नीतिवचन 7:6

क्योंकि मैं ने अपने घर की खिड़की से, अर्थात् अपने झरोखे से झाँका, (केजेवी)

एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है। प्रेरक-उदहारण सहित सिखाया गया पाठ सिद्धांत से बेहतर होता हैं। आदर्शों को सामने रखकर दिए गए नियम और कानून, मात्र नियमों से अधिक बेहतर होते हैं। एक खिड़की ने एक मूर्ख युवक को एक वेश्या द्वारा बहकाए और नष्ट किए जाने के दर्दनाक दृश्य के लिए एक चौखट की मिसाल प्रस्तुत की। कितनी भयानक तस्वीर है!

चाहे यह सुलैमान के जीवन की घटना हो या जीवन के सामान्य खतरे को दर्शाने वाला उसका दृष्टान्त, यह इस पाठ के सबक को नहीं बदलता है। पर क्योंकि यह एक नीतिवचन और दृष्टान्तों की पुस्तक है, न कि उसके जीवन का इतिहास, इस कारण यह अध्याय एक दृष्टान्त है। एक दृष्टान्त के रूप में, यह अध्याय अतिरिक्त शिक्षा देता है।

राजा सुलैमान न केवल आते-जाते लोगों को देखता था, बल्कि उसने निरीक्षण किया, विश्लेषण किया, चिंतन किया और विवेकपूर्ण निष्कर्ष निकाले। उसने आलसी के खेत के साथ भी ऐसा ही किया (नीति 24:30-34)। यह आपका कर्तव्य है कि आप दुनिया के तौर-तरीकों का निरीक्षण करें और उन पर विचार करें, क्योंकि शिक्षा और निर्देशों की इस परमेश्वर प्रेरित पुस्तक के माध्यम से इस बुद्धिमान उपदेशक ने आप को जो बुद्धि दी है उसके उपयोग से आप यह बिना किसी ग़लती के कर सकते हैं।

एक बार फिर यह सबक एक पराई स्त्री, एक व्यभिचारिणी या वेश्या के बारे में है (नीति 7:5, 8, 10)। यह पूरा अध्याय उसी के विषय में है। यह दृष्टान्त सिखाता है कि कैसे एक वेश्या का शक्तिशाली प्रलोभन, उसका छलावा एक मूर्ख और भोले युवक का आसानी से विनाश कर सकते हैं (नीति 7:6-23)। उसके लिए छुटकारे और सुरक्षा की एकमात्र आशा यह है कि वह उससे दूर ही रहे (नीति 7:8, 24-27)।

सुलैमान ने सातवे अध्याय का आरम्भ अपने बेटे से यह अनुरोध करते हुए किया कि वह उसकी शिक्षा का स्मरण रखे, और फिर उसे पराई स्त्री के विषय में चेतावनी दी (नीति 7:1-5)। और उसने उसे गम्भीर खतरे, उससे कैसे बचा जाए, और सावधानी की परम आवश्यकता बताकर समापन किया (नीति 7:24-27)। परिचय और समापन के बीच एक साहसी स्त्री के द्वारा अंजाम दिए गए लैंगिक पाप का चित्रमय दृष्टान्त है।

इस संक्षिप्त नीतिवचन के शब्दों से सबक को समझ लीजिए। माता-पिता और शिक्षकों को वास्तविक जीवन में आनेवाले खतरों के स्पष्ट, और वर्णनात्मक चित्रणों का उपयोग करना चाहिए। सिद्धांत, नियम, डांट-फटकार और नकारात्मक उत्तर पर्याप्त नहीं हैं। सुलैमान ने यहाँ सातवीं आज्ञा का प्रयोग नहीं किया (निर्ग 20:14)। इसके बजाय, उसने उस आज्ञा को तोड़ने से उभरने वाले खतरे और भयानक परिणामों को स्पष्ट रूप से दिखाया। क्या आप जानते हैं कि जीवन की समस्याओं से बचने के लिए ईश्वरीय बुद्धि की शिक्षा कैसे दी जाती है? यदि हाँ, तो क्या आप ऐसी शिक्षा देते हैं?

