नीतिवचन 6:19
झूठ बोलनेवाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करनेवाला मनुष्य।
यहां उन सात वस्तुओं में से दो वस्तुएं और उन सात मनुष्यों में से दो मनुष्य हैं जिनसे परमेश्वर यहोवा बैर रखता है, और जिन से उसको घृणा है (नीतिवचन 6:16-19)। वह उन झूठे लोगों से बैर रखता है जो दूसरों के खिलाफ झूठी गवाही देते हैं, और वह उन विनाशकारी कीटों से बैर रखता है जो प्रभु यीशु मसीह की कलीसिया (चर्च) में भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करते हैं। वह ऐसा भी कह सकता था कि झूठ और कलह से उसको घृणा है, लेकिन उसने कहा कि उसको ऐसे ऐसे पापों को करने वालों से घृणा है, वह उन से बैर रखता है।
परमेश्वर पवित्र है (यशायाह 6:3; प्रकाशितवाक्य 4:8)। वह पाप से घृणा रखता है (नीतिवचन 8:13; इब्रानियों 1:9)। वह इतना पवित्र है कि वह पाप या पापियों से प्रेम नहीं कर सकता (अय्यूब 15:5; हब 1:13)। वह पापियों से घृणा करता है (भजन 5:4-6; 11:4-7; 139:21-22)। लोग अपनी नफरती प्रवृत्ति में चाहे कितनी ही आपत्तियाँ उठाएँ, परमेश्वर पाप और पापियों से घृणा करता है। संडे स्कूल का यह झूठ कि परमेश्वर पाप से घृणा करता है लेकिन पापी से प्रेम करता है, सरासर झूठी शिक्षा है। परमेश्वर को पापियों से घृणा है, और यहाँ उसने उनमें से दो का उल्लेख किया है।
अंतिम न्याय के दिन, वह दुष्टों से कहेगा कि उसने उन्हें कभी नहीं जाना था – उसने उनसे कभी प्रेम ही नहीं किया (मत्ती 7:23; 13:47-50)। वह उनसे कहेगा कि वे उसकी उपस्थिति से दफा हो जाएं, और यह न्यायोचित्त भी है! वह केवल उन्हीं से प्रेम करता है और अपनाता है जिन्हें उसने यीशु मसीह के लहू से पवित्र बनाया है – चुना हुआ उसका प्रिय समाज़ (इफि 1:3-6; रोमियों 9:15)।
लोग इस पवित्र धर्म-शिक्षा के विरुद्ध दांत पीस पीसकर चिल्लाते हैं, परन्तु परमेश्वर सच्चा ठहरे! क्या वह शैतान से भी प्रेम करता है? वे शैतान के प्रति परमेश्वर के बैर को लेकर नहीं कुड़कुड़ाते, क्योंकि उनका अपवित्र और व्यर्थ बकवाद केवल स्वार्थी अभिमान और अपने प्रति प्रेम है। वे इतने अहंकारी हैं कि एक पवित्र और संप्रभु परमेश्वर के निर्णय के प्रति समर्पण नहीं करेंगे।
जब हम बाइबल के इस सिद्धांत की तुलना उद्धार की उन शिक्षाओं से जिनका प्रचार आज अधिकांश मंचों से किया जाता है, जिसमें मनुष्य अपनी स्वतंत्र इच्छा से अंधाधुंध और अप्रभावी तरीके से उद्धार पाने का निर्णय लेता, तब परमेश्वर की संप्रभु कृपा अत्यंत विशेष बन जाती है। परमेश्वर अपनी कलीसिया से प्रेम करता है, अपने पितृत्व के प्रेम से उन्हें ताड़ना देता है, वह उनमें से एक को भी नहीं खोएगा, और वे उसके प्रेम से कभी अलग नहीं किएँ जा सकते (इफि 5:25; इब्रानियों 12:6-8; यूहन्ना 6:37-39; रोमियों 8: 38-39)।
यहोवा परमेश्वर ने कहा, “तू अपने पड़ोसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना” (निर्ग 20:16)। परमेश्वर इस पाप से घृणा करता है, इसलिए उसने इस आज्ञा को दस आज्ञाओं की सारांश सूची में शामिल किया। वह जानता था कि एक दुष्ट मुँह दूसरों को कितना भयानक नुकसान पहुंचा सकता है, और इसके खिलाफ बचाव कितना कम है, इसलिए उसने इसकी कड़ाई से निंदा की (नीतिवचन 19:5,9; 25:18; निर्गमन 23:1; ज़कर्याह 8:17)। बाइबल झूठ बोलने, झूठा आरोप लगाने, बदनामी करने, कानाफूसी करने, चुगली करने और पीठ पीछे किसी की बुराई करने पर कड़ा प्रहार करती है।
जब मनुष्यों पर उनके जीवन, स्वतंत्रता, या उनके भविष्य को लेकर कोई मुक़द्दमा चलाया जाता है, तो यह जरूरी है कि गवाह पूरा सच बताएं और सच के अलावा कुछ भी न बताएं। हमारी अदालतें गवाही लेने से पहले गवाहों को इस कर्तव्य की शपथ दिलाती हैं। परमेश्वर ने पीड़ितों को झूठी गवाही से बचाने के लिए सभी मामलों में कम से कम दो गवाह होने की व्यवस्था दीं (व्यवस्था 19:15); यदि कोई व्यक्ति इस्राएल में झूठी गवाही देता, तो उसे पेड़ पर लगाकर दण्ड दिया जाता था, चाहे वह कितना भी भयानक क्यों न हो (व्यवस्थाविवरण 19:16-21)।
