नीतिवचन 7:11

वह शान्ति रहित और चंचल थी, और अपने घर में न ठहरती थी;

यहाँ एक वेश्या, एक व्यभिचारिणी के तीन चरित्र-लक्षण बताए गए हैं। सभी बुद्धिमान स्त्रियाँ इन तीन चरित्र-लक्षणों से सावधानीपूर्वक बचेंगी, और सभी बुद्धिमान पुरुष उन औरतों से सावधानीपूर्वक बचेंगे जिनमें ये चरित्र-लक्षण पाएं जाते हैं। यहां वह बुद्धि है जो एक पराई स्त्री के इस लंबे वर्णन में छिपी हुई है जो एक युवक को बहका रही है कि उसका नाश कर दे।

अध्याय सात मुख्य रूप से एक नाटकीय दृष्टान्त है जिसमें एक पराई स्त्री किसी नौजवान को बहकाकर अपने साथ ले जाती है (नीतिवचन 7:6-23)। सुलैमान, जो अब तक का सबसे बुद्धिमान पिता हुआ है, उसने इस दृष्टान्त का उपयोग अपने बेटे और बच्चों को इस मोहक शत्रु के खतरों से अवगत कराने के लिए किया (नीतिवचन 7:1-5,24-27)।

वेश्या का सामान्य चरित्र एक ऐसी स्त्री का होता है जो कभी शान्त नहीं रहती। उसे बातें करना अच्छा लगता है; वह बहुत बकबक करती है; और ऊँची आवाज़ में बातें करती है (नीतिवचन 9:13)। वह हमेशा अपनी राय देने के लिए तत्पर होती है, चाहे उससे पूछा गया हो या न हो, भले ही वह आमतौर पर विषय वस्तु से अज्ञात हो। अगर कोई उसका विरोध करे, तो वह और भी तेज़ हो जाती है। वह अक्सर ऐसी छोटी-छोटी बातों में दूसरों को सुधारती है जिनका उससे कोई सम्बन्ध नहीं होता।

उसे दूसरों के वाक्यों को पूरा करना अच्छा लगता है। आप सुन सकते हैं कि वह कैसे अपने बच्चों और पति को ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर सुधारती है। बोल बोलकर झगड़ा करने में उसे आनन्द मिलता है। वह स्वेच्छाचारी, जिद्दी है और अपनी राय व्यक्त करना चाहती है। उसका मुँह चौड़ा और असभ्य बातों से भरा है, अपनी बातों में चिड़ दिलानेवाली और दबंग है, और विरोधाभाषी बातें बोलती है। आपने उसे पहले भी सुना है। उससे बचकर रहें!

एक धर्मपरायण स्त्री, जो अत्यंत खूबसूरत व्यभिचारी स्त्री से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ होती है, उसमें एक नम्र और शांत आत्मा निवास करती है, जिसे परमेश्वर आप एक अति मूल्यवान चरित्र-गुण कहता है (1 पतरस 3:3-4)। उसे अपनी अधीनस्थ भूमिका याद रहती है; वह हमेशा अनुग्रहकारी होती है; भलाई उसके मुँह को वश में रखती है; और उसे चुप रहने में कोई आपत्ति नहीं होती (नीतिवचन 11:16; 31:26; 1 कुरिन्थ 14:34-35)। वह संकोच और संयम को अपना गुण मानती है (1 तीमु 2:9-10)। जब वह बोलती है, तो वे ऐसे शब्द होते हैं जिनकी सब लोग प्रशंसा करते हैं (नीतिवचन 15:23; 24:26; 25:11)।

ख्रिश्चन स्त्रियों, क्या आप कम बाते करने में कुशल हैं? क्या यह संभव है? आपकी बातों की शैली में इस तरह का एक सरल परिवर्तन भले पुरुषों और भली स्त्रियों के बीच आपके सम्मान को अद्भुत रूप से बढ़ा देगा। आप जितना अधिक कम शब्दों में और सम्भलकर बोलोंगी उतनी ही आप ही की प्रतिष्ठा इज्ज़त बढ़ेगी (नीतिवचन 17:27-28)। यदि आप पहले से ही बहुत शांत स्त्री हैं, तो आप इस नीतिवचन की सलाह को नजरअंदाज कर सकती हैं, परन्तु पहले प्रार्थना सहित अपना आत्म-परिक्षण ज़रूर करें।

