाली जीभ से घृणा करता है (नीति 4:24; 6:12, 17; 10:31; 12:19; 21:6)। सुलैमान ने अपने कई नीतिवचन चंगाई देनेवाले वचनों को समर्पित किए, क्योंकि आम तौर पर मुंह के वचनों से ही अधिक पाप होते हैं (नीति 10:19; 12:18; 15:1-2, 28; 17:27-28; 22:11)।

प्रिय मसीही, क्या आपको इन चार बातों से घिन है? क्या आपका जीवन इन चारों से मुक्त है? जब तक आप इन में से किसी भी एक पाप को थामे रहते हैं, तब तक आप बुद्धिमान नहीं बन सकते, और न ही बनेंगे। यहोवा का सच्चा भय आपको इन चारों पापों से बैर रखने प्रेरित करेगा, और उनके प्रत्येक प्रकार को आपके जीवन से नष्ट करेगा (भजन 101:2-3)। यदि आप इन में से किसी एक पाप को भी अपने जीवन में थामे रहते हैं, तो आप यह दावा नहीं कर सकते कि आप परमेश्वर का भय मानते हैं। अपने पापों में बने रहने का अर्थ है परमेश्वर को तुच्छ जानना (नीति 14:2), और परम-पवित्र परमेश्वर आपको दण्ड देगा।

इस धरती पर सबसे महान पुरुष और स्त्रियां वे हैं जो परमेश्वर का भय मानते हैं। वे उसे प्रिय हैं, और आनंद तथा कामयाबी का जीवन जीते हैं। वह उनका परमेश्वर है, और वह उन्हें बहुतायत से आशीष देता है (भजन 25:12-15; 128:1-6)। प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर का भय मानता था, और उसकी प्रार्थनाएं सुनी गई, और वह समस्त विश्व पर शासन करता है (इब्रानियों 5:7-9; 1:3, 13)। उसके पवित्र और सिद्ध आदर्श का अनुसरण करें।

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