नीतिवचन 6:17
घमण्ड से चढ़ी हुई आँखें, झूठ बोलनेवाली जीभ, और निर्दोष का लहू बहानेवाले हाथ
परमेश्वर सात चीज़ों से घृणा करता है, जिन में से तीन यहाँ दी गई हैं (नीतिवचन 6:16-19)। सुलैमान ने इससे पहले लिखा था कि, “छह वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन् सात हैं जिनसे उसको घृणा है” (नीतिवचन 6:16)। अपने जीवन में सफलता और बुद्धि प्राप्त करने के लिए, आपको इन पापों के हर पहलू को अपने जीवन से निकालना होगा।
घमंड, झूठ और लहू बहाना आज के समय में स्वीकार्य है (आगे पढ़ते रहें), परंतु ये सभी प्रभु के लिए घृणित ठहरते हैं। परमेश्वर कभी नहीं बदलता, और न कभी बदलेगा। यदि आप चाहते हैं कि बाइबल का परमेश्वर आपके विरुद्ध खड़ा हो, तो इनमें से एक या अधिक पापों को अपने जीवन का भाग बना लें (भजन संहिता 47:2; 66:3-5; 68:35; 99:3)। यदि आप चाहते हैं कि वह आशीष और अनुग्रह के साथ आपके संग खड़ा हो, तो इन सभी पापों से घृणा करें।
हमारा भ्रष्ट समाज घृणा को व्यवस्था विरोधी घोषित करने का प्रयास करता है, परंतु परमेश्वर अब भी पाप और पापियों से घृणा करता है (भजन संहिता 5:5; 11:5; मलाकी 3:6; इब्रानियों 13:8)। स्वयं को धोखा न दें। स्वर्ग का परमेश्वर, माइकलएंजेलो द्वारा पोप और प्रधानों के लिए कल्पित कोई वृद्ध पुरुष नहीं है। वह ऐसा परमेश्वर है जो प्रतिदिन दुष्टों पर क्रोध करता है (भजन संहिता 7:11)। और वह शीघ्र ही अपने शत्रुओं को अधोलोक में लौटा देगा (भजन संहिता 9:17; मत्ती 7:23; प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।
इस नीतिवचन से स्वयं को बचाकर रखने से पहले तीन बातें याद रखें। पहला, परमेश्वर सात से अधिक पापों से घृणा करता है, बल्कि वह सभी पापों और पापियों से घृणा करता है (भजन संहिता 5:4-6; 11:4-6)। दूसरा, इसका अनुप्रयोग सीमा से परे है और यह आपकी सोच से कहीं अधिक है (भजन संहिता 119:96; मत्ती 5:21-22)। और तीसरा, परमेश्वर जल्द ही इन पापों के लिए आपका न्याय करेगा (सभोपदेशक 12:13-14)।
इसका सही अर्थ समझना बहुत महत्वपूर्ण है, अन्यथा पाखंडी लोग इससे निकास पाने का प्रयास करते हैं (नहेम्याह 8:8)। जब बाइबल घमंड भरी आँखों, झूठ बोलने वाली जीभ और लहू बहाने वाले हाथों की निंदा करती है, तो वह पापमय चेहरे, बोली या कामों से कहीं अधिक को संदर्भित करती है। इसमें हर वे पाप शामिल होते हैं जो उस सामान्य श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के लिए, मौखिक शब्दों का प्रयोग किए बिना, झूठ भरा ईमेल भेजना भी निंदनीय होता है।
यहोवा घमंड भरी आँखों से घृणा करता है। स्वर्गदूत हो या मनुष्य, वह सभी में घमंड की निंदा करता है। उसने घमंड ही के कारण शैतान और उसके दूतों को स्वर्ग से नीचे फेंक दिया था (यशायाह 14:12-15; 1 तीमुथियुस 3:6; यहूदा 1:6)। वह स्वाभिमान, कलह, अहंकारी विचार, आत्म-प्रचार, घमंड भरे क्रोध, अधर्मी जीवन, स्वार्थ, डींगें हांकना, घमंड भरी आँखों, हठ करने और अन्य सभी पापों से घृणा करता है (नीतिवचन 13:10; 14:3; 21:24; 25:27; 26:16; 30:17; भजन संहिता 10:2-6; यशायाह 2:11-12; रोमियों 12:3; गलातियों 6:3; 2 तीमुथियुस 3:1-5)।
