नीतिवचन 6:23

क्योंकि आज्ञा तो एक दीपक है; और व्यवस्था उजियाला है; और उपदेश की दपट जीवन के मार्ग।

अच्छे माता-पिता अपने बच्चों को यौन पापों के प्रति आगाह करते हैं। अच्छे बच्चे अपने माता-पिता की बुद्धि और नियमों को मूल्यवान समझते हैं और इन लोकप्रिय पापों के कारण अपने जीवन में उठनेवाले संकटों से बचते हैं।

मूर्ख माता-पिता बहुत व्यस्त हैं, जीवन के कम महत्वपूर्ण बातों को लेकर बहुत चिंतित हैं, बहुत लंबा इंतजार करते हैं, इतने अति संकोची होते हैं कि अपने बच्चों के साथ इस विषय पर स्पष्ट और सीधे-सीधे बात नहीं कर सकते, अपने वैवाहिक जीवन को रोमांटिक नहीं बनाते हैं कि अपने बच्चों का सम्मान अर्जित कर सकें, या दूसरों के लिए अपने पीछे चेतावनियां छोड़ सकें, पास्टरों के सामान।

इस नीतिवचन को फिर से पढ़ें। आज्ञा, नियम, और शिक्षा की फटकार माता-पिता के अपने बच्चों के लिए नियम और यौन पापों के विरुद्ध चेतावनियाँ हैं। इस नीतिवचन का संदर्भ यही है (नीतिवचन 6:20-35)। इस नीतिवचन द्वारा शुरू किए गए वाक्य के दूसरे भाग में लिखा है, “वे तुझको अनैतिक स्त्री से और व्यभिचारिणी की चिकनी चुपड़ी बातों से बचाएगी” (नीतिवचन 6:24)।

कुलीन माता-पिता नियम निर्धारित करते हैं, कानून देते हैं, बुरे आचरण के लिए फटकार लगाते हैं, और जीवन के इस महत्वपूर्ण पहलू के विषय में शिक्षा देते हैं। हर बुद्धिमान बच्चा इन नियमों, कानूनों और फटकार पर ध्यान देगा, क्योंकि ये वास्तविक सुख और सफलता के लिए बुनियादी हैं। जो मूर्ख अपने माता-पिता की यौन चेतावनियों की अवहेलना करता है, वह अपना ही विनाश कर देगा, क्योंकि खतरे और उसके परिणाम बहुत बड़े हैं।

सुलैमान और उसकी पत्नी ने अपने पुत्र को व्यभिचारिणी स्त्रियों और व्यभिचार के विषय में चेतावनी दी (नीतिवचन 6:20-35)। उसने अपने बेटे से यौन पापों के विनाशकारी परिणामों के बारे में उनके निर्देशों को याद रखने का आग्रह किया (नीतिवचन 6:20-24)। यहाँ आज्ञा पिता के रूप में सुलैमान की ओर से है; कानून सुलैमान की पत्नी से माँ के रूप में है; और शिक्षा में दी गई मिलीजुली फटकार दोनों की ओर से हैं (नीतिवचन 6:20)।

पिता और माता ने मिलकर बच्चों को पढ़ाना और चेतावनी देना चाहिए (नीति 22:6; 29:15; व्यवस्था 6:4-9; 29:29; इफि 6:4)। और उनकी फटकार और शिक्षा में यौन पापों के बारे में नियमित सलाह और चेतावनी शामिल होनी चाहिए, जिनका उल्लेख पवित्रशास्त्र और नीतिवचन में अक्सर किया जाता है (नीति 7:6-27; उत्पत्ति 2:24-25; 39:7-12; लैव 18:6-30; 20:10-24; 2 शमूएल 11:1-27; मलाकी 2:10-16; मत्ती 5:27-32; 1 थिस्स 4:3-8; आदि)।

माता-पिता, विशेषकर माताएँ, अपने बच्चों की स्कूली शिक्षा, गृहकार्य, खेल, मनोरंजन और कलाओं में अधिक समय और प्रयास लगाते हैं। लेकिन कुछ ही माता-पिता, विशेषकर माताएँ, उन्हें यौन-सम्बन्ध के बारे में सिखाते हैं। ख्रिश्चन बच्चे कश्मकश में हो सकते हैं कि वे गर्भ में कैसे आएं, क्योंकि उनके माता-पिता के बीच यौन-सम्बन्ध या संभोग के बारे में कोई उत्साह, आँख-मिचौली, स्पर्श या शब्द नहीं हैं। जैसे हार्मोन उनकी यौन-इच्छाओं और विचारों को भड़काते हैं, उन्हें प्रश्न पड़ता है कि क्या उनके माता-पिता इन सब बातों को समझते हैं।

शैतान ने विक्टोरियाई युग (1820 से 1914 रानी विक्टोरिया का शासन) और अन्य त्रुटियों का इस्तेमाल यौन-सम्बन्ध को लेकर एक विकृत दृष्टिकोण को आकर्षित करने के लिए किया जिसका बाइबल में कोई उल्लेख नहीं है। कई पुराने मसीहियों के विश्वास के बावजूद, बाइबल यौन-सम्बन्ध के प्रति बहुत सकारात्मक है। केवल सुलैमान का गीत पढ़ें! यौन-सम्बन्ध के बारे में दमन और चुप्पी वैवाहिक जीवनों में आज भी बेकार की तबाही को जारी रखे हुए है, परन्तु वैवाहिक जीवनों ही इस अधर्मी विकृति का प्रतिकार करने के लिए यौन क्रांति को जन्म दिया। सच्चाई दोनों खाइयों के बीच है।