झूठ बोलने और झूठा आरोप लगाने वाला मुंह भारी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि कुछ मामलों में प्रतिष्ठा और चरित्र का बलात्कार शरीर के साथ बलात्कार से भी बदतर है (भजन 35:11-12)। शारीरिक हिंसा भयानक है, लेकिन इसमें कुछ बचाव और चंगाई की संभावना होती है; परन्तु मुँह से की जानेवाली बदनामी और झूठे आरोप बदतर बात हैं, और क्योंकि इसकी चोट गहरी आत्मा को छलनी कर देती है, अत: चंगाई की उम्मीद बहुत कम होती है।
परमेश्वर के प्रिय पाठकों, सत्य और सिद्धांतो पर चलनेवाले पुरुष और स्त्री होना आपका परम कर्तव्य है (निर्गमन 18:21)। दूसरों के बारे में कुछ भी कहने से पहले अपने विचारों, शब्दों और इरादे पर सावधानी से विचार करें। अपने होठों से दूसरों की निंदा करने के बजाय उनकी प्रशंसा करने के उपयोग में लाएं, और यदि आपको कभी किसी दूसरे के बारे में गवाही देनी हो, तो आपका हर एक शब्द सच्चाई और ईमानदारी से शोभायमान हो (नीतिवचन 14:5)।
परमेश्वर को एकता भी प्रिय है, विशेषकर अपने लोगों के बीच (भजन 133:1-3; 1 कुरिन्थ 1:10; इफि 4:3-4)। वह उन लोगों से बैर रखता है जो खुल्लम-खुल्ला या षडयंत्र से भाईचारे की संगति और मेलमिलाप को भ्रष्ट कर देते हैं (नीतिवचन 6:12-15; 16:28; 26:20; रोमियों 16:17-18)। वह मतभेद, वाद-विवाद, ईर्ष्या, संगदिली, जलन के कारण बराबरी करने की चेष्टा, बुरी अटकलों, कलह, राजद्रोह, बखेड़ा और कानाफूसी की निंदा करता है। इसके बजाय वह मिलजुलकर रहने की आज्ञा देता है और ऐसों की प्रशंसा करता है (मत्ती 5:9; 2 कुरिन्थ 13:11; फिलि 3:16; कुलु 3:15; याकूब 3:17-18)।
एक राग समन्वित स्वरों का एक सामंजस्यपूर्ण मिश्रण होता है; एकचित्तता सादृश्यता और सद्भाव है; और सौहार्द दो पक्षों के बीच मेलमिलाप और समझौते की स्थिति है। तीनों शब्द एक-दूसरे से संबंधित हैं, जिसका अर्थ है सादृश्यता, सद्भाव और शांति। लेकिन कलह एक विपरीतार्थक शब्द है, जिसका अर्थ है सौहार्द या मेलमिलाप का अभाव। यह असहमति, मतभेद, और कलह है। क्या आपका चर्च उतना सामंजस्यपूर्ण है जितना उसे होना चाहिए? क्या आप सब सुरों को को अनुकूल बिठाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं?
दुष्ट लोग तब कलह बोते हैं जब वे विभाजन और शत्रुता का जहर फैलाकर किसी चर्च या अन्य समाज के सद्भाव, सौहार्द, एकता या शांति को बाधित करते हैं। वे मनुष्यों के आपसी प्रेम को दूर करते हैं और एक-दूसरे के विरुद्ध अपनी भावनाओं को भड़काते हैं। वे किस्से-कहानी, आक्षेप, मूर्खतापूर्ण प्रश्न, विश्वासघात के संदेह, गुटबाज़ी और अन्य विकृत तरीकों से भाइयों के बीच कलह, विवाद, ईर्ष्या और भ्रम फैलाते हैं। ये अलगाववादी सच्चे संतों के शारीरिक शत्रु हैं, और उनमें पवित्र आत्मा नहीं (यहूदा 1:19)।
प्रिय पाठक, मेलमिलाप करनेवाले बनें जिसे प्रभु यीशु ने धन्य कहा (मत्ती 5:9)। एकता और भाईचारे को बढ़ाने के लिए हर अवसर का लाभ उठाएँ; अपने आप को और दूसरों को मण्डली के साथ एकता में रखने के लिए कड़ी मेहनत करें। मेल मिलाप को ढूँढ़े, और उसके यत्न में रहे (1 पतरस 3:11)। शांति और मेल-मिलाप के इस पवित्र नित्यक्रम को अपने जीवन में प्राथमिकता दें (इफि 4:3; मत्ती 5:23-24)।
इन दो पापों के प्रकाश में हमारे धन्य प्रभु और उनके उत्तम आचरण पर अच्छी तरह विचार करें। यहूदियों ने यीशु को मौत की सजा देने के लिए झूठे गवाहों का इस्तेमाल किया (मत्ती 26:59), लेकिन वह विश्वासयोग्य और सच्चा गवाह है (प्रकाशित 3:14; 19:11)। दुष्ट यहूदियों ने यीशु को लेकर फूट डाल दी और अन्यजातियों को प्रेरितों के विरुद्ध भड़का दिया (यूहन्ना 9:16; प्रेरितों के काम 14:2), लेकिन शांति के इस राजकुमार ने अपने क्रूस के द्वारा यहूदी और अन्यजातियों की इस शत्रुता को मिटा दिया और दोनों को एक कर दिया (यशायाह 9:6; यूहन्ना11:52; इफि 2:11-22)।
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