व्यभिचारी स्त्री आम तौर पर ज़िद्दी स्त्री होती है। उसे यह पसंद नहीं कि कोई उसे बताए कि कब क्या करना चाहिए; वह चीजों को अपने तरीके से करना चाहती है; उसे किसी के प्रति जवाबदेह होने से नफरत है; उसे सुधार और निर्देश से नफरत है। वह स्वेच्छाचारी है और अपनी राय को प्राथमिकता देती है। चाहे उसे जीतने के लिए अधिकार या प्रेम का भी उपयोग किया जाए, तौभी वह तब तक अपना विरोध जताती रहेगी जब तक कि मामले में उसकी अपनी मंजूरी नहीं मिलती। जब उसका पति और अन्य लोग उसका मार्गदर्शन करने की कोशिश करते हैं, तो वह विरोध करने के लिए आँसू, धमकी, भावना या अन्य प्रतिक्रियाओं का अपने हथियार के रूप में उपयोग करेगी।

परन्तु एक सद्गुणी स्त्री, जो किसी अत्यंत खूबसूरत व्यभिचारी स्त्री से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ होती है, मन की दीनता में प्रसन्न रहती है और अपने पति की अगुवाई और मार्गदर्शन में चलने हमेश तत्पर रहती है (इफि 5:22-24; कुलुस्सियों 3:18)। वह अपने पति से मार्गदर्शन लेने से न तो कतराती है, न उसकी सलाह पर सवाल करती है और न ही झगड़ा करती है। वह जानती है कि वह उसके लिए बनाई गई है, और वह जानती है कि उसे उसका आदर करना है और उससे डरना है (1 कुरिन्थ 11:9; इफि 5:33; 1 पतरस 3:1-2)। वह उसका और उसके पद का सम्मान करती है, और उसकी आज्ञा का पालन करना और उसकी इच्छाओं को पूरा करने में उसे आनन्द मिलता है।

ख्रिश्चन स्त्रियों, क्या आप जानती हैं कि ज़िद्द स्त्री का एक घृणास्पद गुण है? ज़िद्द स्त्री को वास्तव में एक घिनौनी औरत बना देती है (नीतिवचन 30:21-23)। झगड़ालू स्त्री विवाहित जीवन को दुखों से भर देती है (नीतिवचन 12:4; 19:13; 21:9,19; 25:24; 27:15-16)। अपने पति को उल्टा जवाब दिए बिना प्रसन्नतापूर्वक उसकी आज्ञा को माने, और आप देखोंगी कि कैसे आप का सम्मान आपके पति, परिवार और अन्य लोगों की नज़रों में बढ़ता है और आप अपने प्रति उनके व्यवहार में सुधार को देखोंगी।

व्यभिचारी स्त्री आम तौर पर अपने घर में नहीं ठहरती (नीतिवचन 7:12)। पति और बच्चों की सेवा करने की घरेलू ज़िम्मेदारियाँ उसके लिए उबाऊ, निराशाजनक और निचले दर्जे के काम हैं। वह अपनी इस ईश्वरीय उच्च बुलाहट की उपेक्षा करके शहर में घूमना-फिरना चाहती है, इस पार्टी में या उस सामाजिक काम में भाग लेना चाहती है। वह एक गृहिणी बनकर ऊब चुकी है; वह क्लॉस्ट्रोफोबिक हो जाती है, अर्थात् एक ऐसी बिमारी से ग्रस्त जिसमें रोगी एक सीमित स्थान में बंधा रहने से डरता है; उसे खरीदारी करना अच्छा लगता है; उसे अपने घर से बाहर रहना अच्छा लगता है। अपने घर और परिवार की उन्नति करने और उसे श्रेष्ठ बनाने घर पर काम करके से उसे कोई संतुष्टि नहीं मिलती। वह दूसरों का भला करना चाहती है।

परन्तु जो स्त्री कुलीन और सद्गुणी होती है, जो किसी अत्यंत खूबसूरत व्यभिचारी स्त्री से भी कहीं अधिक श्रेष्ठ होती है, वह अपनी घरेलू बुलाहट से प्रेम रखती है और खुशी-खुशी घर पर रहकर घर का प्रबंधन करती है और अपने पति और उसके बच्चों का भरण-पोषण करती है (नीतिवचन 31:10-31; उत्पत्ति 18:9; 1 तीमु 5) :13-14; तीतुस 2:4-5)। वह अपने पति की सहायता करने और उसके बच्चों की देखभाल करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को समझती है। बच्चे की देखभाल करना और अपने परिवार के लिए भोजन तैयार करना उसकी आत्मा को प्रसन्न करता है, भले ही उनमें बाद में बच्चे को नहलाना-धोना और रात के खाने के बाद रसोई घर की साफ़-सफाई करना शामिल हो।