कानाफूसी, पीठ पीछे किसी की बुराई करना, चुगलखोरी करना और निंदा करना जघन्य पाप हैं। लेकिन बुद्धि के ईश्वरीय निर्देश के लिए वास्तविक घटनाओं का शुद्ध मन से उपयोग करना इनमें से किसी भी श्रेणी में नहीं आता है। यदि वास्तविक लोगों का उपयोग किया जाता है, तो घटनाएँ सत्य होनी चाहिए, जानी-पहचानी होनी चाहिए, और दूसरों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए उपयोग नहीं की जानी चाहिए। महान प्रेरित पौलुस और यूहन्ना ने दुष्टता के उदाहरण देने के लिए पापियों के नामों का, और यहाँ तक कि एक पूरे राष्ट्र के नाम का उपयोग किया (1 तीमुथियुस 1:18-20; 2 तीम 4:14-15; तीतुस 1:12; 3 यूहन्ना 1:9-10)।

यीशु ने कहा, “लूत की पत्नी को स्मरण रखो।” उसने उस स्त्री को कोई हानि नहीं पहुँचाई; क्योंकि उसने पहले ही अपनी प्रतिष्ठा हमेशा के लिए बर्बाद कर दी थी। इन तीन शब्दों में, बड़ी सामर्थ्य के साथ यीशु ने सांसारिक जीवन के विषय में बहुत अधिक चिंतित होने के खतरे का उदाहरण दिया (लूका 17:28-33)। क्या आप नमक का खम्बा देख सकते हैं?

यीशु ने एक फरीसी और चुंगी लेनेवाले की प्रार्थनाओं का वर्णन किया। कुछ ही वचनों में उसने एक का टुटा हुआ मन और दूसरे की आत्म-धार्मिकता को दिखाया (लूका 18:9-14)। उसने फरीसी को कोई हानि नहीं पहुंचाई। उसकी मूर्खतापूर्ण प्रार्थना सत्य थी, प्रसिद्ध थी, और पवित्र शिक्षा के लिए उपयोग की जाती थी।

यीशु अपने समय की घटनाओं का उपयोग करना जानता था। जब उसे पीलातुस द्वारा बलिदान चढ़ाने के दौरान मारे गए गलीलियों के बारे में बताया गया, तो उसने पश्चाताप का पाठ पढ़ाया। साथ ही, उसने अठारह लोगों के समाचार का उपयोग किया जो उन पर मीनार गिर जाने के कारण मारे गए थे, ताकि मन फिराने पर और भी अधिक बल दे सके (लूका 13:1-5)।

बाइबल में दुष्ट और धर्मी दोनों ही प्रकार के कई लोगों के विभिन्न पाप दर्ज हैं। पाप वास्तव में किए गए थे, इस्राएल में बखुबी ज्ञात थे, और शिक्षा के पवित्र उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते थे। पापियों को खुलेआम दण्ड दिया जाता था, ताकि समस्त इस्राएल सुने और भय माने (व्यव. 13:11; 21:21)।

यहूदा की छोटी पत्री पर चिंतन करें। उसने अपने वाचकों को चेतावनी देने के लिए पुराने नियम की घटनाओं का उल्लेख किया : जंगल में यात्रा पर इस्राएल (5), गिरे हुए स्वर्गदूतों (6), सदोम और अमोरा (7), अशुद्ध स्वप्न दर्शी (8), प्रधान स्वर्गदूत मिकाएल (9), हिंसक पशु (10), कैन (11), बिलाम (11), कोरह (11), और हनोक (14)। क्या आप इन घटनाओं में निहित उपदेश और चेतावनी को समझ गए?

पालकों, क्या आप अपने बच्चों को प्रशिक्षित करने अपने परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों, और अन्य लोगों के मूल्यवान वस्तुनिष्ठ सबकों का उपयोग कर सकते हैं? क्या आप पाप और उसके परिणामों को स्पष्ट करने के लिए अपने शहर या राष्ट्र की वर्तमान घटनाओं के उदहारण ले सकते हैं? यदि आप ऐसा कर सकते हैं, तो क्या आपने वास्तव में अपने बच्चों को बचाने के लिए ऐसा किया है?

