नीतिवचन 8:12
मैं जो बुद्धि हूँ, चतुराई में वास करती हूँ, और ज्ञान और विवेक को प्राप्त करती हूँ।
बुद्धि में चतुराई भी शामिल है! चतुराई बुद्धि का व्यावहारिक उपयोग है। आपको क्या लगता है कि कंप्यूटर, आइसक्रीम, माइक्रोवेव और हवाई जहाज़ कहां से आए हैं? किसी उद्विकासवादी की बन्दर-माता से?
रचनात्मक कल्पना, ज्ञान का विस्तार, प्रगतिशील समाधान, आविष्कारशील प्रतिभा और मानव कल्याण के लिए इनका उपयोग, सभी परमेश्वर की ओर से उपहार हैं। यह उन मनुष्यों को प्राप्त होती है और उन मनुष्यों के लिए दी जाती है जो बुद्धि की बड़ाई करते हैं। बुद्धि के अनेक व्यावहारिक, जीवन संबंधी लाभ होते हैं – क्या आप इनके लिए आभारी हैं?
जहां बुद्धि -अर्थात परमेश्वर का भय और पवित्रशास्त्र के लिए प्रेम- का सम्मान किया जाता है, वहाँ ज्ञानी मनुष्यों द्वारा या उन लोगों के लिए अविश्वासियों द्वारा विवेकशील नवोत्पाद और आविष्कार किए जाते हैं। बुद्धिमान लोग हमेशा सफ़ल होते हैं! सुलैमान ने यह सिखाकर बुद्धि की बड़ाई कीं कि वह विवेकशील आविष्कार उत्पन्न करती है।
नीतिवचन अध्याय 8 नीतिवचन की पुस्तक का सबसे उन्नत अध्याय है; यह बाकी सब वस्तुओं में बुद्धि को ऊंचा उठाता है। इसके एक सरल विभाजन में चार खंड हैं – जिसमें बुद्धि की ओर से एक अभिवादन और निमंत्रण (नीतिवचन 8:1-11), बुद्धि से मिलने वाली प्राकृतिक और आत्मिक आशीषें (नीतिवचन 8:12-21), सृष्टि की रचना में परमेश्वर द्वारा बुद्धि का अनंत प्रयोग (नीतिवचन 8:22-31), और बुद्धि की अंतिम चेतावनी (नीतिवचन 8:32-36) शामिल है।
ये चार खंड प्राकृतिक आशीषों को सुलैमान के तर्क के एक प्रमुख भाग के रूप में दिखाकर, नीतिवचन की व्याख्या करने में सहायता करते हैं (नीतिवचन 8:12-21)। इसकी आत्मिक आशीषों में धार्मिकता से प्रेम और बुराई से घृणा करना शामिल हैं। वहीं इसकी प्राकृतिक आशीषों में सलाह, समझ, सामर्थ, शासन, न्याय, राज, धन, सम्मान, स्थिर संपत्ति, सही निर्णय, आविष्कार और खज़ाना शामिल हैं।
जब भी आप एक नई तकनीक का उपयोग करते हैं, किसी नई प्रक्रिया का लाभ उठाते हैं, किसी नए आविष्कार के बारे में पढ़ते हैं, या कोई नया समाधान देखते हैं, तो उस “विवेकशील आविष्कार” के लिए परमेश्वर को महिमा देना याद रखें और उस बुद्धि की बड़ाई करें जिसने उसे खोजा, उसे संप्रेषित किया, उसे हमसे अवगत कराया, या हमारे लाभ के लिए उसे उपयुक्त बनाया। परमेश्वर जानता है कि उसने आपके लिए क्या कुछ किया है, और आपको उस सब के लिए उसे धन्यवाद देना ज़रूरी है।
एक मनुष्य की प्रगति में, बुद्धि ही चतुराई और ज्ञान का स्रोत होती है। वह मनुष्यों की सेवा और सहायता करने में प्रसन्न होती है (नीतिवचन 8:31)। उन नवोत्पादों के आविष्कार के लिए आभारी रहें जो आपके जीवन को आसान और बेहतर बनाते हैं, भले ही उनका आविष्कार मसीहियों के उपयोग के लिए अविश्वासियों द्वारा किया हुआ हो। तब भी आभारी रहें। भले ही धनुष का उपयोग सबसे पहले पलिश्तियों ने किया हो, परंतु दाऊद ने उसका उपयोग उन्हीं के विरुद्ध उनसे भी बेहतर किया (2 शमूएल 1:18)!