ख्रिश्चन स्त्रियों, क्या आप आज ही शान्त रहने, दीन बनने और अपने घरेलू कर्तव्यों का निर्वहन करने में प्रसन्न रहने का प्रण लोंगी? आप इन क्षेत्रों में बुद्धि से अपना घर – अपना परिवार और संपत्ति – बना सकती हैं (नीतिवचन 14:1)। पराई स्त्री के चारित्रिक गुणों को ठुकराकर आप परमेश्वर और अन्य लोगों की दृष्टि में महान बन सकती हैं। आप बेशकीमती हीरे से भी अधिक मूल्यवान बन सकती हैं।

प्रभु यीशु मसीह का नाम लेने वाली प्रत्येक स्त्री शोर-शराबे, ज़िद और घरेलू जीवन के प्रति अरुचि को ठुकरा दे। इसके बजाए, नीतिवचन 31 की घरेलू रानी बनकर शांत आत्मा, नम्रता और अपने पति के प्रति समर्पण और श्रद्धा का एक जीवंत उदाहरण बनना चुनें। आप आने वाले समय में आनन्द पाओगी, क्योंकि परमेश्वर आपकी कुलीनता और सद्गुण को स्वर्ग के प्रतिफल और पुरस्कार से सम्मानित करेगा (नीतिवचन 31) :25)।

प्रत्येक पुरुष इन तीन दुष्ट गुणों वाली प्रत्येक घिनौनी स्त्री से बचे और उनके साथ कोई रिश्ता न बनाए। ऐसी स्त्रियाँ मानव समाज में स्थान पाने की हकदार नहीं हैं, और विशेष रूप से वे एक ऐसे पति को पाने की हकदार नहीं हैं जो उसके पापी जीवन का समर्थन करे और उसे सुरक्षित महसूस कराए। जवानों, चुनाव तुम्हारा है। लेकिन तुम अपना बोझ खुद उठाओगे। अपने लिए ऐसी स्त्री देखो जो अनुग्रह और सद्गुणों से भरपूर हो, और बाकी सब नक़ाबपोश लड़कियों के जाल में फँसने से बचो।

एक और महान व्यभिचारिणी है जो कर्मों के आधार पर उद्धार पाने और पवित्र परमेश्वर के सामने धर्मी ठहरने पर जोर-जोर से डींगें हांकती हैं, अर्थात् ऐसी कलीसिया जो बाइबल के ऊपर अपनी मानव परंपराओं पर चलने की ज़िद करती है, और सदियों पहले ही सरल प्रेरितीय ख्रिश्चन धर्म से दूर हो चुकी हैं। बाइबल पर विश्वास करनेवाली प्रत्येक कलीसिया को यह सुनिश्चित करने के लिए अपना आत्म-परिक्षण करना चाहिए कि कही इस कलीसिया के झूठे सुसमाचार ने उसे संक्रमित तो नहीं किया है। और हर एक मसीही उस से दूर हो जाए, ऐसा न हो कि तुम उसके पापों और विपत्तियों में फंस जाओ। (प्रकाशितवाक्य 18:4)

मसीह की सच्ची दुल्हन के रूप में, प्रत्येक ख्रिश्चन विश्वासी, चाहे पुरुष या स्त्री, अपने परमेश्वर और पति के प्रति शांत समर्पण और अपनी कलीसिया में सेवा करने के लिए तत्पर रहने मसीह का ऋणी है। प्रत्येक पवित्रजन को चुप रहकर परमेश्वर के राज्य में सेवा के अपने कर्तव्यों का पालन करना अवश्य है। नए नए सिद्धांतों और नई नई मानव-निर्मित प्रथाओं से मोहित होने के बजाय, परमेश्वर की प्रत्येक सच्ची संतान उपदेश सुनने में तत्पर, उसका पूरी ईमानदारी से पालन करने में परिश्रमी और चर्च में परमेश्वर-प्रदत्त अपनी भूमिका को पूरा करने के लिए अपने पद की खोज करे।

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