नीतिवचन 6:24

ताकि तुझ को बुरी स्त्री से बचाए और पराई स्त्री की चिकनी–चुपड़ी बातों से बचाए।

पुरुषों को स्त्री के मुंह से अपनी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है। वे स्त्री की चिकनी–चुपड़ी बातें सुनने के लिए अन्दर ही अन्दर मचलते रहते हैं। और जब यह आदर-भाव किसी नई स्त्री से, किसी सुन्दर स्त्री से, या किसी लोकप्रिय स्त्री से आता है, तब वह और भी अधिक उत्तेजक हो जाता है। दुष्ट स्त्रियाँ पुरुषों की इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर उन्हें परस्त्रीगमन और व्यभिचार के पाप में में फँसाती हैं।

जवान पुरुषों को यह सिखाया जाना चाहिए कि व्यभिचारिणी के मुंह से निकलनेवाली प्रशंसा में बहकाने की कैसी सामर्थ्य और कितना भारी खतरा छिपा होता है। आज ईमेल, टेक्स्ट, ट्वीट, या फोन-कॉल के द्वारा चिकनी–चुपड़ी बातों करने के आधुनिक साधनों ने इस जोखिम को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है। क्योंकि आज बहुत-सी स्त्रियों में ज़मीर का बन्धन या लैंगिक संकोच नहीं रहा, जिसका एक उदाहरण “सेक्सटिंग” है, इसलिए जवान पुरुषों को सीखना चाहिए कि ऐसी लड़कियों और स्त्रियों से वे बिलकुल दूर रहें।

राजा सुलेमान, एक भले और बुद्धिमान पिता के नाते, अपने पुत्र को इस्राएल के सिंहासन के लिए तैयार करना चाहता था। वह जानता था कि सत्ता बिगड़ी हुई स्त्रियों के लिए, सबसे बड़े कामोत्तेजक कारणों और प्रेरणाओं में से एक है; इसलिए वह अपने पुत्र को “पराई स्त्री” की लुभावनी बातों के खतरे के विषय में बार-बार चेताता रहा, अर्थात ऐसी कोई भी स्त्री जो उससे विवाहित नहीं थी (नीतिवचन 2:16; 5:3; 7:5,13-21; 22:14; 29:5)। वह जानता था कि स्त्री के मुंह से प्रशंसा, जो करीबी सम्बन्ध बनाने की इच्छा का संकेत देती है, एक बड़ा संकट बन सकती है।

दुष्ट स्त्री उस पुरुष के साथ बिस्तर पर जाने को तैयार हो जाती है जो उसका पति नहीं है; वह वेश्या या व्यभिचारिणी है। वह “पराई स्त्री” इस अर्थ में है कि उसे उसके विवाह के बिस्तर पर कोई अधिकार नहीं (इब्रानियों 13:4)। ऐसी स्त्रियाँ हैं, और आज तो पहले से कहीं अधिक, जो लैंगिक पवित्रता या निष्ठा को बेतुकी बात समझती हैं। विवाह के समय कौमार्य का उपहास किया जाता है, और विवाह के बाद के सम्बन्धों का “समर्थन” किया जाता है। ऐसी स्त्रियाँ भले और सफल पुरुषों को, विशेषकर राजाओं के पुत्रों को, अपना शिकार बनाती हैं (नीतिवचन 6:26; 7:26; 23:27-28)।

इन दुष्ट स्त्रियों की युक्तियाँ बहुत अधिक नहीं होतीं; पर बुद्धिमान पुरुष उन्हें पहचानना और उनसे बचना सीख लेते हैं। पहली युक्ति यह है कि वे निर्लज्ज कपड़े या आचरण के द्वारा अपनी स्त्री-सौन्दर्यता और देह-आकृति को उघाड़कर, और उभारकर, पुरुष की दृष्टि को बन्धक बना लेती हैं (नीतिवचन 6:25; 7:10; यशायाह 3:16)। क्योंकि पुरुष दृष्टि के द्वारा उत्तेजित होता है, इसलिए यह एक बड़ा प्रलोभन है और पाप की पहली नींव रख देता है। बुद्धिमान पुरुष निर्लज्ज स्त्रियों की संगति से दूर रहते हैं, और जिन्हें टालना सम्भव न हो, उनके प्रति भी किसी काम-वासना को ठुकरा देते हैं (नीतिवचन 5:8)।