धर्मपरायण माता-पिता सुखी प्रेमी होते हैं और अपने बच्चों को वैवाहिक यौन-सम्बन्ध की शिक्षा देते हैं, पर साथ ही वे व्यभिचार की पूरी तरह से निंदा करते हैं, विपरीत लिंग के साथ दोस्ती रखने के अवसरों को सीमित करते हैं, भावनात्मक लगाव को प्रतिबंधित करते हैं, कामुक संगीत, कामुक किताबें, फिल्मों और इंटरनेट को खत्म करते हैं, अकेले में मिलने-जुलने पर प्रतिबन्ध लगाते हैं, सांसारिक सनक का उपहास करते हैं, कौमार्य बनाए रखने उपाय करते हैं, और कम उम्र में ही विवाह करने को बढ़ावा देते हैं।

पिताओं! क्या आपके बच्चे आपकी आज्ञाओं को जानते हैं? क्या उनकी बाहर की मित्रता और मर्यादा बाइबल-सम्मत हैं? क्या आपने इन बातों को उन्हें पर्याप्त रूप से परिभाषित कर के समझाया है? क्या आपने स्पष्ट रूप से यौन प्रलोभनों का वर्णन किया है? क्या आपने अपने बच्चों में बढ़ती यौन इच्छा को पहचाना है? क्या आपने समझाया है कि अल्पकालिक सुख दीर्घकालिक परिणामों को सही नहीं ठहराता है? जब युवाओं की यौन कुंठा बढ़ रही होती है तो क्या आपने उन्हें सहारा दिया है?

माताओं! क्या आपने अपने बच्चों को प्रेम और यौन सम्बन्ध के बारे में निर्देश और नियम दिए हैं? क्या आपके नियम मूर्खतापूर्ण व्यभिचार से मुक्त हैं और बाइबल के ठोस ज्ञान पर आधारित हैं? क्या वे स्पष्ट रूप से समझ गए हैं? क्या आपके बच्चे इन मामलों में एक बुद्धिमान और संतुलित महिला के रूप में आप पर भरोसा करते हैं? क्या आप नीतिवचन में वर्णित माताओं के समान नियमों को निर्धारित करने में शामिल हैं (नीति 1:8; 6:20; 31:1-3)?

बच्चों! परमेश्वर परवाह नहीं करता कि आप कितने वर्ष के हैं। यदि आपके माता-पिता हैं, तो आप एक बच्चे हैं। सोलह साल के युवा प्रेम, सेक्स और शादी के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, और वे बीस साल की उम्र में ज्यादा बेहतर नहीं हैं। केवल एक चीज जो वे अच्छी तरह जानते हैं वह है भावनात्मक और यौन संकट का पता लगाना। मूर्खता और वासना से भरे हुए, आप एक ऐसी विपत्ति हैं जो घटित होने की प्रतीक्षा कर रही है (नीतिवचन 7:7; 22:15; भजन 25:7; सभोपदेशक 11:9-10; II तीमुथियुस 2:22)। अपने माता-पिता की बात सुनो! परमेश्वर ने उन्हें इसलिए भेजा है ताकि आपको खुद से बचाए।

बच्चों! यह नीतिवचन मुख्य रूप से आपके लिए है। सुलैमान ने अपने बेटे से कहा कि उसके पिता की आज्ञा और उसकी माँ की व्यवस्था उसे यौन पापों के अंधेर और दर्दनाक परेशानी से बचाने के लिए दीपक और प्रकाश थे। उनकी फटकार और नसीहत ही एक अच्छा जीवन जीने का एकमात्र तरीका था। विश्वास करो, या मर जाओ (नीत 2:18; 5:5; 7:27; 9:18)। और याद रखें, मरने के एक से अधिक तरीके हैं, क्योंकि जीवन मृत्यु से अधिक दर्दनाक हो सकता है, अर्थात् आपका जीवन जीतेजी नरक बन सकता है (नीतिवचन 1:24-31; 5:23; 13:15; 22:5)।

बच्चों! आपकी खुशी और सफलता काफी हद तक स्थायी दागों से बचने और यौन मूर्खता के विनाशकारी परिणामों से बचने पर निर्भर करती है। अपने ख्रिश्चन माता-पिता पर भरोसा करें, जो आपके जीवन में ईश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं, क्योंकि उसी ने प्रेम, यौन और विवाह को बनाया और रचा। वह उनके बारे में संसार से बेहतर जानता है। यह दुनिया के समलैंगिक विवाहो, बढ़ते तलाक, गर्भपात और अन्य विकृतियों को देखकर स्पष्ट होना चाहिए।

पाठक! परमेश्वर अपने बच्चों के लिए एक महान पिता है। उसका वचन हर विषय पर उत्तम सलाह और महान आज्ञाओं से भरा है, जिसमें एक प्रेमपूर्ण विवाह में यौन संतुष्टि भी शामिल है। यह आपका कर्तव्य और विशेषाधिकार है कि आप इस विषय पर एक चर्च में रहकर उसके वचन को सीखें, जहां बिना किसी समझौते या शर्मिंदगी के परमेश्वर की समस्त मंशा सिखाई जाती है। आपके पवित्रीकरण का एक बड़ा हिस्सा परमेश्वर के प्रति आपकी यौन आज्ञाकारिता है (1 थिस्स 4:3-8; 1 कुरिन्थियों 7:1-5)।

बहुतायत का जीवन हर तरह से आप पर निर्भर करता है कि आप उसके वचन बाइबल को सीखें और उसका पालन करें (नीत 3:13-18; भजन 19:11; 34:12-16; यूहन्ना 10:10)। परमेश्वर का वचन एक दीपक और प्रकाश हैं जो आपको इस दुनिया में सबसे अच्छा जीवन और आने वाले नए जगत में जीवन का मार्ग दिखाता है।

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