यहोवा झूठ बोलने वाली जीभ से घृणा करता है। वह सत्य से प्रेम करता है, और सभी प्रकार की धूर्तता से घृणा करता है। शैतान झूठ का पिता है, और उसके बच्चे भी उसी के समान होते हैं (यूहन्ना 8:44; इफिसियों 2:1-3)। झूठ बोलने वाले लोग अधोलोक में डाल दिए जाएंगे। (प्रकाशितवाक्य 21:8; 22:15)। परमेश्वर अतिशयोक्ति, कपट, बहकाना, झूठी गवाही , झूठी निंदा, सौदेबाज़ी, चापलूसी, शपथ के तहत मौन रखने और उपहास जैसे झूठ बोलने के हर संसकरण से घृणा करता है (नीतिवचन 10:18; 12:22; 19:5;5; 20:14,23; 26:18-19,28; निर्गमन 23:1; व्यवस्थाविवरण 19:16-21; अय्यूब 17:5)।
यहोवा लहू बहाने वाले हाथों से घृणा करता है। वह जीवन से प्रेम करता है, क्योंकि वह जीवित परमेश्वर है, और वह सभी को जीवन और सांस प्रदान करता है (उत्पत्ति 2:7; यशायाह 42:5; प्रेरितों के काम 17:25)। जीवन पवित्र मनुष्य की विशेषता के कारण नहीं होैता, बल्कि इसलिए होता क्योंकि इसे परमेश्वर ने रचा है और वही इसकी रक्षा करता है। वह लहू बहाने के लिए मृत्युदंड देता है (उत्पत्ति 9:6), और जो व्यक्ति इससे असहमत होता है, वह एक मूर्ख है। शैतान आरंभ से ही एक हत्यारा है, और उसकी संतान भी ऐसी ही हैं, जो कि सभी अधोलोक में फेंक दिए जाएंगे (यूहन्ना 8:44; प्रकाशितवाक्य 21:8; 22:15)।
परमेश्वर गर्भपात, चुगली, कड़वाहट, वाद-विवाद, ईर्ष्या, कुढ़ना, द्वेष, हत्या, लापरवाही से हत्या, कलह, मूर्खतापूर्ण क्रोध, बाल अनुशासन की उपेक्षा, अपशब्द कहना, पशुओं की मूर्खतापूर्ण हत्या, सहायता की पुकार की उपेक्षा, दया का अभाव, कोप, मृत्युदंड देने से पीछे हटना, और अफवाह फैलाने जैसे लहू बहाने के अन्य सभी संस्करणों से घृणा करता है (नीतिवचन 12:20; 13:24; 22:6-7; 23:13-14; 31:8-9; निर्गमन 21:22-25,28-29; व्यवस्थाविवरण 22:6-8; ; मत्ती 5:21-26; गलातियों 5:19-21; इफिसियों 4:31-32)।
परमेश्वर के वचन का व्याख्यान और अनुप्रयोग व्यापक रूप से किया जाना चाहिए (मत्ती 5:27-32; लूका 10:29-37)। इसकी आवश्यकताएँ उन सभी सीमाओं से परे हैं जिनकी इच्छा आप अपने हृदय में रखते हैं। ये वही चीज़ें हैं जिनसे परमेश्वर घृणा करता है, परंतु फिर भी आज इनके विरुद्ध अधिक प्रचार नहीं किया जाता है। साधक केंद्रित कलीसियाएं चाहती हैं कि आप सोचें कि आप निष्कलंक हैं। परंतु यह तो आप भी मानेंगे कि आप एक या उससे अधिक पाप के दोषी हैं। आपको उन्हें अपने जीवन से बाहर निकालने और फिर अपने बच्चों को ये नियम सिखाने की आवश्यकता है।
क्या यह कहना उचित है कि आज के समय में घमंड स्वीकार्य होता है? निःसंदेह! कई मनोवैज्ञानिक, शिक्षक और पास्टर अधिकतर संबंधो की समस्याओं के निवारण के रूप में आत्म-सम्मान, आत्म-प्रेम और आत्म-विश्वास को बढ़ावा देते हैं, जो कि वास्तव में स्वयं की स्वार्थपूर्ण प्रशंसा के लिए मनोवैज्ञानिक बकवाद के ही पर्यायवाची शब्द हैं। यह आज के समय में स्वीकार्य घमंड का केवल एक उदाहरण है। सच्ची मसीहत इसके बिल्कुल विपरीत होती है, जहां स्वयं से अधिक दूसरों से प्रेम किया जाता है (मत्ती 22:39; रोमियों 12:10; इफिसियों 5:21; फिलिप्पियों 2:3-4; 2 तीमुथियुस 3:1-2)।
क्या यह कहना उचित है कि आज के समय में झूठ बोलना स्वीकार्य है? निःसंदेह! आज के सभी नेता बिना सोचे-समझे वायदे करते हैं और उन्हें पूरा नहीं करते। जब वे किसी नैतिक या राजनीतिक त्रुटि में पकड़े जाते हैं, तो वे शब्दों को घूमाकर उस अपराध से बचने का प्रयास करते हैं। इस कानूनी भाषा का उपयोग अक्सर वकीलों द्वारा शब्दों को घूमाकर पेश करने के लिए किया जाता है (लूका 10:29)। क्या आपने कभी किसी दुकानदार से कुछ सामान लेते समय, उसमेें खामियाँ निकालने और फिर कहीं और से कम कीमत पर मिलने का दावा करते हुए, मोल-भाव किया है (नीतिवचन 20:14)?