दूसरी युक्ति यह है कि वे पुरुष की प्रशंसा करने के लिए अपनी आँखों की अदाओं का उपयोग करती हैं, और उसे यह संकेत देती हैं कि वे उसकी सेक्स-पार्टनर बनने को तैयार हैं। आँखों की ऐसी अदाओं को अकसर “बेडरूम आइज़” कहा जाता है। दुष्ट स्त्रियाँ जानती हैं कि किसी पुरुष को कैसे संकेत दिया जाए कि वे उसे चाहती हैं, और बहुत थोड़े पुरुष उस दृष्टि का सामना कर पाते हैं (नीतिवचन 6:25; यशायाह 3:16)। लड़के बहुत छोटी आयु में ही सीख लेते हैं कि किसी लड़की का स्नेहपूर्वक देखना कितना सुखद लगता है। पर श्रेष्ठ पुरुष अपनी पत्नी के अतिरिक्त किसी दूसरी स्त्री के साथ आँखों की ऐसी अदाओं को कोई स्थान नहीं देते।

तीसरी युक्ति है, चिकनी–चुपड़ी बातें, ताकि पुरुष की रोक-टोक टूट जाए और वे कामवासना के पाप के “अन्तिम शिकार” तक पहुँच जाएँ। निर्लज्ज पोशाक दूर से ही, बिना किसी प्रत्यक्ष सम्बन्ध के, प्रलोभन उत्पन्न करती है। आँखों का मिलना प्रायः पहली व्यक्तिगत डोर बनता है जिससे बहकावा आरम्भ होता है। पर निकटता के शब्द, रज़ामन्दी की पुष्टि करते हैं, इच्छा को अधिक विस्तार से व्यक्त करते हैं, और पुरुष को झुकने के लिए राज़ी कर लेते हैं। यदि किसी पुरुष ने मूर्खता से किसी स्त्री को यहाँ तक पहुँचने दिया, तो सम्भव है कि वह फिर रुक न सके।

स्त्री के शब्द कितने सामर्थ्यशाली होते हैं? अधिकांश लोग जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक! शिमशोन के विषय में सोचकर देखें। हालांकि वह जानता था कि दलीला उसे बर्बाद करना चाहती थी, क्योंकि वह उसकी तीन परीक्षाओं में बहुत बुरी तरह असफल हुई थी, फिर भी वह उसके प्रतिदिन के लुभावने दबाव का सामना न कर सका (न्यायियों 16:1-21)। यह मानना कठिन लगता है कि संसार का सबसे बलवान पुरुष एक मूर्तिपूजक जाति की औरत के सामने इतनी सहजता से गिर पड़ा, जिसका झूठ साबित हो चूका था। उसके कानों में घुलती मीठी बातों ने उसके भविष्य की उस दशा का कभी उल्लेख भी नहीं किया था, कि वह अन्धा होकर चक्की पीसेगा!

चिकनी–चुपड़ी बातों से सुरक्षा का उपाय सरल है, स्त्रियों से आवश्यकता से अधिक बातचीत न करें। जो स्त्री अपने शब्दों में अत्यधिक प्रशंसक या ज़रूरत से अधिक घुल-मिलने वाली हो, उससे सम्बन्ध तोड़ दीजिए। इसमें टेक्स्ट, ईमेल, और फोन-कॉल भी आते हैं, जहाँ पुरुष बिना स्त्री की देह देखे, और बिना आँखों के मिलाए, केवल शब्दों से ही बहकाया जा सकता है। यदि इसके लिए परिवार के मित्रों से दूरी, नौकरी बदलना, या कोई अन्य कठोर कदम उठाना पड़े, तो उन पर भी विचार किया जाना चाहिए (मत्ती 5:28-30; रोमियों 13:14; 2 तीमुथियुस 2:22)।

जवान पुरुषों को यह शिक्षा दी जानी चाहिए कि जो लड़कियाँ बोलने में और आचरण में निर्लज्ज हो और आगे बढ़ने वाली हों, उनसे घृणा करें और उनसे बचें। उनका हमेशा निर्लज्ज पोशाक पहनना और ढीठ मुख-भाव उनकी पहचान हैं, पर हर बार ऐसा नहीं होता। इसलिए छोटी आयु से ही माता-पिता दोनों को अपने पुत्रों को चेताना चाहिए कि ऐसी लड़कियाँ बुरी और खतरनाक होती हैं। विद्यालय, पड़ोस, सम्बन्धियों, या अन्य स्रोतों से लिए गए ठोस उदाहरण देकर पुत्रों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे अपनी पवित्रता और सफलता के इस संकट को तुच्छ नहीं, बल्कि घृणित समझें।

बुद्धिमान माता-पिता इस नीतिवचन की चेतावनी से यह पहचानते हैं कि बेटों को व्यभिचार से बचाने के लिए लड़कियों के साथ बातचीत को सीमित करना और उसकी निगरानी रखना आवश्यक है। टेलीफोन जैसा माध्यम व्यापार और मानवीय सम्पर्क के लिए उपयोगी साधन है, पर जवान पुरुषों के लिए यह एक नया खतरा भी बन जाता है। और मोबाइल फोन, बहुत-से मामलों में मानो “पाप का फोन”, संचार का ऐसा माध्यम उपलब्ध कराता है जिसे सीमित करना या देख-रेख में रखना कहीं अधिक कठिन है। माता-पिता, सावधान रहिए!

