नीतिवचन 7:24

अब हे मेरे पुत्रो, मेरी सुनो, और मेरी बातों पर मन लगाओ।

पिता किस लिए होता है? आपके लिए चॉकलेट और खिलौने लाने? रात में घर को चोरों से बचाने? आँगन में आपके साथ बैडमिंटन खेलने? आपका जेबखर्च पूरा करने? कॉलेज की शिक्षा की भारी फ़ीस भरने? यहोवा परमेश्वर, जो स्वर्ग और पृथ्वी का रचियता है, उसने ऐलान किया कि पिताओं को अपने बच्चों का पालन–पोषण प्रभु की शिक्षा और चेतावनी देते हुए करना है (इफि 6:4)।

पिता ने क्या शिक्षा देनी है? साइकिल कैसे चलाएं? शोपिंग कैसे करें? कार कैसे चलायें? परमेश्वर ने कहा कि पिताओं को उन्हें यहोवा का भय मानना और यहोवा के मार्ग पर चलना सिखाना है (भजन 34:11; उत्पत्ति 18:19)। क्योंकि परमेश्वर का भय मानना और उसकी आज्ञाओं का पालन करना मनुष्य का संपूर्ण कर्तव्य है, अत: यही उसकी शिक्षा का प्राथमिक लक्ष्य है (सभो 12:13-14; भजन 78:1-8)।

परमेश्वर व्यभिचार, या विवाहेतर यौन संबंध की निंदा करता है (इब्रानियों 13:4)। सुलैमान ने यह अध्याय अपने बेटे को व्यभिचारी स्त्रियों के बारे में चेतावनी देने के लिए लिखा। मुख्य विषय का परिचय देने के बाद (नीतिवचन 7:1-5), उसने एक ऐसे मूर्ख युवक का एक लंबा दृष्टांत लिखा जिसे एक स्त्री अपने जाल में फांसने के लिए बहकाती है और विनाश की ओर ले जाती है (नीतिवचन 7:6-23)। यह नीतिवचन उसकी इसी चेतावनी के सारांश से आरम्भ होता है (नीतिवचन 7:24-27)।

यह बड़े शर्म की बात है कि अधिकांश ख्रिश्चन पिता सुलैमान के समान खुले दिमागवाले, व्यावहारिक और यथार्थवादी नहीं हैं, खासकर वासना में डूबी इस कामुक पीढ़ी में। यौन परीक्षाओं के मसले पर अति संकोची और चुप रहने के बजाय, पिताओं को हर संभव तकनीक के जरिए ऐसी परीक्षाओं के खिलाफ अपने बेटे और बेटियों को चेतावनी देने की ज़रूरत है। ख़तरा बड़ा है; परीक्षा हर जगह हैं; युवाओं को सुलैमान जैसे पिता की ज़रूरत है।

सुलैमान अपने दृष्टांत का उपयोग करता है और अपने बच्चों को उसकी बात सुनने का आव्हान करता। विषय-वस्तु पर अगर गौर करें, तो समझ में आता है कि उसके बच्चें बालक नहीं थे। पिता इन चीज़ों के बारे में अपने किशोरावस्था के बेटों या बीसवें वर्ष के बेटों की तुलना में कहीं अधिक जानते हैं। वह अपने बच्चों से कहता है कि वे उसकी सुनें और उसकी बातों पर मन लगाएं। उसने उस युवक के भयानक नियति का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि उन्हें इस शिक्षा और चेतावनी की आवश्यकता है।

पिताओं! संकोच मत करों। शर्माओं मत। अनिच्छुक मत बनो। आपके बेटे को अश्लील साहित्य, कैज़ुअल सेक्स और व्यभिचारी औरतों का सामना करना पड़ता है। खुलकर बात करनेवाले, व्यावहारिक और यथार्थवादी बनें। आपका बेटा इस वक़्त अपने जीवन के के जिस महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, वहाँ उसे परमेश्वर के इस वचन के व्यावहारिक उपयोग की सख्त आवश्यकता है। यूसुफ और शिमशोन की तुलना करें। उन कारणों और विवरणों का वर्णन करें जिन्होंने यूसुफ को दाऊद से महान बनाया।

बच्चों! जब आपके पिता, या माँ, आपसे यौन मामलों के बारे में बात करते हैं, तो उनकी बात सुनें। उनकी बातों पर मन लगाएं। आप अभी भी एक नासमझ मूर्ख युवा हैं (नीतिवचन 7:7)। उनके लिए आपको शिक्षा देना सहज बनाएं। उन्हें अपने प्रलोभन बताएं। खुलकर बात करने के लिए उन्हें धन्यवाद दें।

पाठक! स्वर्ग में विराजमान आपके पिता परमेश्वर ने जीवन और भक्ति से संबंधित सभी बातों की शिक्षा दीं है। क्या आपने उन बातों को मन लगाकर सुना? क्या आप उनपर ध्यान देते हैं? क्या आपने उसकी आज्ञा का पूरा पूरा पालन किया है? माता-पिता की शिक्षा पर ध्यान देना भली और लाभदायक बात है, लेकिन परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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