बुद्धि का उपयोग चतुराई कहलाता है और यह पुराने कार्यों को एक अधिक आसान, किफायती और कुशल तरीके से पूरा करने के लिए नए तरीके उत्पन्न करती है। किसी भी समाज की प्रगति परमप्रधान से उन्हें प्राप्त हुई बुद्धि और आशीषों की मात्रा पर निर्भर करती है। क्योंकि परमेश्वर दुष्टों पर भी धूप और वर्षा भेजता है, इसलिए कुछ नवोत्पाद उनके द्वारा भी होते हैं।
बुद्धि उन कठिनाइयों के लिए बेहतर समाधान ढूंढती है जिन्हें अन्य लोग अटल मानकर छोड़ देते हैं। पारंपरिक तरीकों के प्रति उपेक्षा, प्रयौगिक कार्यों के प्रति जुनून, असफलता के भय का अभाव और किसी अस्तित्वहीन चीज़ का दर्शन रखना परमेश्वर की ओर से उपहार हैं। यही गुण एक मनुष्य को आविष्कारक बनाते हैं! और आविष्कारक अधिक उत्पादकता के लिए एक नए उपकरण द्वारा समाज के श्रम को कम करके, उनमें सुधार करते हैं।
आवश्यकता आविष्कार की जननी है। यह सत्य वचन है! परंतु केवल उन्हीं के लिए जो चीज़ों को करने के भिन्न तरीकों से करने की कल्पना करने में सक्षम होते हैं! विभिन्न राष्ट्रों की कई पीढ़ियों ने जीवित रहने या उत्पादन के पारंपरिक साधनों को हठपूर्वक अपनाए रखा है। आखिर कुछ लोग काम करने के बेहतर, आसान और अधिक किफायती तरीकों को ढूंढने के प्रति इतने जुनूनी क्यों रहते हैं? यह इसलिए क्योंकि परमेश्वर ने उन्हें रचनात्मक सोच में सक्षम बनाया है और उन्हें वैकल्पिक तरीकों या मशीनों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
निर्देशित बुद्धि लाभदायक होती है (सभोपदेशक 10:10)। एक मूर्ख थोथी कुल्हाड़ी से पेड़ों को काटकर अपनी द्विशिर पेशियों के आकार पर गर्व करता है; परन्तु एक बुद्धिमान व्यक्ति अपनी कुल्हाड़ी की धार को पैनी करता है, जो उसे उस मूर्ख की तुलना में काफी कम समय और प्रयास में ही पेड़ों को काटने में सहायता करती है। जहां एक पैनी कुल्हाड़ी एक थोथी कुल्हाड़ी से बेहतर होती है, वहीं एक आरी एक पैनी कुल्हाड़ी से भी कई गुना बेहतर होती है! बुद्धि चतुराई और विवेकशील आविष्कारों की ओर ले जाती है। परंतु कुछ मनुष्य और समाज सदैव मूर्ख बने रहते हैं।
खेती पुरातनकाल के अर्धविकसित-मानव-बंदरों द्वारा कई वर्षों तक परीक्षण और संशोधन द्वारा किए गए प्रयोगों का परिणाम नहीं है – यह परमेश्वर का उपहार है (यशायाह 28:23-29)। दुनिया में ऐसे समाज आज भी हैं जिन्हें अभी तक बीज बोने और कटाई करने का कोई ज्ञान या तंत्र नहीं है। आज भी जंगलों में कुछ लोग खरगोशों, और जंगली पशुओं और घास-फूस में ही संतुष्ट हैं। सारी महिमा परमेश्वर की है – वह जिसे चाहे उसे बुद्धि देता है और जिसे चाहे उसे बुद्धि से वंचित रखता है (अय्यूब 39:13-18; भजन 147:19-20; नीतिवचन 16:4; प्रकाशित 4:11; 1 कुरिन्थ 4:7)।
विभिन्न खाद्यान्नों के बीज का बुद्धिमानीपूर्ण और सुव्यवस्थित रीति से बोया जाना, उन्हें खाद देना, निराई करना, पानी देना, कटाई करना और अंत में उनका फटकना, यह सब परमेश्वर का एक वरदान है (यशायाह 28:23-29)। यशायाह 28:23-29 को पढ़ें, और यहोवा में आनन्द करें! इन चीजों का कोई परीक्षण और पुनर्निरीक्षण नहीं किया गया था। परमेश्वर ने आरंभ में ही कुछ मनुष्यों में बुद्धि प्रत्यारोपित की। आदम सभी पशुओं के नाम रखने में काफी पारंगत था (उत्पत्ति 2:19-20)।
क्या आप वॉशिंग मशीन, कंप्यूटर, आइसक्रीम और हवाई जहाज के लिए परमेश्वर की महिमा करते हैं? क्या आप ATM कार्ड, सटीक डिजिटल वज़न और माप की मशीनों, स्थिर बैंकिंग और अनुमानित निर्दोषता की कानूनी प्रणाली जैसी बातों में प्रयुक्त हुई बुद्धिमत्ता के लिए परमेश्वर के आभारी हैं? क्या आप हमारे देश को जोड़नेवाले महामार्गों-राजमार्गों, दवाओं, इंटरनेट, माइक्रोवेव ओवन और फ्रीज़ के लिए प्रभु में प्रसन्न हैं? आपको आनंद मनाना चाहिए!