केवल मूर्ख माता-पिता ही बिना निगरानी के डेटिंग, या लैंगिक निकटता के अन्य स्पष्ट अवसरों पर ही अपना ध्यान टिकाए रखते हैं। पर बुद्धिमान माता-पिता उन चिकनी–चुपड़ी बातचीतों पर आरम्भ में ही रोक लगाने का प्रयत्न करेंगे, जो मनों को बहकाती हैं और इच्छाओं को भड़काती हैं, उससे पहले कि कोई युगल कभी अकेला भी हुआ हो। वे जानते हैं कि लम्बी बातचीतों, ईमेलों, या टेक्स्ट संदेशों की लैंगिक उत्तेजना और भावनात्मक आकर्षण, दो जवानों के अकेले होने का कोई उपाय ढूँढ़ने से बहुत पहले ही, मन और चरित्र, दोनों पर डाका डाल सकता है।

जवान स्त्रियों को यह सिखाया जाना चाहिए कि विवाह से पहले वे शब्दों, पत्रों, कार्डों, पर्चियों, फोन-कॉलों, ईमेलों, या टेक्स्ट संदेशों के द्वारा कभी छेड़छाड़ न करें। उन्हें यह जानना चाहिए कि चिकनी–चुपड़ी बातों भरे वचन उनके पति के लिए हैं, पुरुषों को चिढ़ाने, बहकाने, या बेचैन करने की युक्तियाँ नहीं। उन्हें उस नम्र, शान्त, और लज्जाशील स्वभाव की शिक्षा दी जानी चाहिए जिसकी पवित्र शास्त्र अपेक्षा करता है (1 तीमुथियुस 2:9-10; 1 पतरस 3:3-4)। भक्त माताएँ यह भी उदाहरण देकर सिखाएँगी कि अपने पति को प्रसन्न करने के लिए शब्दों का उपयोग कैसे किया जाता है।

पुरुष भी चिकनी–चुपड़ी बातों करते हैं और शब्दों के द्वारा लड़कियों तथा स्त्रियों को सावधानी से भटकाकर करके उनका अनुचित लाभ उठाते हैं। यह दिन भर में अनगिनत बार होता है। नीतिवचनों में विशेष बल दुष्ट स्त्रियों के खतरे पर इसलिए है कि यह एक पिता ने अपने पुत्र की सुरक्षा और सफलता के लिए लिखा। पर इस बुद्धि को पूरी रीति से लागू करने के लिए लड़कियों और स्त्रियों को और भी अधिक सावधान रहना चाहिए; क्योंकि मीठी बातें करने वाले वे पुरुष, जो थोडासा भी संकेत दें कि वे लैंगिक अनुग्रह चाहते हैं, उनसे बचना चाहिए और उन्हें तुच्छ समझना चाहिए।

भक्त पत्नियाँ इस नीतिवचन से सीखती हैं कि वे अपने पति को मज़बूत रखने के लिए, और दाम्पत्य प्रेम में अधिक उत्तम होने के लिए, दयालु वचनों और प्रशंसा का उपयोग कर सकती हैं। बहुत-सी ख्रिस्ती पत्नियाँ या तो अत्यन्त अज्ञानी, संकोची, या कड़वी हो जाती हैं, इसलिए वे शब्दों के द्वारा अपने पति के प्रति अनुराग प्रकट नहीं करतीं; और तब वे पति उन सांसारिक स्त्रियों के प्रति अधिक असुरक्षित हो जाते हैं, जो स्वभावतः चिकनी–चुपड़ी बातों का उपयोग जानती हैं। ख्रिस्ती पत्नी में यह सामर्थ्य और यह अभिलाषा होनी चाहिए कि वह अपने पति के विषय में “पराई स्त्री” को उसी के खेल में परास्त कर दे।

भले शब्द और मधुर भाषण केवल लैंगिक पापों के लिए ही नहीं प्रयुक्त होते। पौलुस ने चेतावनी दी कि इनके द्वारा ख्रिस्तियों को झूठे सिद्धान्तों की ओर भी खींचा जाता है (रोमियों 16:17-18)। झूठे शिक्षक आपसे यह नहीं कहेंगे कि वे आपको सत्य से भटकाना चाहते हैं; वे तो इसके विपरीत करेंगे। वे जितना सम्भव हो उतना “सच्चे” और “शास्त्रानुसार” प्रतीत होने का प्रयत्न करेंगे। और वे अपने धर्म में अनेक आत्मिक आशीषों और लाभों का वचन भी देंगे। आपकी सर्वोत्तम रक्षा क्या है? परमेश्वर के वचन के द्वारा सब बातों को परखिए, और हर झूठी धारणा को ठुकरा दें (भजन 119:128; प्रेरितों के काम 17:11; 1 थिस्सलुनीकियों 5:21)।

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