शैक्षणिक शिक्षा फिर चाहे शिक्षा-क्षेत्र का कोई भी पेशा हो, उसका मूल्य तुलनात्मक रूप से बहुत कम है। परमेश्वर के वचन की मेज पर परोसा गया व्यावहारिक प्रशिक्षण बहुत अधिक मूल्यवान है। जीविका कमाना आसान है, लेकिन पवित्र भक्ति का जीवन जीना कहीं अधिक कठिन है। माता-पिता, अपनी प्राथमिकताएं उचित रखें।

आप स्थानीय स्कूल, ईसाई स्कूल या संडे स्कूल को अपने बच्चों को प्रशिक्षित करने की ज़िम्मेदारी नहीं सौंप सकते। यह आपका कर्तव्य है। अपने बच्चों को स्कूल का होमवर्क करने में मदद करना उन्हें प्रशिक्षित करना नहीं है (नीति 22:6; भजन 78:1-8; इफि 6:4)। मूर्तिपूजक छोटे छोटे मूर्तिपूजक बनाने के लिए अपने बच्चों को स्कूल के होमवर्क में सहायता करते हैं।

अपने बच्चों को आध्यात्मिक सत्य, ईश्वरीय बुद्धि, पवित्र जीवन, सदाचारी सोच, नेक व्यवहार और इन सभी का संयम से व्यवहारिक उपयोग करना सिखाएं। अपने बच्चों को प्रशिक्षण देना आसान होगा, यदि आप मूर्तिपूजकों के शिक्षा-तंत्र की उनकी उपासना में शामिल न हो। शिक्षा की आपकी मेज परमेश्वर से आने वाली बुद्धि का पर्व बनने दे। हर दिन सीखने का एक अनुभव होना चाहिए, क्योंकि इस संसार की खिड़की कई तस्वीरें प्रस्तुत करती है।

एक पिता जो किसी शिशु के क्रोधावेश या एक अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक घटना को लेकर परमेश्वर के वचन का व्यवहारिक उपयोग कर सकता है वह एक बुद्धिमान और मूल्यवान पिता है। उसके बच्चे उसकी राय पर भरोसा करेंगे और उससे डरेंगे। एक पिता जो जीवन के वास्तविक पहलुओं के बारे में स्पष्ट रूप से बोल सकता है – जैसे कि यौनाचार, पैसा, प्रेम और सफलता – एक महान पिता है। उसके बच्चे उस पर भरोसा करेंगे और अपने निर्णयों के लिए उससे सलाह-मशवरा करेंगे।

न तो अक्लमंदी, शिक्षा, न वाक्पटुता की आवश्यकता है। हर एक मनुष्य सक्षम है, क्योंकि एक किसान या गाडी सुधारनेवाला मनुष्य जो अपनी बाइबल पढ़ता और अपनी खिड़की के झरोखे से देखता है, उसके पास खाने की मेज पर अपने बच्चों को शिक्षा देने की बुद्धि होगी। पिताओं, क्या आप इस अवसर का लाभ उठाएंगे?

सुलैमान ने अपना जीवन पाप और मनुष्य के उद्देश्य के बारे में पढ़ने में नहीं, बल्कि उसके साथ प्रयोग करते हुए बिताया। उसका अद्वितीय अनुभव और ज्ञान बाइबल में आपके लिए बड़ी आसानी से उपलब्द है। आपको उसके समान प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं है; आप उसकी खोजबिनों से सीख सकते हैं और एक वास्तविक जगत से आनेवाली शिक्षा से, जो आपकी खिड़की के सामने से गुज़र रही है, मूल्यवान वस्तुनिष्ठ पाठों का उपयोग कर सकते हैं।

क्या आप वर्तमान घटनाओं को लेकर उन पर परमेश्वर के वचन को लागू कर सकते हैं? क्या आप सुलैमान के नीतिवचन को जीवन की परिस्थितियों पर लागू कर सकते हैं? एक मसीही के रूप में यह आपका कर्तव्य है कि आप बुद्धि और ज्ञान में उन्नति करें ताकि आप अच्छे और बुरे के बीच भेद कर सकें और दूसरों को सिखा सकें (इब्रानियों 5:12-14)।

यीशु मसीह मंदिर के भण्डार के सामने बैठकर लोगों द्वारा दी जा रही भेंटों को देख रहा था और पवित्र शिक्षा के लिए अद्भुत निष्कर्ष निकाले (मरकुस 12:41-44)। उसने हमारी शिक्षा के लिए पवित्रशास्त्र को उदाहरणों से भर दिया (रोमियों 15:4; 1 कुरिं 10:5-6, 11-12)। यदि आप बाइबल की खिड़की से देखते हैं और मसीह को देखते हैं, तो आपके पास भक्तिमय जीवन के लिए एक सिद्ध उदाहरण होगा (इब्रानियों 12:1-4; 1 पतरस 2:21)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।