जब मूसा को आज्ञा दी गई कि वह इस्राएल के लिए तम्बू बनाए जहाँ वे यहोवा की आराधना करेंगे, तो परमेश्वर ने इस जटिल कार्य के लिए महान बुद्धि वाले एक प्रतिभाशाली व्यक्ति को तैयार किया था (निर्गमन 31:1-11; 35:30-35)। परमेश्वर ने दाऊद को उस मंदिर का नमूना और विवरण भी दिया जिसे सुलैमान को बनाना था, और उसने उसे वहां आराधना के लिए संगीत वाद्ययंत्रों का आविष्कार करने का वरदान भी दिया (1 इति 28:11-21; आमोस 6:5)।
जबकि परमेश्वर ने कैन के वंशजों को आविष्कारों की प्रतिभा दी, उन्होंने अपने ज्ञान और आविष्कारों का उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए नहीं किया, जिससे उन पर और उनके बच्चों पर अधिक क्रोध प्रकट हुआ (उत्पत्ति 4:17-22; यहेज़केल 16:1-59; प्रेरितों 14:15-17; रोमियों 1: 18-28; 2:4)। जब दुष्ट लोग अपने कौशल और गुणों का सही ढंग से उपयोग नहीं करते हैं तो परमेश्वर अंत में उन आशिषों को धर्मी लोगों की ओर स्थानांतरित कर देता है कि वे उनका बेहतर उपयोग करें और परमेश्वर की महिमा करें (अय्यूब 27:16-17; सभो 2:26)।
अपनी चतुराई पर घमण्ड न करो (यशायाह 5:21)। परमेश्वर उन लोगों को अंधा कर देता है और उनमें भ्रम को भेजता है जो स्वयं को बुद्धिमान समझते हैं (अय्यूब 5:12-13; यिर्म 8:8-9; मत्ती 11:25-26; 1 कुरिन्थ 1:19-20; 3:19-20)। यदि बुद्धि और विवेक का उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए नहीं किया जाता है तो वह छीन ली जाएगी, और एक मनुष्य या पूरी जाति को ही मूर्खता में छोड़ दिया जाएगा (यशायाह 10:13-16; 19:11-14; 29:13-14; लूका 8:18)। अपने आप को एक छोटे बालक के समान नम्र करें, परमेश्वर की महिमा करें, और वह आपको बुद्धिमान बना देगा (I राजा 3:5-14; 1 कुरिन्थ 3:18)।
प्रभु यीशु मसीह, जो परमेश्वर का देहधारी पुत्र था, एक बुद्धिमान औरचतुर मनुष्य था (यशायाह 11:1-4; कुल 2:3)। अपनी बुद्धि और ज्ञान की अद्वितीय तीक्ष्णता के कारण, वह अपने शत्रुओं की योजनाओं और विचारों को जानता था और उन्हें उजागर करता था (मत्ती 9:4-8; लूका 7:36-50)। और उसने उनकी अधर्मी धारणाओं का शानदार और आत्म-परिक्षण करने वाले और उन्हें दुविधाओं में डालनेवाले सवालों के साथ सामना किया (मत्ती 21:23-27; 22:15-46)।
समस्त विश्व में परम चतुराई और रचनात्मक समाधान परमेश्वर की उद्धार की योजना में पाई जाती है, जिसमें परमेश्वर ने अपने चुने हुए लोगों के लिए ऐसा काम किया जिसमें “सारे ज्ञान और समझ की बहुतायत है” (इफि 1: 8; 3:10; यशायाह 52:13; 1 कुरिन्थ 1:24, 30)। एक पवित्र परमेश्वर कैसे पापियों को धर्मी और निर्दोष ठहरा सकता है और फिर भी आप धर्मी और निर्दोष ठहर सकता है? अपनी असीम बुद्धि में, उसने कुंवारी से जन्मे यीशु मसीह को हमारे स्थान में मरने के लिए और फिर मृतकों में से जीवित होने के लिए भेजा! स्वर्गदूत भी इस महिमामय लेन-देन को ध्यान से देखने की लालसा रखते हैं (1 पतरस 1:10-12)।
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