क्या यह कहना उचित है कि आज के समय में लहू बहाना स्वीकार्य है? निःसंदेह! बिना किसी उचित कारण के क्रोध करना या अपशब्द कहना हत्या ही है (मत्ती 5:21-22)। किसी भी कारणवश गर्भपात करना हत्या ही कहलाता है (निर्गमन 21:22-25)। यदि सख्त बाल-अनुशासन उन्हें असमय मृत्यु से बचा सकता है, तो उसकी उपेक्षा करना भी हत्या ही है (नीतिवचन 23:13-14)। चुगली करना, अफवाह फैलाना, और कानाफूसी करना दूसरे की प्रतिष्ठा को नष्ट करने के साधन हैं, जो एक प्रकार से हत्या का ही रूप है (नीतिवचन 18:8; 26:22; 12:18)।
प्रिय पाठक! आप दोषी ठहराए गए हैं! दाऊद ने इसे इस प्रकार वर्णित किया है, “हे यहोवा, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा? (भजन संहिता 130:3)। यहाँ तक कि परमेश्वर के प्रिय दाऊद को भी यह पता था कि यदि परमेश्वर उसके पापों का लेखा लेगा, तो वह संकट में पड़ जाएगा। यदि परमेश्वर हर व्यक्ति के हर पाप को चिह्नित और दर्ज करे, तो प्रत्येक व्यक्ति अनंत काल के लिए दंड भोगेगा। और चूँकि परमेश्वर ऐसा ही करता है, इसलिए वह आपको इस नीतिवचन के हर उल्लंघन को आने वाले समय में जल्द ही दिखाएगा (सभोपदेशक 12:13-14; प्रकाशितवाक्य 20:11-15)।
परंतु यह कहानी का अंत नहीं है, क्योंकि दाऊद आगे लिखता है कि, “परन्तु तू क्षमा करनेवाला है, जिससे तेरा भय माना जाए (भजन संहिता 130:4)। क्षमा प्राप्त किए बिना परमेश्वर के निकट जाना हमारे लिए दुर्गम होगा, परंतु जो लोग उसे पुकारते हैं उन पर दया की जाएगी, जो कि केवल चुने हुए लोग ही कर पाते हैं (यूहन्ना 3:19; 5:40; 6:44; 8:45)। विश्वास पूर्वनियति का परिणाम होता है (प्रेरितों के काम 13:48), क्योंकि स्वाभाविक रूप से मनुष्य के भीतर सुसमाचार के प्रति घृणा और विद्रोह होता है (1 कुरिन्थियों 1:18-24; 2:14)।
परमेश्वर ने संसार के आरम्भ ही में अपने चुने हुए लोगों के स्थान पर यीशु मसीह को मरने के लिए नियुक्त करने के द्वारा, उन्हें क्षमा करने का निर्णय ले लिया था (यूहन्ना 6:38-39; 10:26-29; 17:2; रोमियों 5:6-21; 8:29-39; इफिसियो 1:3-11; 1 पतरस 1:20)। परमेश्वर किसी पर अनुग्रह करने और प्रेम रखने के लिए किसी का कर्ज़दार नहीं है; वह यह केवल उन्हें ही प्रदान करता है जिन्हें उसने चुना है (निर्गमन 33:19; रोमियों 9:15)। यदि आप उससे प्रेम करते हैं, तो जान लें कि पहले उसने आपसे प्रेम किया था (1 यूहन्ना 4:19)। उसके लिए इन तीन पापों से घृणा करने के द्वारा, आपका विश्वास आपके इस धार्मिक जीवन के चुनाव को प्रमाणित करता है (2 पतरस 1:5-11; भजन संहिता 15:1-5)।
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