नीतिवचन 7:19

क्योंकि मेरा पति घर में नहीं है; वह दूर देश को चला गया है;

व्यभिचारियों और परस्त्रीगामियों को लगता है और वे कहते भी हैं, कि “हम पकड़े नहीं जाएँगे।” इस नीतिवचन में, एक व्यभिचारिणी ने अपने शिकार को यह वादा करके फुसलाया है कि वह उसके साथ अपने गुप्त अवैध प्रेमसंबंध में हर खतरे से पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जिस रीति से शैतान ने हव्वा से झूठ कहा था, उसी रीति से वह भी कहती है कि उस पर कोई आंच नहीं आएगी, क्योंकि उसका पति दूर देश की यात्रा पर चला गया था। जिस रीति से दलीला ने शिमशोन से झूठ कहा था, उसी रीति से उसने भी उसे यह नहीं बताया कि उस जवान पुरुष का परमेश्वर लंबी यात्रा पर नहीं है।

किंग जेम्स बाइबल में पुराना अंग्रेजी शब्द “गुडमैन” (भला मानुस) प्रयुक्त हुआ है जिसका अर्थ पति होता है। सुलैमान के इस दृष्टांत में की धूर्त ईज़ेबेल ने यहाँ इस शब्द का उपयोग अपने पति के विषय में उपहासात्मक बात करने के लिए किया है (नीतिवचन 2:17), इसलिए कि दोनों के विवेकों को अपने मासूम पति को, जो उसकी युवावस्था से उसका वास्तविक प्रेमी है, धोखा देने की दोष-भावना से मुक्त रखा जा सके। व्यभिचार के लिए आमतौर पर पति का अपनी पत्नी की और पत्नी का अपने पति की कुछ हद तक आलोचना की जानी आवश्यकता होती है, ताकि अवैध प्रेम-सम्बन्ध को सही ठहराया जा सके।

अपने मेहनती पति (नीतिवचन 7:19-20) को नीचा दिखाने के लिए उसने “वह” और “उसे” जैसे पुरुष-सर्वनामों का उपयोग किया, ताकि वह अपने स्वयं के बिस्तर को ही उनके छिप-छिप कर मिलने के लिए एक सुरक्षित स्थान के रूप में सूचित कर सके (नीतिवचन 7:16-17)। उसने गर्मी और जोश से भरे इस प्रेम-प्रसंग के लिए बहुत सारा समय मिलने का आश्वासन दिया, क्योंकि वह काफ़ी लम्बे समय के लिए यात्रा पर चला गया होगा (नीतिवचन 7:20)। जब स्त्रियाँ अपने पतियों के बारे में सोचती हैं तब सारा की निष्टावान वफ़ादारी का अनुसरण करना उनके लिए ईश्वरीय बुद्धि है (1 पतरस 3:5-6)।

उसके बाद उसने अपने पति की दूर देश की लंबी यात्रा का ज़िक्र किया, और ऐसा कहकर उसने अपनी भावना व्यक्त कीं कि उसका पति व्यापार के सिलसिले में बार-बार बाहर की यात्राओं पर होता है, ताकि वह इस मूर्ख युवक से अपनी तन्हाई के लिए सहानुभूति पा सके और जता सके कि उसे उसके प्यार और अपनेपन की कितनी जरूरत है। कितने व्यभिचारियों ने अपने पति या पत्नी को दोष देकर अपने जघन्य पाप के लिए बहाने दिए है, जबकि सत्य यह है कि उनमें परमेश्वर के भय और संयम की कमी है जो उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में संतुष्ट रख सके?

पाप धोखा देने वाला होता है, परन्तु व्यभिचार के पाप सबसे अधिक धोखा देने वाले होते हैं (नीतिवचन 3:13)। अल्पकालिक सुखविलास इतना संतोषजनक दिखाई दे सकता है और दूरस्थ दुष्परिणाम इतने अस्पष्ट दिखाई दे सकते हैं, कि अगर दोनों व्यक्तियों में आपसी सहमती बनती है तो ऐसे यौन पाप को हानिरहित माना जाता है। लेकिन पाप आपको यौन रोग, अनचाहा गर्भधारण, अपराधबोध, शर्म, आग में जलता ईर्ष्यावान पति या क्रोधित पिता, भविष्य की नपुंसकता, अनचाही यादें, यौन सम्बन्ध को प्रेम समझ बैठने की ग़लतफ़हमी, पछतावा, अकेलापन, आदि के बारे में नहीं बताता है।

भारत देश और दुनिया के अधिकांश देश अब इस तरह की यौन-विकृतियों की साज़िशों से भरे गीतों, उपन्यासों और फिल्मों के द्वारा अपना मनोरंजन करते हैं जैसा कि यह नीतिवचन वर्णन करता है। व्यभिचार महामारी है और मीडिया द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है कि महिलाएं खुद को खोजें और बड़ी उम्र की महिलाएं युवा पुरुषों के साथ मौज-मस्ती करें। पुरुषों को लगता है कि अपने बिस्तर पर जितनी ज्यादा हो सके उतनी ज्यादा महिलाओं को ले आना उनकी मर्दानगी की भूमिका और उनका विशेषाधिकार है। लेकिन ऐसी जघन्य दुष्टता के बारे में परमेश्वर और बाइबल क्या कहते हैं?

यहाँ सुलैमान का पाठ आज किसी फिल्म या उपन्यास के लिए एक महान कथानक होगा, और नायिका वेश्या की भूमिका में होगी। युवक को बहकाने की उसकी कला का सभी दर्शक आनंद उठाएंगे; उसकी विजय को प्रेम की विजय के रूप में मनाया जाएगा; नाटक सुखद रूप से समाप्त होगा; और इसे देखने या पढ़ने वाले अधिकांश युवा ऐसे ही भाग्यशाली होने की कामना करेंगे। इस प्रकार मूर्ख पाप का उपहास करते हैं (नीतिवचन 14:9)। इस प्रकार शैतान फिल्मों और किताबों के माध्यम से अपना जहर बेचता है (भजन 101:3)। लेकिन यहोवा क्या कहता है?

उसने आज्ञा दीं है कि दोनों व्यभिचारियों को मृत्युदण्ड दिया जाए (लैव 20:10; व्यवस्था 22:22-24; 2 शमूएल 12:13; यूहन्ना 8:5)। इस से क्या फ़र्क पड़ेगा अगर इस अनैतिक सम्बंध के लिए दोनों सहमत हुए थे? कुछ नहीं। यह मृत्यु के योग्य पाप है (इब्रा 13:4; प्रकाशितवाक्य 21:8)। इज़राइल में क़ानून था जिसके तहत पति अपनी व्यापार-यात्रा से लौटने के बाद अगर उसे अपनी पत्नी पर संदेह हो जाए तो वह उसे व्यभिचार की जांच के लिए याजकों के पास ले जा सकता था, जिसमें परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कोई आवश्यकता नहीं होती थी। यदि वह यौन-बेवफाई की दोषी पाई जाती, तो उसका पेट फूल जाता और उसकी जांघें तुरंत सड़ जाती (गिनती 5:11-31)।

पुरुषों के लिए व्यापार यात्राएं अक्सर अधिक खतरनाक होती हैं, क्योंकि ऐसी परिस्थिति में जब वह घर से दूर एक बढ़िया होटल में होता है, और उसके पास बहुत समय हो, शानदार खाना और शराब हो, और जहाँ उसे कोई नहीं पहचानता हो, तब उसे कई परीक्षाओं का सामना करना पड़ सकता है। जो कोई मसीह का नाम लेता है वह अपनी बाहरी व्यवसाय की यात्रा को सीमित करे और अपना पात्र शुद्ध रखे (1 थिस्स 4:1-8)। पहले से ही चेतावनी दिए जाने का अर्थ है पहले से ही हथियारबंध हो जाना। ऐसी स्थितियों में यूसुफ के आदर्शों पर चलो (उत्पत्ति 39:7-12)।

अपने वैवाहिक जीवन में अपने जीवनसाथी से जुदाई को कम से कम रखें। यदि पति-पत्नी दोनों धर्मी हैं और किसी एक का यात्रा पर जाना आवश्यक हो जाता है, तब ऐसी जुदाई दोनों के मनों में एक-दूसरे के लिए केवल प्रेम और पुनर्मिलन की तड़प को बढ़ाती है। अन्यथा, पति-पत्नी का दैनिक रूप से प्रेम-प्रसंग (शारीरिक समागम) में समय बिताना दोनों का दायित्व होता है, और अनावश्यक जुदाई से विहाह की वाचा को तोड़ने और जीवनसाथी को धोखा देने का अवसर बन जाती है, और आपको यौनाचार के पाप में ले जाने का शैतान को अवसर देती है (1 कुरिन्थियों 7:1-5)। परमेश्वर जानता था कि व्यापार और युद्ध के कारण पति-पत्नी के बीच जुदाईयों के समय आयेंगे, इसलिए उसने पतियों को आदेश दिया कि वे नई-नई शादी होने पर पूरा एक वर्ष युद्ध या किसी व्यवसाय के लिए बाहर न जाए, और केवल अपनी ब्याही पत्नी को प्रसन्न करें (व्यव. 24:5)।

एक सद्गुणी कुलीन स्त्री पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है, चाहे वह कहीं भी हो (नीतिवचन 31:10-12)। फिर भी व्यभिचार के पाप से सुरक्षित रहने के लिए, स्त्रियों को घर से दूर रहने के अपने समय को सीमित ही रखना चाहिए (नीतिवचन 7:11-12; 1 तीमु 5:12-15), क्योंकि स्त्रियाँ असानी से पाप के लिए फूसलाई जा सकती हैं (नीतिवचन 30:19-20; उत्पत्ति 3:1-6; 1 तीमु 2:14; 1 पतरस 3:7)। वह घर में व्यस्त रहकर अपनी बहुत मदद कर सकती है (नीतिवचन 31:13-27; तीतुस 2:3-5)। और उसे अपने पति के साथ भरपूर संतुष्टि से भरा और बार-बार संभोग करना चाहिए (1 कुरिन्थियों 7:1-5)।

यद्यपि पति एक लंबी व्यावसायिक-यात्रा पर जाता हो, फिर भी परमेश्वर की दृष्टि हर जगह लगी रहती है, और एक व्यभिचारिणी पापी पत्नी जो जो सोचती और करती है वह सब कुछ वह देखता है, और इस विषय में सुनिश्चित रहें कि उसका पाप उसे ढूंढ ही लेगा (नीतिवचन 15:3; गिनती 32:23)। घर से दूर रहने वाले पति को याद रखना चाहिए कि परमेश्वर उसके यौन इरादों और यौनाचार को भी देखता है (नीतिवचन 5:21; अय्यूब 34:22; यिर्म 23:24; इब्रा 4:13)। इसलिए सावधान रहो!

प्रिय पाठक, कलीसिया का पति, अर्थात् प्रभु यीशु मसीह शीघ्र ही लौटेगा, जो महिमा का प्रभु, और कलीसिया का दूल्हा है (मत्ती 24:42-51; मरकुस 13:34-37; 1 थिस्स 3:13; 5:1-10) ; 2 पतरस 3:9-17). क्या वह आपको एक निष्ठावान पवित्रता और विश्वासयोग्यता में उसकी प्रतीक्षा करते हुए पाएगा? या संसार के साथ व्यभिचार के बिछौने पर (याकूब 4:4)? विश्वास में होकर उससे मिलने का आनंद इस संसार में पल भर के पाप के सुख से कहीं अधिक बढ़कर है, अगर संदेह हो तो मूसा या यीशु से पूछो (इब्रा 11:24-26; मरकुस 10:28-30)।

नीतिवचन और उनकी व्याख्या हर दिन मुफ़्त पाएँ। चैनल खोलें, “फ़ॉलो करें” पर टैप करें और नोटिफ़िकेशन की घंटी चालू करें।